<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><rss xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0">
  <channel>
    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
    <link>https://www.prabhasakshi.com/</link>
    <item>
      <title><![CDATA[Dream Home का सपना होगा सच: Home Loan और Smart Financial Planning की पूरी विस्तृत जानकारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/complete-information-on-getting-your-dream-home-housing-loans-and-financial-planning]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत जैसे देश में अपना घर होना न केवल एक बुनियादी आवश्यकता है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और व्यक्तिगत गौरव का प्रतीक भी माना जाता है। आज के समय में संपत्ति की बढ़ती कीमतों को देखते हुए, अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अपनी जमा पूंजी से सीधा घर खरीदना लगभग असंभव सा हो गया है। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए विभिन्न बैंक और वित्तीय संस्थान <a href="https://www.herohousingfinance.com/hi" target="_blank">हाउसिंग लोन </a>की सुविधा प्रदान करते हैं। यह ऋण न केवल आपको घर खरीदने में मदद करता है, बल्कि आपको वित्तीय रूप से व्यवस्थित भी बनाता है।</div><div><br></div><h2>संक्षिप्त सारांश:</h2><div><b>- ऋण की सीमा: </b>बैंक आमतौर पर संपत्ति के कुल बाजार मूल्य का 75% से 90% तक ही हाउसिंग लोन प्रदान करते हैं; शेष राशि का प्रबंध स्वयं करना होता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- वित्तीय योजना: </b>घर खरीदने से पहले अपने बजट का सही आकलन करें और होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर का उपयोग करके अपनी मासिक किश्तों की योजना बनाएं।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- पात्रता मानदंड:</b> ऋण की स्वीकृति मुख्य रूप से आपकी आय की स्थिरता, आयु और 650 से अधिक के अच्छे क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करती है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- कर में छूट: </b>भारत<span style="font-size: 1rem;">सरकार आयकर अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आवास ऋण के मूलधन और ब्याज भुगतान पर महत्वपूर्ण टैक्स लाभ प्रदान करती है।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><b>- आवश्यक दस्तावेज: </b>आवेदन के लिए पहचान पत्र, आय के प्रमाण (वेतन पर्ची/आयकर रिटर्न) और संपत्ति के कानूनी कागजात तैयार रखना अनिवार्य है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- अवधि का चयन: </b>अपनी पुनर्भुगतान क्षमता के अनुसार ऋण की अवधि चुनें। लंबी अवधि में ईएमआई कम होती है, जबकि छोटी अवधि में कुल ब्याज का भुगतान कम करना पड़ता है।</div><div><br></div><div>इस लेख में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि भारत में आवास ऋण की प्रक्रिया क्या है, इसके लाभ क्या हैं और आप कैसे अपनी किश्तों का प्रबंधन कर सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-which-rules-will-change-starting-august-1st-will-prices-fluctuate-or-remain-stable" target="_blank">जानिए, 1 अगस्त से किन-किन नियमों में बदलाव आएगा? कीमतें होंगी ऊपर नीचे या रहेंगी स्थिर!</a></h3><h2>आवास ऋण: एक महत्वपूर्ण वित्तीय कदम</h2><div>जब आप अपने लिए एक घर चुनने की प्रक्रिया शुरू करते हैं, तो सबसे पहले मन में वित्तीय बजट का विचार आता है। भारत में हाउसिंग लोन लेने की प्रक्रिया पिछले एक दशक में काफी सरल और पारदर्शी हो गई है। डिजिटल क्रांति ने इसे और भी सुगम बना दिया है, जहाँ आप घर बैठे विभिन्न बैंकों की ब्याज दरों की तुलना कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>ऋण लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति का सही आकलन करना अनिवार्य है। आपको यह समझना होगा कि आपकी मासिक आय का कितना हिस्सा ऋण की अदायगी में जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की सलाह होती है कि आप ऑनलाइन उपलब्ध होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर का उपयोग करें। यह उपकरण आपको यह समझने में मदद करता है कि ऋण की राशि, ब्याज दर और समय सीमा के आधार पर आपकी मासिक किश्त कितनी बनेगी। इससे आप भविष्य में आने वाले वित्तीय दबाव से बच सकते हैं।</div><div><br></div><h2>ऋण के लिए पात्रता और मापदंड</h2><div>भारत में ऋणदाता संस्थान किसी भी आवेदन को स्वीकार करने से पहले आवेदक की साख की गहन जांच करते हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जाता है:</div><div>&nbsp;</div><div><b>1. आय की स्थिरता:</b> बैंक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आप ऋण चुकाने में सक्षम हैं। यदि आप किसी प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत हैं या आपका अपना सफल व्यवसाय है, तो ऋण मिलने की संभावना अधिक होती है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div><b>2. साख अंक (क्रेडिट स्कोर): </b>आपका पिछला वित्तीय व्यवहार कैसा रहा है, यह आपके साख अंक से पता चलता है। 650 से अधिक का अंक आदर्श माना जाता है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div><b>3. आयु सीमा:</b> आमतौर पर 21 वर्ष से 60-65 वर्ष की आयु तक के लोगों को ऋण दिया जाता है। युवा आवेदकों को लंबी अवधि के लिए ऋण मिलने की सुविधा होती है।</div><div><br></div><h2>हाउसिंग लोन के प्रकार और चयन</h2><div>भारतीय बाजार में कई तरह के ऋण विकल्प उपलब्ध हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका चयन कर सकते हैं:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- नया घर खरीदने के लिए ऋण: </b>यह सबसे प्रचलित प्रकार है, जो नई बनी हुई संपत्ति या निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए दिया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- गृह सुधार ऋण: </b>यदि आप अपने पुराने घर की मरम्मत या नवीनीकरण करना चाहते हैं, तो इसके लिए भी बैंक धन उपलब्ध कराते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- भूमि खरीद ऋण: </b>कई लोग निवेश के उद्देश्य से या भविष्य में घर बनाने के लिए खाली जमीन खरीदना चाहते हैं, बैंक इसके लिए भी विशिष्ट योजनाएं प्रदान करते हैं।</div><div><br></div><h2>वित्तीय योजना और प्रबंधन</h2><div>ऋण लेना केवल धन प्राप्त करना नहीं है, बल्कि अगले 15 से 30 वर्षों के लिए एक जिम्मेदारी स्वीकार करना है। इसलिए, आवेदन करने से पहले आपको अपनी बचत और खर्चों का एक खाका तैयार करना चाहिए। जब आप हाउसिंग लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक संपत्ति के कुल मूल्य का केवल 75 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक ही वित्त पोषित करते हैं। शेष राशि, जिसे 'डाउन पेमेंट' कहा जाता है, उसका प्रबंध आपको अपनी बचत से करना होता है।</div><div><br></div><div>अपनी किश्तों की योजना बनाने के लिए <a href="https://www.herohousingfinance.com/hi/calculators/home-loan-emi-calculator" target="_blank">होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर</a> का सही उपयोग करना बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकता है। आप अलग-अलग ब्याज दरों और समय अवधि को डालकर देख सकते हैं कि कौन सा विकल्प आपके मासिक बजट में सटीक बैठता है। उदाहरण के लिए, यदि आप लंबी अवधि चुनते हैं तो आपकी मासिक किश्त कम हो जाएगी, लेकिन कुल ब्याज भुगतान बढ़ जाएगा। इसके विपरीत, छोटी अवधि में किश्तें भारी होंगी परंतु आप कर्ज से जल्दी मुक्त हो पाएंगे।</div><div><br></div><h2>आवश्यक दस्तावेजों की सूची</h2><div>भारत में हाउसिंग लोन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपको एक सुव्यवस्थित दस्तावेजीकरण की आवश्यकता होती है। इनमें प्रमुख हैं:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- पहचान पत्र: </b>आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र।</div><div><b>- आय प्रमाण:</b> वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए पिछले 3 महीनों की वेतन पर्ची और पिछले 2 वर्षों का आयकर रिटर्न। व्यवसायियों के लिए लाभ-हानि खाता और बैलेंस शीट।</div><div><b>- संपत्ति के कागजात: </b>विक्रेता के साथ किया गया अनुबंध, संपत्ति की श्रृंखला के दस्तावेज और स्थानीय निकाय से प्राप्त अनुमति पत्र।</div><div><br></div><h2>कर लाभ और सरकारी प्रोत्साहन</h2><div>भारत सरकार देश के नागरिकों को अपना घर लेने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिसके कारण आयकर अधिनियम के तहत कई छूट प्रदान की जाती हैं। आवास ऋण के मूलधन और ब्याज, दोनों के भुगतान पर आयकर में महत्वपूर्ण कटौती प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, 'प्रधानमंत्री आवास योजना' जैसी सरकारी पहलों ने ब्याज पर सब्सिडी प्रदान करके निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए हाउसिंग लोन को और अधिक किफायती बना दिया है।</div><div><br></div><h2>अंतिम सुझाव और निष्कर्ष</h2><div>अपना घर खरीदना एक बड़ा निवेश है। जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचें। बाजार में प्रचलित ब्याज दरों पर नजर रखें और समय-समय पर अपने ऋण को कम ब्याज दर वाले बैंक में स्थानांतरित करने (बैलेंस ट्रांसफर) के विकल्पों पर भी विचार करें।</div><div><br></div><div>याद रखें, एक अच्छी तरह से नियोजित हाउसिंग लोन आपके भविष्य की नींव को मजबूत करता है। अपनी क्षमता का आकलन करें, सही संपत्ति का चुनाव करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। सही योजना के साथ, आपके अपने घर का सपना अवश्य पूरा होगा।</div><div><br></div><h2>अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)</h2><div><b>प्रश्न 1.&nbsp; हाउसिंग लोन की अधिकतम अवधि कितनी हो सकती है?</b>&nbsp;</div><div>भारत में अधिकांश बैंक और वित्तीय संस्थान 30 वर्ष तक की अधिकतम अवधि के लिए हाउसिंग लोन प्रदान करते हैं। यह अवधि आपकी सेवानिवृत्ति की आयु और आपकी ऋण चुकाने की क्षमता पर निर्भर करती है। लंबी अवधि चुनने से आपकी मासिक किश्त कम हो जाती है।</div><div><br></div><div><b>प्रश्न 2. क्या मैं समय से पहले अपने ऋण का भुगतान कर सकता हूँ?</b></div><div>हाँ, आप अपनी सुविधा के अनुसार ऋण का समय से पहले भुगतान (प्री-पेमेंट) कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, फ्लोटिंग ब्याज दर वाले ऋणों पर बैंक कोई अतिरिक्त जुर्माना या शुल्क नहीं वसूल सकते। भुगतान से पहले अपनी बचत का आकलन करने के लिए होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर की सहायता लेना उपयोगी रहता है।</div><div><br></div><div><b>प्रश्न 3. सह-आवेदक होने के क्या लाभ हैं?&nbsp;</b></div><div>यदि आप अपने जीवनसाथी या परिवार के किसी सदस्य को सह-आवेदक के रूप में जोड़ते हैं, तो आपकी कुल आय बढ़ जाती है, जिससे अधिक ऋण राशि मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, यदि सह-आवेदक एक महिला है, तो कई बैंक ब्याज दरों में विशेष छूट भी प्रदान करते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 11:20:59 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/complete-information-on-getting-your-dream-home-housing-loans-and-financial-planning</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/8/6/housing-loans_large_1121_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जानिए, 1 अगस्त से किन-किन नियमों में बदलाव आएगा? कीमतें होंगी ऊपर नीचे या रहेंगी स्थिर!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-which-rules-will-change-starting-august-1st-will-prices-fluctuate-or-remain-stable]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में मध्यमवर्गीय परिवार के लोगों की नजर किसी भी माह की पहली तारीख पर टिकी रहती है, क्योंकि उस दिन सैलरी तो आती ही है, साथ ही किस मासिक नियम से उनके ऊपर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और किससे नहीं, यह भी पता चल जाता है। साथ ही तरह तरह की कागजी औपचारिकता के प्लस-माइनस का भी पता चल जाता है। इस बार भी 1 अगस्त 2026 से आम लोगों पर असर डालने वाले कई नियम और कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि इनमें कुछ बदलाव हर महीने होने वाली नियमित समीक्षा हैं, जबकि कुछ नए नियामकीय परिवर्तन हैं, जिन्हें जानना-समझना और उसी के अनुरूप खुद को ढालना जरूरी है ताकि बच्चों का जीवन प्रभावित नहीं हो।&nbsp;</div><div><br></div><h2>प्राप्त जानकारी के मुताबिक, होने वाले मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:-</h2><div><b>पहला, एलपीजी सिलेंडर की कीमतें:</b> तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को घरेलू (14.2 किग्रा) और व्यावसायिक (19 किग्रा) एलपीजी के दाम संशोधित करती हैं। इसलिए 1 अगस्त से आपके शहर में गैस सिलेंडर सस्ता या महंगा हो सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>दूसरा, बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड: </b>कुछ बैंक क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट, सर्विस चार्ज, एसएमएस शुल्क और अन्य बैंकिंग शुल्क में बदलाव लागू कर सकते हैं। इसलिए अपने बैंक की सूचना गौरपूर्वक अवश्य देखें।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/even-after-having-a-balance-your-fastag-card-may-be-blacklisted-due-to-these-reasons" target="_blank">बैलेंस होने के बाद भी इन वजहों से ब्लैकलिस्ट हो सकता है फास्टैग कार्ड, ऐसे कर सकते हैं ठीक</a></h3><div><b>तीसरा, सीकेवाईसी (CKYC) 2.0:</b> नई केंद्रीय केवाईसी प्रणाली का चरणबद्ध लागू होना शुरू होगा, जिससे भविष्य में बार-बार केवाईसी दस्तावेज़ जमा करने की जरूरत कम होगी और पहचान सत्यापन अधिक सुरक्षित होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>चौथा, जीएसटी (GST) नियम:</b> ई-इनवॉइस और ई-वे बिल से जुड़े नियमों में बदलाव होंगे। इसका सीधा प्रभाव व्यापारियों और कंपनियों पर पड़ेगा, आम उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष असर हो सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>पांचवां, रेलवे तत्कल टिकट: </b>रेलवे आरक्षण काउंटर पर तत्कल टिकट के लिए टोकन व्यवस्था में बदलाव किया गया है, जिससे भीड़ कम करने और प्रक्रिया आसान बनाने का प्रयास है।&nbsp;</div><div><br></div><div><b>छठा, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR):</b> जिन करदाताओं ने समय सीमा तक ITR दाखिल नहीं किया है, उन्हें अब विलंब शुल्क (लेट फीस) देना पड़ सकता है।</div><div><br></div><div><b>सातवां, होम लोन और ईएमआई (EMI):</b> 3 अगस्त से शुरू होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद यदि रेपो रेट में बदलाव होता है, तो आने वाले दिनों में होम लोन, वाहन ऋण, एफडी और EMI पर असर पड़ सकता है। यह बदलाव 1 अगस्त से तुरंत लागू नहीं होगा, बल्कि MPC के निर्णय पर निर्भर करेगा।&nbsp;</div><div><br></div><h2>समझिए, क्या महंगा और क्या सस्ता हो सकता है?</h2><div><br></div><div><b>एक, एलपीजी सिलेंडर:</b> कीमतें बदलकर ऊपर जा सकती हैं।</div><div><br></div><div><b>दो, बैंकिंग सेवाएं:</b> बैंक के अनुसार शुल्क बढ़ या घट सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>तीन, रेस्टोरेंट/होटल: </b>यदि व्यावसायिक एलपीजी महंगी होती है तो लागत बढ़ सकती है।</div><div><br></div><div><b>चार, पेट्रोल-डीजल</b> पर 1 अगस्त से कोई सार्वदेशिक नया नियम घोषित नहीं है; इनके दाम सामान्य मूल्य निर्धारण व्यवस्था के अनुसार बदलते रहते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 12:50:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-which-rules-will-change-starting-august-1st-will-prices-fluctuate-or-remain-stable</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/7/31/lpg-cylinders_large_1251_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बैलेंस होने के बाद भी इन वजहों से ब्लैकलिस्ट हो सकता है फास्टैग कार्ड, ऐसे कर सकते हैं ठीक]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/even-after-having-a-balance-your-fastag-card-may-be-blacklisted-due-to-these-reasons]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में 15 फरवरी 2021 से हर फोर-व्हीलर, चाहे वह प्राइवेट हो या कमर्शियल, के लिए FASTag होना ज़रूरी है। FASTag कार की विंड शील्ड पर चिपकाया जाता है और RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) टेक्नोलॉजी और एक डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल करके टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल पेमेंट करने में मदद करता है।</div><div>&nbsp;</div><div>देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल भुगतान को आसान बनाने के लिए FASTag अनिवार्य किया गया है। हालांकि कई बार वाहन मालिकों को ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है, जब FASTag में पर्याप्त बैलेंस होने के बावजूद वह ब्लैकलिस्ट (Blacklisted) या हॉटलिस्ट (Hotlisted) हो जाता है। ऐसी स्थिति में टोल प्लाजा पर परेशानी के साथ अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>इसके अलावा, 1 अप्रैल 2021 से कार इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए भी FASTags ज़रूरी हो गए हैं। भारत में पब्लिक सड़कों पर गाड़ी चलाने के लिए कम से कम एक थर्ड-पार्टी फोर-व्हीलर इंश्योरेंस पॉलिसी की ज़रूरत होती है। हालांकि, कई बार ऐसा हो सकता है कि आपका FASTag ब्लैकलिस्ट हो जाए, जिससे आप टोल देने के लिए इसका इस्तेमाल न कर पाएं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/under-what-circumstances-does-a-health-insurance-claim-get-rejected" target="_blank">किन परिस्थितियों में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम हो जाता है रिजेक्ट? ज्यादातर मामलों में होते हैं ये कारण</a></h3><h2>ब्लैकलिस्टेड FASTag क्या है?</h2><div>ब्लैकलिस्टेड FASTag का मतलब है कि आपका FASTag अकाउंट जारी करने वाली एजेंसी ने कुछ समय के लिए या हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया है। ऐसा कई वजहों से हो सकता है, जैसे बैलेंस कम होना, नियमों का पालन न करना वगैरह। ब्लॉकलिस्टिंग से बचने के लिए आपको उन दिक्कतों को तुरंत ठीक करना होगा जिनकी वजह से यह हुआ, जैसे उनके अकाउंट का बैलेंस भरना, गाइडलाइंस का पालन करना, टैग प्लेसमेंट को ठीक करना, किसी भी बकाया वायलेशन पेनल्टी को क्लियर करना, और संदिग्ध फ्रॉड को ठीक करना। ज़रूरी कदम उठाकर और जारी करने वाली एजेंसी, FASTag के साथ सहयोग करके आप उनके टैग की फंक्शनैलिटी को ठीक कर सकते हैं और आसान और कुशल टोल पेमेंट सर्विस का मज़ा लेते रह सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>बैलेंस होने के बाद भी FASTag क्यों होता है ब्लैकलिस्ट?</h2><div>1. केवाईसी (KYC) अधूरी होना : यदि FASTag जारी करने वाले बैंक या एजेंसी के पास आपकी KYC पूरी नहीं है या अपडेट नहीं है तो FASTag को अस्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।</div><div>2. चेसिस नंबर या वाहन विवरण में गड़बड़ी: वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर या अन्य जानकारी गलत दर्ज होने पर सिस्टम FASTag को अमान्य मान सकता है।</div><div>3. टैग का सही तरीके से न लगना: यदि FASTag वाहन की विंडशील्ड पर सही स्थान पर नहीं लगा है, क्षतिग्रस्त हो गया है या RFID चिप काम नहीं कर रही है तो स्कैनिंग में समस्या आ सकती है।</div><div>4. बैंक या सिस्टम से जुड़ी तकनीकी समस्या: कई बार बैंक सर्वर, भुगतान नेटवर्क या टोल सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण भी FASTag अस्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट दिखाई दे सकता है।</div><div>5. एक ही वाहन पर एक से अधिक FASTag: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के नियमों के अनुसार एक वाहन के लिए केवल एक सक्रिय FASTag होना चाहिए। एक से अधिक सक्रिय टैग होने पर कार्रवाई की जा सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>FASTag ब्लैकलिस्ट होने पर क्या होगा?</h2><div>- टोल प्लाजा पर FASTag स्कैन नहीं होगा।</div><div>- आपको नकद या अन्य माध्यम से भुगतान करना पड़ सकता है।</div><div>- नियमों के अनुसार कई मामलों में दोगुना टोल शुल्क भी देना पड़ सकता है।</div><div>- यात्रा के दौरान अनावश्यक देरी हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>FASTag को दोबारा एक्टिव कैसे करें?</h2><div>- KYC अपडेट कराएं: यदि KYC लंबित है तो संबंधित बैंक या FASTag जारीकर्ता के पोर्टल, मोबाइल ऐप या शाखा में जाकर KYC पूरी करें।</div><div>- वाहन की जानकारी सत्यापित करें : वाहन नंबर, आरसी और अन्य विवरण सही हैं या नहीं, इसकी जांच करें। किसी गलती की स्थिति में बैंक या जारीकर्ता से अपडेट कराएं।</div><div>- FASTag की स्थिति जांचें: अपने बैंक, FASTag ऐप या ग्राहक सेवा के माध्यम से टैग का स्टेटस देखें। कई जारीकर्ता ऑनलाइन ब्लैकलिस्ट का कारण भी बताते हैं।</div><div>- ग्राहक सेवा से संपर्क करें: यदि समस्या तकनीकी है तो FASTag जारी करने वाले बैंक या एजेंसी की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।</div><div>- नया FASTag लें (यदि आवश्यक हो): यदि टैग क्षतिग्रस्त हो गया है या RFID चिप काम नहीं कर रही है तो नया FASTag जारी कराया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>इन बातों का रखें ध्यान</h2><div>- FASTag खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें।</div><div>- समय-समय पर KYC अपडेट करते रहें।</div><div>- वाहन बेचने पर पुराने FASTag को बंद कर दें।</div><div>- एक ही वाहन के लिए दूसरा FASTag सक्रिय न रखें।</div><div>- यात्रा से पहले FASTag की स्थिति और बैलेंस की जांच कर लें।</div><div>&nbsp;</div><div>FASTag में बैलेंस होने के बावजूद KYC अधूरी होने, वाहन की गलत जानकारी, तकनीकी खराबी या एक से अधिक सक्रिय टैग जैसी वजहों से यह ब्लैकलिस्ट हो सकता है। इसलिए केवल रिचार्ज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि KYC और वाहन संबंधी जानकारी को भी अपडेट रखना जरूरी है। यदि आपका FASTag ब्लैकलिस्ट हो गया है तो संबंधित बैंक या जारीकर्ता से संपर्क कर इसे आसानी से दोबारा सक्रिय कराया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 19:34:46 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/even-after-having-a-balance-your-fastag-card-may-be-blacklisted-due-to-these-reasons</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/7/30/fastag-card_large_1934_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[किन परिस्थितियों में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम हो जाता है रिजेक्ट? ज्यादातर मामलों में होते हैं ये कारण]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/under-what-circumstances-does-a-health-insurance-claim-get-rejected]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बीमारी या दुर्घटना के समय आर्थिक सुरक्षा देने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस एक महत्वपूर्ण साधन है। हालांकि कई बार पॉलिसीधारकों को तब बड़ा झटका लगता है जब अस्पताल में इलाज के बाद उनका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। अधिकांश मामलों में क्लेम किसी तकनीकी कारण या पॉलिसी की शर्तों का पालन नहीं करने की वजह से अस्वीकृत होता है। इसलिए पॉलिसी खरीदने के साथ-साथ उसके नियमों को समझना भी उतना ही जरूरी है।</div><div>&nbsp;</div><h2>किन कारणों से हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है?</h2><h2>1. पहले से मौजूद बीमारी (Pre-existing Disease) की जानकारी छिपाना</h2><div>पॉलिसी लेते समय यदि आपने पहले से मौजूद किसी बीमारी, जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग की जानकारी नहीं दी है और बाद में जांच में यह सामने आ जाता है तो बीमा कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। इसलिए आवेदन के समय सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही-सही देना जरूरी है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/is-corporate-insurance-or-personal-health-insurance-best" target="_blank">कंपनी वाला बीमा बेस्ट है या पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस? यहां दूर करें कन्फ्यूजन</a></h3><h2>2. वेटिंग पीरियड के दौरान क्लेम करना</h2><div>अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में कुछ बीमारियों और पहले से मौजूद रोगों के लिए वेटिंग पीरियड होता है। यदि इस अवधि के दौरान इलाज कराया जाता है तो क्लेम स्वीकार नहीं किया जा सकता।</div><div>&nbsp;</div><h2>3. पॉलिसी में शामिल न होने वाला इलाज</h2><div>हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ एक्सक्लूजन (Exclusions) होते हैं। कॉस्मेटिक सर्जरी, केवल सौंदर्य बढ़ाने के लिए किए गए उपचार, कुछ वैकल्पिक उपचार या पॉलिसी में शामिल न किए गए मेडिकल खर्चों का क्लेम अस्वीकार किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>4. समय पर बीमा कंपनी को सूचना न देना</h2><div>कैशलेस इलाज या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में बीमा कंपनी या थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) को तय समय के भीतर सूचना देना जरूरी होता है। देरी होने पर क्लेम प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>5. दस्तावेज अधूरे या गलत होना</h2><div>अस्पताल के बिल, डिस्चार्ज समरी, डॉक्टर की रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट या अन्य जरूरी दस्तावेज अधूरे या गलत होने पर भी क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>6. पॉलिसी का लैप्स होना</h2><div>यदि समय पर प्रीमियम जमा नहीं किया गया और पॉलिसी लैप्स हो गई, तो उस अवधि में किए गए इलाज का क्लेम स्वीकार नहीं किया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्लेम रिजेक्ट होने से कैसे बचें?
