50 वर्ष पुराने विवाद को अमित शाह ने ऐसे कर दिया हल, क्या है असम-मेघालय सीमा विवाद, जिसको लेकर हो चुकी है कई हिंसक झड़पें

By अभिनय आकाश | Mar 30, 2022

50 साल से जिस मुद्दे को लेकर असम और मेघालय के लोग आपस में झगड़ रहे थे उस झगड़े को सुलझा लिया गया। इसका श्रेय गृह मंत्री अमित शाह को जाता है। पूर्वोत्तर में बीते दिनों शांति की नई पहल हुई और असम-मेघालय के बीच समझौता हुआ है। जिसके साथ ही 50 साल पुराने सीमा विवाद पर विराम लग गया। गृह मंत्रालय में हुई बैठक में असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने ऐतिहासिक करार कर दस्तखत किए। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 50 साल पुराना विवाद इस समझौते के हस्ताक्षर के साथ ही समाप्त हो गया। 12 विवादित प्लाइंट्स में से 6 प्वाइंट पर असम और मेघालय के बीच में समझौता हुआ है। अमित शाह ने कहा कि सीमा की लंबाई की दृष्टि से देखें तो करीब करीब 70 प्रतिशत सीमा विवाद मुक्त हो गई। असम मेघालय के बीच ये सीमा विवाद इतना जटिल था कि इसे लेकर कई बार दोनों राज्यों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। 

असम और मेघालय 885 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। फिलहाल उनकी सीमाओं पर 12 बिंदुओं पर विवाद है। असम-मेघालय सीमा विवाद ऊपरी ताराबारी, गज़ांग आरक्षित वन, हाहिम, लंगपीह, बोरदुआर, बोकलापारा, नोंगवाह, मातमूर, खानापारा-पिलंगकाटा, देशदेमोराह ब्लॉक I और ब्लॉक II, खंडुली और रेटचेरा के क्षेत्र हैं। मेघालय को असम पुनर्गठन अधिनियम, 1971 के तहत असम से अलग किया गया था, एक कानून जिसे उसने चुनौती दी, जिससे विवाद हुआ। असम और मेघालय के बीच विवाद का एक प्रमुख बिंदु असम के कामरूप जिले की सीमा से लगे पश्चिम गारो हिल्स में लंगपीह जिला है। लंगपीह ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान कामरूप जिले का हिस्सा था, लेकिन आजादी के बाद, यह गारो हिल्स और मेघालय का हिस्सा बन गया। असम इसे असम में मिकिर पहाड़ियों का हिस्सा मानता है। मेघालय ने मिकिर हिल्स के ब्लॉक I और II पर सवाल उठाया है । कार्बी आंगलोंग क्षेत्र - असम का हिस्सा है। मेघालय का कहना है कि ये तत्कालीन यूनाइटेड खासी और जयंतिया हिल्स जिलों के हिस्से थे। 

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सीमा विवाद नया नहीं है?

मेघालय के निर्माण के तुरंत बाद विवाद शुरू हुआ। असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के 12 साल लंबे मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान सीमा विवाद फ्लैश पॉइंट में से एक था। दरअसल, तरुण गोगोई द्वारा आधिकारिक निवास के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले असम सरकार के एक गेस्ट हाउस पर सवाल उठाया था जो खानापारा-पिलंगकाटा ब्लॉक में एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है। इसे अक्सर मेघालय द्वारा अपने क्षेत्र के रूप में दावा किया जाता था। स्टेट गेस्ट हाउस का निर्माण 1976 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सम्मेलन में भाग लेने के लिए गुवाहाटी आने वाले एक वीआईपी को समायोजित करने के लिए किया गया था। मेघालय ने हमेशा कहा कि रिकॉर्ड जमीन पर उसके दावे को साबित करते हैं।

