By अंकित सिंह | Jan 23, 2026
तमिलनाडु विधानसभा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्वारा पेश किए गए एक प्रस्ताव को पारित कर केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) का नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि वह ग्रामीण रोजगार योजना के लिए महात्मा गांधी का नाम बरकरार रखे और वास्तविक रोजगार मांग और राज्यवार प्रदर्शन के अनुरूप पर्याप्त और निरंतर निधि आवंटन सुनिश्चित करे।
प्रस्ताव में राज्य सरकार के योगदान को 40 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रस्तावित कदम पर भी आपत्ति जताई गई, जिसे विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G-RAM-G) के तहत नामित किया गया है। इसमें चेतावनी दी गई है कि ऐसा कदम राज्य के वित्त पर भारी दबाव डालेगा और ग्रामीण आजीविका को नुकसान पहुंचाएगा। इस सप्ताह विधानसभा में राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण रहा, जिसके चलते प्रस्ताव पारित हुआ।
सदन में इस वर्ष के पहले सत्र के दौरान पहले ही काफी हंगामा हो चुका था, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने डीएमके सरकार द्वारा तैयार किए गए पाठ को "गलतियों" का हवाला देते हुए पढ़ने से इनकार कर दिया और सदन से बाहर चले गए। स्टालिन ने राज्यपाल पर संवैधानिक प्रावधानों और विधायी परंपराओं की अवहेलना करने का आरोप लगाया और कहा कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं तो डीएमके संसद में संवैधानिक संशोधन लाने के लिए समान विचारधारा वाली पार्टियों से परामर्श करेगी।