किन परिस्थितियों में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम हो जाता है रिजेक्ट? ज्यादातर मामलों में होते हैं ये कारण

पॉलिसी लेते समय यदि आपने पहले से मौजूद किसी बीमारी, जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग की जानकारी नहीं दी है और बाद में जांच में यह सामने आ जाता है तो बीमा कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। इसलिए आवेदन के समय सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही-सही देना जरूरी है।
बीमारी या दुर्घटना के समय आर्थिक सुरक्षा देने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस एक महत्वपूर्ण साधन है। हालांकि कई बार पॉलिसीधारकों को तब बड़ा झटका लगता है जब अस्पताल में इलाज के बाद उनका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। अधिकांश मामलों में क्लेम किसी तकनीकी कारण या पॉलिसी की शर्तों का पालन नहीं करने की वजह से अस्वीकृत होता है। इसलिए पॉलिसी खरीदने के साथ-साथ उसके नियमों को समझना भी उतना ही जरूरी है।
किन कारणों से हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है?
1. पहले से मौजूद बीमारी (Pre-existing Disease) की जानकारी छिपाना
पॉलिसी लेते समय यदि आपने पहले से मौजूद किसी बीमारी, जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग की जानकारी नहीं दी है और बाद में जांच में यह सामने आ जाता है तो बीमा कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। इसलिए आवेदन के समय सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही-सही देना जरूरी है।
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2. वेटिंग पीरियड के दौरान क्लेम करना
अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में कुछ बीमारियों और पहले से मौजूद रोगों के लिए वेटिंग पीरियड होता है। यदि इस अवधि के दौरान इलाज कराया जाता है तो क्लेम स्वीकार नहीं किया जा सकता।
3. पॉलिसी में शामिल न होने वाला इलाज
हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ एक्सक्लूजन (Exclusions) होते हैं। कॉस्मेटिक सर्जरी, केवल सौंदर्य बढ़ाने के लिए किए गए उपचार, कुछ वैकल्पिक उपचार या पॉलिसी में शामिल न किए गए मेडिकल खर्चों का क्लेम अस्वीकार किया जा सकता है।
4. समय पर बीमा कंपनी को सूचना न देना
कैशलेस इलाज या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में बीमा कंपनी या थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) को तय समय के भीतर सूचना देना जरूरी होता है। देरी होने पर क्लेम प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
5. दस्तावेज अधूरे या गलत होना
अस्पताल के बिल, डिस्चार्ज समरी, डॉक्टर की रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट या अन्य जरूरी दस्तावेज अधूरे या गलत होने पर भी क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
6. पॉलिसी का लैप्स होना
यदि समय पर प्रीमियम जमा नहीं किया गया और पॉलिसी लैप्स हो गई, तो उस अवधि में किए गए इलाज का क्लेम स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्लेम रिजेक्ट होने से कैसे बचें?
- पॉलिसी खरीदते समय सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही दें।
- पॉलिसी के नियम, कवरेज और एक्सक्लूजन ध्यान से पढ़ें।
- वेटिंग पीरियड की जानकारी रखें।
- अस्पताल में भर्ती होने पर बीमा कंपनी को समय पर सूचना दें।
- इलाज से जुड़े सभी मूल दस्तावेज सुरक्षित रखें।
- समय पर प्रीमियम का भुगतान करें और पॉलिसी को सक्रिय रखें।
यदि क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?
यदि आपको लगता है कि क्लेम गलत तरीके से अस्वीकार किया गया है तो सबसे पहले बीमा कंपनी से लिखित कारण मांगें। इसके बाद कंपनी की ग्रिवेंस रिड्रेसल (शिकायत निवारण) प्रणाली में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यदि समस्या का समाधान नहीं होता तो इंश्योरेंस ओम्बुड्समैन या भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के शिकायत पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है।
लेकिन, यह पक्का करने के लिए कि आपका क्लेम रिजेक्ट न हो, खरीदते समय सभी पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में ईमानदारी से बताएं, हॉस्पिटल में भर्ती होने के 24-48 घंटों के अंदर इंश्योरेंस कंपनी को बताएं और जमा करने के लिए ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें।
हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने के पीछे ज्यादातर मामलों में गलत जानकारी देना, वेटिंग पीरियड के दौरान क्लेम करना, पॉलिसी की शर्तों की अनदेखी और दस्तावेजों में कमी जैसे कारण जिम्मेदार होते हैं। थोड़ी सावधानी और सही जानकारी के साथ इन समस्याओं से बचा जा सकता है। इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के बाद केवल प्रीमियम भरना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सभी शर्तों और प्रक्रियाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है।
- जे. पी. शुक्ला
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