By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 23, 2026
कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच तनाव की खबर को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा तथा कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस मामले पर संसद और देश को विश्वास में लेना चाहिए। मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि देश को 56 इंच की छाती के खोखले दावे नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव जयराम रमेश ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के एक बयान का हवाला देते हुए सरकार को निशाने पर लिया, जिसमें उन्होंने कहा है कि चीन से पारंपरिक युद्ध तरीकों से मुकाबला करने का दौर बीत चुका है, इसलिए बल अपने जवानों, हथियारों, वाहनों और सीमा चौकियों के आधुनिकीकरण में निवेश कर रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत की गश्त की पहुंच प्रभावित हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। देश को इस बारे में अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है?’’ उन्होंने आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि वित्त वर्ष 2020-21 के बाद चीन से आयात में 102 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है।
खरगे का कहना था कि कांग्रेस को सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही जरूरी है। खरगे ने कहा, ‘‘विपक्ष पर हमला करने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी को संसद और देश को विश्वास में लेना चाहिए।’’ कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार चीन को लगातार रियायतें दे रही है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर गंभीर सवाल बने हुए हैं। रमेश ने दावा किया कि ताकसिंग में कथित टकराव के बाद वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई तथा स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ गश्त बिंदुओं तक पहुंच प्रभावित हुई है।
उन्होंने चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने और 60,000 मेगावाट की बांध परियोजना का भी उल्लेख किया तथा इसे भारत की पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए चुनौती बताया। कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 99 अरब डॉलर था और इससे कई क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) पर प्रतिकूल असर पड़ा है। रमेश ने 19 जून, 2020 को सर्वदलीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें मोदी ने कहा था, ‘‘न कोई वहां हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है।’’ उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे से जुड़ी एक टिप्पणी और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को चीन से कथित सहयोग संबंधी पूर्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह के वक्तव्य का भी उल्लेख किया।
रमेश ने सवाल किया कि सीमा पर तनाव के दावों के बीच चीन के प्रति कथित नरमी और आर्थिक निर्भरता किस तरह का राष्ट्रवाद है? उन्होंने कहा कि देश को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब चाहिए। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने सीमा प्रबंधन में भी समर्पण कर दिया है।
खेड़ा ने कपूर के बयान का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘ये दिखाता है कि मोदी सरकार की क्या हालत है? जब प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया को मैसेज देने का मंच मिलता है तो वहां लाल आंख दिखाने के बजाय विपक्ष को बुरा-भला कहते हैं।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘आखिर नरेन्द्र मोदी को किस बात का डर है? चीन के पास मोदी का ऐसा कौन सा राज है, जो ये बिछ जाते हैं?
मोदी की चीन के साथ कई मुलाकातें हुई, इसके बावजूद उन्होंने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील मुद्दों को क्यों नहीं उठाया?’’ खेड़ा ने कहा कि देश अब प्रधानमंत्री मोदी से जवाब मांग रहा है।