Pakistan Fitna Al Hindustan New Propaganda | संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार! 'फितना अल-हिंदुस्तान' है नफरत की सरकारी फैक्टरी

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रेनू तिवारी । Jun 9 2026 8:26AM

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए सोमवार को कहा कि इस्लामाबाद द्वारा अपनी सीमाओं के भीतर सक्रिय समूहों को ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहना कुछ और नहीं, बल्कि ‘‘धार्मिक शब्दावली में लिपटा आधिकारिक रूप से प्रायोजित गलत सूचना फैलाने का अभियान और दुष्प्रचार’’ है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ‘अफगानिस्तान की स्थिति’ पर आयोजित एक बैठक के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक तल्खी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई। भारत ने पाकिस्तान के दुष्प्रचार का पुरजोर जवाब देते हुए उसे वैश्विक मंच पर बेनकाब किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे "धार्मिक शब्दावली में लिपटा आधिकारिक रूप से प्रायोजित गलत सूचना फैलाने का अभियान" करार दिया।

'फितना अल-हिंदुस्तान' के पीछे की हकीकत

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय आतंकवादी समूहों को आधिकारिक तौर पर ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ करार दिया था। पाकिस्तान ने बिना किसी सबूत के यह आरोप लगाया था कि ये संगठन भारत के इशारे पर काम कर रहे हैं। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भारतीय राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा: "पाकिस्तान ने सरकारी अधिसूचनाएं जारी कर अपनी एजेंसियों को अपनी सीमाओं के भीतर सक्रिय समूहों को ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहने का निर्देश दिया है। यह पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान से संचालित नफरत की ऐसी संगठित फैक्टरी का परिणाम है, जिसका उद्देश्य अपने नागरिकों को भारत के खिलाफ स्थायी शत्रुता की स्थिति में रखना है।"

उन्होंने आगे कहा कि इस दुष्प्रचार का असली मकसद पाकिस्तान की जनता का ध्यान वहां की मुख्य राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं से भटकाना है, ताकि वहां का सत्ता प्रतिष्ठान राष्ट्रीय संसाधनों पर अपना नियंत्रण बनाए रख सके।

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पाकिस्तानी मीडिया द्वारा प्रसारित खबरों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय सभी आतंकवादी समूहों और संगठनों को पिछले वर्ष आधिकारिक रूप से ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ करार दिया था और बिना कोई सबूत दिए आरोप लगाया था कि ये संगठन भारत के इशारे पर आतंकवाद में शामिल हैं। पर्वतनेनी ने इसे ‘‘पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान से संचालित नफरत की ऐसी संगठित फैक्टरी का परिणाम’’ बताया, जिसका उद्देश्य अपने नागरिकों को भारत के खिलाफ स्थायी शत्रुता की स्थिति में रखना है, ताकि सत्ता पर उनकी पकड़ बनी रहे और राष्ट्रीय संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखा जा सके तथा लोगों का ध्यान मुख्य राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं से हटाया जा सके।

उन्होंने कहा कि ‘‘27वें संविधान संशोधन के जरिये सेना द्वारा किया गया वास्तविक तख्तापलट इसका सबसे हालिया उदाहरण है।’’ भारतीय दूत ने पाकिस्तान की संसद द्वारा पिछले वर्ष पारित संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए यह बात कही जिसके तहत ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (सीडीएफ) का पद सृजित किया गया था। इसके बाद फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को पाकिस्तान का पहला सीडीएफ नियुक्त किया गया। यूएनएससी की बैठक में भारतीय दूत ने अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान के सैन्य हवाई हमलों की भी कड़ी निंदा की।

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पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘मैं फिर दोहराता हूं। किसी नरसंहार को सैन्य अभियान का रूप देने से अपराधी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। आम नागरिकों की हत्या करना, उन्हें अपंग बनाना और बच्चों को अनाथ करना आतंकवाद-रोधी कार्रवाई नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में बेरहमी से हवाई हमले करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता के उच्च सिद्धांतों की बात करना पाखंड का सबसे सटीक उदाहरण है। भारतीय दूत ने कहा, ‘‘अपनी नाकामियों के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है। दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश नाकाम होगी।

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