देवों के आचार्य, देवशिल्पी और शिल्पकला के सृजनहार हैं भगवान विश्वकर्मा

By शुभा दुबे | Sep 16, 2020

भगवान विश्वकर्मा सिर्फ गृह निर्माता ही नहीं हैं वह अस्त्र−शस्त्रों के निर्माता भी हैं। भगवान विश्वकर्मा जी ने ही ब्रह्मा जी को शक्ति, महादेव शंकर जी को त्रिशूल और विष्णु जी को पजक धनुष और कौमुदी गदा तथा इंद्र देवता को कवच एवं परशुराम को फरसा और धनुष दिया था।

भगवान विश्वकर्मा ने इसके अलावा देवों के लिए स्वयं चलित विमान भी बनाए साथ ही उन्होंने सुंदर उपवनों, जलाशयों, विहार वाटिका आदि की भी रचना की। उनकी इस रचनात्मकता से प्रसन्न होकर ही इंद्र देवता ने भगवान विश्वकर्मा को देवशिल्पी का सम्मान दिया था। इस प्रकार भगवान विश्वकर्मा देवों और दानवों तथा मानवों के शिल्प शास्त्र के कर्ता−धर्ता और औद्योगिक शिल्पकला के सृजनहार माने जाते हैं।

भगवान विश्वकर्मा देवों के आचार्य तथा आठ प्रकार की सिद्धियों के पिता भी माने जाते हैं। उन्होंने देवों के लिए सुंदर आभूषण और दिव्य विमानों के निर्माण के साथ ही इंद्र, यम और वरूण आदि देवताओं की विशाल सभाओं और पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ का निर्माण किया। स्कन्धपुराण में लिखा है कि ब्रह्मा, विष्णु, शंकर आदि की रचना के बाद ब्रह्म कुल में पैदा हुए भगवान विश्वकर्मा शिल्प विद्या के प्रकाशक तथा देवताओं के आचार्य हैं। उनकी शिल्पकला से ही प्राणी का पालन पोषण होता है।

इसे भी पढ़ें: किस देवता के आशीर्वाद के चलते हनुमानजी सदैव जल से सुरक्षित रहते हैं ?

महाभारत युद्ध के दौरान भगवान विश्वकर्मा ने आधुनिक अस्त्र−शस्त्र व अत्याधुनिक रथ की रचना की थी। भगवान विश्वकर्मा ने ही इंद्र के लिए अमरावती और कुबेर के लिए अलकापुरी और पुष्पक विमान की रचना की थी। भगवान विश्वकर्मा ने पृथ्वी पर भी कई नगरों की रचना की है। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही नदियों, तालाबों, झीलों, पर्वतों आदि की रचना कर मानव जीवन को प्रकृति की ओर से अनोखा उपहार दिया।

भगवान विश्वकर्मा ने ही लौहकार्य, काष्ठकार्य, धातुकर्म और मिट्टी कर्म आदि उद्योग लोगों को सिखाए। पुराणों में यह भी जानकारी मिलती है कि भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर ही भगवान विश्वकर्मा ने वृंदावन की रचना की थी। भगवान विश्वकर्मा आठवें वसु प्रभास ऋषि के पुत्र हैं। इनकी मां का नाम योगीसिद्धा है जोकि देवों के गुरु बृहस्पति की बहन हैं। भगवान विश्वकर्मा का विवाह प्रहलाद की पुत्री विरोचना देवी से हुआ था।

इसे भी पढ़ें: भगवान श्री सत्यनारायण की पूजा, व्रत और कथा सुनने से पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएँ

इनके पांच पुत्र और पांच पुत्रियां हुईं। इनके पुत्रों का नाम− पुत्रमनु लुहार, मय सुतार, त्वस्टा−कंसारा, शिल्पी−कड़िया और दैवझ−स्वर्णकरा तथा पुत्रियों के नाम− रिद्धि सिद्धि, संज्ञा, उर्जस्वती और पद्मा हैं। इनमें से रिद्धि और सिद्धि का विवाह भगवान गणेशजी के साथ हुआा। संज्ञा का विवाह सूर्यदेव तथा उर्जस्वती का विवाह शुक्र व पद्मा का विवाह मनु महाराज के साथ हुआ।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा देशभर में की जाती है। कई देशों के शिल्पी भी पूरे विधि विधान से भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं ताकि उनका आशीर्वाद बना रहे और उद्योग व उनके कारोबार में वृद्धि होती रहे।

शुभा दुबे

प्रमुख खबरें

FIH World Cup: Argentina से हारकर India सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर, टूटा भारत का सपना।

पहले हंसे, फिर किया इशारा, कुछ इस तरह तुर्किए-पाकिस्तान-बांग्लादेश की जयशंक ने उड़ा दी नींद!

Amravati Hospital में आग की जांच के लिए 7 सदस्यीय कमेटी बनी, 8 दिन में देगी रिपोर्ट

Balochistan के मस्तुंग और चमन में 5 शव बरामद, Pakistan में Forced Disappearances पर गहराया संकट