</h2><div>- पॉलिसी खरीदते समय सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही दें।</div><div>- पॉलिसी के नियम, कवरेज और एक्सक्लूजन ध्यान से पढ़ें।</div><div>- वेटिंग पीरियड की जानकारी रखें।</div><div>- अस्पताल में भर्ती होने पर बीमा कंपनी को समय पर सूचना दें।</div><div>- इलाज से जुड़े सभी मूल दस्तावेज सुरक्षित रखें।</div><div>- समय पर प्रीमियम का भुगतान करें और पॉलिसी को सक्रिय रखें।</div><div>&nbsp;</div><h2>यदि क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?</h2><div>यदि आपको लगता है कि क्लेम गलत तरीके से अस्वीकार किया गया है तो सबसे पहले बीमा कंपनी से लिखित कारण मांगें। इसके बाद कंपनी की ग्रिवेंस रिड्रेसल (शिकायत निवारण) प्रणाली में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यदि समस्या का समाधान नहीं होता तो इंश्योरेंस ओम्बुड्समैन या भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के शिकायत पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है।</div><div>&nbsp;</div><div>लेकिन, यह पक्का करने के लिए कि आपका क्लेम रिजेक्ट न हो, खरीदते समय सभी पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में ईमानदारी से बताएं, हॉस्पिटल में भर्ती होने के 24-48 घंटों के अंदर इंश्योरेंस कंपनी को बताएं और जमा करने के लिए ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें।</div><div>&nbsp;</div><div>हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने के पीछे ज्यादातर मामलों में गलत जानकारी देना, वेटिंग पीरियड के दौरान क्लेम करना, पॉलिसी की शर्तों की अनदेखी और दस्तावेजों में कमी जैसे कारण जिम्मेदार होते हैं। थोड़ी सावधानी और सही जानकारी के साथ इन समस्याओं से बचा जा सकता है। इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के बाद केवल प्रीमियम भरना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सभी शर्तों और प्रक्रियाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 18:44:15 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/under-what-circumstances-does-a-health-insurance-claim-get-rejected</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/7/28/health-insurance_large_1844_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[कंपनी वाला बीमा बेस्ट है या पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस? यहां दूर करें कन्फ्यूजन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/is-corporate-insurance-or-personal-health-insurance-best]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन बन गया है। नौकरीपेशा लोगों को अक्सर कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस मिलता है, जबकि कई लोग अलग से रिटेल (पर्सनल) हेल्थ इंश्योरेंस भी खरीदते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों में कौन-सा विकल्प बेहतर है और क्या केवल कंपनी के बीमा पर निर्भर रहना सही है?</p><p>वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों योजनाओं के अपने-अपने फायदे और सीमाएं हैं। इसलिए फैसला अपनी जरूरत, परिवार की स्वास्थ्य आवश्यकताओं और भविष्य की योजना को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।</p><p>इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pension-worries-are-over-secure-your-old-age-with-these-investment-plans" target="_blank" rel="noopener">पेंशन की टेंशन खत्म, इन Investment Plans से करें अपना बुढ़ापा सिक्योर</a></p><h2 class="">क्या होता है कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस?</h2><p>कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस वह पॉलिसी होती है जिसे कोई कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए समूह बीमा (Group Health Insurance) के रूप में खरीदती है।</p><h2 class="">मुख्य विशेषताएं:</h2><p>- प्रीमियम का भुगतान आमतौर पर कंपनी करती है।</p><p>- कर्मचारी को अलग से पॉलिसी खरीदने की जरूरत नहीं होती।</p><p>- कई मामलों में पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing Diseases) को भी शुरुआती समय से कवर किया जा सकता है।</p><p>- कैशलेस इलाज के लिए अस्पतालों का नेटवर्क उपलब्ध रहता है।</p><h2 class="">क्या होता है रिटेल (पर्सनल) हेल्थ इंश्योरेंस?</h2><p>रिटेल या पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस वह पॉलिसी होती है जिसे व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार स्वयं खरीदता है।</p><h2 class="">मुख्य विशेषताएं:</h2><p>- बीमा राशि (Sum Insured) अपनी जरूरत के अनुसार चुनी जा सकती है।</p><p>- पॉलिसी नौकरी बदलने या रिटायरमेंट के बाद भी जारी रहती है।</p><p>- नो-क्लेम बोनस, ऐड-ऑन कवर और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं।</p><p>- लंबे समय तक निरंतर कवरेज बनाए रखना आसान होता है।</p><h2 class="">कॉर्पोरेट और रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस में अंतर</h2><h2 class="">1. कवरेज</h2><p>- कॉर्पोरेट प्लान: कंपनी द्वारा तय बीमा राशि मिलती है।</p><p>- रिटेल प्लान: अपनी जरूरत और बजट के अनुसार कवरेज चुन सकते हैं।</p><h2 class="">2. नौकरी बदलने का असर</h2><p>- कॉर्पोरेट प्लान: नौकरी छोड़ने या बदलने पर बीमा कवर समाप्त हो सकता है।</p><p>- रिटेल प्लान: नौकरी से कोई संबंध नहीं होता, इसलिए कवरेज जारी रहता है।</p><h2 class="">3. प्रीमियम</h2><p>- कॉर्पोरेट प्लान: प्रीमियम का खर्च आमतौर पर कंपनी उठाती है।</p><p>- रिटेल प्लान: प्रीमियम का भुगतान स्वयं करना होता है।</p><h2 class="">4. लंबी अवधि की सुरक्षा</h2><p>- कॉर्पोरेट प्लान: रोजगार पर निर्भर।</p><p>- रिटेल प्लान: जीवन के अलग-अलग चरणों में लगातार सुरक्षा प्रदान करता है।</p><p>क्या केवल कंपनी के बीमा पर निर्भर रहना सही है?</p><p>वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि केवल कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसकी प्रमुख वजहें हैं:</p><p>- नौकरी बदलने पर कवरेज समाप्त हो सकता है।</p><p>- रिटायरमेंट के बाद कंपनी का बीमा उपलब्ध नहीं रहता।</p><p>- कई बार कंपनी का सम इंश्योर्ड बड़े इलाज के लिए पर्याप्त नहीं होता।</p><p>- नौकरी छूटने की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य सुरक्षा खत्म हो सकती है।</p><h2 class="">किसे कौन-सा विकल्प चुनना चाहिए?</h2><p>- यदि आप नौकरीपेशा हैं और कंपनी हेल्थ इंश्योरेंस देती है, तब भी अपनी और परिवार की जरूरतों के अनुसार एक रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर विचार करें।</p><p>- यदि आप स्वरोजगार करते हैं या फ्रीलांसर हैं तो रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।</p><p>- जिन परिवारों में बुजुर्ग सदस्य या गंभीर बीमारियों का जोखिम अधिक है, उन्हें पर्याप्त बीमा राशि वाली व्यक्तिगत पॉलिसी पर ध्यान देना चाहिए।</p><h2 class="">पॉलिसी खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान</h2><p>- पर्याप्त सम इंश्योर्ड चुनें।</p><p>- नेटवर्क अस्पतालों की सूची जांचें।</p><p>- वेटिंग पीरियड और एक्सक्लूजन को ध्यान से पढ़ें।</p><p>- क्लेम सेटलमेंट रेशियो और ग्राहक सेवा की गुणवत्ता की जानकारी लें।</p><p>- प्रीमियम के साथ मिलने वाले लाभों की तुलना करें।</p><p>कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस और रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि कई मामलों में एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। कंपनी का बीमा तत्काल सुरक्षा देता है, जबकि व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यदि बजट अनुमति देता है तो दोनों का संयोजन भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी खर्चों से बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकता है।</p><p>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:40:09 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/is-corporate-insurance-or-personal-health-insurance-best</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/7/21/health-insurance_large_20260721173837560_f7f5cb0fc9_23.jpg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पेंशन की टेंशन खत्म, इन Investment Plans से करें अपना बुढ़ापा सिक्योर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pension-worries-are-over-secure-your-old-age-with-these-investment-plans]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>सरकार ने सीनियर सिटिज़न्स को रिटायरमेंट के बाद एक सुरक्षित ज़िंदगी देने के लिए कई पेंशन प्लान लागू किए हैं। ये प्लान रेगुलर इनकम देने के लिए बनाए गए हैं, ताकि रिटायर लोग बिना किसी पैसे की तंगी के आरामदायक ज़िंदगी जी सकें।</div><div>&nbsp;</div><div>अगर आपकी उम्र 60 साल से ज़्यादा है तो बैंकों और पोस्ट ऑफिस में FD, सीनियर सिटिज़न सेविंग स्कीम, ELSS, NSC और पेंशन प्लान पांच सबसे अच्छे इन्वेस्टमेंट हैं जिनसे सीनियर सिटिज़न को सबसे ज़्यादा फ़ायदा हो सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/lost-your-original-lpg-cylinder-connection-receipt-learn-how-to-get-a-new-one" target="_blank">एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन की खो गई है ओरिजिनल रसीद? जानें नया दस्तावेज कैसे बनवाएं</a></h3><h2>फिक्स्ड डिपॉजिट</h2><div>फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या टर्म डिपॉजिट किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में शुरू किए जा सकते हैं। ये फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के पास मौजूद सबसे सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाली स्कीम में से एक हैं।</div><div><br></div><div>- ज़्यादातर बैंकों में सीनियर सिटिजन को आम लोगों की तुलना में फिक्स्ड डिपॉजिट पर 25 से 50 बेसिस पॉइंट ज़्यादा इंटरेस्ट रेट मिलता है।</div><div>- FD शुरू करने के लिए कम से कम 7 दिन और ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल का समय चाहिए।</div><div>- आप FD अकाउंट में जितना चाहें उतना अमाउंट डाल सकते हैं, जिसकी शुरुआत 100 रुपये से होती है।</div><div>- आप या तो FD पर मिलने वाले इंटरेस्ट को समय-समय पर अपने सेविंग्स अकाउंट में जमा करवा सकते हैं या मैच्योरिटी के समय पूरी अमाउंट - प्रिंसिपल और इंटरेस्ट - निकाल सकते हैं।</div><div>- अगर आप उस बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट शुरू करते हैं जिसमें आपका पहले से अकाउंट है, तो चीजें आसान हो जाएंगी।</div><div>- भारत में पोस्ट ऑफिस 1 से 5 साल की टर्म डिपॉजिट स्कीम और बैंक FD की तुलना में ज़्यादा इंटरेस्ट रेट देते हैं।</div><div>- अगर तुरंत ज़रूरत हो तो आप पेनल्टी देकर टर्म खत्म होने से पहले अमाउंट निकाल सकते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है और हर समय के लिए ब्याज दरें अलग-अलग होती हैं। इसलिए अगर आप अपना पैसा FD में इन्वेस्ट करने का प्लान बना रहे हैं तो ठीक से रिसर्च करें और ऐसी स्कीम ढूंढें जो आपको ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा दे।</div><div>&nbsp;</div><h2>पेंशन प्लान</h2><div>पेंशन प्लान एक अच्छा तरीका है जिससे आप काम करना बंद करने के बाद रेगुलर इनकम पा सकते हैं। कई तरह के पेंशन प्लान मौजूद हैं। एक तरह के प्लान में आप एक ही डिपॉजिट में बड़ी रकम इन्वेस्ट कर सकते हैं और दूसरे तरह के प्लान में आप रेगुलर तौर पर छोटी रकम जमा कर सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>- कुछ प्लान में कम से कम इन्वेस्टमेंट Rs. 200 जितना कम है।</div><div>- ये प्लान 3-7% इंटरेस्ट देते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस कंपनी के साथ पेंशन प्लान रखते हैं।</div><div>- लॉक-इन पीरियड 3 साल जितना कम हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस उम्र में प्लान शुरू करते हैं और आप किस इंस्टीट्यूशन से प्लान खरीद रहे हैं।</div><div>- EPF और PPF भी पेंशन प्लान के ही टाइप हैं, जहाँ आप रेगुलर डिपॉजिट करते हैं और इंटरेस्ट कमाते हैं,&nbsp; PPF अभी 7.1% सालाना (Q4 FY 2025-26 तक) दे रहा है, जबकि EPF रेट EPFO हर साल बताता है।</div><div>- लॉक-इन पीरियड के बाद - PPF के लिए 15 साल और रिटायरमेंट के बाद या जब आप EPF के लिए काम करना बंद कर देते हैं - आप एकमुश्त रकम निकाल सकते हैं।</div><div>- हालांकि, इस निकासी पर टैक्स बेनिफिट पाने के लिए आपको प्रोविडेंट फंड का एक हिस्सा एन्युइटी प्लान में फिर से इन्वेस्ट करना होगा। एन्युइटी प्लान पेंशन प्लान की तरह ही होते हैं, जिसमें आपको ज़िंदगी भर के लिए एक गारंटीड रकम मिलेगी।</div><div>&nbsp;</div><h2>सिनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS)&nbsp;</h2><div>मौजूदा समय में यह बुजुर्गों के लिए सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है। इसमें तिमाही आधार पर (Quarterly) ब्याज का भुगतान होता है और टैक्स बेनिफिट (80C) भी मिलता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)&nbsp;</h2><div>इसमें इक्विटी और डेट का अच्छा मिश्रण मिलता है। रिटायरमेंट पर एकमुश्त (Lumpsum) रकम के साथ-साथ लाइफटाइम रेगुलर पेंशन का विकल्प मिलता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) / LIC प्लान्स&nbsp;</h2><div>एलआईसी के तत्काल एन्युटी (Immediate Annuity) प्लान्स, जहां एकमुश्त रकम जमा करके तुरंत मासिक या सालाना पेंशन शुरू की जा सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>म्यूचुअल फंड में SWP (Systematic Withdrawal Plan)&nbsp;</h2><div>यह आज के समय का सबसे स्मार्ट विकल्प माना जाता है। एकमुश्त राशि को किसी अच्छे हाइब्रिड या लार्ज-कैप फंड में डालकर हर महीने एक तय रकम (पेंशन की तरह) निकाली जा सकती है। इससे बची हुई रकम पर ग्रोथ भी मिलती रहती है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 17:52:08 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pension-worries-are-over-secure-your-old-age-with-these-investment-plans</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/7/17/investment-plans_large_1752_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन की खो गई है ओरिजिनल रसीद? जानें नया दस्तावेज कैसे बनवाएं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/lost-your-original-lpg-cylinder-connection-receipt-learn-how-to-get-a-new-one]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन लेते समय गैस एजेंसी उपभोक्ता को सब्सक्रिप्शन वाउचर (SV) या कनेक्शन रसीद जारी करती है। यह दस्तावेज इस बात का प्रमाण होता है कि गैस कनेक्शन आपके नाम पर पंजीकृत है। भविष्य में गैस कनेक्शन ट्रांसफर कराने, एजेंसी बदलने या स्वामित्व से जुड़े कुछ मामलों में इसकी जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में यदि यह ओरिजिनल रसीद खो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। गैस कंपनी से डुप्लीकेट दस्तावेज प्राप्त किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या है सब्सक्रिप्शन वाउचर (SV)?</h2><div>यह एलपीजी कनेक्शन का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है। इसमें उपभोक्ता का नाम, ग्राहक संख्या, पता और कनेक्शन का विवरण दर्ज रहता है। इसे भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है। रसीद खो जाए तो सबसे पहले क्या करें?</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/major-changes-to-passport-rules-effective-july-1-2026" target="_blank">1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, जानिए नई फीस दर और आवेदन का तरीका</a></h3><h2>यदि ओरिजिनल रसीद या SV खो गया है, तो सबसे पहले:</h2><div>- अपनी गैस एजेंसी से संपर्क करें।</div><div>- ग्राहक संख्या (Consumer Number) और पंजीकृत मोबाइल नंबर अपने पास रखें।</div><div>- यदि ग्राहक संख्या याद नहीं है, तो आधार, मोबाइल नंबर या पते की मदद से एजेंसी रिकॉर्ड खोज सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>डुप्लीकेट रसीद कैसे बनवाएं?</h2><div>1. गैस एजेंसी जाएं: जिस एजेंसी से आपने कनेक्शन लिया है, वहां जाकर डुप्लीकेट SV के लिए आवेदन करें।</div><div>2. आवेदन पत्र भरें: एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए आवेदन फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरें। कुछ एजेंसियां साधारण लिखित आवेदन भी स्वीकार करती हैं।</div><div>3. पहचान पत्र जमा करें: आमतौर पर निम्न दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:</div><div>- आधार कार्ड</div><div>- पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस (यदि आवश्यक हो)</div><div>- पंजीकृत मोबाइल नंबर</div><div><br></div><div>4. सत्यापन प्रक्रिया: एजेंसी आपके रिकॉर्ड का सत्यापन करेगी। जानकारी सही मिलने पर डुप्लीकेट दस्तावेज जारी कर दिया जाएगा।</div><div><br></div><div>5. शुल्क (यदि लागू हो): कुछ तेल विपणन कंपनियां या एजेंसियां डुप्लीकेट दस्तावेज जारी करने के लिए नाममात्र का शुल्क ले सकती हैं। इसकी जानकारी संबंधित एजेंसी से प्राप्त की जा सकती है।</div><div><br></div><div>6. अपनी नई रसीद पाएं: नई रसीद जारी होने के बाद आपको यह आपके LPG कनेक्शन के नाम पर मिलेगी।</div><div>&nbsp;</div><h2>ऑनलाइन भी मिल सकती है मदद</h2><div>यदि आपका कनेक्शन इंडियन ऑयल (Indane), भारत पेट्रोलियम (Bharatgas) या हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP Gas) का है तो आप संबंधित कंपनी के आधिकारिक पोर्टल या मोबाइल ऐप पर लॉगिन करके अपने कनेक्शन का विवरण देख सकते हैं। कई सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं, हालांकि डुप्लीकेट SV जारी करने की प्रक्रिया एजेंसी के माध्यम से ही पूरी हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>किन परिस्थितियों में पड़ती है जरूरत?</h2><div>- गैस कनेक्शन दूसरे शहर में ट्रांसफर कराने पर</div><div>- कनेक्शन का स्वामित्व बदलने पर</div><div>- रिकॉर्ड सत्यापन के दौरान</div><div>- किसी विवाद या दस्तावेजी जांच की स्थिति में</div><div>&nbsp;</div><h2>ध्यान रखने योग्य बातें</h2><div>- गैस कनेक्शन से जुड़े सभी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी सुरक्षित रखें।</div><div>- अपना मोबाइल नंबर और ई-केवाईसी (e-KYC) अपडेट रखें।</div><div>- केवल अधिकृत गैस एजेंसी या संबंधित तेल विपणन कंपनी से ही संपर्क करें।</div><div>- किसी अनधिकृत व्यक्ति को अपने ग्राहक नंबर या ओटीपी की जानकारी साझा न करें।</div><div>&nbsp;</div><div>यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि नई रसीद पाने का प्रोसेस आपकी लोकेशन और आप जिस खास LPG डिस्ट्रीब्यूटर के साथ काम कर रहे हैं, उसके आधार पर अलग हो सकता है। हमेशा पक्का करें कि आप अपने LPG कनेक्शन में किसी भी दिक्कत से बचने के लिए सही तरीके अपना रहे हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>एलपीजी कनेक्शन की ओरिजिनल रसीद या सब्सक्रिप्शन वाउचर खो जाने पर नया दस्तावेज बनवाना कठिन नहीं है। अपनी गैस एजेंसी में आवेदन, पहचान सत्यापन और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद डुप्लीकेट दस्तावेज प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए यदि आपकी रसीद गुम हो गई है तो बिना देरी किए संबंधित गैस एजेंसी से संपर्क करें और अपने कनेक्शन के रिकॉर्ड को अपडेट रखें।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 17:49:13 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/lost-your-original-lpg-cylinder-connection-receipt-learn-how-to-get-a-new-one</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/7/17/lpg-cylinder-connection_large_1749_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[EPFO New Rules: PF क्लेम में देरी पर Officer की कटेगी Salary, लगेगा 12% का भारी जुर्माना]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/new-social-security-code-faster-pf-claim-settlement]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>खासतौर पर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के जरिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की तीन नई योजनाओं को अधिसूचित कर दिया है। बता दें कि, इसमें कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026, कर्मचारी पेंशन योजना-2026 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-2026 शामिल है।&nbsp;</div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इन नई योजनाओं को तहत डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाने और भविष्य निधि (पीएफ), पेंशन और बीमा दावों का समय पर निपटा लें।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">नई व्यवस्था के मद्देनजर अगर भविष्य निधि, पेंशन या बीमा का दावा सभी आवश्यक डॉक्यूमेंट के साथ पूरा होने के बाद 20 दिनों के अंदर ही निपटा लें। वरना इस मामले में आयुक्त पर 12 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज लगेगा।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">आपको बताते चलें कि, यह रकम संबंधित अधिकारी के वेतन से काटी जाएगी। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि, इससे दावों के निपटारे में अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी और कर्मचारियों को समय पर उनका पैसा मिलेगा।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले भी देरी होने पर ब्याज देने का प्रावधान था, लेकिन अब इसे स्पष्ट रुप से 12 प्रतिशत तय किया है। पहले अधिकारियों को पीएफ पर घोषित ब्याज दर के अनुसार भुगतान करना पड़ सकता है।</span></div><div><br></div><div><b>कर्मचारी और नियोक्ताओं का अंशदान पहले की तरह ही रहेगा</b></div><div><span style="font-size: 1rem;">दरअसल, नई योजनाएं लागू होने के बाद कर्मचारी भविष्य निधि योजना-1952, कर्मचारी परिवार पेंशन योजना-1971, कर्मचारी पेंशन योजना-1995 और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना-1976 की जगह लेंगी।&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">जबकि कर्मचारियों व नियोक्ताओं के अंशदान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह कर्मचारी और नियोक्ताओं के कर्मचारी और नियोक्ता दोनों अपने मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत योगदान देंगे। नियोक्ता के अंशदान में से 8.33 फीसदी राशि पेंशन योजना में मिलेगी, वहीं केंद्र सरकार पहले की तरह 1.16 प्रतिशत का योगदान देगी।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">हालांकि, जो नई योजनाएं बनी गई हैं, उनमें नियोक्ताओं और ईपीएफओ दोनों के लिए डिजिटल अनुपालन को अनिवार्य बनाया गया है, जिससे सदस्य निकासी, पेंशन, बीमा और अन्य सेवाओं का लाभ कंप्लीट ऑनलाइन और बिना देरी के लिया जा सकता है।&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 16:12:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/new-social-security-code-faster-pf-claim-settlement</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/7/3/epfo-new-rules_large_1612_157.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, जानिए नई फीस दर और आवेदन का तरीका]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/major-changes-to-passport-rules-effective-july-1-2026]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत सरकार ने पासपोर्ट नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। दरअसल, विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट आवेदन शुल्क में संशोधन किया है। नया संशोधित शुल्क ताज़ा आवेदन, पासपोर्ट रिन्यूअल (Re-issue), तत्काल (Tatkal) सेवा और खोए/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट के मामलों पर लागू होगा। बताया गया है कि यदि आप 1 जुलाई 2026 के बाद पासपोर्ट आवेदन करेंगे तो आपको नई शुल्क दरों के अनुसार ही भुगतान करना होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>प्राप्त विभागीय जानकारी के मुताबिक, नई फीस की मुख्य श्रेणियां इस प्रकार हैं, जो क्रमशः सेवा, पुरानी फीस और नई फीस को अभिव्यक्त करती हैं। कहने का आशय यह कि 36 पेज का सामान्य पासपोर्ट अब ₹1,500 के बजाए ₹2,500 में बनेगा, जो ₹1000 अधिक है। इसी प्रकार 36 पेज वाला तत्काल (Tatkal) पासपोर्ट के लिए अब ₹3,500 के बजाए ₹5,000 देने होंगे, जो ₹1500 ज्यादा है। इसी प्रकार से 60 पेज का सामान्य पासपोर्ट अब ₹2,000 की जगह ₹3,500 में बनेगा, यानी इस सेवा के लिए भी ₹1500 अधिक भुगतान करना पड़ेगा।