रूस के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने के लिए तैयार विश्व नेता, हिटलर से हो रही तुलना

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 25, 2022

तोक्यो।रूस के आक्रमण के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवीय कोष में यूक्रेन के लिये दो करोड़ डॉलर और ईयू आर्थिक सहायता कोष में 1.5 अरब यूरो देने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और अन्य देशों ने रूस पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने रूस की कार्रवाई की निंदा भी की है। रूस ने बृहस्पतिवार को यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया था, जिसपर विभिन्न देशों के नेताओं की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त किये जाने का सिलसिला अब भी जारी है। कई देशों ने रूस की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबियों समेत विभिन्न नेताओं को सबक सिखाने की बात कही है। फ्रांस के राष्ट्रपति एमेनुअल मैक्रों ने शुक्रवार को कहा कि फ्रांस और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने मॉस्को पर बहुत गंभीर प्रहार करने का फैसला किया है। इसके तहत रूसी लोगों पर और प्रतिबंध लगाने के अलावा वित्त, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों पर जुर्माना लगाना शामिल है। पाबंदियां लगाने से जुड़े कानूनी दस्तावेजों को अंतिम रूप देकर शुक्रवार को ही मंजूरी के लिये ईयू के विदेश मंत्रियों के पास भेजा जाएगा। मैक्रों ने यह भी कहा कि ईयू ने यूक्रेन को 1.5 अरब यूरो की अभूतपूर्व आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया है। इस बीच, रूसी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने रूस आने जाने वाली ब्रिटेन की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया।

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हालांकि, रूस इस प्रस्ताव पर वीटो कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के केंद्रीय आपात प्रतिक्रिया कोष को दी जाने वाली 2 करोड़ डॉलर की धनराशि से यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में दोनेत्स्क और लुहांस्क व अन्य हिस्सों में आपात अभियानों में मदद मिलेगी। इसके तहत संकट से प्रभावित अति संवेदनशील लोगों के लिये स्वास्थ्य देखभाल, आश्रय, भोजन, जल आदि की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों ने यूक्रेन में सैनिक भेजने और यूरोपीय महाद्वीप में व्यापक युद्ध छिड़ने के खतरे के बारे में कोई बात नहीं कही है। हालांकि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने एक बार फिर पूर्वी यूरोप के अपने सदस्य देशों को हमले की आशंका के बीच सतर्क रहने की हिदायत दी है। जापान की तरह ही अमेरिका का एक और मजबूत सहयोगी दक्षिण कोरिया अधिक सतर्कता बरत रहा है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों का समर्थन करेगा, लेकिन एकतरफा प्रतिबंधों पर विचार नहीं करेगा। दक्षिण कोरिया ने इसलिये सतर्क रुख अपनाया है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर है। उसे इस बात की भी चिंता है कि रूस के साथ संबंध तनावपूर्ण होने पर उत्तर कोरिया के परमाणु संकट के समाधान के प्रयास भी कमजोर पड़ जाएंगे।

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रूस दक्षिण कोरिया का 10वां सबसे बड़ा व्यापार साझेदार माना जाता है। उधर, ताइवान ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने का समर्थक है। हालांकि उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये प्रतिबंध किस प्रकार के होंगे। एक ओर जहां एशिया के अधिकतर देशों ने यूक्रेन का समर्थन किया है, तो दूसरी ओर चीन ने रूस पर प्रतिबंध लगाने की निंदा की है। चीन ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर रूस को उकसाने का आरोप लगाया है। एशिया में अमेरिका की ताकत को लेकर चिंतित चीन की विदेश नीति रूस की ओर झुकाव रखती है ताकि पश्चिमी देशों को चुनौती दी जा सके। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा, ऐसे समय में जब ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका, यूरोप और जापान मिलकर रूस को रोकने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं चीन की सरकार रूस को व्यापार पाबंदियों में ढील देने की बात कह रही है। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। मॉरिसन ने द साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक खबर का जिक्र करते हुए कहा, आप ऐसे समय में रूस को जीवनदान देने की बात नहीं कर सकते जब वह किसी दूसरे देश पर आक्रमण कर रहा हो। द साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर में कहा गया है कि चीन ने घोषणा की है कि वह रूसी गेहूं के आयात के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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