अमेरिका ने काबुल से रेस्क्यू मिशन किया समाप्त, पीछे छूटे कई अफगानी नागरिक

By अभिनय आकाश | Sep 01, 2021

अफगानिस्तान से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी 31 अगस्त की डेडलाइन के साथ ही सामप्त हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने 20 साल तक चले इस मिशन को कामयाब बताया है। इसके साथ ही अफगानिस्तान समेत दुनियाभर के आतंक के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता भी जताई है। अफगानिस्तान से रेस्क्यू अभियान के जरिये अमेरिका ने अपने सैनिकों और कई नागरिकों को सुरक्षित निकाला है। लेकिन अभी भी कई लोग ऐसे हैं जो अमेरिका से मदद की गुहार लगा रहे हैं। इनमें से ही एक शख्स है मोहम्मद जिसने आज से 13 साल पहले बाइडेन की मदद की थी। 2008 में बाइडेन और दो अन्य सीनेटर एक दूरस्थ अफगानिस्तान घाटी में फंसे हुए थे। उस कंपकंपी सर्दी में बर्फीली पहाड़ों के बीच फंसे बाइडेन को वापस लाने में अफगान दुभाषिया मोहम्मद ने मदद की थी लेकिन अब वो अफगानिस्तान में ही छूट गया है।

इसे भी पढ़ें: अफगानिस्तान में कोई विदेशी ताकत नहीं! 20 साल बाद तालिबान शासन के अधीन लोगों की पहली सुबह

मोहम्मद अब व्हाइट हाउस से मदद की गुहार लगा रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल से बात करते हुए मोहम्मद (पहचान छिपाने के लिए पूरे नाम का उपयोग नहीं किय गया) ने अमेरिकी राष्ट्रपति से खुद को और उसके परिवार को बचाने की अपील की। साल 2008 में काम करने वाले सेना के दिग्गजों के अनुसार 2008 में तत्कालीन सीनेटर जो बाइडेन और पूर्व सीनेटर्स चक हेगल, आर नेब, जॉन केरी, डी मास को बचाने में मदद की थी। जब उनका हेलीकॉप्टर बर्फीले तूफान की वजह से अफगानिस्तान में इमरजेंसी लैंडिंग करने पर मजबूर हुआ था। मोहम्मद उस समय अमेरिकी सेना के लिए एक दुभाषिया थे।  

इसे भी पढ़ें: अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाना एकदम सही फैसला था: जो बाइडेन

सीएनएन से बात करने वाली महिला ने छद्म नाम "सारा" का इस्तेमाल किया। सीएनएन को बताते हुए महिला ने कहा कि अपने घर में 19 बच्चों की देखभाल की और उन्हें खिलाया-पिलाया, जिसमें से दो विकलांग भी थे। मुझे अभी पता चला कि वे चले गए। और मैं बस थोड़ी देर चुप रही। मैं बस कमरों में घूमने चली गयी। मैंने देखा कि छोटे बच्चे सो रहे हैं और उन्हें पता नहीं है कि क्या हुआ? अमेरिका आखिरी उड़ान चली गई, और हम पीछे रह गए। यह देखकर दिल दहल जाता है। महिला ने कहा कि हमें किसी ने नहीं सुना कि हम खतरे में हैं, और हमें सुरक्षित रहने की आवश्यकता है। यह दिल दहला देने वाली घटना है। टीवी एंकर से महिला ने कहा कि मुझे यह भी नहीं पता कि आपसे क्या कहना है। और क्या - जो भी मेरी मदद करने और मेरा समर्थन करने की कोशिश कर रहे थे, उन्होंने मुझे यह भी नहीं बताया कि यह आखिरी उड़ान है। इसलिए, मुझे अभी भी उम्मीद थी कि हम चले जाएंगे। सारा ने कहा कि वह छह बच्चों के साथ हवाई अड्डे पर गई थी। वहां एक गेट पर जहां विदेश विभाग ने मुझे जाने के लिए कहा था।

इसे भी पढ़ें: अमेरिका और भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग कर सकते हैं : कृष्णमूर्ति

इसके साथ ही सारा ने बताया कि उन्होंने मुझसे कहा कि 'सुनिश्चित करें कि आपके पास अपना छाता है। जिससे आपकी पहचान करना आसान हो।  सुनिश्चित करें कि आपके पास एक गुप्त कोड है।' मैंने कहा 'ठीक है, मेरे पास वह है और बस गेट पर पहुंचो।' मैंने कहा 'ठीक है। सारा ने दावा किया कि फेंकी गई गैस ने उसे बाहर कर दिया और मैंने सभी छोटे बच्चों को खो दिया। मुझे यह भी नहीं पता था कि बच्चे कहां हैं। सीएनएन पत्रकार ने पूछा, "तो, अब क्या होगा? जिसपर सारा ने जवाब दिया म सब जा चुके हैं? वे कहते हैं, 'हम वहां लोगों के साथ काम करते रहेंगे। तालिबान ने कहा है कि जो लोग जाना चाहते हैं वो जा सकते हैं। हवाई अड्डा खुला रहेगा। क्या आप इनमें से किसी पर विश्वास करते हैं? मैं अब और नहीं जानती कि अब और क्या करूं। मैं अब किसी पर विश्वास नहीं करती। क्योंकि पिछले 10 दिनों से, आगे-पीछे, आगे-पीछे करवा कर वे मुझे बेवकूफ बना रहे हैं। 

प्रमुख खबरें

PM Modi से सपरिवार मिले Varun Gandhi, क्या खत्म होगा सियासी वनवास? BJP में वापसी के संकेत?

मैं अपनी जगह खुद भरने आया हूँ, Irrfan Khan से तुलना पर Nawazuddin Siddiqui का दोटूक जवाब

Oscars 2026 Controversy | Dharmendra की अनदेखी पर Esha Deol का भावुक बयान, कहा- पापा को इन छोटी बातों से फर्क नहीं पड़ता

Epstein Files Row: 24 घंटे में हटाए सभी कंटेंट, हरदीप पुरी की बेटी की याचिका पर HC ने दिया आदेश