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/so-much-confusion-regarding-citizenship-documents-is-not-right" target="_blank">नागरिकता के दस्तावेजों पर इतना भ्रम ठीक नहीं..</a></h3><div>वहीं, 60 पेज के तत्काल (Tatkal) पासपोर्ट के लिए अब ₹4,000 की जगह ₹6,000 देने होंगे, यानी कि इस कोटि में भी 2000 की बढ़ोतरी की गई है, जो सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट, नाबालिगों के पासपोर्ट तथा अन्य पासपोर्ट सेवाओं की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, कुछ श्रेणियों, जैसे पात्र वरिष्ठ नागरिकों और छोटे बच्चों के लिए निर्धारित रियायतें जारी हैं।&nbsp;</div><div>सवाल है कि आप अपना पासपोर्ट आवेदन कैसे करें? तो जवाब होगा कि पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर पंजीकरण करें। फिर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। उसके बाद आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें। पुनः निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। ततपश्चात नज़दीकी पासपोर्ट सेवा केंद्र/पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र में अपॉइंटमेंट बुक करें। साथ ही दस्तावेज़ सत्यापन और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी करें। यह सबकुछ होने के बाद आपके आवेदनों व अद्यतन जानकारियों का पुलिस सत्यापन किया जाएगा, जिसमें सबकुछ सही मिलने और प्रशासनिक विवेक की संतुष्टि के बाद पासपोर्ट जारी किया जाएगा।&nbsp;</div><div><br></div><h2># देशभर में और भी कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू होंगे</h2><div><br></div><div>केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों से मिली अद्यतन जानकारी के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से ही देशभर के विभिन्न विभागों में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की सेवाओं पर पड़ेगा, जबकि कुछेक चीजें मुफ्त भी होंगी। इनमें से कुछ बदलाव 1 जुलाई से सीधे प्रभावी हैं, जबकि कुछ जुलाई महीने के दौरान लागू होने वाली समय-सीमाएँ या नियामकीय परिवर्तन हैं। प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं—</div><div><br></div><div>एक, आधार में ईमेल अपडेट मुफ्त: 1 जुलाई से निर्धारित अवधि के लिए आधार में ईमेल आईडी अपडेट कराने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>दूसरा, क्रेडिट कार्ड नियमों में बदलाव: कुछ State Bank of India द्वारा निर्गत क्रेडिट कार्डों के रिवॉर्ड पॉइंट नियम बदलेंगे। जहां कुछ कार्डों के रिवॉर्ड पॉइंट और लाभों में बदलाव होगा, वहीं कुछ खर्चों पर मिलने वाले रिवॉर्ड कम या समाप्त किए गए हैं। जबकि HDFC Bank के कुछ कार्डों पर एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस की नई शर्तें लागू होंगी, क्योंकि इसके नियम बदले गए हैं और लाउंज सुविधा के लिए न्यूनतम खर्च जैसी नई शर्तें लागू की गई हैं।</div><div><br></div><div>तीसरा, बैंकों की मिस-सेलिंग पर RBI के नए नियम:यदि बैंक ग्राहक को गलत तरीके से वित्तीय उत्पाद बेचते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई और ग्राहक संरक्षण के नए प्रावधान लागू होंगे।&nbsp;</div><div><br></div><div>चौथा, आयकर रिटर्न (ITR): ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। जुलाई में समय पर रिटर्न दाखिल करने पर विशेष ध्यान देना होगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>पांचवां, रेलवे नियमों में कुछ बदलाव होंगे: रेलवे की कुछ परिचालन और यात्री सुविधाओं से जुड़े नियमों में संशोधन लागू होंगे।&nbsp;</div><div><br></div><div>छठा, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी कीमतें: हर महीने की तरह 1 जुलाई को इनकी कीमतों की समीक्षा होगी, इसलिए नई दरें घोषित हो सकती हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>सातवां, रेलवे के कुछ टिकटिंग और परिचालन नियमों में संशोधन लागू होंगे, जिसके दृष्टिगत यात्रियों को नए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। खासकर घरेलू और वाणिज्यिक सिलेंडरों की दरों में बदलाव संभव है।</div><div><br></div><div>आठवां, EPFO 3.0: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़ी नई डिजिटल सेवाओं का विस्तार शुरू होने की संभावना है।</div><div><br></div><div>नौवां, कारों की कीमतें: कुछ वाहन कंपनियाँ 1 जुलाई से कीमतों में वृद्धि लागू कर सकती हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>दसवां, पेट्रोल और डीज़ल: सरकार ने वाणिज्यिक खरीदारों पर लगाए गए अस्थायी बिक्री प्रतिबंध 1 जुलाई से हटाने का निर्णय लिया है। इससे सामान्य आपूर्ति व्यवस्था बहाल होगी।&nbsp;</div><div><br></div><h2># समझिए, आम नागरिक पर सबसे अधिक असर किन बदलावों का पड़ेगा?&nbsp;</h2><div>पासपोर्ट बनवाने वालों पर, आयकर रिटर्न भरने वालों पर, SBI और HDFC क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं पर, बैंक ग्राहकों पर (RBI के नए नियम), LPG/CNG/PNG उपभोक्ताओं पर और रेल यात्रियों पर। स्वाभाविक है कि इससे महंगाई भी बढ़ेगी।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:35:16 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/major-changes-to-passport-rules-effective-july-1-2026</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/30/indian-passport_large_1835_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आखिर ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी कैसे होती है? और इससे कैसे बचें? समझिए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-exactly-does-cyber-fraud-involving-e-challans-take-place-and-how-can-you-avoid-it]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आपको पता है कि किसी भी अनजान मैसेज पर क्लिक करेंगे तो बैंक खाता हो सकता है खाली? जी हां,&nbsp; आजकल यही हो रहा है। खासकर साइबर अपराधी फर्जी ई-चालान (E-Challan) के नाम पर एसएमएस (SMS), व्हाट्सऐप (WhatsApp) और ई-मेल (E-mail) भेजकर लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा रहे हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>दरअसल, ऐसे संदेशों में लिखा होता है कि आपका ट्रैफिक चालान बकाया है, तुरंत भुगतान करें, अन्यथा वाहन जब्त हो सकता है या लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। लिहाजा लोग इनके झांसे में आ जाते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-to-get-your-ayushman-card-made-what-is-the-annual-limit-for-free-medical-treatment" target="_blank">AB-PMJAY: जानिए कैसे बनेगा आपका आयुष्मान कार्ड? वर्षपर्यंत कितने रुपये का मिलेगा मुफ्त इलाज?</a></h3><h2># समझिए, ठगी कैसे होती है?</h2><div>फर्जी एसएमएस या व्हाट्सऐप संदेश- "आपका ₹2,000 का चालान बकाया है।"......"24 घंटे में भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई होगी।".....नकली लिंक संदेश में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही आप नकली वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं। वहां वाहन नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक विवरण या यूपीआई पिन (UPI PIN) मांगा जाता है। वहीं, मैलवेयर का खतरा भी रहता है क्योंकि कुछ लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में हानिकारक ऐप डाउनलोड हो जाता है। इससे ठग ओटीपी (OTP) बैंकिंग जानकारी और व्यक्तिगत डेटा चुरा सकते हैं।</div><div><br></div><h2># आखिर कैसे पहचानें फर्जी ई-चालान?</h2><div>संदेश में भेजे गए लिंक का डोमेन संदिग्ध हो। अत्यधिक डराने या जल्द भुगतान का दबाव बनाया जाए। भुगतान के लिए निजी मोबाइल नंबर या UPI ID दी गई हो। वर्तनी और भाषा संबंधी कई गलतियां हों। आपने कोई ट्रैफिक नियम नहीं तोड़ा हो, फिर भी चालान का संदेश आए।</div><div>&nbsp;</div><div>सुरक्षित रहने के उपाय: किसी भी एसएमएस या व्हाट्सऐप लिंक पर सीधे क्लिक न करें। ई-चालान की जांच केवल सरकारी पोर्टल पर करें। OTP, UPI PIN, CVV या बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें। मोबाइल में केवल आधिकारिक ऐप ही इंस्टॉल करें। संदिग्ध संदेश मिलने पर उसे रिपोर्ट करें और ब्लॉक करें।</div><div><br></div><h2># ई-चालान की जांच कहां करें?</h2><div>भारत में ट्रैफिक चालान की वास्तविक स्थिति देखने के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें: Parivahan eChallan Portal⁠. वहीं, यदि ठगी हो जाए तो क्या करें? तुरंत बैंक और यूपीआई (UPI) सेवा प्रदाता को सूचित करें। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। फिर साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: National Cyber Crime Reporting Portal.</div><div><br></div><h2># जानिए, आपका अधिकार क्या है?</h2><div>यदि आप समय रहते 1930 पर शिकायत कर देते हैं, तो कई मामलों में संदिग्ध खाते में गई राशि को फ्रीज कराकर वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। हमेशा यह याद रखें कि कोई भी वैध सरकारी विभाग व्हाट्सऐप संदेश भेजकर आपसे ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक पासवर्ड नहीं मांगता। ई-चालान का संदेश मिलने पर पहले उसकी सत्यता जांचें, फिर ही कोई भुगतान करें।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 18:59:33 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-exactly-does-cyber-fraud-involving-e-challans-take-place-and-how-can-you-avoid-it</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/29/e-challans_large_1859_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[AB-PMJAY: जानिए कैसे बनेगा आपका आयुष्मान कार्ड? वर्षपर्यंत कितने रुपये का मिलेगा मुफ्त इलाज?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-to-get-your-ayushman-card-made-what-is-the-annual-limit-for-free-medical-treatment]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) द्वारा संचालित "आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना" (AB-PMJAY) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी जनस्वास्थ्य योजना है, जिसके तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलता है। चूंकि यह सुविधा सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध है, इसलिए इसकी लोकप्रियता गांवों से लेकर शहरों-महानगरों तक में है।&nbsp;</div><div><br></div><div>इससे लाभान्वित होने वाले लोग अक्सर पूछते हैं कि इसके द्वारा साल भर में कितना मुफ्त इलाज मिल सकता है? तो जवाब होगा कि इस योजना के पात्र परिवार को ₹5 लाख प्रति वर्ष तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। चूंकि यह फैमिली फ्लोटर कवर होता है, इसलिए परिवार के एक या अधिक सदस्य मिलकर इसका उपयोग कर सकते हैं। इस योजना की खास बात यह है कि इसके तहत इलाज पूरी तरह कैशलेस और पेपरलेस होता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-a-fake-case-or-fir-is-filed-against-you-find-out-how-you-can-defend-yourself-against-it" target="_blank">यदि आपके खिलाफ को फेक केस या F.I.R. करे तो जानिए कि आप उससे से कैसे बचें? आखिर 2026 में क्या कहता है कानून और आपके क्या क्या हैं अधिकार?</a></h3><div>सवाल है कि आप अपना आयुष्मान कार्ड कैसे बनाएं? तो जान लीजिए कि सबसे पहले आपको अपनी पात्रता की जांच करनी है। इस हेतु आप सम्बन्धित अधिकारिक पोर्टल या आयुष्मान ऐप पर जाकर मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। ततपश्चात आधार या अन्य विवरण डालकर अपना नाम खोजें। उसके बाद यदि आपकी पात्रता सत्यापित हो गई तो अपना ई-केवाईसी (e-KYC) करें। इस हेतु आधार आधारित सत्यापन (OTP या बायोमेट्रिक) का चरण पूरा करें। फिर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। इसके बाद अपना कार्ड डाउनलोड करें। इससे पहले आपका दस्तावेज सत्यापित किया जाएगा। फिर सत्यापन के बाद डिजिटल आयुष्मान कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अलावा, नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से भी कार्ड बनवाया जा सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>सवाल है कि आखिर किन-किन लोगों को इसका लाभ मिलता है? तो जवाब होगा कि एसईसीसी (SECC)-2011 के आधार पर चिन्हित गरीब एवं वंचित परिवार। जबकि शहरी क्षेत्रों के कुछ श्रमिक वर्ग भी इसमें शामिल किए गए हैं। वहीं 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिक, आय की परवाह किए बिना ही, अब इस योजना के पात्र हैं। इससे इस योजना की लोकप्रियता भी बढ़ी है।</div><div><br></div><div>सवाल है कि इस योजना के तहत क्या-क्या खर्च कवर होते हैं? तो जवाब होगा कि योजना में सामान्यतः शामिल हैं: अस्पताल में भर्ती, सर्जरी, दवाइयाँ, जांच (डायग्नोस्टिक टेस्ट), आईसीयू (ICU) सेवाएँ, इम्प्लांट, भोजन व आवास, भर्ती से पहले और बाद का कुछ चिकित्सा खर्च, ताकि मरीज और उसके आश्रितों को परेशान न होना पड़े।</div><div><br></div><div>महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके मार्फ़त इलाज केवल पैनल (Empanelled) में शामिल अस्पतालों में ही मुफ्त मिलता है। ऐसे में यदि कोई अस्पताल योजना के तहत कवर इलाज के लिए अतिरिक्त पैसा मांगता है, तो उसकी शिकायत की जा सकती है। शिकायत सही मिली तो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है, इसलिए प्रमाण सहित शिकायत करें।</div><div><br></div><div>यूँ तो यह योजना पूरे देश में लागू है, लेकिन विपक्षी नेताओं ने इसकी सफलता में बहुत रोड़े अटकाए। यही वजह है कि दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु आदि राज्यों में इस योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। हालांकि दिल्ली और पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने से हालात सुधर चुके हैं।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 18:57:56 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-to-get-your-ayushman-card-made-what-is-the-annual-limit-for-free-medical-treatment</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/27/ayushman-card_large_1858_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[यदि आपके खिलाफ को फेक केस या F.I.R. करे तो जानिए कि आप उससे से कैसे बचें? आखिर 2026 में क्या कहता है कानून और आपके क्या क्या हैं अधिकार?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-a-fake-case-or-fir-is-filed-against-you-find-out-how-you-can-defend-yourself-against-it]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>यदि व्यक्तिगत खुन्नस या संस्थागत रंजिश के चले आपके खिलाफ कोई भी व्यक्ति झूठी यानी फेक केस या F.I.R. दर्ज करवाता है तो उससे से कैसे बचें? इस बारे में वर्ष 2026 में क्या क्या कानून हैं और इसके दृष्टिगत आपके क्या क्या अधिकार हैं, यह आपको अवश्य जानना, समझना चाहिए। आपको सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कोई भी व्यक्ति पूरी तरह इस बात की गारंटी नहीं दे सकता कि उसके खिलाफ झूठी शिकायत या FIR दर्ज नहीं होगी। लेकिन कानून आपको ऐसे मामलों में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा देता आया है।&nbsp;</div><div><br></div><div>आइए जानते हैं उन आठ परिस्थितियों या प्रावधानों के बारे में, जो ऐसे किसी भी षड्यंत्र से न केवल आपको बचाते हैं, बल्कि ऐसा करने के नापाक इरादे रखने वाले व्यक्ति को कानूनी मकड़जाल में उलझाते भी हैं:-</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/landlords-beware-has-the-tenant-provided-their-aadhaar-or-pan" target="_blank">मकान मालिक सावधान! किराएदार ने दिया आधार-पैन? ऐसे करें असली-नकली की पहचान</a></h3><h2>पहला, यदि झूठी शिकायत की आशंका हो तो क्या करें?</h2><div><br></div><div>यदि झूठी शिकायत की आशंका हो तो आप निम्नलिखित दो कदम उठाएं- (अ) सबूत पहले से सुरक्षित रखें: फोन कॉल रिकॉर्ड (जहां कानूनी रूप से अनुमत हो।) व्हाट्सऐप चैट, ईमेल, SMS, CCTV फुटेज, यात्रा, लोकेशन या उपस्थिति के रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन के दस्तावेज आदि झूठे मामलों में अक्सर यही सबूत बाद में सबसे मजबूत रक्षा बनते हैं। और, (ब) विवाद को लिखित रूप में रखें: यदि किसी व्यक्ति से विवाद चल रहा है और वह झूठे मुकदमे की धमकी दे रहा है, तो उसके संदेश, ऑडियो, ईमेल आदि सुरक्षित रखें।</div><div><br></div><h2>दूसरा, FIR दर्ज हो जाए तो घबराएं नहीं</h2><div><br></div><div>FIR दर्ज होना दोषी साबित होना नहीं है। भारत में अभियोजन पक्ष को अदालत में आरोप सिद्ध करने होते हैं। केवल FIR के आधार पर किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता।</div><div><br></div><h2>तीसरा, गिरफ्तारी से बचने का सबसे बड़ा अधिकार: अग्रिम जमानत</h2><div><br></div><div>यदि आपको लगता है कि किसी गैर-जमानती अपराध में फंसाया जा सकता है, तो आप अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन कर सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>2026 में यह अधिकार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 482 में है, जिसने पुराने CrPC की धारा 438 का स्थान लिया है। इसके तहत अदालत यह आदेश दे सकती है कि गिरफ्तारी होने पर आपको तुरंत जमानत पर छोड़ दिया जाए।&nbsp;</div><div><br></div><h2>चौथा, पुलिस पूछताछ के दौरान आपके अधिकार</h2><div><br></div><div>भारतीय संविधान के अनुसार: आपको अपने खिलाफ स्वयं गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। वकील की सहायता लेने का अधिकार है। गिरफ्तारी का कारण बताया जाना चाहिए। परिवार या मित्र को सूचना देने का अधिकार है। ये अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े हैं।</div><div><br></div><h2>पांचवां, FIR झूठी साबित हो जाए तो क्या करें?</h2><div><br></div><div>यदि जांच या अदालत में मामला झूठा निकलता है, तो आप झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। मानहानि (Defamation) का दावा कर सकते हैं। दुर्भावनापूर्ण अभियोजन (Malicious Prosecution) के आधार पर राहत मांग सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>कुछ परिस्थितियों में पुलिस या न्यायालय के समक्ष प्रतिवाद प्रस्तुत कर सकते हैं।</div><div><br></div><h2>छठा, हाई कोर्ट से FIR रद्द (Quash) कराने का अधिकार</h2><div><br></div><div>यदि FIR में लगाए गए आरोप पहली नजर में ही अपराध नहीं बनाते, या मामला स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है, तो संबंधित उच्च न्यायालय से FIR रद्द कराने (quashing) की मांग की जा सकती है। कई मामलों में अदालतें ऐसी राहत देती रही हैं।&nbsp;</div><div><br></div><h2>सातवां, Zero FIR क्या है?</h2><div><br></div><div>आज किसी भी थाने में Zero FIR दर्ज कराई जा सकती है, भले ही घटना उस थाने के क्षेत्राधिकार में न हुई हो। और बाद में मामला संबंधित थाने को भेजा जाता है। इसलिए केवल यह तर्क कि "घटना यहां नहीं हुई" FIR दर्ज होने से नहीं रोकता।</div><div><br></div><h2>आठवां, जानिए किन मामलों में विशेष सावधानी रखें?</h2><div><br></div><div>अनुभव बताता है कि निम्न प्रकार के मामलों में आरोप लगते ही कानूनी सलाह लेना उचित होता है: यथा- दहेज/वैवाहिक विवाद, यौन अपराध संबंधी आरोप, SC/ST अत्याचार अधिनियम, वित्तीय धोखाधड़ी, साइबर अपराध और राजनीतिक या सामाजिक प्रतिद्वंद्विता वाले मामले, आदि में गिरफ्तारी, जांच और जमानत के नियम अलग-अलग हो सकते हैं। लिहाजा, उन्हें समझकर अत्यावश्यक कदम उठाएं।</div><div><br></div><div>अंततोगत्वा यह कहा जा सकता है कि किसी भी प्रकार के फेक FIR से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है कि अपने व्यवहार और लेन-देन का रिकॉर्ड रखें। साथ ही धमकियों या विवादों के सबूत सुरक्षित रखें। अपने विरुद्ध FIR दर्ज होते ही किसी अनुभवी वकील से संपर्क करें। और,&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">आवश्यकता होने पर BNSS की धारा 482 के तहत अग्रिम जमानत लें। वहीं, यदि मामला झूठा है तो हाई कोर्ट में FIR रद्द कराने और झूठी शिकायतकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई का विकल्प भी उपलब्ध है, इसका सहारा लें, ताकि अगले को सबक मिले। ध्यान रहे कि यह सामान्य कानूनी जानकारी है। इसलिए किसी विशिष्ट FIR या मामले में अधिकार और रणनीति अपने ऊपर लगे आरोपों, राज्यवार अलग-अलग कानूनों तथा तथ्यों पर निर्भर करेगी।</span></div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 18:06:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-a-fake-case-or-fir-is-filed-against-you-find-out-how-you-can-defend-yourself-against-it</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/24/fir_large_1806_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मकान मालिक सावधान! किराएदार ने दिया आधार-पैन? ऐसे करें असली-नकली की पहचान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/landlords-beware-has-the-tenant-provided-their-aadhaar-or-pan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आधार कार्ड भारत में एक ज़रूरी डॉक्यूमेंट है, जिसका इस्तेमाल सरकारी सर्विस का इस्तेमाल करने, सीधे फ़ायदे पाने और नौकरी के लिए एप्लीकेशन और स्कूल में एडमिशन जैसे अलग-अलग कामों के लिए पहचान वेरिफ़ाई करने के लिए किया जाता है। यूनिक आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI) द्वारा जारी किए गए आधार कार्ड में बायोमेट्रिक और डेमोग्राफ़िक जानकारी होती है और इसकी पहचान एक यूनिक 12-डिजिट नंबर से होती है। इसकी अहमियत को देखते हुए आधार कार्ड का असली होना पक्का करना बहुत ज़रूरी है, खासकर तब जब इसका इस्तेमाल पहचान वेरिफ़िकेशन के लिए किया जाता है, जैसे कि मकान मालिक प्रॉपर्टी किराए पर देते समय।</div><div><br></div><div>आज के दौर में किसी को अपना मकान या दुकान किराए पर देते समय सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। अमूमन मकान मालिक पहचान के तौर पर किराएदार से आधार कार्ड और पैन (PAN) कार्ड की प्रतियां मांगते हैं। लेकिन डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग से अब नकली और जाली दस्तावेज बनाना बेहद आसान हो गया है। शातिर अपराधी नकली पहचान पत्र देकर मकान किराए पर लेते हैं और बाद में गैर-कानूनी गतिविधियों या अवैध कब्ज जैसी गंभीर समस्याओं को अंजाम देते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pm-svanidhi-credit-card-how-to-get-a-credit-card-with-a-limit-of-rs-30000" target="_blank">PM Svanidhi Credit Card: 30000 की लिमिट वाला क्रेडिट कार्ड कैसे बनेगा, यहां जानें पूरा प्रोसेस</a></h3><h2>1. आधार कार्ड के असली या नकली होने की पहचान कैसे करें?</h2><div>भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई बेहतरीन और मुफ्त डिजिटल साधन उपलब्ध कराए हैं। किसी भी किराएदार का आधार जांचने के लिए इन तरीकों का उपयोग करें:</div><div><br></div><div><b>- एम-आधार (mAadhaar) ऐप से क्यूआर कोड स्कैनिंग:</b> यह सबसे आसान और अचूक तरीका है। अपने स्मार्टफोन में आधिकारिक 'mAadhaar' ऐप डाउनलोड करें। ऐप में दिए गए क्यूआर कोड स्कैनर को खोलें और किराएदार के आधार कार्ड पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करें। यदि आधार असली है तो स्क्रीन पर उस व्यक्ति का नाम, लिंग, राज्य, फोटो और अन्य विवरण दिखाई देंगे। जाली आधार होने पर क्यूआर कोड स्कैन नहीं होगा या विवरण मेल नहीं खाएंगे।</div><div><br></div><div><b>- आधिकारिक पोर्टल से ऑनलाइन सत्यापन:</b> आप यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट (www.uidai.gov.in) पर जाकर 'Verify an Aadhaar Number' सेवा का उपयोग कर सकते हैं। वहाँ आधार संख्या और कैप्चा दर्ज करने पर यदि वह नंबर वैध है तो स्क्रीन पर उसकी पुष्टि हो जाएगी और व्यक्ति की अनुमानित आयु सीमा (जैसे 30-40 वर्ष), लिंग और राज्य का नाम दिखाई देगा।