लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के लापता होने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, पुलिस कमिश्नर से मांगा जवाब, DCP को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश

By रेनू तिवारी | Jun 09, 2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नाबालिग लड़कियों के लापता होने और अपहरण के बढ़ते मामलों पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसे मामलों की प्रभावी और समयबद्ध निगरानी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया तथा उनके अधिकार क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों, सर्किल अधिकारियों और जांच अधिकारियों को अगली सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए।

मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने शहर के विभिन्न थानों में इसी प्रकार की घटनाओं को लेकर लखनऊ पुलिस आयुक्त से भी स्पष्टीकरण मांगा। अदालत ने कहा कि नाबालिग लड़कियों के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में पुलिस को अधिक सतर्कता और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए।

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सुनवाई के दौरान पुलिस उपायुक्त ने एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करते हुए बताया कि उनके पर्यवेक्षण वाले नौ थानों से 81 महिलाओं और लड़कियों, जिनमें अधिकांश नाबालिग थीं, के अपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाए जाने के मामले सामने आए हैं। इनमें से 66 को बरामद कर लिया गया है, जबकि 15 लड़कियां अभी भी लापता हैं। अदालत ने डीसीपी को ऐसे मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया जो पुलिस को रिपोर्ट ही नहीं किए गए हों और उन पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि जहां आवश्यक हो वहां सक्षम अधिकारियों की तैनाती की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और जांच अधिकारी ऐसे मामलों को गंभीरता से लें। ये निर्देश बीबीडी थाना क्षेत्र से लगभग चार महीने से लापता 12 वर्षीय लड़की से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए।

बीबीडी थाने की लापरवाही पर कोर्ट नाराज; 4 महीने बाद बरामद हुई बच्ची

हाई कोर्ट ने यह कड़े निर्देश बीबीडी (BBD) थाना क्षेत्र से पिछले लगभग चार महीनों से लापता एक 12 वर्षीय लड़की से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए।

अदालत के कड़े हस्तक्षेप के बाद आखिरकार पुलिस ने लड़की को बरामद कर कोर्ट में पेश किया। अदालत द्वारा पूछे जाने पर बच्ची ने अपने पिता के साथ जाने की इच्छा जताई, जिसके बाद माननीय न्यायालय ने उसकी अभिरक्षा (Custody) पिता को सौंप दी।

जांच अधिकारी को फटकार: अदालत ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) अश्वनी कुमार राय की कार्यशैली पर गहरा असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने न तो उचित प्रक्रिया का पालन किया और न ही बच्ची को ढूंढने के लिए समय रहते पर्याप्त प्रयास किए।

अदालत ने आदेश दिया है कि थानों और चौकियों पर सक्षम अधिकारियों की तैनाती की जाए ताकि भविष्य में ऐसे संवेदनशील मामलों को पूरी गंभीरता से निपटाया जा सके।

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