सीमा विवाद को लेकर हुई ह‍िंसा

सीमा विवाद की वजह से दोनों राज्यों के बीच हिंसक झड़प भी देखने को मिली थी। 14 मई को असम के कामरूप की सीमा से सटे पश्चिमी खासी हिल्स के लैंगपीह में असम पुलिस के जवानों की गोलीबारी में खासी समुदाय के चार ग्रामीण मारे गए थे, जबकि 12 घायल हो गए थे। 26 जुलाई 2021 को सबसे भीषण हिंसा देखने को मिली थी। जिसमें असम पुलिस के छह जवानों की मौत हो गई थी और दोनों राज्यों के लगभग 100 लोग और सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे। 

क्या सीमा विवाद पर कोई प्रगति हुई है?

असम और मेघालय दोनों ने सीमा विवाद निपटान समितियों का गठन किया है। हाल ही में, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके मेघालय समकक्ष कोनराड संगमा ने सीमा विवादों को चरणबद्ध तरीके से हल करने के लिए दो क्षेत्रीय समितियों का गठन करने का निर्णय लिया। सरमा ने हाल ही में कहा था कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए पांच पहलुओं पर विचार किया जाना है। वे ऐतिहासिक तथ्य, जातीयता, प्रशासनिक सुविधा, संबंधित लोगों की मनोदशा और भावनाएं और भूमि की निकटता हैं। पहले चरण में छह स्थलों पर विचार किया जा रहा है। ये हैं ताराबारी, गिजांग, हाहिम, बकलापारा, खानापारा-पिलिंगकाटा और रातचेरा ये विवादित क्षेत्र असम की तरफ कछार, कामरूप मेट्रो और कामरूप ग्रामीण और मेघालय की तरफ पश्चिम खासी हिल्स, री भोई जिले और पूर्वी जयंतिया हिल्स का हिस्सा हैं।

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असम और सीमा मुद्दे

पूर्वोत्तर के राज्यों को बड़े पैमाने पर असम से अलग किया गया था, जिसका कई राज्यों के साथ सीमा विवाद है। अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के साथ असम के सीमा विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। मेघालय और मिजोरम के साथ असम के सीमा विवाद फिलहाल बातचीत के जरिए समाधान के चरण में हैं। मिजोरम के साथ सीमा विवाद हाल ही में हिंसक हो गया, जिसके कारण केंद्र ने हस्तक्षेप किया। असम और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए जुलाई और अगस्त में अलग-अलग बातचीत की है। 

क्या हुआ समझौता?

 छह स्थानों में 36 गांव हैं, जिसके दायरे में 36.79 वर्ग किमी का क्षेत्र आता है, जिसके संबंध में समझौता हो गया है। मेघालय को 1972 में असम से अलग कर नया राज्य बनाया गया था, लेकिन नए राज्य ने असम पुनर्गठन अधिनियम, 1971 को चुनौती दी थी, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में 12 स्थानों पर विवाद हुआ था। असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वो इस समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री के निरंतर मार्गदर्शन के लिए उनके आभारी हैं। उन्होंने कहा, “सहकारी संघवाद को मजबूत करने के हमारे सामूहिक प्रयासों में यह एक मील का पत्थर है। साथ में, हम इस तरह के सभी सीमा मुद्दों को जल्द ही हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” मेघालय के मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि मेघालय और असम के साथ 12 विवादित क्षेत्रों में से छह में विवाद को आधिकारिक रूप से हल करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के साथ इतिहास बन गया है। गृह मंत्री ने कहा कि इस समझौते पर हस्ताक्षर से दोनों राज्यों के बीच 70 प्रतिशत सीमा विवाद सुलझ गया है और उम्मीद जताई कि बाकी छह स्थानों के लिये भी समाधान ढूंढ लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह अंतर-राज्यीय सीमा समझौता असम और मेघालय में शांति, सद्भाव और प्रगति के एक नए युग की शुरुआत करेगा। 

-अभिनय आकाश  

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