</div><div><br></div><div><b>- सुरक्षा फीचर्स की भौतिक जांच:</b> असली आधार कार्ड पर अशोक स्तंभ का लोगो, भारत सरकार का वाटरमार्क और एक विशेष सुरक्षा धागा या पैटर्न होता है। केवल साधारण फोटोकॉपी पर भरोसा करने के बजाय मूल (Original) कार्ड को ध्यान से देखें।</div><div><br></div><h2>2. पैन (PAN) कार्ड को सत्यापित करने का सही तरीका</h2><div>आयकर विभाग ने भी पैन कार्ड की प्रामाणिकता जांचने के लिए ऑनलाइन माध्यम दिए हैं ताकि धोखाधड़ी से बचा जा सके:</div><div><br></div><div><b>- 'वेरिफाई योर पैन' (Verify Your PAN) सेवा: </b>आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल (www.incometax.gov.in/iec/foportal) पर जाएं। होमपेज पर 'Quick Links' के अंतर्गत 'Verify Your PAN' पर क्लिक करें। यहाँ किराएदार का पैन नंबर, उनका पूरा नाम (जैसा पैन पर है), जन्म तिथि और मोबाइल नंबर दर्ज करें। विवरण सही होने पर स्क्रीन पर 'PAN is Active and details are matching with PAN database' का संदेश दिखाई देगा।</div><div><br></div><div><b>- पैन क्यूआर कोड स्कैनर ऐप: </b>आयकर विभाग के 'PAN QR Code Reader' मोबाइल ऐप के जरिए पैन कार्ड पर मौजूद क्विक रिस्पांस (QR) कोड को स्कैन करके भी कार्ड धारक का असली नाम, पिता का नाम और जन्म तिथि का मिलान किया जा सकता है।</div><div><br></div><h2>मकान मालिकों के लिए अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय</h2><div>दस्तावेजों की जांच के अलावा, कानूनी रूप से सुरक्षित रहने के लिए इन बातों का पालन अवश्य करें:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) अनिवार्य: </b>केवल दस्तावेज जांचना काफी नहीं है। अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर या राज्य पुलिस के आधिकारिक ऐप के माध्यम से किराएदार का पुलिस सत्यापन जरूर कराएं। यह कानूनी रूप से भी कई शहरों में अनिवार्य है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- लिखित रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement): </b>हमेशा 11 महीने का पंजीकृत या नोटरीकृत रेंट एग्रीमेंट बनवाएं। इसमें किराएदार के मूल पते और गवाहों के हस्ताक्षर स्पष्ट रूप से होने चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- पड़ोसी या पिछले मकान मालिक से फीडबैक:</b> यदि संभव हो तो किराएदार के कार्यस्थल (Office) या उनके पिछले मकान मालिक से उनके व्यवहार और पृष्ठभूमि के बारे में संक्षिप्त जानकारी लें।</div><div><br></div><div>सतर्कता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। एक मकान मालिक के रूप में थोड़ी सी जल्दबाजी या लापरवाही आपको बड़े कानूनी विवाद में डाल सकती है। किराएदार को चाबी सौंपने से पहले ऊपर बताए गए सरकारी पोर्टलों के जरिए उनके आधार और पैन कार्ड का मिलान अवश्य करें।</div><div><br></div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:24:11 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/landlords-beware-has-the-tenant-provided-their-aadhaar-or-pan</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/22/landlords_large_1824_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PM Svanidhi Credit Card: 30000 की लिमिट वाला क्रेडिट कार्ड कैसे बनेगा, यहां जानें पूरा प्रोसेस]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pm-svanidhi-credit-card-how-to-get-a-credit-card-with-a-limit-of-rs-30000]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>केंद्र सरकार ने रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट वेंडर्स (सड़क किनारे दुकान लगाने वाले) को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना के दायरे को और व्यापक कर दिया है। सरकार ने इस योजना के तहत अब 'पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड' की अनूठी सुविधा शुरू की है। यह रुपे (RuPay) प्लेटफॉर्म पर आधारित एक लाइफटाइम फ्री क्रेडिट कार्ड है, जिसकी अधिकतम सीमा (Limit) 30,000 रुपये तक तय की गई है।</div><div>&nbsp;</div><h2>PM स्वनिधि क्रेडिट कार्ड क्या है?</h2><div>PM स्वनिधि क्रेडिट कार्ड एक RuPay-बेस्ड कार्ड है जो एक रेगुलर क्रेडिट कार्ड की तरह काम करता है। आप इसका इस्तेमाल रोज़मर्रा की चीज़ें खरीदने, बिल भरने और डिजिटल पेमेंट करने के लिए कर सकते हैं। इसकी शुरुआत Rs. 10,000 की लिमिट से होती है, जिसे बाद में बढ़ाकर Rs. 30,000 कर दिया जाता है। इस कार्ड का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि 20 से 50 दिनों के अंदर पेमेंट करने पर कोई ब्याज नहीं लगता है। यह कार्ड 5 साल के लिए वैलिड होता है और UPI से लिंक होता है, जिससे QR कोड स्कैनिंग के ज़रिए पेमेंट किया जा सकता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/getting-a-passport-will-become-easier-learn-rules-and-regulations-related-to-passports-in-2026" target="_blank">पासपोर्ट बनवाना हो जाएगा आसान, जानें पासपोर्ट से जुड़े 2026 के नियम और कानून</a></h3><h2>पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड में 30,000 की लिमिट कैसे मिलती है?</h2><div>यह क्रेडिट कार्ड विशेष रूप से छोटे दुकानदारों को दैनिक व्यापारिक आवश्यकताओं और आपातकालीन खर्चों के लिए 'ऑन-डिमांड' लोन (ऋण) की सुविधा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। क्रेडिट लिमिट का गणित इस प्रकार काम करता है:</div><div>- शुरुआती लिमिट (Initial Limit): कार्ड जारी होने पर शुरुआत में इसकी क्रेडिट लिमिट 10,000 रुपये तय की जाती है।</div><div>- 30,000 रुपये की अधिकतम लिमिट: जब लाभार्थी इस कार्ड का उपयोग करता है और समय पर इसके बिल का भुगतान (Satisfactory Usage) करता है तो बैंक द्वारा इसकी लिमिट को धीरे-धीरे बढ़ाकर अधिकतम 30,000 रुपये कर दिया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>इस क्रेडिट कार्ड की मुख्य विशेषताएं और लाभ</h2><div>यह कार्ड सामान्य वाणिज्यिक क्रेडिट कार्डों से काफी अलग और बेहद किफायती है:</div><div>- लाइफटाइम फ्री कार्ड: इस कार्ड को बनवाने के लिए कोई जॉइनिंग फीस, एक्टिवेशन शुल्क या सालाना रिन्यूअल फीस नहीं देनी होती। यह पूरी तरह निशुल्क है।</div><div>- ब्याज मुक्त अवधि: कार्ड धारकों को ट्रांजैक्शन की तारीख से 20 से 50 दिनों तक की ब्याज मुक्त (Interest-Free) अवधि मिलती है।</div><div>- यूपीआई लिंकेज (UPI Linkage): चूंकि यह रुपे (RuPay) नेटवर्क पर आधारित है, इसलिए इसे भीम (BHIM) या अन्य यूपीआई ऐप्स से लिंक किया जा सकता है। इसके बाद रेहड़ी-पटरी वाले सीधे क्यूआर कोड स्कैन करके भी इस लिमिट से भुगतान कर सकते हैं।</div><div>- रिवॉर्ड पॉइंट्स और कैशबैक: इस कार्ड से प्रति 100 रुपये के खर्च पर रिवॉर्ड पॉइंट मिलते हैं। इसके अलावा डिजिटल बिक्री और थोक खरीद पर सरकार द्वारा निर्दिष्ट कैशबैक का लाभ भी मिलता है।</div><div>- ईएमआई (EMI) सुविधा: यदि कोई दुकानदार एक साथ पूरा बिल नहीं चुका पाता है तो 2,500 रुपये से अधिक के बिल को आसान मासिक किश्तों (EMI) में बदलने की सुविधा भी उपलब्ध होती है।</div><div>- रोकथाम/प्रतिबंध: इस कार्ड से एटीएम (ATM) या पीओएस (POS) मशीन के जरिए कैश (नकद) निकालने की अनुमति नहीं है। साथ ही, कुछ प्रतिबंधित श्रेणियों (जैसे सट्टा, विदेशी होटल आदि) में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।</div><div>&nbsp;</div><h2>कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता)</h2><div>इस क्रेडिट कार्ड का लाभ हर किसी को नहीं मिल सकता। इसके लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य हैं:</div><div>- आवेदक मुख्य रूप से 'पीएम स्वनिधि योजना' का मौजूदा लाभार्थी होना चाहिए।</div><div>- यह कार्ड उन स्ट्रीट वेंडर्स को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाता है जिन्होंने पीएम स्वनिधि योजना के तहत लिए गए अपने दूसरे टर्म लोन (Term Loan) को समय पर और सफलतापूर्वक चुका दिया है।</div><div>- आवेदक के पास शहरी स्थानीय निकाय (ULB) द्वारा जारी वेंडिंग प्रमाणपत्र या पहचान पत्र होना चाहिए।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्रेडिट कार्ड बनवाने की पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया</h2><div>पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और कागज़ रहित (Paperless) रखा गया है:</div><div>- आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले पीएम स्वनिधि की आधिकारिक वेबसाइट (www.pmsvanidhi.mohua.gov.in) पर जाएं या इसके आधिकारिक मोबाइल एप्लीकेशन को डाउनलोड करें।</div><div>- यूएएन/लॉगिन विवरण दर्ज करें: अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर (जो आधार से लिंक हो) के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन करें।</div><div>- क्रेडिट कार्ड विकल्प का चयन: डैशबोर्ड पर दिए गए 'PM SVANidhi Credit Card Application' के लिंक पर क्लिक करें।</div><div>- विवरण भरें और बैंक चुनें: अपनी मेंबर आईडी और बुनियादी व्यावसायिक विवरण दर्ज करें। इसके बाद उस बैंक का चयन करें जहाँ आपका पीएम स्वनिधि लोन खाता सक्रिय है (जैसे यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि)।</div><div>- ओटीपी सत्यापन: आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, जिसे दर्ज करके सबमिट करें।</div><div>- सत्यापन और प्रेषण: बैंक अधिकारी आपके डिजिटल रिकॉर्ड और पिछले लोन के पुनर्भुगतान के इतिहास (Credit Discipline) की जांच करेंगे। सब कुछ सही पाए जाने पर कार्ड स्वीकृत कर दिया जाएगा और इसकी डिजिटल प्रति आपके ऐप में सक्रिय हो जाएगी।</div><div>&nbsp;</div><div>पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड छोटे व्यापारियों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने और उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने का सरकार का एक बेहद सराहनीय कदम है। यदि आप भी एक स्ट्रीट वेंडर हैं और अपनी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी रखते हैं तो आज ही इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठाएं।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:49:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/pm-svanidhi-credit-card-how-to-get-a-credit-card-with-a-limit-of-rs-30000</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/18/pm-svanidhi-credit-card_large_1749_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पासपोर्ट बनवाना हो जाएगा आसान, जानें पासपोर्ट से जुड़े 2026 के नियम और कानून]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/getting-a-passport-will-become-easier-learn-rules-and-regulations-related-to-passports-in-2026]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत सरकार ने 2026 के लिए पासपोर्ट नियमों का एक नया सेट जारी किया है, जिसे देश भर में एप्लिकेंट्स के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस को आसान बनाने, सिक्योरिटी को मज़बूत करने और सर्विस डिलीवरी को तेज़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये अपडेटेड नियम, जो 15 फरवरी के बाद पूरी तरह से लागू होंगे, पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू करने को ज़्यादा आसान बनाने के साथ-साथ फ्रॉड और बेवजह की देरी की गुंजाइश को कम करने के लिए हैं। एप्लिकेंट्स से कहा जा रहा है कि वे आखिरी समय में रिजेक्शन या प्रोसेसिंग में दिक्कतों से बचने के लिए नई ज़रूरतों के बारे में पहले से ही जान लें।</div><div>&nbsp;</div><div>अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले और विदेश जाने का सपना देखने वाले भारतीय नागरिकों के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट आवेदन और नवीनीकरण (Renewal) की प्रक्रिया को बेहद सुरक्षित, आधुनिक और सुगम बना दिया है। तकनीक के समावेश के साथ अब नियमों को इस तरह बदला गया है कि आम लोगों को बिचौलियों के चक्कर न काटने पड़ें और उनका पासपोर्ट कम से कम समय में बनकर घर पहुँच जाए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-you-want-better-returns-find-out-when-to-invest-in-ppf-and-when-to-invest-in-mutual-funds" target="_blank">यदि आप निवेशकर्ता हैं और बेहतर मुनाफा चाहते हैं तो यह जानिए कि कब लगाएं PPF में पैसा और कब निवेश करें Mutual Fund में?</a></h3><h2>2026 में पासपोर्ट से जुड़े प्रमुख बदलाव और नियम</h2><div>पासपोर्ट प्रक्रिया को तेज और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने बुनियादी नियमों और तकनीक में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं:</div><div>- चिप-आधारित ई-पासपोर्ट (e-Passport) का रोलआउट: अब भारत में चरणबद्ध तरीके से 'ई-पासपोर्ट' जारी किए जा रहे हैं। इन नए पासपोर्ट के कवर में एक इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप (RFID Chip) और एक एंटीना लगा होता है। इसमें आवेदक का नाम, जन्म तिथि, डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रूप से स्टोर रहता है। इससे हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन की प्रक्रिया बेहद तेज हो जाएगी और जाली पासपोर्ट बनाना नामुमकिन होगा।</div><div>- बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र की अनिवार्यता: 1 अक्टूबर 2023 को या उसके बाद पैदा हुए बच्चों के पासपोर्ट आवेदन के लिए 'बर्थ सर्टिफिकेट' (Birth Certificate) को जन्म तिथि के मुख्य और अनिवार्य दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक है।</div><div>- वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को फीस में छूट: 'नॉर्मल' कैटेगरी के तहत नए पासपोर्ट आवेदन पर वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक) और नाबालिगों (8 वर्ष से कम आयु) को सरकारी शुल्क में 10% की विशेष छूट दी जा रही है।</div><div>- डिजिलॉकर (DigiLocker) का एकीकरण: अब आवेदकों को दस्तावेजों की ढेर सारी हार्ड कॉपी ले जाने की जरूरत नहीं है। आवेदन करते समय आप अपने जरूरी दस्तावेज सीधे डिजिलॉकर से लिंक कर सकते हैं। हालांकि, पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) पर सत्यापन के लिए एक बार मूल (Original) दस्तावेज साथ रखना सुरक्षित रहता है।</div><div>- एम-पासपोर्ट पुलिस ऐप (mPassport Police App): पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए पुलिस कर्मियों को विशेष ऐप दिए गए हैं। अब वे आपके घर आकर सीधे टैबलेट या मोबाइल से डिजिटल रिपोर्ट सबमिट करते हैं, जिससे पहले लगने वाला 2-3 सप्ताह का समय घटकर अब महज कुछ दिन रह गया है।</div><div>&nbsp;</div><h2>पासपोर्ट आवेदन की आसान प्रक्रिया: चरण-दर-चरण</h2><div>नया पासपोर्ट बनवाने या पुराने को री-इश्यू (Re-issue) कराने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है:</div><div>- पंजीकरण: पासपोर्ट सेवा की आधिकारिक वेबसाइट (www.passportindia.gov.in) या 'mPassport Seva' ऐप पर जाकर नया यूजर अकाउंट बनाएं।</div><div>- फॉर्म भरना: लॉगिन करने के बाद 'Apply for Fresh Passport/Re-issue' विकल्प पर क्लिक करें और फॉर्म में अपनी सटीक जानकारी भरें।</div><div>- फीस और अपॉइंटमेंट: 'Pay and Schedule Appointment' पर क्लिक करके अपने नजदीकी पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) या पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) का चयन करें। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन (UPI, नेट बैंकिंग या कार्ड) के माध्यम से करें।</div><div>- केंद्र का दौरा: निर्धारित समय पर अपने मूल दस्तावेजों के साथ केंद्र पर जाएँ। वहाँ आपके बायोमेट्रिक्स (उंगलियों के निशान और फोटो) लिए जाएंगे।</div><div>- पुलिस वेरिफिकेशन और डिलीवरी: पुलिस सत्यापन सफल होने के बाद आपका पासपोर्ट स्पीड पोस्ट के जरिए सीधे आपके घर के पते पर भेज दिया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>आवेदन के लिए आवश्यक मुख्य दस्तावेज</h2><div>एक सामान्य वयस्क आवेदक के लिए निम्नलिखित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं:</div><div>- पते का प्रमाण (कोई एक): आधार कार्ड, बिजली बिल, पानी का बिल, गैस कनेक्शन का प्रमाण या बैंक पासबुक।</div><div>- जन्म तिथि का प्रमाण (कोई एक): आधार कार्ड, पैन कार्ड, मैट्रिक (10वीं) की मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र।</div><div>&nbsp;</div><h2>सुरक्षा और सतर्कता संबंधी सुझाव</h2><div>- आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें: इंटरनेट पर 'passportindia' नाम से मिलती-जुलती कई फर्जी वेबसाइटें सक्रिय हैं जो भारी फीस वसूलती हैं। हमेशा केवल आधिकारिक .gov.in डोमेन वाली वेबसाइट का ही उपयोग करें।</div><div>- डाटा की शुद्धता: आवेदन फॉर्म में आपके नाम की स्पेलिंग, माता-पिता का नाम और जन्म तिथि ठीक वैसी ही होनी चाहिए जैसी आपके आधार या पैन कार्ड पर अंकित है। विसंगति होने पर आवेदन होल्ड पर डाला जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div>ई-पासपोर्ट की शुरुआत और डिजिटल वेरिफिकेशन के कारण अब भारतीय पासपोर्ट वैश्विक मानकों के अनुरूप बेहद शक्तिशाली और सुरक्षित हो गया है। नियमों की सही जानकारी और सही दस्तावेजों के साथ आवेदन करने पर आपका पासपोर्ट बिना किसी बाधा के समय पर बनकर तैयार हो जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:07:11 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/getting-a-passport-will-become-easier-learn-rules-and-regulations-related-to-passports-in-2026</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/17/passport_large_1807_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[यदि आप निवेशकर्ता हैं और बेहतर मुनाफा चाहते हैं तो यह जानिए कि कब लगाएं PPF में पैसा और कब निवेश करें Mutual Fund में?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-you-want-better-returns-find-out-when-to-invest-in-ppf-and-when-to-invest-in-mutual-funds]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>निवेश की दुनिया में अक्सर लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर में अपनी गाढ़ी कमाई से बमुश्किल की जाने वाली बचत का रुपया-पैसा कहाँ लगाएं, जहां पर वह डूबे नहीं, बल्कि सुरक्षित भी रहे। ऐसे में आप अपना रुपया-पैसा पीपीएफ (Public Provident Fund) में लगाएं या एमएफ (Mutual Fund) में। क्योंकि सच यह है कि दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है और सही समय पर सही विकल्प चुनना ही आपके लिए अधिक महत्वपूर्ण है।</div><div><br></div><div>इसलिए आइए आज आपको बताते हैं कि कब पीपीएफ में निवेश करें और कब एमएफ में।</div><div><br></div><h2>पहले हम बात करते हैं कि पीपीएफ (PPF) में निवेश कब न करें?&nbsp;</h2><div><br></div><div>आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि Public Provident Fund (PPF) उन लोगों के लिए बेहतर है जो अपनी पूंजी की सुरक्षा चाहते हैं। साथ ही एक निश्चित और जोखिम-मुक्त रिटर्न पसंद करते हैं। इसके अलावा, टैक्स भी बचाना चाहते हैं। और तो और, 15 वर्ष या उससे अधिक की लंबी अवधि के लिए निवेश कर सकते हैं। चूंकि इसका महत्वपूर्ण फंडा यह है कि PPF में हर महीने की 5 तारीख से पहले पैसा जमा करने पर उस महीने का ब्याज भी मिलता है। इसलिए यदि आप मासिक निवेश करते हैं तो 1 से 5 तारीख के बीच जमा करना अधिक फायदेमंद माना जाता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/filing-an-fir-will-become-easier-once-you-know-the-laws-of-2026" target="_blank">FIR कराना हो जाएगा आसान, जब जानेंगे 2026 के कानून</a></h3><h2>अब हम बात करते हैं कि Mutual Fund (MF) में कब निवेश करें?</h2><div><br></div><div>तो यह गांठ बांध लीजिए कि Mutual Fund उन निवेशकों के लिए बेहतर है जो महंगाई को मात देने वाला रिटर्न चाहते हैं। साथ ही लंबी अवधि (10-15 वर्ष या अधिक) के लिए निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा, कुछ उतार-चढ़ाव (रिस्क) सहन कर सकते हैं। और तो और संपत्ति निर्माण (Wealth Creation) का लक्ष्य रखते हैं। चूंकि इसका महत्वपूर्ण फंडा यह है कि Mutual Fund में "सही समय" पकड़ने की बजाय SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए नियमित निवेश करना अधिक प्रभावी माना जाता है। जो कि बाजार ऊपर हो या नीचे, SIP लागत को औसत कर देती है।</div><div><br></div><div>सवाल है कि किसे चुनें? आपके निवेशक का लक्ष्य क्या है? आपके पास बेहतर विकल्प क्या है? आपकी पूंजी सुरक्षा कितनी है। चूंकि पीपीएफ से टैक्स बचत होती है, रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित फंड रहता है और लंबी अवधि में अधिक रिटर्न रिटर्न मिलता है। जबकि म्युचुअल फंड धन सृजन (Wealth Creation) के लिए अच्छा है, बशर्ते कि आप संतुलित रणनीति अपनाएं।</div><div><br></div><div>जहां तक PPF&nbsp; और Mutual Fund में सबसे असरदार रणनीति की बात है तो वित्तीय विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि निवेशक दोनों का संयोजन रखें। एक ओर सुरक्षा और टैक्स लाभ के लिए PPF अच्छा है तो संपत्ति निर्माण और महंगाई से आगे निकलने के लिए Equity Mutual Fund SIP बेहतर है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति हर महीने ₹10,000 निवेश करना चाहता है, तो वह ₹3,000–₹4,000 PPF में और शेष राशि अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड की SIP में लगा सकता है। इससे सुरक्षा और वृद्धि दोनों का लाभ मिल सकता है।</div><div><br></div><div>निष्कर्षतः यह कहा जा&nbsp; सकता है कि यदि आपका लक्ष्य पूंजी की सुरक्षा है तो PPF बेहतर है। और यदि आपका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा धन बनाना है तो Mutual Fund अधिक उपयुक्त हो सकता है। वहीं, दोनों का संतुलित मिश्रण अधिकांश निवेशकों के लिए व्यावहारिक और प्रभावी रणनीति साबित हो सकता है। हाँ, यहां पर यह सदैव ध्यान रखें कि Mutual Fund बाजार जोखिमों के अधीन हैं, जबकि PPF अपेक्षाकृत सुरक्षित सरकारी योजना है। लिहाजा, निवेश का निर्णय अपनी आयु, लक्ष्य, जोखिम क्षमता और समयावधि को ध्यान में रखकर करें।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:15:20 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/if-you-want-better-returns-find-out-when-to-invest-in-ppf-and-when-to-invest-in-mutual-funds</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/16/mutual-funds_large_1515_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[FIR कराना हो जाएगा आसान, जब जानेंगे 2026 के कानून]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/filing-an-fir-will-become-easier-once-you-know-the-laws-of-2026]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत FIR 2023 में लागू हुई और यह भारत के क्रिमिनल प्रोसीजर कानूनों में एक बड़ा बदलाव है। यह FIR दर्ज करने का एक साफ और व्यवस्थित तरीका पेश करता है और इसका मकसद कानून लागू करने को तेज़ और ज़्यादा ट्रांसपेरेंट बनाना है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत FIR के नियमों में सेक्शन 173 और 174 में बड़े बदलाव किए गए हैं, जो इस बात पर फोकस करते हैं कि कोर्ट कानूनों को कैसे समझते हैं और सिस्टम गलत इस्तेमाल से कैसे बचाता है। नए एक्ट में ये अपडेट पहले के कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) को भी बेहतर बनाते हैं।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><div>भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव हो चुके हैं। भारतीय दंड संहिता (IPC) और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के स्थान पर अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) पूरी तरह प्रभावी हैं। इन नए कानूनों का सबसे बड़ा और सीधा लाभ आम जनता को प्राथमिकी यानी एफआईआर (FIR) दर्ज कराने में मिल रहा है। पहले जहाँ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस थानों के चक्कर काटने पड़ते थे, वहीं अब नए नियमों ने इस प्रक्रिया को बेहद सुगम, पारदर्शी और तकनीक-अनुकूल बना दिया है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-do-not-use-your-account-for-two-years" target="_blank">2 साल तक अकाउंट इस्तेमाल न करने पर क्या होता है? जानिए Inactive Account पर क्या पड़ता है असर</a></h3><div>&nbsp;</div><h2>FIR क्या है?