By अंकित सिंह | Jul 28, 2026
लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ़ संशोधन बिल पर चल रही बहस के दौरान SP के अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने एक 'प्रधान' को बचाने के लिए दूसरे 'प्रधान' को हटा दिया है। अखिलेश यादव ने 'प्रधान' शब्द का मज़ाकिया अंदाज़ में इस्तेमाल करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि जब मंत्री (पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान) (संसद) पहुँचे, तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया। सोचिए सदस्यों को कितनी बड़ी राहत मिली होगी और वे किस बड़े संकट से बच गए। एक 'प्रधान' को हटाकर, आपने असल में 'प्रधानमंत्री' को बचा लिया।
मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि समस्या कानूनों की नहीं, बल्कि नीयत की है। उन्होंने कहा कि मैं दूर से ही विरोध-प्रदर्शन देख रहा था। जीत के बाद जो नारे लगाए गए, वे सरकार के ख़िलाफ़ थे। यह सरकार इस बात पर गर्व करती थी कि वह किसी के सामने नहीं झुकती। इससे पहले कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने लोकसभा में परीक्षा प्रश्नपत्र निरोधक कानून को मोदी सरकार की ‘‘विफलता का स्मारक’’ करार दिया और कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को सदन में इसका जवाब देना चाहिए कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था। उन्होंने सदन में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए और यह दावा किया कि 2024 में लाया गया मूल कानून भी पेपर लीक रोकने में नाकाम रहा था और नया प्रस्तावित कानून भी अपने उद्देश्य में सफल नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि मंत्री (जितेंद्र सिंह) के वक्तव्य और विधेयक के प्रावधानों से स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है और यह केवल दिखावे का विधेयक है। उनके मुताबिक, 2024 में जब इसी तरह का विधेयक लाया गया था तब सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए दावा किया था कि पेपर लीक नहीं होगा, लेकिन उसी वर्ष नीट-यूजी पेपर लीक मामले में 45 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें से अधिकतर को जमानत मिल चुकी है। उनका कहना था कि मामले के कथित मास्टरमाइंड को भी जमानत मिल गई।
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