</h2><div>FIR (First Information Report) एक फॉर्मल डॉक्यूमेंट है जिसे पुलिस किसी कॉग्निजेबल या नॉन-कॉग्निजेबल अपराध के होने की जानकारी मिलने पर तैयार करती है। यह क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन का पहला स्टेप है और यह देखता है कि लॉ एनफोर्समेंट अथॉरिटी रिपोर्ट किए गए अपराधों पर तुरंत एक्शन लेती हैं या नहीं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत, FIR रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने के लिए ज़ीरो FIR, E-FIR और शुरुआती पूछताछ को शामिल करके नए प्रोविज़न लाए गए हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>1. ई-एफआईआर (e-FIR): थाने जाने की मजबूरी खत्म</h2><div>नए कानून की धारा 173 (BNSS) के तहत अब कोई भी नागरिक इलेक्ट्रॉनिक संचार (E-mail या आधिकारिक पोर्टल) के माध्यम से किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की शिकायत दर्ज करा सकता है।</div><div>प्रक्रिया: आपको पुलिस स्टेशन जाने की आवश्यकता नहीं है। आप संबंधित राज्य की पुलिस वेबसाइट या ऐप पर जाकर अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।</div><div>अनिवार्य शर्त: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत भेजने के बाद शिकायतकर्ता को 3 दिन के भीतर संबंधित थाने जाकर उस पर हस्ताक्षर करने होंगे। हस्ताक्षर होने के बाद ही इसे आधिकारिक तौर पर एफआईआर के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। यह व्यवस्था विशेषकर चोरी, मोबाइल गुम होने या संपत्ति से जुड़े मामलों में आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है।</div><div>&nbsp;</div><h2>2. जीरो एफआईआर (Zero FIR) को मिला कानूनी दर्जा</h2><div>अक्सर देखा जाता था कि जब कोई पीड़ित किसी थाने में शिकायत लेकर जाता था तो पुलिस 'क्षेत्राधिकार' (Jurisdiction) का बहाना बनाकर उसे उस इलाके के थाने में जाने को कहती थी जहाँ अपराध हुआ है। इससे कीमती समय बर्बाद होता था और अपराधियों को भागने का मौका मिलता था।</div><div>&nbsp;</div><div>नया नियम: अब कोई भी व्यक्ति भारत के किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर एफआईआर दर्ज करा सकता है, चाहे अपराध उस थाने के अधिकार क्षेत्र में हुआ हो या नहीं।</div><div>आगे की कार्रवाई: पुलिस तुरंत 'जीरो एफआईआर' दर्ज करेगी और प्रारंभिक जांच शुरू कर देगी। इसके बाद, उस एफआईआर को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने में स्थानांतरित (Transfer) कर दिया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>3. प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) के लिए सख्त समय सीमा</h2><div>झूठे मुकदमों पर लगाम लगाने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नए कानून में एक विशेष प्रावधान किया गया है। जिन अपराधों में सजा 3 से 7 वर्ष के बीच है, वहाँ पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज करने के बजाय प्राथमिक जांच कर सकती है।</div><div>समय सीमा: पुलिस अधिकारी को ऐसी जांच 14 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।</div><div>निर्णय: जांच में प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर ही एफआईआर दर्ज की जाएगी, जिससे बेकसूर लोगों को प्रताड़ना से बचाया जा सके।</div><div>&nbsp;</div><h2>4. पीड़ितों के लिए डिजिटल अधिकार और पारदर्शिता</h2><div>नए कानून केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जांच की प्रगति में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं:</div><div>मुफ्त प्रति का अधिकार: एफआईआर दर्ज होने के बाद उसकी एक प्रति (Copy) शिकायतकर्ता या पीड़ित को तुरंत और पूरी तरह मुफ्त (Free of Cost) दी जाएगी।</div><div>90 दिनों में प्रोग्रेस अपडेट: अब पुलिस के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वह एफआईआर दर्ज होने के 90 दिनों के भीतर पीड़ित को जांच की प्रगति (Progress Report) की जानकारी दे। इसे एसएमएस या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी साझा किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करे तो क्या करें?</h2><div>यदि कोई थाना प्रभारी (SHO) आपकी वैध शिकायत पर भी एफआईआर दर्ज करने से इनकार करता है तो नए कानून के तहत आपके पास निम्नलिखित वैधानिक विकल्प हैं:</div><div>पुलिस अधीक्षक (SP) को आवेदन: आप अपनी शिकायत लिखित रूप में या डाक द्वारा संबंधित जिले के एसपी (Superintendent of Police) को भेज सकते हैं। यदि वे संतुष्ट होते हैं तो खुद जांच करेंगे या संबंधित थाने को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देंगे।</div><div>न्यायिक मजिस्ट्रेट का रुख: यदि वहाँ से भी राहत नहीं मिलती तो आप धारा 175 (BNSS) के तहत सीधे इलाका मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मजिस्ट्रेट के पास पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और जांच के आदेश देने का पूर्ण अधिकार है।</div><div>&nbsp;</div><div>नया कानूनी ढांचा पूरी तरह से नागरिक-केंद्रित (Citizen-centric) है। तकनीक के समावेश और जवाबदेही तय होने से अब पुलिस के लिए किसी पीड़ित को टालना आसान नहीं होगा। एक जागरूक नागरिक के रूप में इन नियमों को जानना और समझना ही आपके अधिकारों की सबसे बड़ी सुरक्षा है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:20:22 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/filing-an-fir-will-become-easier-once-you-know-the-laws-of-2026</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/6/11/fir_large_1820_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[2 साल तक अकाउंट इस्तेमाल न करने पर क्या होता है? जानिए Inactive Account पर क्या पड़ता है असर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-do-not-use-your-account-for-two-years]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हम सभी के पास एक बैंक अकाउंट होता है जो हमने स्कूल या कॉलेज के दौरान खोला था। या जब हमारी सैलरी किसी दूसरी कंपनी के ज़रिए आती थी। या क्योंकि किसी दोस्त ने कहा, “बस खोल लो, कोई नुकसान नहीं है।” लेकिन सालों बाद पासबुक गायब है, ATM कार्ड एक्सपायर हो गया है और आपने उसे कभी छुआ तक नहीं है।</div><div>&nbsp;</div><div>तो क्या होता है जब आप लंबे समय तक अपने बैंक अकाउंट का इस्तेमाल नहीं करते? क्या बैंक इसे बंद कर सकता है? क्या कोई चार्ज जमा हो रहा है? क्या आपका पैसा गायब हो जाएगा?</div><div>&nbsp;</div><div>बैंक अकाउंट तब "इनएक्टिव" होता है जब लगातार 12 महीने तक कस्टमर की तरफ से कोई ट्रांज़ैक्शन—जैसे, डिपॉज़िट, विड्रॉल, फंड ट्रांसफर, या इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन नहीं हुआ हो। अगर यह 24 महीने तक इनएक्टिव रहता है तो अकाउंट को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के नियमों और दूसरे देशों के ऐसे ही नियमों के तहत कानूनी तौर पर "डॉर्मेंट" माना जाता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/make-sure-to-add-a-nominee-to-your-pf-account-otherwise-you-may-face-problems-in-the-future" target="_blank">जरूर जोड़ लें PF अकाउंट में नॉमिनी, वरना भविष्य में हो सकती है दिक्कत</a></h3><div>कई लोग नौकरी बदलने, शहर बदलने या एक से अधिक बैंक खाते होने की वजह से कुछ अकाउंट लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन यदि किसी बैंक खाते में लंबे समय तक कोई लेन-देन नहीं होता तो वह Inactive Account या बाद में Dormant Account की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ता है और ग्राहकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्या होता है जब अकाउंट दो साल तक इस्तेमाल नहीं किया जाता है?</h2><div>जब आपका अकाउंट डॉर्मेंट मार्क हो जाता है तो बैंक कई सर्विसेज़ पर रोक लगा देते हैं। हो सकता है कि आप ATM से पैसे न निकाल पाएं, ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन के लिए पैसे न डाल पाएं या अकाउंट के बदले जारी किए गए डेबिट कार्ड का इस्तेमाल न कर पाएं। सेविंग्स पर इंटरेस्ट अभी भी मिलता रहता है और डिविडेंड या रिफंड अभी भी क्रेडिट किए जा सकते हैं, लेकिन आप अकाउंट को तब तक आज़ादी से इस्तेमाल नहीं कर सकते जब तक इसे फिर से एक्टिवेट न कर दिया जाए। यह मुख्य रूप से नज़रअंदाज़ किए गए या छोड़े गए अकाउंट के खिलाफ फ्रॉड और गलत इस्तेमाल से बचाव के तौर पर किया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>जब यह बंद हो जाता है तो क्या होता है?</h2><div>- आप ऑनलाइन ट्रांसफर, ATM से पैसे नहीं निकाल सकते या डेबिट कार्ड से पेमेंट नहीं कर सकते।</div><div>- चेक बुक इनवैलिड हो सकती हैं।</div><div>- बैंक अकाउंट स्टेटमेंट या SMS अलर्ट भेजना बंद कर सकते हैं।</div><div>- कुछ मामलों में अकाउंट आपके नेट बैंकिंग डैशबोर्ड से हटा दिया जाता है।</div><div>- सबसे ज़रूरी बात यह है कि आपको सेविंग्स या ऑटो-FD-लिंक्ड अकाउंट जैसे कुछ अकाउंट पर कंपाउंड इंटरेस्ट मिलना बंद हो जाता है।</div><div><br></div><div>एक डॉर्मेंट अकाउंट सिर्फ़ ऑपरेशनल परेशानी से ज़्यादा दिक्कतें पैदा कर सकता है। अकाउंट पर सभी बकाया इंस्ट्रक्शन, ऑटो-पेमेंट या डायरेक्ट डेबिट इनवैलिड हो जाएँगे। अगर डॉर्मेंट अकाउंट में पेमेंट किया जाता है तो सैलरी, टैक्स क्रेडिट या इन्वेस्टमेंट रिटर्न जैसे ज़रूरी क्रेडिट छूटने का भी रिस्क रहता है। साथ ही, अगर ज़्यादा समय तक इसे ठीक नहीं किया जाता है तो अनक्लेम्ड बैलेंस आखिरकार एक सेंट्रल अथॉरिटी, जैसे कि भारत में डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h2>बंद अकाउंट को फिर से एक्टिवेट कैसे करें?</h2><div>बंद अकाउंट को फिर से एक्टिवेट करना आम तौर पर आसान होता है, लेकिन इसके लिए आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है। आपको पहचान और पते के सबूत के साथ ब्रांच जाना होगा और फिर से एक्टिवेट करने के लिए लिखकर रिक्वेस्ट देनी होगी। कुछ बैंक नेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग के ज़रिए भी रीएक्टिवेट करने की सुविधा देते हैं, अगर यह नई KYC जानकारी से जुड़ा हो। अगर यह ऑथेंटिकेट हो जाता है तो बैंक नॉर्मल एक्टिविटी फिर से शुरू कर देगा और आप अपना अकाउंट हमेशा की तरह चला सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>2 साल तक इस्तेमाल न होने पर बैंक अकाउंट Inactive या Dormant हो सकता है, जिससे ट्रांजेक्शन और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि सही प्रक्रिया अपनाकर खाते को दोबारा सक्रिय कराया जा सकता है। बैंकिंग सुविधाओं में बाधा से बचने के लिए अपने खाते का नियमित उपयोग और समय-समय पर निगरानी करना जरूरी है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:58:03 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-do-not-use-your-account-for-two-years</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/30/bank-account_large_1858_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जरूर जोड़ लें PF अकाउंट में नॉमिनी, वरना भविष्य में हो सकती है दिक्कत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/make-sure-to-add-a-nominee-to-your-pf-account-otherwise-you-may-face-problems-in-the-future]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>क्या आप जानते हैं कि हर साल 40% से ज़्यादा EPF बेनिफिट्स इसलिए बिना क्लेम के रह जाते हैं क्योंकि मेंबर्स ने सही नॉमिनेशन फाइल नहीं किया था? एक EPF मेंबर के तौर पर यह पक्का करना कि आपकी मेहनत की कमाई आपकी गैरमौजूदगी में आपके अपनों तक पहुंचे, सिर्फ़ एक ज़िम्मेदार फाइनेंशियल प्लानिंग ही नहीं है बल्कि यह आपके परिवार के भविष्य के लिए ज़रूरी सुरक्षा भी है। EPFO यूनिफाइड पोर्टल पर ई-नॉमिनेशन की शुरुआत ने इस प्रोसेस में बड़ा बदलाव किया है, फिर भी कई मेंबर्स अभी भी इस ज़रूरी काम को सही तरीके से पूरा करने में मुश्किल महसूस करते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन (EPFO) मेंबर्स को अपने EPF अकाउंट के लिए परिवार के सदस्यों को नॉमिनेट करने की सुविधा देता है ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में फंड ट्रांसफर आसानी से हो सके। बाद में होने वाली दिक्कतों से बचने के लिए नॉमिनी की डिटेल्स अपडेट करना बहुत ज़रूरी है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-causes-a-cibil-score-to-drop-even-after-a-loan-foreclosure" target="_blank">शीघ्रतापूर्वक कर्ज चुकाने यानी लोन फोरक्लोजर के बाद भी सिबिल स्कोर घटने का क्या कारण होता है? समझिए</a></h3><h2>एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) क्या है?</h2><div>एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) भारत की मुख्य सोशल सिक्योरिटी एजेंसियों में से एक है, जो मिनिस्ट्री ऑफ़ लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट के तहत काम करती है। इसे 1951 में एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविज़न्स (EPF&amp;MP) एक्ट के ज़रिए बनाया गया था और यह पूरे भारत में एम्प्लॉइज के लिए प्रोविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस स्कीम को रेगुलेट और मैनेज करने के लिए ज़िम्मेदार है। EPFO इंटरनेशनल वर्कर्स के लिए दूसरे देशों के साथ सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट भी आसान बनाता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>प्रोविडेंट फंड अकाउंट में नॉमिनी कैसे जोड़ें?</h2><div>एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन अकाउंट होल्डर्स को अपने परिवार के सदस्यों की सोशल सिक्योरिटी और वेल-बीइंग के लिए नॉमिनी जोड़ने की सुविधा देता है। EPFO मेंबर आसानी से EPFO वेबसाइट के ज़रिए अपने PF नॉमिनी ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>नॉमिनेशन से EPF अकाउंट होल्डर के PF कंट्रीब्यूशन, इंटरेस्ट, EDLI और पेंशन के फायदे अकाउंट होल्डर की अचानक मौत होने पर नॉमिनी को ट्रांसफर हो जाते हैं। नॉमिनेशन हो जाने के बाद EPF मेंबर नॉमिनेशन को ऑनलाइन अपडेट या बदल सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>EPF नॉमिनी अपडेट ऑनलाइन कैसे करें, यह जानने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स देखें:</h2><div>- स्टेप 1: EPFO नॉमिनेशन अपडेट के लिए पहला स्टेप है ऑफिशियल EPFO मेंबर ई-सेवा पोर्टल पर जाना, इस लिंक https://unifiedportal-mem.epfindia.gov.in/memberinterface/ का इस्तेमाल करना। अपना UAN और पासवर्ड डालें और फिर कैप्चा कोड डालें। अब ‘साइन इन’ पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 2: ‘मैनेज’ टैब पर माउस ले जाएं और ‘ई-नॉमिनेशन’ चुनें। आप यहां अपने अभी के नॉमिनी देख पाएंगे। अगर आपका कोई नॉमिनी नहीं है तो आपको एक जोड़ना होगा।</div><div>- स्टेप 3: अगले पेज पर जाएं और ‘एंटर न्यू नॉमिनेशन’ पर क्लिक करें। आपकी ‘प्रोफाइल’ डिटेल्स पॉप अप हो जाएंगी; ‘प्रोसीड’ पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 4: नया नॉमिनी जोड़ने या अपने अभी के नॉमिनी की डिटेल्स अपडेट करने के लिए ‘फैमिली डिक्लेरेशन’ के अंदर ‘हां’ पर क्लिक करें। (सिर्फ पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता को ही परिवार माना जाता है। अगर मेंबर्स अपने भाई-बहनों को नॉमिनी बनाना चाहते हैं तो उन्हें 'नहीं' बताना होगा)।</div><div>- स्टेप 5: नॉमिनी की डिटेल्स दें - आधार कार्ड नंबर, नाम, जन्मतिथि, जेंडर, रिश्ता, पता, बैंक डिटेल्स, गार्जियन (अगर नॉमिनी माइनर है) और फोटो। आगे बढ़ने के लिए 'Save Family Details' पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 6: अगर आप कोई और नॉमिनी जोड़ना चाहते हैं, तो 'Add now' पर क्लिक करें और उनकी डिटेल्स डालें।</div><div>- स्टेप 7: हर नॉमिनी के हिस्से का अमाउंट डालें और फिर 'Save EPF Nomination' पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 8: 'Pending Nomination' के अंदर, 'E-Sign' ऑप्शन पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 9: अगर e-Sign रजिस्टर्ड नहीं है तो स्क्रीन पर एक डायलॉग बॉक्स दिखेगा। 'Proceed' पर क्लिक करें।</div><div>- स्टेप 10: आधार से e-KYC सर्विस डेटा के लिए अपनी मंज़ूरी देने के लिए बॉक्स चुनें।</div><div>- स्टेप 11: अपना आधार कार्ड नंबर डालें और आपके रजिस्टर्ड फ़ोन नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा। यह OTP डालें और फिर 'Submit' चुनें।&nbsp;</div><div>- स्टेप 12: OTP वेरिफ़ाई करने के बाद EPFO नए नॉमिनी को रजिस्टर करेगा। नॉमिनेशन हिस्ट्री देखने और नॉमिनी का स्टेटस चेक करने के लिए ‘मैनेज’ टैब के अंदर "ई-नॉमिनेशन" पर क्लिक करें।</div><div>&nbsp;</div><div>नॉमिनेशन हिस्ट्री में नए जोड़े गए या अपडेट किए गए नॉमिनी का स्टेटस ‘नॉमिनेशन सक्सेसफुल’ के तौर पर दिखेगा और पिछले नॉमिनेशन की डिटेल्स भी दिखेंगी। कृपया याद रखें कि सिर्फ़ पहला नॉमिनेशन ही वैलिड है और यह पिछले सभी नॉमिनेशन को ओवरराइड करता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>PF अकाउंट में नॉमिनी जोड़ना क्यों जरूरी है?</h2><div>यदि खाताधारक की अचानक मृत्यु हो जाए तो PF खाते में जमा रकम, पेंशन और बीमा लाभ पाने के लिए नॉमिनी की जानकारी बेहद अहम होती है। नॉमिनी दर्ज नहीं होने पर परिवार को क्लेम प्रक्रिया में देरी हो सकती है और कानूनी दस्तावेज और उत्तराधिकार प्रमाण की जरूरत पड़ सकती है साथ ही साथ PF राशि निकालने में भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>नॉमिनी जोड़ने या अपडेट करने के लिए ज़रूरी चीज़ें</h2><div>नॉमिनेशन प्रोसेस शुरू करने से पहले पक्का कर लें कि आपके पास ये चीज़ें हैं:</div><div>- एक्टिवेटेड UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर)</div><div>- EPFO के साथ लिंक्ड आधार और PAN</div><div>- OTP वेरिफिकेशन के लिए आधार के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर</div><div>- नॉमिनी की फ़ोटो की स्कैन की हुई कॉपी (ऑप्शनल)</div><div>- नॉमिनी का आधार नंबर (पसंदीदा लेकिन ज़रूरी नहीं)</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 18:51:12 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/make-sure-to-add-a-nominee-to-your-pf-account-otherwise-you-may-face-problems-in-the-future</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/29/pf-account_large_1851_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[शीघ्रतापूर्वक कर्ज चुकाने यानी लोन फोरक्लोजर के बाद भी सिबिल स्कोर घटने का क्या कारण होता है? समझिए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-causes-a-cibil-score-to-drop-even-after-a-loan-foreclosure]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>यदि आपने समय से पहले ही कर्ज यानी लोन चुका दिया, जिसे "लोन फोरक्लोजर/प्री-क्लोजर" कहा जाता है और&nbsp; उसके बाद भी आपका सिबिल स्कोर गिर गया हो, तो यह प्रथम दृष्टया यानी पहली नजर में भले ही अजीब सा लगता है। लेकिन क्रेडिट स्कोरिंग सिस्टम ऐसा होने के पीछे कई तकनीकी पहलुओं पर काम करता है। इसलिए कई बार “जल्दी कर्ज चुकाना” भी अस्थायी रूप से आपके स्कोर घटा देता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>कहा भी जाता है कि कोई भी कार्य न तो समय से पहले करना चाहिए और न ही समय के बाद, बल्कि उसे उचित समय पर ही करना चाहिए। खासकर कर्ज जैसे वित्तीय लेन-देन के मामले में। अब आइए समझते हैं कि आखिर सिबिल स्कोर क्यों गिर जाता है?</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-much-loan-is-available-in-which-category-under-pm-mudra-yojana" target="_blank">पीएम मुद्रा योजना में किस कैटेगरी में कितना लोन मिलता है?</a></h3><div>पहला, पुराना लोन एकाउंट बंद हो जाता है: जब आप लोन फोरक्लोज करते हैं, तो वह अकाउंट “बंद” दिखने लगता है। यदि वह आपका पुराना और अच्छे भुगतान रिकॉर्ड वाला अकाउंट था, तो आपकी “क्रेडिट हिस्ट्री लेंथ” कम मानी जाती है, जिससे स्कोर थोड़ा गिर सकता है।</div><div><br></div><div>दूसरा, क्रेडिट मिक्स प्रभावित होता है: क्रेडिट ब्यूरो यह भी देखते हैं कि आपके पास किस प्रकार के कर्ज हैं: जैसे-सिक्योर्ड लोन (होम/कार), अनसिक्योर्ड लोन (पर्सनल/क्रेडिट कार्ड)। यदि आपने एकमात्र होम लोन या ऑटो लोन बंद कर दिया, तो आपका क्रेडिट मिक्स कमजोर हो सकता है।</div><div><br></div><div>तीसरा, अचानक एक्टिव क्रेडिट कम होना: स्कोरिंग मॉडल यह भी देखते हैं कि आप सक्रिय रूप से क्रेडिट को जिम्मेदारी से संभाल रहे हैं या नहीं। सभी लोन जल्दी बंद होने पर कुछ समय के लिए “एक्टिव क्रेडिट बेहवीयर” कम दिख सकता है।</div><div><br></div><div>चौथा, फोरक्लोजर की रिपोर्टिंग: कुछ मामलों में बैंक “फोरक्लोज्ड” स्टेटस अपडेट करते हैं। हालांकि यह डिफॉल्ट नहीं होता, लेकिन कुछ एल्गोरिद्म इसे सामान्य ईएमआई कम्पलीशन से अलग तरीके से पढ़ते हैं।</div><div><br></div><div>पांचवां, बैंक द्वारा रिपोर्टिंग डिले या एरर कई बार:&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">लोन बंद हो गया लेकिन सिबिल में “आउटस्टैंडिंग” दिखता रहता है या “सेटल्ड” अपडेट हो जाता है। "सेटल्ड" शब्द स्कोर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि इसका मतलब होता है कि पूरा भुगतान नहीं हुआ।</span></div><div><br></div><div>छठा, “क्लोज्ड” और “सेटल्ड” में बड़ा अंतर: चूंकि ये दोनों शब्द लोन भुगतान की प्रवृति के द्योतक होते हैं जो&nbsp;&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उनकी स्थिति, अर्थ और स्कोर पर असर डालता है। यहां क्लोज्ड का मतलब होता है कि पूरा लोन सही तरीके से चुका दिया गया है जो सकारात्मक स्थिति है। जबकि सेटल्ड का मतलब होता है कि बैंक से समझौता कर कम रकम चुकाई गई है जो नकारात्मक स्थिति का द्योतक होता है। इसलिए फोरक्लोजर के बाद अपनी सिबिल रिपोर्ट जरूर जांचें।</span></div><div><br></div><div>सातवां, आगे क्या करना चाहिए?: बैंक से फोरक्लोजर लेटर संभालकर रखें। नो ड्यूज सर्टिफिकेट, लोन क्लोज़र लेटर, एनओसी जरूर लें। वहीं सिबिल ऑफिसियल वेबसाइट पर सिबिल रिपोर्ट चेक करें और देखें कि लोन क्लोज्ड दिख रहा है या नहीं, कोई ओवरड्यू तो नहीं दिख रहा है, या फिर "सेटल्ड" तो नहीं लिखा हुआ है। वहीं कोई गलती होने पर तुरंत डिस्प्यूट रेज करें, यानी कि यदि रिपोर्ट गलत है, तो तत्क्षण डिस्प्यूट दर्ज करें।</div><div><br></div><div>आठवां, फोरक्लोजर के बाद क्रेडिट कार्ड का उपयोग संतुलित रखें: क्रेडिट कार्ड में क्रेडिट यूटिलाइजेशन कम रखें। साथ ही क्रेडिट कार्ड की ईएमआई/बिल समय पर भरें तो स्कोर वापस सुधर जाता है। सवाल है कि आखिर स्कोर कितने समय में सुधरता है? तो यह जान लीजिए कि आमतौर पर 30–90 दिनों में सुधार शुरू हो जाता है। यदि बाकी रीपेमेंट हिस्ट्री अच्छी है, तो स्कोर फिर बढ़ने लगता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>सबसे अंतिम और महत्वपूर्ण बात यह है कि लोन जल्दी चुकाना वित्तीय अनुशासन का संकेत है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। अधिकतर मामलों में सिबिल स्कोर की गिरावट अस्थायी होती है, बशर्ते आपकी रिपोर्ट में कोई तकनीकी गलती या “सेटल्ड” एंट्री न हो।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 18:13:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-causes-a-cibil-score-to-drop-even-after-a-loan-foreclosure</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/29/cibil-score_large_1813_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पीएम मुद्रा योजना में किस कैटेगरी में कितना लोन मिलता है?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-much-loan-is-available-in-which-category-under-pm-mudra-yojana]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) जैसी स्कीम की वजह से भारत में छोटा बिज़नेस शुरू करना बहुत आसान हो गया है। चाहे आप छोटी दुकान खोलना चाहते हों, डेयरी फार्म चलाना चाहते हों, टेलरिंग यूनिट शुरू करना चाहते हों या अपने मौजूदा बिज़नेस को बढ़ाना चाहते हों, आप बिना किसी कोलैटरल के ₹20 लाख तक का लोन ले सकते हैं। केंद्र सरकार ने यह स्कीम 8 अप्रैल 2015 को शुरू की थी ताकि यह पक्का किया जा सके कि छोटे एंटरप्रेन्योर, खासकर महिलाओं और पहली बार बिज़नेस शुरू करने वालों को साहूकारों पर निर्भर न रहना पड़े। अकेले पहली बार एंटरप्रेन्योर्स को 12.15 करोड़ से ज़्यादा लोन देने के साथ PM मुद्रा लोन स्कीम भारत सरकार की एक सफल फ्लैगशिप स्कीम साबित हुई है।</div><div>&nbsp;</div><h2>प्रधानमंत्री मुद्रा योजना क्या है?</h2><div>प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) 8 अप्रैल 2015 को शुरू की गई थी। यह स्कीम नॉन-कॉर्पोरेट, नॉन-फार्म माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को फाइनेंशियल मदद देती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/which-hospital-in-your-city-can-you-use-your-ayushman-card-for-free-treatment" target="_blank">आयुष्मान कार्ड से आप अपने शहर के किस अस्पताल में करवा सकते हैं मुफ्त इलाज? यहां जानें</a></h3><div>Rs.20 लाख तक के लोन देती है (उन एंटरप्रेन्योर्स के लिए जिन्होंने ‘तरुण’ कैटेगरी के तहत लोन सक्सेसफुली चुका दिया है)। लोन रीजनल रूरल बैंक (RRBs), कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, MFIs, और NBFCs देते हैं। एप्लीकेंट सीधे पार्टिसिपेटिंग लेंडर्स से कॉन्टैक्ट कर सकते हैं या उद्यमीमित्र पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>मुद्रा लोन के मुख्य उद्देश्य</h2><div>मुद्रा लोन के मुख्य उद्देश्य इस पकार&nbsp; हैं:</div><div>- अवधि और ब्याज दरें: बैंक के पॉलिसी फैसलों पर निर्भर करता है</div><div>- लोन सुविधा : कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट और टर्म लोन</div><div>- लोन अमाउंट: 10 लाख रुपये तक (बजट 2024 में 20 लाख रुपये तक का प्रस्ताव)</div><div>- प्रोसेसिंग फीस : शिशु कैटेगरी के लिए (50,000 रुपये तक के लोन) – कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं&nbsp;</div><div>- किशोर और तरुण कैटेगरी के लिए – फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन पर निर्भर करता है</div><div>&nbsp;</div><h2>PM मुद्रा लोन स्कीम के तहत लोन कैटेगरी</h2><div>PM मुद्रा लोन स्कीम आपके बिज़नेस की ज़रूरत और उसके स्टेज के आधार पर लोन को चार कैटेगरी में बांटती है। इस तरह, पहली बार स्ट्रीट वेंडर और एक अच्छी तरह से जमी हुई छोटी फैक्ट्री के मालिक, दोनों को एक सही ऑप्शन मिल सकता है।</div><div><br></div><div><b>1. शिशु- </b>₹50,000 तक के लोन। यह पहली बार एंटरप्रेन्योर और नए माइक्रो बिज़नेस के लिए बनाया गया है जो अभी शुरू हो रहे हैं। इस कैटेगरी के लिए आपको डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट की ज़रूरत नहीं है और डॉक्यूमेंटेशन बहुत कम है। शिशु लोन 7 से 10 वर्किंग डेज़ में अप्रूव हो सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>2. किशोर-</b> ₹50,000 से ₹5 लाख तक के लोन। यह उन बिज़नेस के लिए है जो पहले ही शुरू हो चुके हैं और उन्हें बढ़ाने या अपने ऑपरेशन को स्टेबल करने के लिए फंड की ज़रूरत है। इस स्टेज पर एक बेसिक बिज़नेस प्लान की ज़रूरत हो सकती है।</div><div><br></div><div><b>3. तरुण- </b>₹5 लाख से ₹10 लाख तक के लोन। यह कैटेगरी उन अच्छी तरह से जमे-जमाए माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज़ के लिए है जो अपना बिज़नेस बढ़ाना चाहते हैं, इक्विपमेंट खरीदना चाहते हैं या वर्किंग कैपिटल बढ़ाना चाहते हैं। आमतौर पर ITR और प्रोजेक्ट रिपोर्ट की ज़रूरत होती है।</div><div><br></div><div><b>4. तरुण प्लस-</b> ₹10 लाख से ₹20 लाख तक के लोन। यह कैटेगरी यूनियन बजट 2024-25 में शुरू की गई थी और यह सिर्फ़ उन एंटरप्रेन्योर के लिए है जिन्होंने पहले ही तरुण लोन सक्सेसफुली चुका दिया है। यह अच्छे रीपेमेंट डिसिप्लिन को रिवॉर्ड देता है और बढ़ते बिज़नेस को ज़्यादा क्रेडिट पाने में मदद करता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>PM मुद्रा लोन 2026 के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया</h2><div>ज़्यादातर भारतीय नागरिक जो छोटा नॉन-फार्म बिज़नेस चला रहे हैं या चलाने की प्लानिंग कर रहे हैं, वे अप्लाई कर सकते हैं। अप्लाई करने से पहले आपको ये बातें चेक करनी होंगी:</div><div>- नागरिकता और उम्र: आपकी उम्र 18 से 65 साल के बीच होनी चाहिए।</div><div>- बिज़नेस टाइप: आपका बिज़नेस मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग या सर्विसेज़ में होना चाहिए। खेती से जुड़ी एक्टिविटीज़ जैसे पोल्ट्री, डेयरी, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और फ़ूड प्रोसेसिंग भी कवर होती हैं, लेकिन डायरेक्ट क्रॉप लोन एलिजिबल नहीं हैं।</div><div>- बिज़नेस स्ट्रक्चर: लोग, मालिक, पार्टनरशिप, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियाँ और सेल्फ-एम्प्लॉयड प्रोफेशनल सभी अप्लाई कर सकते हैं।</div><div>- कोई लोन डिफॉल्ट नहीं: आप किसी भी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के डिफॉल्टर नहीं होने चाहिए।</div><div>- तरुण प्लस कंडीशन: सिर्फ़ पिछले तरुण बॉरोअर जिनका रीपेमेंट रिकॉर्ड साफ हो, वे ही तरुण प्लस कैटेगरी के तहत ₹10 लाख से ज़्यादा के लोन के लिए एलिजिबल हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>PM मुद्रा लोन के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स</h2><div>लोन कैटेगरी के हिसाब से ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स थोड़े अलग हो सकते हैं। हालाँकि, PM मुद्रा लोन के लिए ज़रूरी बेसिक डॉक्यूमेंट्स इस तरह हैं:</div><div>- आइडेंटिटी प्रूफ: आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर ID कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस (कोई भी एक)।</div><div>- एड्रेस प्रूफ: आधार कार्ड, हाल का बिजली या टेलीफ़ोन बिल (2 महीने से ज़्यादा पुराना नहीं), या पासपोर्ट।</div><div>- बिज़नेस प्रूफ: GST रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट, उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट, ट्रेड लाइसेंस या संबंधित लाइसेंस की कॉपी।</div><div>- बैंक स्टेटमेंट: आपके मौजूदा बैंक का पिछले 6 महीने का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट।</div><div>- फ़ोटो: एप्लीकेंट के 2 हाल के पासपोर्ट-साइज़ फ़ोटो।</div><div>- SC/ST/OBC सर्टिफ़िकेट (अगर लागू हो, क्योंकि इससे आपको खास ट्रीटमेंट मिल सकता है)।</div><div>&nbsp;</div><h2>मुद्रा लोन के फ़ायदे</h2><div>मुद्रा लोन के खास फ़ायदे नीचे दिए गए हैं:</div><div>- कोई कोलैटरल ज़रूरी नहीं: सिक्योरिटी के तौर पर कोई एसेट गिरवी रखने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि MUDRA लोन अनसिक्योर्ड होते हैं।</div><div>- फाइनेंस तक आसान पहुँच: कम से कम डॉक्यूमेंटेशन और आसान प्रोसेस से फंडिंग ज़्यादा आसानी से मिल जाती है।</div><div>- कम इंटरेस्ट रेट: ट्रेडिशनल बिज़नेस लोन की तुलना में, इंटरेस्ट रेट आम तौर पर ज़्यादा अफ़ोर्डेबल होते हैं।</div><div>- कई लोन कैटेगरी: बिज़नेस स्टेज और फंडिंग की ज़रूरतों के आधार पर, ऑप्शन में शिशु, किशोर, तरुण और तरुणप्लस शामिल हैं।</div><div>- फ्लेक्सिबल लोन ऑप्शन: वर्किंग कैपिटल लोन, टर्म लोन, ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी और दूसरे फाइनेंसिंग सॉल्यूशन देता है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 17 May 2026 12:11:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-much-loan-is-available-in-which-category-under-pm-mudra-yojana</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/17/pm-mudra-yojana_large_1211_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आयुष्मान कार्ड से आप अपने शहर के किस अस्पताल में करवा सकते हैं मुफ्त इलाज? यहां जानें]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/which-hospital-in-your-city-can-you-use-your-ayushman-card-for-free-treatment]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>2018 में शुरू की गई आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) भारत सरकार की एक खास हेल्थकेयर पहल है। यह हर परिवार को सेकेंडरी और टर्शियरी हॉस्पिटलाइज़ेशन के लिए हर साल ₹5 लाख तक देती है, जिससे 50 करोड़ से ज़्यादा लोगों (भारत की आबादी का लगभग 40%) को फ़ायदा होता है। इस स्कीम में लगभग 1,949 मेडिकल प्रोसीजर शामिल हैं, जिसमें हार्ट सर्जरी, कैंसर केयर और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसे ज़रूरी इलाज शामिल हैं, ये सभी पैनल वाले हॉस्पिटल में कैशलेस तरीके से किए जाते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>आयुष्मान कार्ड क्या है?</h2><div>आयुष्मान कार्ड भारत सरकार की एक हेल्थ स्कीम का हिस्सा है जो गरीब और ज़रूरतमंद परिवारों को हर साल ₹5 लाख तक का मुफ़्त मेडिकल इलाज दिलाने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए आपको किसी भी लिस्टेड हॉस्पिटल में अपना आयुष्मान कार्ड और अपना आधार कार्ड दिखाना होगा।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/government-is-giving-rs-71000-for-makhana-production-and-rs-2-lakh-for-the-farm" target="_blank">मखाना उत्‍पादन के ल‍िए 71 हजार तो खेत के ल‍िए 2 लाख रुपये दे रही सरकार</a></h3><div>आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश भर में लाखों लोग हेल्थ बेनिफिट्स ले रहे हैं। इस स्कीम का मुख्य मकसद गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को गंभीर बीमारियों का फ्री इलाज देना है। इस स्कीम के तहत, आयुष्मान कार्ड होल्डर्स बिना कोई फीस दिए सरकारी और मान्यता प्राप्त प्राइवेट हॉस्पिटल में हॉस्पिटल का खर्च उठा सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>PM आयुष्मान योजना के फ़ायदे</h2><div>आपके शहर के ज़्यादातर सरकारी अस्पताल आयुष्मान भारत स्कीम से जुड़े हुए हैं। इन बड़े अस्पतालों में ज़िला अस्पताल, राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेज और बड़े शहरों के अस्पताल शामिल हैं। कार्ड होल्डर्स को इन अस्पतालों में मुफ़्त इलाज, सर्जरी, मेडिकल टेस्ट और दवाएँ मिलती हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>इस स्कीम का मकसद यह पक्का करना है कि पैसे की कमी की वजह से कोई भी मरीज़ इलाज से वंचित न रहे। इस स्कीम में सरकारी अस्पतालों में कई तरह के इलाज और सर्जरी शामिल हैं, जिसमें कार्डियक सर्जरी, किडनी की समस्याएँ, कैंसर का इलाज और जनरल सर्जरी शामिल हैं। ये सभी हेल्थकेयर सर्विस उपलब्ध हैं।</div><h2>&nbsp;<br>कैसे चेक करें कि कौन से हॉस्पिटल पैनल में हैं?</h2><div>अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके शहर या इलाके के कौन से हॉस्पिटल आयुष्मान कार्ड से इलाज करते हैं तो सबसे आसान तरीका ऑनलाइन है। सबसे पहले आयुष्मान भारत स्कीम के ऑफिशियल पोर्टल https://hospitals.pmjay.gov.in/Search/ पर जाएं और Find Hospitals सेक्शन पर क्लिक करें। यहां आपको अपना राज्य, जिला, शहर या पिनकोड डालने का ऑप्शन मिलेगा।</div><div>&nbsp;</div><div>आप सरकारी या प्राइवेट हॉस्पिटल भी चुन सकते हैं। अपनी जानकारी डालने के बाद Search पर क्लिक करें, जिससे आपके इलाके के सभी पैनल में शामिल हॉस्पिटल की लिस्ट दिखेगी। इस लिस्ट में हर हॉस्पिटल का नाम, पता, कॉन्टैक्ट नंबर और उपलब्ध सर्विस शामिल हैं। किसी भी हॉस्पिटल की पूरी जानकारी और पैनल में शामिल इलाज पैकेज देखने के लिए उस पर क्लिक करें। मदद के लिए सीधे हॉस्पिटल से संपर्क करें या PMJAY हेल्पलाइन 14555 या 1800-11-4477 पर कॉल करें।</div><div>&nbsp;</div><h2>PMJAY एलिजिबिलिटी</h2><div>यह वेरिफ़ाई करने के लिए कि आप आयुष्मान कार्ड के लिए एलिजिबल हैं या नहीं:</div><div>- सबसे पहले आप beneficiary.nha.gov.in पर जाएं।</div><div>- अपना स्टेटस चेक करने के लिए अपना मोबाइल नंबर या आधार नंबर डालें।</div><div>- मदद के लिए PMJAY हेल्पलाइन से संपर्क करें या पास के किसी पैनल वाले हॉस्पिटल में जाएं।</div><div>- एलिजिबलिटी ग्रामीण और शहरी परिवारों के लिए सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसस (SECC) 2011 पर आधारित है।</div><div>&nbsp;</div><div>आयुष्मान कार्ड जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत है। सही जानकारी होने पर आप अपने शहर के सूचीबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज का लाभ उठा सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>इलाज से पहले अस्पताल की एम्पैनल्ड सूची जरूर जांचें और सभी दस्तावेज साथ रखें, ताकि बिना परेशानी कैशलेस इलाज मिल सके।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 19:02:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/which-hospital-in-your-city-can-you-use-your-ayushman-card-for-free-treatment</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/14/ayushman-card_large_1902_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मखाना उत्‍पादन के ल‍िए 71 हजार तो खेत के ल‍िए 2 लाख रुपये दे रही सरकार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/government-is-giving-rs-71000-for-makhana-production-and-rs-2-lakh-for-the-farm]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बिहार सरकार ने नेशनल मखाना बोर्ड के तहत फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए मखाना डेवलपमेंट स्कीम शुरू की है, जिसमें खेती से लेकर एक्सपोर्ट तक सप्लाई चेन में सब्सिडी दी जाएगी। इस स्कीम का मकसद मखाना, जिसे फॉक्स नट्स भी कहते हैं, के प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को बढ़ाकर किसानों की इनकम बढ़ाना है। बिहार भारत में मखाना का सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है। इस पहल से विशेष रूप से कोसी, मिथिलांचल और सीमांचल जैसे क्षेत्रों के किसानों को लाभ होगा।</div><div><br></div><div>अधिकारियों ने कहा कि मखाना की खेती करने वाले किसान मॉडर्न तरीके अपनाने और प्रोडक्शन बेहतर करने के लिए 71,600 रुपये तक की मदद के हकदार होंगे। राज्य में मखाना की खेती और प्रोसेसिंग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी और अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/these-3-small-mistakes-are-the-reason-why-most-insurance-claims-are-rejected" target="_blank">इन 3 छोटी गलतियों की वजह से ज्यादातर इंश्योरेंस क्लेम होते हैं रिजेक्ट, यहां जानें डिटेल्स</a></h3><h2>किसानों और यूनिट्स के लिए कितने तक सब्सिडी?</h2><div>इस स्कीम के तहत सरकार ज़रूरी फाइनेंशियल मदद दे रही है:</div><div>- प्रति हेक्टेयर खेती की लागत: ₹97,000</div><div>- सब्सिडी: 75% तक यानि ₹71,600 प्रति हेक्टेयर</div><div>- खेत/तालाब विकास और संरचना तैयार करने के लिए करीब ₹2 लाख तक का अनुदान दिया जा रहा है</div><div>- यह सहायता पात्र किसानों को योजना की शर्तों के अनुसार दी जाती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए सब्सिडी:</h2><div>- माइक्रो यूनिट्स: ₹5 लाख</div><div>- मीडियम यूनिट्स: ₹1.5 करोड़</div><div>- बड़ी यूनिट्स: ₹3.5 करोड़</div><div>- इसके अलावा, किसानों को खेत लेवल पर प्रोडक्ट मैनेजमेंट यूनिट्स के लिए ₹2 लाख की मदद मिलेगी&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>किन किसानों को मिलेगा लाभ?</h2><div>- बिहार के पंजीकृत किसान</div><div>- मखाना की खेती करने वाले या शुरू करने के इच्छुक किसान</div><div>- तालाब आधारित खेती करने वाले किसान</div><div>- किसान समूह और एफपीओ (FPO) भी पात्र हो सकते हैं</div><div>&nbsp;</div><h2>किन कामों के लिए मिलती है सहायता?</h2><div>- मखाना उत्पादन : बीज और खेती की लागत और आधुनिक तकनीक अपनाने में सहायता</div><div>- खेत/तालाब विकास: तालाब की खुदाई या मरम्मत, खेती के लिए बुनियादी ढांचा तथा जल प्रबंधन व्यवस्था</div><div>- प्रोसेसिंग और भंडारण : कुछ योजनाओं में प्रोसेसिंग यूनिट और स्टोरेज के लिए भी सहायता उपलब्ध होती है</div><div>&nbsp;</div><h2>एलिजिबिलिटी और एप्लीकेशन प्रोसेस</h2><div>स्कीम के लिए अप्लाई करने के लिए किसानों को ये करना होगा:</div><div>- बिहार का रहने वाला हो</div><div>- आधार कार्ड हो</div><div>- बैंक अकाउंट हो</div><div>- ज़मीन के मालिकाना हक के डॉक्यूमेंट्स हों</div><div>&nbsp;</div><h2>एप्लीकेशन इन तरीकों से जमा किए जा सकते हैं:</h2><div>- सबसे पास का कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)</div><div>- बिहार एग्रीकल्चर ऐप</div><div>- ऑफिशियल पोर्टल: horticulture.bihar.gov.in</div><div>&nbsp;</div><h2>उद्देश्य&nbsp;</h2><div>इस स्कीम को इसलिए बनाया गया है:</div><div>- मखाना का प्रोडक्शन बढ़ाना</div><div>- बेहतर बीज और खेती की मॉडर्न तकनीक देना</div><div>- पारंपरिक औजारों की जगह एडवांस्ड इक्विपमेंट लाना</div><div>- प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को मज़बूत करना</div><div>- बेहतर प्रोडक्टिविटी और कीमत तय करके किसानों की इनकम दोगुनी करना</div><div>&nbsp;</div><div>मखाना डेवलपमेंट स्कीम बिहार की पारंपरिक खेती को एक मॉडर्न, एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड इंडस्ट्री में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अच्छी सब्सिडी, इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और ग्लोबल मार्केटिंग पहल के साथ, इस स्कीम से किसानों की इनकम में काफी बढ़ोतरी होने और ग्लोबल मखाना मार्केट में बिहार की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।</div><div>&nbsp;</div><div>मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार की यह पहल किसानों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है। उत्पादन से लेकर खेत और तालाब विकास तक मिलने वाली सब्सिडी खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने में मदद करेगी।</div><div>&nbsp;</div><div>जो किसान मखाना की खेती करना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना आर्थिक सहायता के साथ आधुनिक खेती अपनाने का अच्छा मौका है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 18:14:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/government-is-giving-rs-71000-for-makhana-production-and-rs-2-lakh-for-the-farm</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/13/makhana-production_large_1814_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पर्सनल लोन अप्रूवल पाने के लिए आवेदन को मजबूत बनाने के आसान कदम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/simple-steps-to-strengthen-your-personal-loan-application-for-approval]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वित्तीय आपातकाल कभी चेतावनी देकर नहीं आते। चाहे अचानक आया मेडिकल बिल हो या घर की तत्काल मरम्मत, आपको अक्सर तुरंत पैसों की ज़रूरत पड़ती है। जबकि कई प्लेटफ़ॉर्म तुरंत लोन प्रदान करते हैं, लेकिन उसका “approved” स्टेटस मिलना पूरी तरह आपकी प्रोफ़ाइल पर निर्भर करता है।</div><div><br></div><div>ऋणदाता अपना पैसा देने से पहले आपकी बैंकिंग और क्रेडिट हिस्ट्री में कुछ विशेष पैटर्न देखते हैं। यदि आप उनके मानकों पर खरे नहीं उतरते, तो आपका आवेदन लगातार रिजेक्शन के चक्र में फँस जाता है। इस पोस्ट में आपका स्वागत है, जो बताती है कि आप अपने आवेदन को वेरिफिकेशन में आसानी से कैसे पास करवा सकते हैं।</div><div><br></div><h2>पर्सनल लोन पात्रता को जल्दी सुधारने के टिप्स</h2><div><br></div><div>यहाँ आपके पर्सनल लोन की पात्रता सुधारने के तरीके दिए गए हैं –</div><div><br></div><h2>आज ही अपनी क्रेडिट रिकॉर्ड ठीक करें</h2><div>जैसे ही आप अपना PAN दर्ज करते हैं, <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.lendingplate" target="_blank">पर्सनल लोन ऐप</a> सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर निकालती है। इसे अपनी वित्तीय प्रतिष्ठा समझिए। 750 से ऊपर का स्कोर आपको सबसे अच्छे टर्म्स दिलाता है। यदि आपका स्कोर इससे थोड़ा कम है तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। आप छोटे-छोटे कर्ज़ चुकाकर इस स्कोर को बढ़ा सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-home-loan-insurance-and-why-is-it-a-profitable-deal" target="_blank">क्या होता है होम लोन इंश्योरेंस और क्यों हैं इसे लेना फायदे का सौदा?</a></h3><div>क्या आपके क्रेडिट कार्ड पर ₹2000 का बकाया है? उसे अभी चुका दें। ऐसे छोटे क्लोज़र कुछ ही हफ्तों में आपकी रिपोर्ट पर सकारात्मक प्रभाव दिखाते हैं। साथ ही, गलतियों की जाँच करें। कई बार महीनों पहले बंद किया गया लोन अभी भी “active” दिखता है। उसे सही करवाने से आपकी पात्रता तेजी से बढ़ सकती है।</div><div><br></div><h2>अपनी आय और कर्ज़ के बीच संतुलन रखें</h2><div>ऋणदाता एक फॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं जिसे Debt-to-Income Ratio कहा जाता है। वे देखते हैं कि आपकी ₹20,000+ सैलरी का कितना हिस्सा पहले से अन्य EMI में जा रहा है। यदि आपकी आय का 60% पहले से ही खर्च हो रहा है, तो नया ऋणदाता आपको उच्च जोखिम वाला मानेगा। उन्हें डर रहता है कि एक और बिल जुड़ने पर आप डिफॉल्ट कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>ऐसे में कोशिश करें कि कोई छोटा लोन जो खत्म होने वाला हो, उसे बंद कर दें। यहाँ तक कि फोन या फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन को बंद करने से भी आपकी “repayment capacity” क्रेडिट एल्गोरिदम की नजर में बढ़ जाती है।</div><div><br></div><h2>हर आय स्रोत का प्रमाण दें</h2><div>अधिकतर लोग केवल अपनी बेसिक सैलरी स्लिप दिखाते हैं। यह एक बड़ी गलती है। यदि आपको परफॉर्मेंस बोनस, ट्रैवल अलाउंस या किराये से अतिरिक्त आय मिलती है, तो उसका भी दस्तावेज़ दें। अपनी ITR या Form 16 के जरिए अपनी कुल कमाई दिखाएँ।</div><div><br></div><div>जब ऋणदाता देखते हैं कि आपके पास कई आय स्रोत हैं, तो उन्हें आपके इंस्टेंट कैश लोन चुकाने की क्षमता पर अधिक भरोसा होता है। इससे ₹2.5 लाख की ऊपरी सीमा तक लोन मिलना आसान हो जाता है।</div><div><br></div><h2>अपने बैंक स्टेटमेंट को ठीक करें</h2><div>आपका बैंक स्टेटमेंट आपकी जीवनशैली की झलक देता है। ऋणदाता पिछले तीन महीनों में खासकर “return” मार्क्स देखते हैं। कम बैलेंस के कारण एक भी चेक बाउंस या ECS फेल होने से आपकी संभावना तुरंत खत्म हो सकती है। इससे ऋणदाता को लगता है कि आप अव्यवस्थित हैं या आर्थिक रूप से कमजोर हैं।</div><div><br></div><div>आवेदन से पहले के 90 दिनों में सुनिश्चित करें कि हर ऑटो-डेबिट पहली बार में सफल हो। साथ ही, बार-बार “low balance” अलर्ट से बचें। खाते में थोड़ा अतिरिक्त बैलेंस रखना आपकी वित्तीय परिपक्वता दिखाता है।</div><div><br></div><h2>अपने डिजिटल दस्तावेज़ सही तरीके से तैयार करें</h2><div>तकनीकी रिजेक्शन सबसे ज्यादा परेशान करने वाले होते हैं क्योंकि उनका आपके पैसों से कोई संबंध नहीं होता। यदि आपके आधार पर लिखा नाम PAN या बैंक अकाउंट से मेल नहीं खाता, तो सिस्टम उसे फ्लैग कर देता है। यह समस्या अक्सर मिडिल नेम या स्पेलिंग की गलती के कारण होती है।</div><div><br></div><div>सुनिश्चित करें कि आपके KYC दस्तावेज़ एक जैसे हों। ऐप इस्तेमाल करते समय दस्तावेज़ों की साफ फोटो लें। यदि टेक्स्ट धुंधला होगा या कोने कटे होंगे, तो ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन उसे रिजेक्ट कर देगा। अपने फोन में पिछली तीन सैलरी स्लिप की डिजिटल PDF तैयार रखना समय बचाता है।</div><div><br></div><h2>बहुत ज्यादा आवेदन करने से बचें</h2><div>जब आपको मेडिकल इमरजेंसी लोन चाहिए होता है, तो एक साथ दस अलग-अलग ऋणदाताओं के पास आवेदन करने का मन करता है। ऐसा मत करें। हर आवेदन के साथ ऋणदाता आपकी क्रेडिट फाइल पर “hard enquiry” करते हैं।</div><div>कम समय में बहुत अधिक enquiry आपको “credit hungry” दिखाती है। इससे लगता है कि आप वित्तीय परेशानी में हैं। इसलिए पहले एक या दो ऐसे ऋणदाता चुनें जो आपकी प्रोफ़ाइल के अनुसार हों, फिर आवेदन करें। यदि दूसरी जगह आवेदन करना ही पड़े, तो कुछ महीनों का अंतर रखें।</div><div><br></div><h2>डिजिटल लेंडिंग चैनलों की गति</h2><div>पारंपरिक बैंकिंग में कागज़ों का ढेर और शाखा के कई चक्कर शामिल होते हैं। आधुनिक NBFC ने सब कुछ ऑनलाइन कर दिया है। अब आप दिल्ली या भारत के किसी भी हिस्से से अपने घर में बैठकर आवेदन कर सकते हैं। 100% डिजिटल प्रक्रिया की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी गति है।</div><div><br></div><div>क्योंकि सिस्टम आपके डेटा को एल्गोरिदम से जांचता है, इसलिए आपको कुछ ही मिनटों में निर्णय मिल जाता है। इसमें कोई मानवीय पक्षपात नहीं होता। यदि आपका डेटा साफ है, तो लगभग 30 मिनट में पैसा आपके खाते में पहुँच सकता है। यही कारण है कि अपनी डिजिटल “financial footprint” को साफ रखना इतना महत्वपूर्ण है।</div><div><br></div><h2>वे गलतियाँ जो आपके फंड को रोक सकती हैं</h2><div><b>- कैश में सैलरी –</b> ऋणदाता नकद आय को सत्यापित नहीं कर सकते। यदि आपका नियोक्ता हाथ में वेतन देता है, तो जल्दी लोन मिलना लगभग असंभव हो जाता है। सुनिश्चित करें कि सैलरी बैंक ट्रांसफर से मिले।</div><div><b>- बार-बार नौकरी बदलना – </b>यदि आप हर तीन महीने में नौकरी बदलते हैं, तो आप अस्थिर दिखते हैं। ऋणदाता कम से कम 6 महीने की निरंतर नौकरी पसंद करते हैं।</div><div><b>- जॉइंट अकाउंट से आवेदन –</b> लोन डिस्बर्सल के लिए आमतौर पर आपके नाम का प्राइमरी सेविंग अकाउंट चाहिए होता है। साझा अकाउंट वेरिफिकेशन फेल कर सकता है।</div><div><b>- गलत जानकारी देना –</b> पुराना ऑफिस पता या आधिकारिक ईमेल की जगह पर्सनल ईमेल देने से बैकग्राउंड चेक में देरी हो सकती है।</div><div><br></div><h2>अपनी उधार लेने की क्षमता बनाना</h2><div>पात्रता सुधारना एक बार का काम नहीं है। यह ऐसी प्रोफ़ाइल बनाने के बारे में है जो हमेशा “loan-ready” रहे। अपने कर्ज़ कम रखकर और दस्तावेज़ अपडेट रखकर आप ऋणदाताओं के पसंदीदा ग्राहक बन जाते हैं। शुरुआत में आपको छोटा अमाउंट मिल सकता है, लेकिन समय पर भुगतान करने से आपकी लिमिट बढ़ती जाती है।</div><div><br></div><div>इसी तरह आप कम तनाव के साथ पर्सनल लोन सुरक्षित कर सकते हैं। हमेशा प्रोसेसिंग फीस और ब्याज दर (आमतौर पर सालाना 12% से 36%) की जाँच करें। जानकारी रखने वाला उधारकर्ता ही योग्य उधारकर्ता होता है।</div><div><br></div><h2>अंतिम विचार</h2><div>लोन की पात्रता पूरी करना स्थिरता दिखाने के बारे में है। यदि आपकी आय कम से कम ₹20,000 है, आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है और आपके दस्तावेज़ व्यवस्थित हैं, तो आप आधा रास्ता पहले ही तय कर चुके हैं। कई जगह आवेदन करने के जाल से बचें और साफ बैंक स्टेटमेंट प्रस्तुत करने पर ध्यान दें।</div><div><br></div><div><a href="https://lendingplate.com/personal-loan" target="_blank">डिजिटल लेंडिंग</a> की दुनिया गति पर आधारित है, इसलिए आप जितने अधिक व्यवस्थित होंगे, पैसा उतनी जल्दी आपके खाते में आएगा। चाहे शादी का खर्च हो, मेडिकल बिल हो या कोई उपभोक्ता खरीदारी, आपकी वित्तीय अनुशासन ही वह चीज़ है जो आपके लिए दरवाज़ा खोलती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 08 May 2026 19:56:56 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/simple-steps-to-strengthen-your-personal-loan-application-for-approval</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/8/personal-loan_large_1956_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[इन 3 छोटी गलतियों की वजह से ज्यादातर इंश्योरेंस क्लेम होते हैं रिजेक्ट, यहां जानें डिटेल्स]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/these-3-small-mistakes-are-the-reason-why-most-insurance-claims-are-rejected]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>इंश्योरेंस का मकसद मन की शांति देना है, जब ज़िंदगी में अचानक कोई मुश्किल आती है - चाहे वह कार एक्सीडेंट हो, मेडिकल इमरजेंसी हो, घर में आग लग जाए, या कोई ट्रिप खराब हो जाए। लेकिन, अगर आपका इंश्योरेंस क्लेम अचानक रिजेक्ट हो जाए तो यह शांति खत्म हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><div>क्लेम रिजेक्ट होना कोई नई बात नहीं है। हर साल हज़ारों क्लेम ऐसे कारणों से रिजेक्ट हो जाते हैं जिन्हें अक्सर रोका जा सकता है। यह आर्टिकल इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने के सबसे आम कारणों के बारे में बताता है, बताता है कि क्लेम प्रोसेस कैसे काम करता है और इन महंगी गलतियों से बचने के लिए प्रैक्टिकल टिप्स देता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-home-loan-insurance-and-why-is-it-a-profitable-deal" target="_blank">क्या होता है होम लोन इंश्योरेंस और क्यों हैं इसे लेना फायदे का सौदा?</a></h3><h2>इंश्योरेंस क्लेम क्या है?</h2><div>इंश्योरेंस क्लेम एक फॉर्मल रिक्वेस्ट है जो पॉलिसी होल्डर अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर हुए नुकसान या डैमेज के लिए कम्पेनसेशन या कवरेज के लिए इंश्योरेंस कंपनी से करता है। यह इंश्योरेंस कंपनी से फाइनेंशियल मदद मांगने का आपका तरीका है ताकि आप किसी अनचाही घटना से उबर सकें। इंश्योरेंस क्लेम कई वजहों से फाइल किए जा सकते हैं, जैसे कार एक्सीडेंट, प्रॉपर्टी का नुकसान, मेडिकल खर्च, या जान का नुकसान भी।</div><div>&nbsp;</div><h2>इंश्योरेंस क्लेम प्रोसेस को समझना</h2><div>इससे पहले कि हम जानें कि क्लेम क्यों रिजेक्ट होते हैं, यह समझना ज़रूरी है कि यह प्रोसेस आम तौर पर कैसे काम करता है:</div><div>- घटना होना – कुछ ऐसा होना जो आपकी पॉलिसी में कवर होता है (जैसे, कार एक्सीडेंट, बीमारी, चोरी)।</div><div>- नोटिफ़िकेशन – आप एक तय टाइमफ़्रेम के अंदर अपनी इंश्योरेंस कंपनी को इन्फ़ॉर्म करते हैं।</div><div>- डॉक्यूमेंटेशन – आप पुलिस रिपोर्ट, रसीदें, मेडिकल रिपोर्ट वगैरह जैसे प्रूफ़ देते हैं।</div><div>- असेसमेंट – इंश्योरेंस कंपनी क्लेम की जांच और मूल्यांकन करती है।</div><div>- फ़ैसला – नतीजों और पॉलिसी की शर्तों के आधार पर क्लेम को मंज़ूरी दी जाती है या नामंज़ूर किया जाता है।</div><div>हालांकि यह प्रोसेस सीधा लगता है, लेकिन एक भी गलती आपके पूरे क्लेम को पटरी से उतार सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>क्लेम रिजेक्ट होने की 3 सबसे आम गलतियां</h2><div><b>1. गलत या अधूरी जानकारी देना (Non-Disclosure)</b></div><div>- पॉलिसी लेते समय स्वास्थ्य, आय या जोखिम से जुड़ी जानकारी छिपाना</div><div>- मेडिकल हिस्ट्री, धूम्रपान/शराब की आदतें न बताना</div><div>- बीमा कंपनियां इसे मटेरियल फैक्ट छिपाना मानती हैं</div><div>नतीजा: क्लेम के समय कंपनी जांच में यह सामने आने पर दावा खारिज कर सकती है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>2. पॉलिसी की शर्तें और कवरेज न समझना</b></div><div>- क्या-क्या कवर है और क्या नहीं, इसकी जानकारी न होना</div><div>- वेटिंग पीरियड, एक्सक्लूजन (Exclusions) को नजरअंदाज करना, जैसे - कुछ बीमारियां शुरुआती वर्षों में कवर नहीं होतीं</div><div>नतीजा: ऐसे मामलों में क्लेम “नियमों के तहत” रिजेक्ट कर दिया जाता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>3. समय पर क्लेम न करना या दस्तावेज अधूरे देना</b></div><div>- क्लेम की सूचना देने में देरी करना&nbsp;</div><div>- जरूरी दस्तावेज (बिल, रिपोर्ट, FIR आदि) जमा न करना</div><div>- गलत फॉर्म या अधूरी जानकारी देना&nbsp;</div><div>नतीजा: प्रक्रिया अधूरी होने के कारण क्लेम अस्वीकृत हो सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>किन बातों का रखें खास ध्यान?</b></div><div>क्लेम करते समय निम्नलिखित बातों&nbsp; ध्यान रखना आवश्यक होता है :&nbsp;</div><div>- पॉलिसी खरीदते समय पूरी और सही जानकारी दें</div><div>- सभी शर्तों (Terms &amp; Conditions) को ध्यान से पढ़ें</div><div>- इलाज/दुर्घटना के तुरंत बाद कंपनी को सूचित करें</div><div>- सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें और समय पर जमा करें</div><div>- एजेंट या कंपनी से किसी भी शंका पर लिखित पुष्टि लें</div><div>&nbsp;</div><h2>क्लेम रिजेक्शन से कैसे बचें?</h2><div>क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए अक्सर तैयारी, ट्रांसपेरेंसी और कम्युनिकेशन की ज़रूरत होती है। यहाँ कुछ यूनिवर्सल टिप्स दिए गए हैं:</div><div>- अपने पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स को रेगुलर रिव्यू करें</div><div>- अपनी इंश्योरेंस कंपनी को ज़िंदगी में होने वाले किसी भी बदलाव (जैसे, घर बदलना, हेल्थ कंडीशन, नौकरी में बदलाव) के बारे में अपडेट करें</div><div>- कीमती सामान और रसीदों का पेपर और डिजिटल रिकॉर्ड रखें</div><div>- पॉलिसी खरीदने से पहले सवाल पूछें और साफ़ करें कि क्या कवर है और क्या नहीं</div><div>- अपनी इंश्योरेंस कंपनी के ऐप या कस्टमर सर्विस का इस्तेमाल करके उनके डॉक्यूमेंटेशन और रिपोर्टिंग प्रोसेस को समझें</div><div>&nbsp;</div><div>इंश्योरेंस आपकी सुरक्षा के लिए होता है, लेकिन यह तभी काम करता है जब आप समझते हैं कि यह कैसे काम करता है। ज़्यादातर क्लेम इसलिए मना नहीं किए जाते हैं कि इंश्योरेंस कंपनियाँ आपको धोखा देना चाहती हैं, बल्कि इसलिए मना किए जाते हैं क्योंकि ऐसी गलतियाँ होती हैं जिनसे बचा जा सकता है, गलतफ़हमियाँ होती हैं, या पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन होता है।</div><div>&nbsp;</div><div>अपनी पॉलिसी को पढ़ने के लिए समय निकालकर, अपनी जानकारी को अपडेट रखकर और सही डॉक्यूमेंट जमा करके, आप सफल क्लेम की संभावना को काफ़ी बढ़ा सकते हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 19:24:32 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/these-3-small-mistakes-are-the-reason-why-most-insurance-claims-are-rejected</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/4/29/insurance-claims_large_1924_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[क्या होता है होम लोन इंश्योरेंस और क्यों हैं इसे लेना फायदे का सौदा?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-home-loan-insurance-and-why-is-it-a-profitable-deal]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>घर खरीदना हर परिवार का बड़ा सपना होता है, जिसे पूरा करने के लिए अधिकांश लोग होम लोन लेते हैं। लेकिन अगर लोन चुकाने के दौरान कमाने वाले व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी हो जाए तो परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। ऐसे जोखिम से बचाव के लिए होम लोन इंश्योरेंस अहम भूमिका निभाता है।</div><div>&nbsp;</div><div>लोन लेने वाले हमेशा इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि अगर जल्द ही उनके साथ कुछ अनहोनी हो गई तो वे अपने घर के लोन का बकाया नहीं चुका पाएंगे। कंज्यूमर नहीं चाहता कि उनकी असमय मौत के बाद होम लोन लेने का बोझ उनके परिवार पर पड़े। क्योंकि होम लोन एक लंबे समय के लोन से जुड़ा होता है जो 30 साल तक चल सकता है, इसलिए यह बात लोन लेने वाले के दिमाग में बार-बार आती है। इसलिए, लोन लेने वालों के लिए यह समझदारी है कि वे इसे ध्यान में रखें और उसी के हिसाब से प्लान बनाएं।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>होम लोन इंश्योरेंस क्या होता है?</h2><div>होम लोन इंश्योरेंस, जिसे होम लोन प्रोटेक्शन प्लान (HLPP) भी कहते हैं, लगभग हर फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन द्वारा दी जाने वाली एक स्कीम है जिसमें इंश्योरर, लोन देने वाले या बैंक को लोन लेने वाले के बकाया या बचे हुए होम लोन कवर इंश्योरेंस अमाउंट का पेमेंट करता है, अगर अचानक कोई ऐसी स्थिति आ जाए, जैसे कि लोन लेने वाले की मौत हो जाए। आप अपनी इंश्योरेंस की मूल ज़रूरतों का पता लगाने के लिए हाउसिंग लोन इंश्योरेंस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-you-can-receive-a-pension-of-rs-3000-for-just-rs-55-200-under-the-pm-symy" target="_blank">जानिए, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYMY) के तहत आपको मात्र 55-200 रुपये में कैसे म‍िलेगी 3000 पेंशन?</a></h3><div>आसान शब्दों में कहें तो होम लोन प्रोटेक्शन प्लान या होम लोन इंश्योरेंस एक इंश्योरेंस प्लान है। होम लोन इंश्योरेंस में मौत होने पर इंश्योरेंस कंपनी बैंकों, NBFCs, या हाउसिंग फाइनेंस फर्मों के साथ होम लोन का बाकी हिस्सा चुकाती है। पॉलिसी का टर्म आमतौर पर लोन के टर्म जितना ही होता है।</div><div>&nbsp;</div><h2>होम लोन इंश्योरेंस के प्रकार</h2><div>कई लोन देने वाली कंपनियाँ लोन लेने वालों को 3 मुख्य प्रकार के होम इंश्योरेंस देती हैं। इन प्लान को रिड्यूसिंग कवर प्लान, हाइब्रिड प्लान और लेवल प्लान के तौर पर बांटा गया है। तीनों प्लान के बीच मुख्य अंतर यह है:</div><div>- लेवल कवरेज प्लान: इंश्योर्ड व्यक्ति का प्रोटेक्शन कवरेज पूरे लोन टर्म में एक जैसा रहता है।</div><div>- हाइब्रिड कवरेज प्लान: लोन के पहले साल में कवरेज पूरा होता है। समय के साथ लोन बैलेंस अमाउंट कम होने पर यह कम होने लगता है।</div><div>- रिड्यूसिंग कवर प्लान: समय बीतने के साथ कवरेज और बकाया लोन दोनों कम हो जाते हैं।</div><div>&nbsp;</div><h2>होम लोन इंश्योरेंस खरीदने के फ़ायदे</h2><div><b>- फाइनेंशियल सिक्योरिटी:</b> जब किसी लोन लेने वाले की मौत हो जाती है और उसके डिपेंडेंट लोन नहीं चुका पाते हैं तो लोन देने वाले को घर का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने और लोन वसूलने के लिए उसे बेचने का अधिकार होता है। हालांकि, ऐसा करने के लिए लोन देने वाले को बहुत ज़्यादा फोरक्लोज़र फीस देनी पड़ती है।</div><div><b>- फ़ैमिली प्रोटेक्शन: </b>डिपेंडेंट को फ़ाइनेंशियल बोझ से बचाता है, मतलब होम लोन इंश्योरेंस पॉलिसी किसी मुसीबत की हालत में किसी के परिवार और डिपेंडेंट को लोन से बचाती है। क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी बकाया हाउस लोन अमाउंट को कवर करेगी, इसलिए आपके अपने सुरक्षित रहेंगे।</div><div><b>- मन की शांति:</b> इमरजेंसी में स्ट्रेस कम करता है, यानी जब आप होम लोन प्रोटेक्शन प्लान खरीदते हैं तो आप ऐसे ऐड-ऑन कवर चुन पाएंगे जो आपको परमानेंट डिसेबिलिटी, गंभीर बीमारियों और नौकरी जाने से बचाते हैं। यह इमरजेंसी की हालत में आपकी सुरक्षा करेगा।</div><div><b>- टैक्स फ़ायदे:</b> सेक्शन 80C/80D के तहत प्रीमियम एलिजिबल हैं।</div><div><b>- क्लेम में आसानी:</b> लेंडर के साथ सीधे कोऑर्डिनेट किया जाता है, जिससे पेमेंट आसान हो जाता है।</div><div><br></div><div>ये फ़ायदे होम लोन इंश्योरेंस को ज़िम्मेदार होमओनरशिप का एक ज़रूरी हिस्सा बनाते हैं। इसके अलावा, अगर आपके पास ये ऐड-ऑन हैं तो आपका बकाया लोन पेमेंट न केवल पॉलिसी होल्डर की मौत की हालत में, बल्कि लोन लेने वाले की डिसेबिलिटी या गंभीर बीमारी की हालत में भी किया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><div>हालांकि अपने परिवार को हाउस लोन इंश्योरेंस से सुरक्षित रखना सही है, लेकिन आपको इसके नुकसानों के बारे में भी पता होना चाहिए, जैसे कि आपके कुल खर्चे बढ़ सकते हैं। इसके बजाय, आप एक आसान टर्म प्लान चुन सकते हैं, जो आपको आपकी सभी मौजूदा देनदारियों, जिसमें आपका मॉर्गेज भी शामिल है, के लिए सस्ता इंश्योरेंस कवरेज देता है। जब आप होम लोन लेते हैं तो आप एक फाइनेंशियल ज़िम्मेदारी लेते हैं जो लोन के समय के आधार पर कई सालों तक जारी रहेगी। हालांकि, क्योंकि आप यह अंदाज़ा नहीं लगा सकते कि लोन के 20 साल से ज़्यादा के समय में क्या हो सकता है, इसलिए होम लोन इंश्योरेंस खरीदकर लोन को सुरक्षित करना एक अच्छा विचार है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 19:16:48 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-is-home-loan-insurance-and-why-is-it-a-profitable-deal</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/4/29/home-loan-insurance_large_1916_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Health Insurance Policy में बीमारी छुपाना पड़ सकता है भारी, इसे Fraud मानकर रद्द हो सकता है क्लेम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-conceal-a-pre-existing-disease]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हेल्थ इंश्योरेंस में Pre-existing Disease छुपाने से आपका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है, पॉलिसी रद्द हो सकती है और भविष्य में इंश्योरेंस मिलना भी मुश्किल हो सकता है। पूर्व शोध IRDAI की रिपोर्ट के अनुसार हर साल लगभग 8 से 10 लाख क्लेम PED या उससे जुड़ी शर्तों की वजह से रिजेक्ट हो जाते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>जब आप अपना हेल्थ इंश्योरेंस कराते है, तो कंपनी आपकी पुरानी बीमारी यानी Pre-existing Disease का रिकॉर्ड मांगती है। यदि आप ऐसे मेंं झूठ बोलते है या जानकारी छुपाते हैं, तो कंपनी आपकी पॉलिसी तुरंत रद्द कर सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह 'अतुल्य विश्वास' (Uberrimae Fidei) के सिद्धांत का उल्लंघन है, जिसे बीमा कंपनी और कानून धोखाधड़ी मानते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-you-can-receive-a-pension-of-rs-3000-for-just-rs-55-200-under-the-pm-symy" target="_blank">जानिए, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYMY) के तहत आपको मात्र 55-200 रुपये में कैसे म‍िलेगी 3000 पेंशन?</a></h3><div>अगर आप यह गलती कर चुके हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी आपका क्लेम स्वीकार नहीं करेगी या आपका प्रीमियम बढ़ा देगी। आइए जानते हैं, क्लेम रिजेक्शन की सच्चाई के साथ बचने के तरीके क्या है।</div><div><br></div><h2>Pre-existing Disease छुपाने के नुकसान</h2><div>हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले Pre-existing Disease छुपाने से आपका क्लेम रद्द हो सकता है, साथ ही कुछ केस में प्रीमियम महंगा हो सकता है। इसीलिए अपनी पहले से मौजूद बीमारी को छुपाने की गलती न करें:</div><div>- हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रद्द होने पर आपकी वर्तमान तक जमा की गई प्रीमियम राशि वापस नहीं की जाती है।</div><div>- यदि एक कंपनी PED छुपाने के कारण पॉलिसी कैंसिल करती है, तो दूसरी कंपनी आसानी से हेल्थ इंश्योरेंस नहीं देती है।</div><div>- यदि आप कंपनी से अपनी बीमारी जानबूझकर छुपाते है तो इसे बीमा कंपनी फ्रॉड मान सकती है, जिससे आपके ऊपर कानूनी कार्यवाही भी हो सकती है।</div><div>- अगर क्लेम के समय अस्पताल के रिकॉर्ड से पुरानी बीमारी का पता चलता है, तो कई कंपनी क्लेम देने से साफ मना कर सकती है।</div><div><br></div><h2>वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवश्यक बात</h2><div>सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस में किसी भी बीमारी को छुपाना महंगा पड़ सकता है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि अगर आप स्वास्थ्य बीमा लेते समय सही जानकारी नहीं देते हैं, तो बीमा कंपनी क्लेम रद्द कर सकती है। इससे आपको भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसलिए हमेशा पूरी और सही जानकारी दें।</div><div><br></div><div>आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस केवल एक विकल्प नहीं बल्कि बड़ी जरूरत है। आमतौर पर आप किसी भी अच्छी कंपनी से बीमा ले सकते है, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले सभी विकल्पों की तुलना करना बेहद आवश्यक है। बेहतर तुलना करने के लिए आप वेटिंग पीरियड, प्रीमियम, को-पेमेंट, कवरेज और मिलने वाले लाभ को ध्यान में रख सकते है। बेहतर फैसले लेने के लिए आप भरोसेमंद प्लेटफॉर्म जैसे <a href="https://www.policybazaar.com/health-insurance/senior-citizen-health-insurance/" target="_blank">Policybazaar </a>की मदद ले सकते हैं, पॉलिसीबाजार सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की तुलना करने, इंश्योरेंस खरीदने और रिन्यू कराने&nbsp; की सुविधा प्रदान करता है।</div><div><br></div><h2>क्लेम रिजेक्शन की सच्चाई&nbsp;</h2><div>हेल्थ इंश्योरेंस में क्लेम रिजेक्शन सभी बीमारियों पर लागू नहीं होता हैं। निम्न बीमारियों को छुपाने से आपको क्लेम मिलना मुश्किल हो सकता है या बहुत लंबे वेटिंग पीरियड तक रुकना पड़ सकता है:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- डायबिटीज: </b>अगर आपने शुगर छुपाई है, तो किडनी फेलियर, हार्ट अटैक या रेटिनोपैथी (आंखों की समस्या) का क्लेम रिजेक्ट हो सकता हैं।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- हायपरटेंशन (High BP): </b>बीपी छुपाने पर स्ट्रोक या पैरालिसिस का क्लेम नहीं मिलता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- अस्थमा: </b>अगर आपने बताया नहीं हैं कि आपको सालों से साँस की दिक्कत है, तो फेफड़ों से जुड़े किसी भी गंभीर इलाज का पैसा कंपनी नहीं देगी।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- थायराइड:</b> इसके कारण होने वाले हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी सर्जरी का क्लेम रुक सकता है।</div><div><br></div><div>अगर आप अपनी बीमारी को कंपनी को पहले ही बता देते है या बाद में भी बताते है, तो कंपनी निम्न शर्तों के साथ उसे स्वीकार कर लेती है:</div><div>&nbsp;</div><div><b>- वेटिंग पीरियड के बाद: </b>अगर आपने बताया है कि आपको 'पथरी' या 'मोतियाबिंद' जैसा कोई भी बीमारी है, तो कंपनी 2 से 4 साल का वेटिंग पीरियड देती है। इस समय के बाद आपको हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम आसानी से मिल सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- अन्य बीमारियाँ: </b>ऐसी बीमारियाँ जो पॉलिसी लेने के बाद हुई हैं, जैसे डेंगू, मलेरिया, एक्सीडेंट, या अचानक हुआ अपेंडिक्स, तो उनका क्लेम मिलता है। हालांकि इसके लिए भी वेटिंग पीरियड हो सकता है।</div><div>&nbsp;</div><div><b>- दुर्घटना - </b>यदि आपके साथ दुर्भाग्यवश कोई दुर्घटना हो जाती है, तो इसके लिए हेल्थ इंश्योरेंस में कोई वेटिंग पीरियड नहीं होता है, ऐसी स्थिति में कंपनी आपका क्लेम स्वीकार करती है।&nbsp;</div><div><br></div><h2>इंश्योरेंस कंपनी को कैसे पता चलता है?</h2><div>बीमा कंपनी, हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम देने से पहले, मेडिकल रिपोर्ट की सहायता से पहले से मौजूद बीमारी का पता लगाती है। साथ ही, जब आप अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहे होते हैं, तो डॉक्टर आपको डिस्चार्ज समरी (Discharge Summary) देते हैं, जिससे पता चल जाता है कि बीमारी कब से है। इसके अलावा अगर आपकी उम्र 45 से ज्यादा है या आप बड़ी बीमा राशि ले रहे हैं, तो कंपनी खुद आपके टेस्ट करवाती है।</div><div><br></div><div>ज्यादातर मामलों में डॉक्टर की रिपोर्ट में यह जानकारी आ जाती है कि आपको बीमारी कब से हैं। यदि आप बड़ा क्लेम 2 साल के भीतर लेने की कोशिश करते हैं, तो बीमा कंपनी पुराने फैमिली डॉक्टर, पुराने अस्पताल रिकॉर्ड और यहां तक कि आपके पास के केमिस्ट शॉप पर भी पूछ सकती हैं।&nbsp;</div><div><br></div><h2>क्लेम रिजेक्शन से बचने के तरीके</h2><div>हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय यदि आपने बीमा कंपनी से Pre-existing Disease छुपाने की गलती की है, तो पॉलिसी कराने के 15 दिन के अंदर कंपनी को मेल करके सूचित कर दें। इससे आप फ्रॉड के केस से बच सकते है, हालाँकि, इससे हो सकता है, कि आपका प्रीमियम लगभग 15% तक बढ़ जाए, लेकिन यह भविष्य में होने वाले नुकसान से बचा लेता है।&nbsp;</div><div><br></div><div>इसके अलावा, हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पॉलिसी के नियम व शर्तों को ध्यान से पढ़े, प्रीमियम का भुगतान समय पर करें, सभी दस्तावेज पूरे रखें और समय रहते पॉलिसी रिन्यू कराएं। अगर आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स हो जाती है, तो आपके पिछले सभी 'वेटिंग पीरियड' के लाभ खत्म हो जाते हैं साथ ही नए क्लेम मिलने में भी दिक्कत आ सकती है। इन सभी बातों पर ध्यान देकर क्लेम रिजेक्शन से बचा जा सकता है।&nbsp;</div><div><br></div><h2>निष्कर्ष&nbsp;</h2><div>सभी बीमा कंपनियाँ ईमानदारी और भरोसे के साथ काम करती हैं। यदि पॉलिसीधारक अपनी पहले से मौजूद बीमारी को छुपाता है, तो इसे फ्रॉड माना जाता है। ऐसे मामले में न केवल हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है, बल्कि भविष्य में किसी अन्य बीमा कंपनी से भी हेल्थ इंश्योरेंस मिलना भी कठिन हो जाता है। साथ ही, अब तक जो प्रीमियम आपने भरा है, वह वापस नहीं मिलता है। इसलिए हमेशा पॉलिसी फॉर्म में सही और पूरी जानकारी देना सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम माना जाता है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:07:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/what-happens-if-you-conceal-a-pre-existing-disease</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/4/13/health-insurance_large_1207_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जानिए, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYMY) के तहत आपको मात्र 55-200 रुपये में कैसे म‍िलेगी 3000 पेंशन?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-you-can-receive-a-pension-of-rs-3000-for-just-rs-55-200-under-the-pm-symy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना (PM SYMY) असंगठित क्षेत्र के गरीब श्रमिकों के लिए एक सरकारी पेंशन योजना है, जिसके तहत 60 साल की उम्र के बाद हर महीने 3000 रुपये की पेंशन मिलती है। वो भी तब, जब आपने लगभग 55–200 रुपये प्रति माह इस फंड में योगदान दिया हो, जो कि उम्र के हिसाब से निर्धारित है। फिर इसमें सरकार आपके योगदान के बराबर ही अतिरिक्त राशि जमा करती है, जिससे लंबे समय में 3000 ₹ प्रतिमाह की पेंशन व्यवस्था बनती है।&nbsp;</div><div><br></div><h2>#&nbsp; समझिए, PM SYMY क्या है? यह किसके लिए है?</h2><div><br></div><div>PM SYMY एक “केंद्रीय क्षेत्र की पेंशन योजना” है जो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों (रेहड़ी पटरी वाले, मजदूर, घरेलू कामगार, निर्माण मजदूर, एग्रीकल्चर वर्कर आदि) के लिए 2019 में शुरू की गई थी। इसे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय चलाता है और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पेंशन फंड के रूप में काम करता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/11-years-of-pm-mudra-yojana-pm-modi-said-the-dream-of-self-employment-of-youth-has-come-true" target="_blank">PM Mudra Yojana के 11 साल: PM Modi बोले- युवाओं के Self-Employment का सपना हुआ साकार</a></h3><h2># जानिए, आखिर महज 55 रुपये में 3000 रुपये की पेंशन कैसे?</h2><div><br></div><div>दरअसल, PM SYMY में आपकी प्रवेश आयु (Entry Age) के हिसाब से आपको मासिक योगदान 55 से 200 रुपये के बीच देना होता है; जिसके बाद सरकार उतनी ही राशि आपके लिए जमा करती है, यानी कुल 110 से 400 रुपये प्रति माह तक फंड में जाता है। जैसे: अगर आप 18 साल की उम्र में जुड़ते हैं तो आप 55 रुपया/माह, और सरकार 55 रुपया/माह देती है (कुल 110 रुपया)। इस तरह लगभग 20–40 साल तक श्रमिक से योगदान लिया जाता है, जिससे 60 साल की उम्र तक पैसे ब्याज सहित बढ़ जाते हैं और फिर पेंशन के रूप में 3000 रुपये/माह वापस आते हैं। कहने का तातपर्य यह कि जितनी कम उम्र में आप जुड़ते हैं, फंड को उतने ज्यादा साल के लिए ब्याज लगता है, इसलिए आपका अपना मूल योगदान बहुत कम (जैसे 55 रुपये) ही रह जाता है, लेकिन लंबे समय में यह 3000 ₹/माह तक पहुँच जाता है। वर्तमान में यह योजना 18–40 साल के असंगठित श्रमिकों के लिए खुली है, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये से कम है और जो EPFO, ESIC या NPS के सदस्य नहीं हैं।&nbsp;</div><div><br></div><h2># देखिए, प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना (PM SYMY) में घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?</h2><div><br></div><div>प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना (PM SYMY) में घर बैठे ऑनलाइन आवेदन दो तरीकों से कर सकते हैं: पहला, सीधा ऑनलाइन (सेल्फ रजिस्ट्रेशन), या कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से आवेदन, जहाँ आपकी ओर से ऑनलाइन फॉर्म भरा जाता है। लिहाजा, नीचे बताए हुए तरीके से आप अपने मोबाइल, लैपटॉप या कम्प्यूटर से सीधा ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसके लिए चरण दर चरण (स्टेप वाइज) फॉर्म भरकर आप निम्नलिखित तरीके से जमा करें।</div><div><br></div><div>पहला, बेसिक जानकारी और लिंक: PM SYMY के ऑफिशियल पोर्टल: maandhan.in पर जाकर “PM Shram Yogi Maandhan” / “Mandhan” या लॉगिन/ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन वाला सेक्शन ढूँढें। यहाँ आप सेल्फ इनरोलमेंट (Self Enrollment) ऑप्शन चुनकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>दूसरा, ऑनलाइन आवेदन के स्टेप: आप पोर्टल खोलें और फिर रजिस्टर/लॉगिन ब्राउज़र में maandhan.in खोलें, तब ऊपरी नेविगेशन बार में “Enroll / Apply” / “Self Enrollment” वाले लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद अपना 10 डिजिट मोबाइल नंबर दर्ज करें; और उस पर आए OTP को वैलिडेट करके लॉगिन करें। उसके बाद&nbsp; छह स्टेप फॉर्म भरें।पोर्टल पर आमतौर पर 6 स्टेप वाला एनरोलमेंट फॉर्म दिखता है: चरण 1: पर्सनल डिटेल्स – नाम, जन्म तिथि, पता, लिंग, उम्र, आदि। चरण 2: आधार और e Shram/कार्ड डिटेल्स – आधार नंबर, e Shram कार्ड नंबर (अगर हो तो) दर्ज करें। चरण 3: बैंक डिटेल्स – बचत बैंक खाता, आईएफएससी, नाम आदि। यहाँ ऑटो डेबिट की सुविधा चुननी होती है, ताकि हर महीने योगदान बैंक से कट सके। मैन्डेट फॉर्म अपलोड करें। पोर्टल से मैन्डेट फॉर्म (Mandate Form) डाउनलोड करें, उसे भरकर स्कैन/मोबाइल की फोटो लें। चरण 4: इस फॉर्म की स्कैन कॉपी या फोटो अपलोड करें (JPG/PDF आदि फॉर्मेट में)। चरण 5: फिर, भुगतान करें। फॉर्म वेरिफाई होने के बाद आपको पहली सदस्यता/फीस का भुगतान करना होता है, जो आपकी उम्र के हिसाब से 55–200 रुपये प्रति माह तक हो सकती है। भुगतान ऑनलाइन गेटवे या नियत समय पर बैंक ऑटो डेबिट से होता है। चरण 6: सफल रजिस्ट्रेशन और कार्ड- सफल आवेदन के बाद आपको पीएम SYM यूनिक आईडी / कार्ड नंबर मिलता है, जिससे आप भविष्य में नेट बैंकिंग या योजना के पोर्टल पर स्टेटस चेक कर सकते हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>तीसरा, अगर आप ऑफलाइन/सीएससी से करवाना चाहें किसी नजदीकी CSC / जिला श्रम विभाग / उपायुक्त कार्यालय पर जाएँ। अपने साथ ले जाएँ: आधार कार्ड, बचत बैंक खाता पासबुक/IFSC, और फोटो आईडी/पता प्रमाण (जैसा लोकल अधिकारी बोले)। सीएससी ऑपरेटर आपका आधार बायोमेट्रिक वेरिफाई करके ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरेगा, आप एक बार नकद भुगतान करेंगे और बाद में आपका बैंक खाता ऑटो डेबिट शुरू हो जाता है।</div><div><br></div><div>चौथा, जरूरी चेतावनी / टिप्स: आपकी आयु 18–40 साल और मासिक आय 15,000 रुपये या कम होनी चाहिए, और आप EPFO/ESIC/NPS या किसी और सरकारी पेंशन योजना के लाभार्थी नहीं होने चाहिए। फॉर्म भरते समय मोबाइल नंबर, आधार, बैंक आईडी और खाता नंबर सही सही दें; छोटी सी गलती से आपको पेंशन या लॉगिन इंटरफेस में दिक्कत हो सकती है।</div><div><br></div><h2># प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन (PM SYM) योजना के लिए पात्रता की साफ साफ शर्तें जानिए</h2><div><br></div><div>प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन (PM SYM) योजना के लिए पात्रता कुछ साफ साफ शर्तों पर निर्भर करती है, जो मुख्यतः उम्र, आय और काम के प्रकार से जुड़ी हैं।</div><div>मुख्य पात्रता शर्तें:&nbsp; आयु सीमा: आवेदक की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। मासिक आय: आवेदक की मासिक आय ₹15,000 या उससे कम होनी चाहिए।</div><div>असंगठित क्षेत्र का कामगार: आवेदक असंगठित क्षेत्र में काम कर रहा हो, जैसे:रेहड़ी पटरी वाले, निर्माण श्रमिक, दिहाड़ी मजदूर,घरेलू कामगार, कृषि श्रमिक, रिक्शा चालक, बीड़ी श्रमिक, बुनकर, मछुआरे आदि।&nbsp;</div><div><br></div><div>किसे छोड़ा जाता है / अपात्रता: संगठित क्षेत्र के लाभार्थी नहीं होना: अगर आप EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि), ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) या NPS (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) के सदस्य हैं, तो PM SYM के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। आयकरदाता नहीं होना: जो इनकम टैक्स भुगतानकर्ता हैं (यानी आय के आधार पर आयकर देने वाले), वे आमतौर पर इस योजना के लिए अपात्र गिने जाते हैं। अन्य सरकारी पेंशन योजना: अगर आपको पहले से ही किसी अन्य सरकारी पेंशन/सुरक्षा योजना का लाभ मिल रहा है, तो आप PM SYM में जुड़ने के लिए पात्र नहीं हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>अन्य जरूरी जानकारी निम्नलिखित है- आधार और बैंक खाता: आवेदक के पास आधार कार्ड और सक्षम बचत बैंक खाता (IFSC के साथ) होना चाहिए, क्योंकि योगदान बैंक खाते से ऑटो डेबिट होता है।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 17:19:48 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/find-out-how-you-can-receive-a-pension-of-rs-3000-for-just-rs-55-200-under-the-pm-symy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/4/8/pmsymy_large_1719_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सड़क पर स्टंटबाजी करना पड़ेगा भारी, वकील से जानें कितने साल की जेल और जुर्माने की राशि?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/doing-stunts-on-the-road-will-prove-costly-know-from-the-lawyer-how-many-years-of-jail]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>रेसिंग और स्टंट ड्राइविंग को बहुत खतरनाक काम माना जाता है, जिससे पब्लिक सेफ्टी के साथ-साथ ड्राइवर और पैसेंजर की सेफ्टी को भी गंभीर खतरा होता है। भारत में मोटर व्हीकल एक्ट पब्लिक सड़कों पर इस तरह की लापरवाही से ड्राइविंग को रोकने के लिए सख्त नियम बनाता है और नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। गैर-कानूनी स्ट्रीट रेसिंग और स्टंट ड्राइविंग की बढ़ती घटनाओं की वजह से इन खतरनाक कामों को रोकने के लिए सख्ती से कार्रवाई करने पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया है।</div><div>&nbsp;</div><div>सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए सड़कों पर स्टंटबाजी (Stunt Driving) का चलन बढ़ रहा है। लेकिन यह न केवल आपकी बल्कि दूसरों की जान के लिए भी खतरा है। कानून के मुताबिक, सड़क पर स्टंट करना गंभीर अपराध है और इसके लिए भारी जुर्माना, लाइसेंस सस्पेंशन और जेल तक हो सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-to-claim-compensation-of-up-to-100-times-annual-rent-if-items-go-missing-from-bank-locker" target="_blank">जानिए, बैंक लॉकर से सामान गायब होने पर कैसे मिलेगा सालाना किराया से 100 गुना तक ज्यादा मुआवजा?</a></h3><h2>स्टंट ड्राइविंग और रेसिंग क्या होती है?&nbsp;</h2><div>रेसिंग का मतलब है कोई भी कॉम्पिटिशन जिसमें गाड़ियों को तेज़ स्पीड में चलाया जाता है, आम तौर पर मनोरंजन के लिए, बिना अधिकारियों की इजाज़त के पब्लिक सड़कों पर।</div><div>&nbsp;</div><div>स्टंट ड्राइविंग में खतरनाक हरकतें करना शामिल है जैसे ड्रिफ्टिंग, व्हीलीज़, बर्नआउट, या कोई और जोखिम भरा काम जिससे ड्राइवर, पैसेंजर और सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों को खतरा हो।</div><div>&nbsp;</div><h2>स्टंटबाजी को कानून कैसे देखता है?</h2><div>भारत में सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों को मुख्यतः मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 (Motor Vehicles Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत देखा जाता है। स्टंटबाजी को आमतौर पर इन श्रेणियों में रखा जाता है:</div><div>- खतरनाक ड्राइविंग (Dangerous Driving)</div><div>- लापरवाही से वाहन चलाना</div><div>- सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालना</div><div>&nbsp;</div><h2>स्टंट ड्राइविंग के लिए कानून:</h2><div>- फाइन: मोटर व्हीकल एक्ट (खासकर सेक्शन 184) के तहत, पब्लिक सड़कों पर लापरवाही से गाड़ी चलाने या स्टंट करने पर ₹5,000 या उससे ज़्यादा का जुर्माना लग सकता है।</div><div>- कैद: अगर स्टंट ड्राइविंग या रेसिंग की वजह से किसी को गंभीर चोट लगती है या मौत हो जाती है तो नियम तोड़ने वाले को 1 साल या उससे ज़्यादा की जेल हो सकती है।</div><div><br></div><div>अगर लापरवाही से गाड़ी चलाने या रेसिंग करने से पब्लिक प्रॉपर्टी को बहुत ज़्यादा नुकसान होता है या दूसरों को चोट लगती है तो नियम तोड़ने वाले को ज़्यादा जेल हो सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h2>कितनी हो सकती है सजा और जुर्माना?</h2><h2>1. खतरनाक ड्राइविंग (Motor Vehicles Act, Section 184)</h2><div><b>पहली बार अपराध:</b> 6 महीने तक की जेल या&nbsp; ₹1,000 से ₹5,000 तक जुर्माना</div><div>&nbsp;</div><div><b>दोबारा अपराध: </b>2 साल तक की जेल या&nbsp; ₹10,000 तक जुर्माना</div><div>&nbsp;</div><div><b>2. लापरवाही से वाहन चलाना (IPC Section 279) :</b> 6 महीने तक की जेल&nbsp; या ₹1,000 तक जुर्माना या दोनों</div><div><br></div><div><b>3. जान को खतरे में डालना (IPC Section 336/337/338) :</b> अगर किसी को चोट पहुंचती है तो 3 महीने से 2 साल तक की सजा और जुर्माना भी लग सकता है</div><div><br></div><div><b>4. गंभीर दुर्घटना या मौत की स्थिति: </b>IPC Section 304A के तहत 2 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों भी लग सकता है&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h2>लाइसेंस और वाहन पर क्या कार्रवाई हो सकती है?</h2><div>- ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है</div><div>- वाहन को जब्त (Seize) किया जा सकता है</div><div>- दोबारा लाइसेंस पाने में मुश्किलें आ सकती हैं</div><div>&nbsp;</div><h2>वकीलों की क्या सलाह है?</h2><div>- सड़क पर स्टंट करना “एंटरटेनमेंट” नहीं, बल्कि कानूनी जोखिम है</div><div>- पुलिस अब ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई कर रही है</div><div>- सोशल मीडिया पर वीडियो डालना भी आपके खिलाफ सबूत बन सकता है</div><div>&nbsp;</div><h2>युवाओं के लिए जरूरी संदेश</h2><div>- खाली सड़कों पर भी स्टंट करना सुरक्षित नहीं और न ही इसे कानूनी मान्यता&nbsp;</div><div>- रेसिंग या स्टंट के लिए केवल अधिकृत ट्रैक का उपयोग करें</div><div>- अपनी और दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें</div><div>&nbsp;</div><div>सड़क पर स्टंटबाजी करना भारी पड़ सकता है - न सिर्फ आर्थिक रूप से, बल्कि कानूनी और सामाजिक रूप से भी। भारत में स्टंट ड्राइविंग एक गंभीर अपराध है क्योंकि इससे पब्लिक सेफ्टी और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों को बड़ा खतरा होता है। ऐसी एक्टिविटीज़ के लिए भारी फाइन, लाइसेंस सस्पेंशन, गाड़ी इंपाउंडमेंट और जेल भी हो सकती है। ड्राइवरों के लिए यह ज़रूरी है कि वे इस तरह की लापरवाही वाली हरकतों से बचें और अपनी और सड़क पर दूसरों की सेफ्टी पक्का करने के लिए ट्रैफिक कानूनों का पालन करें। सुरक्षित ड्राइविंग ही सबसे अच्छा विकल्प है - क्योंकि सड़क पर जिम्मेदारी ही असली समझदारी है।</div><div>&nbsp;</div><div>- जे. पी. शुक्ला&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:31:28 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/doing-stunts-on-the-road-will-prove-costly-know-from-the-lawyer-how-many-years-of-jail</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/3/31/stunt-driving_large_1731_23.webp" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जानिए, बैंक लॉकर से सामान गायब होने पर कैसे मिलेगा सालाना किराया से 100 गुना तक ज्यादा मुआवजा?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-to-claim-compensation-of-up-to-100-times-annual-rent-if-items-go-missing-from-bank-locker]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वर्ष 2021 में बैंक लॉकर सुविधा के लिए विभिन्न संशोधित दिशानिर्देश जारी किए, जो विगत 1 जनवरी 2022 से लागू हैं। इनके तहत बैंक लॉकर से सामान गायब होने पर बैंक की जिम्मेदारी तय की गई है। साथ ही ग्राहक की लापरवाही के बारे में भी नियमसम्मत जानकारी उपलब्ध कराई गई है ताकि किसी भी प्रकार का नीतिगत विरोधाभास नहीं बचे। यही वजह है कि बैंक लॉकर के धंधे में तेजी आई है।</div><div><br></div><div>इस बारे में मुख्य गाइडलाइंस निम्नलिखित है- आरबीआई के अनुसार, बैंक लॉकर की सामग्री का इन्वेंटरी रखने या उसके मूल्य की जांच करने का अधिकार बैंक को नहीं है।हां, लॉकर हायरर&nbsp; को अवैध या खतरनाक वस्तुएं रखने की मनाही है, और बैंक को अपनी सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होती है। इसलिए लॉकर एग्रीमेंट में ये शर्तें शामिल होनी चाहिए।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/old-regime-has-come-under-discussion-amid-the-new-income-tax-draft-rules" target="_blank">नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट नियमों के बीच चर्चा में आई Old Regime, फिर से बन सकती है फायदेमंद; इन्हें मिलेगी राहत</a></h3><h2># बैंक की लापरवाही, चोरी, आग, डकैती, लूट या कर्मचारी धोखाधड़ी से नुकसान होने पर बैंक सालाना लॉकर किराए के 100 गुना मुआवजा देगा</h2><div>जहां तक मुआवजे की प्रक्रिया की बात है तो बैंक की लापरवाही, चोरी, आग, डकैती, लूट या कर्मचारी धोखाधड़ी से नुकसान होने पर बैंक सालाना किराए के 100 गुना मुआवजा देगा। उदाहरणस्वरूप, यदि सालाना किराया 4000 रुपये है, तो अधिकतम 4 लाख रुपये मिल सकते हैं।वहीं, प्राकृतिक आपदा या ग्राहक की एकमात्र लापरवाही के मामले में बैंक जिम्मेदार नहीं होता है।</div><div><br></div><div>उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने बैंक लॉकर नियमों को 2021 से कई चरणों में अपडेट किया है, जिसमें 2025 में बायोमेट्रिक एक्सेस, सीसीटीवी और क्लेम निपटान पर नए निर्देश शामिल हैं। ये 31 दिसंबर 2025 तक पूरी तरह लागू हों चुके हैं। सुरक्षा उपाय के तहत, बैंकों को लॉकर रूम में बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/आइरिस) सत्यापन, 24x7 सीसीटीवी (180 दिन फुटेज) और एक्सेस पर एसएमएस/ईमेल अलर्ट अनिवार्य करना होगा। वहीं ड्यूल-की सिस्टम बरकरार रहेगा।&nbsp;</div><div><br></div><div>जहां तक मुआवजा और दायित्व की बात है तो बैंक की गलती से नुकसान पर सालाना किराए का 100 गुना मुआवजा मिलेगा। जबकि नकदी, हथियार या खतरनाक वस्तुएं रखना प्रतिबंधित है; और 3 साल निष्क्रियता पर बैंक लॉकर खोल सकते हैं। वहीं, क्लेम निपटान हेतु मृत ग्राहक के लॉकर/खाते क्लेम पर सभी दस्तावेज मिलने के 15 दिनों में निपटारा अनिवार्य है, जबकि देरी पर मुआवजा मिलेगा। ये नियम 31 मार्च 2026 तक पूर्ण रूप से लागू हो चुके हैं। इसके तहत स्टैंडर्ड एग्रीमेंट और नॉमिनेशन अपडेट जरूरी है।</div><div><br></div><div>बैंक लॉकर से नुकसान होने पर आरबीआई (RBI) गाइडलाइंस के अनुसार, बैंक सालाना किराए के 100 गुना तक मुआवजा देगा, यदि नुकसान बैंक की लापरवाही, चोरी, आग, डकैती या कर्मचारी धोखाधड़ी से हुआ हो तो। वहीं मुआवजे की गणना के लिए निम्न उदाहरण दिए गए हैं, जिसके मुताबिक, यदि आपका लॉकर किराया ₹3,000 सालाना है, तो अधिकतम ₹3,00,000 (3,000 x 100) मिल सकता है, भले ही सामान की कीमत इससे ज्यादा हो।यह सीमा किराए पर आधारित है, क्योंकि बैंक लॉकर सामग्री का मूल्यांकन नहीं करता। सवाल है कि आखिर कब यह मुआवजा नहीं मिलेगा, तो जवाब होगा कि प्राकृतिक आपदा या ग्राहक की एकमात्र गलती (जैसे गलत PIN) पर बैंक जिम्मेदार नहीं होगा। वहीं दावा साबित करने के लिए एफआईआर, सीसीटीवी सबूत जरूरी हैं; जबकि अतिरिक्त बीमा कराना उचित होता है।</div><div><br></div><h2># यदि कुछ गड़बड़ हुआ है तो दावा कैसे करें?</h2><div>अब सवाल है कि यदि कुछ गड़बड़ हुआ है तो दावा कैसे करें? तो यह जान लीजिए कि नुकसान की सूचना बैंक को तुरंत दें और पुलिस में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराएं। जिसके बाद बैंक को सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, एक्सेस लॉग और जांच पूरी होने तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। तब मौजूदा लॉकर धारकों के लिए 1 जनवरी 2023 तक एग्रीमेंट अपडेट करना अनिवार्य था और अब नए नियमों के मुताबिक ही बैंक और ग्राहक में एग्रीमेंट बन रहे हैं।</div><div><br></div><h2># RBI लॉकर नियमों में "एक्ट ऑफ गॉड" क्या है? इससे बचने के लिए करवा सकते हैं वस्तु बीमा!</h2><div>आरबीआई (RBI) लॉकर नियमों में "एक्ट ऑफ गॉड" प्राकृतिक आपदाओं को संदर्भित करता है। एक्ट ऑफ गॉड की परिभाषा के तहत प्राकृतिक आपदा जैसी घटनाएं, जो मानवीय नियंत्रण से बाहर होती हैं, जैसे भूकंप, बाढ़, तूफान, बिजली गिरना या सुनामी। इनमें बैंक की कोई लापरवाही नहीं मानी जाती। लिहाजा मुआवजे पर इसका प्रभाव पड़ता है। चूंकि ऐसी आपदाओं से लॉकर में सामान नष्ट या गायब होने पर बैंक कोई मुआवजा नहीं देगा। इसलिए ऐसी आफत से बचने के लिए बैंक को लॉकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होते हैं, जैसे सीसीटीवी और मजबूत ताले। वहीं, चोरी या बैंक कर्मचारी की गलती में 100 गुना किराए तक मुआवजा मिल सकता है। वहीं इस क्षति से बचने के लिए आप लॉकर वस्तु बीमा करवा सकते हैं, ताकि आपके क्षति की भरपाई संभव हो सके।</div><div><br></div><h2># समझिए, आरबीआई लॉकर नियमों में एक्ट ऑफ गॉड के अलावा और किन स्थितियों में बैंक मुआवजा नहीं देगा</h2><div>हालांकि, आरबीआई (RBI) लॉकर नियमों में एक्ट ऑफ गॉड के अलावा भी कुछ स्थितियां हैं जहां बैंक मुआवजा नहीं देगा। जैसे, ग्राहक की लापरवाही यानी कि अगर ग्राहक लॉकर की कुंजी खो देता है, गलत व्यक्ति को पहुंच देता है या लॉकर का अनधिकृत उपयोग करता है, तो बैंक जिम्मेदार नहीं माना जाएगा। वहीं लॉकर समझौते में हस्ताक्षर न करने या नियमों का पालन न करने पर भी मुआवजा नहीं मिलेगा। वहीं, अन्य अपवाद स्वरूप बैंक द्वारा लॉकर बीमा न कराने पर भी, नुकसान की कुल राशि का भुगतान नहीं होगा- केवल वार्षिक किराए के 100 गुना तक सीमित रहता है। जबकि युद्ध, दंगा या आतंकवादी हमले जैसी घटनाओं में भी बैंक की दायित्व सीमा लागू हो सकती है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के समान छूट मिलती है। इसलिए हमेशा लिखित समझौता जांचें।&nbsp;</div><div><br></div><div>आपको यह पता होना चाहिए कि विभिन्न बैंकों में लॉकर किराया आकार, स्थान (मेट्रो/शहरी/ग्रामीण) और बैंक नीति पर निर्भर करता है, जो सालाना जीएसटी (GST) सहित लिया जाता है। ये शुल्क 2026 में अपडेटेड हैं और बदल सकते हैं। यदि प्रमुख बैंकों के किराए की तुलना करनी है तो सटीक जानकारी के लिए बैंक शाखा से संपर्क करें। यह भी जान लें कि लॉकर किराया अग्रिम लिया जाता है, और 3 साल का एक सावधि जमा (FD) भी जरूरी हो सकता है।</div><div><br></div><h2># बैंकों में लॉकर लेने के लिए एफडी (FD) की आवश्यकता पर नियम जानिए</h2><div>चूंकि बैंकों में लॉकर लेने के लिए एफडी (FD) की आवश्यकता कई बार लगाई जाती है, लेकिन यह आरबीआई (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, वैकल्पिक है। एफडी (FD) की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं- कई बैंक लॉकर किराए की वसूली सुनिश्चित करने के लिए 3 साल के किराए के बराबर एफडी (FD) मांगते हैं, जिसका ब्याज किराए में समायोजित होता है। इससे किराया बकाया रहने पर बैंक सुरक्षित रहता है। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक लॉकर आवंटन के लिए एफडी (FD) या बीमा अनिवार्य नहीं कर सकते; केवल किराया और शुल्क ही पर्याप्त हैं। ऐसे में यदि बैंक जबरदस्ती करें, तो शिकायत दर्ज कराएं। कुछ बैंक इसे स्वेच्छा नीति के रूप में रखते हैं ताकि लॉकर उपलब्धता प्रबंधित रहे।</div><div><br></div><div>- कमलेश पांडेय</div><div>वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 17:03:57 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/how-to-claim-compensation-of-up-to-100-times-annual-rent-if-items-go-missing-from-bank-locker</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/3/30/bank-locker_large_1708_23.webp" />
    </item>
  </channel>
</rss>