By अभिनय आकाश | Aug 31, 2026
श्रीलंका का सुप्रीम कोर्ट संविधान में प्रस्तावित 22वें संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इस संशोधन का मकसद निचली और ऊपरी अदालतों के जजों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाना है। इस कदम से राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि इससे न्यायपालिका की आज़ादी पर असर पड़ सकता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि बड़ी संख्या में लंबित मामलों से निपटने के लिए यह ज़रूरी है। चीफ जस्टिस पी.पी. सुरसेना द्वारा नियुक्त सुप्रीम कोर्ट की पांच-सदस्यीय बेंच के सामने सुनवाई शुरू होगी। सोमवार को की गई घोषणा के अनुसार, चीफ जस्टिस समेत यह बेंच बिल के खिलाफ दायर 25 से ज़्यादा याचिकाओं और इसके समर्थन में दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
विपक्ष के कई नेताओं के अनुसार, याचिकाओं में मुख्य तर्क यह है कि 22वां संशोधन संविधान के अनुच्छेद 3 का उल्लंघन करता है, जो लोगों की संप्रभुता से संबंधित है। उनका तर्क है कि इसलिए संसद में दो-तिहाई बहुमत के अलावा इसे देशव्यापी जनमत संग्रह के ज़रिए मंज़ूरी की भी ज़रूरत है। विरोध करने वालों ने इस संशोधन को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर "सीधा हमला" बताया है। उनका कहना है कि इससे कार्यकारी राष्ट्रपति को अदालतों के कामकाज को प्रभावित करने का ज़्यादा मौका मिलेगा। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा है कि श्रीलंका बार एसोसिएशन, ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन के सदस्यों और कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन की आपत्तियों के बावजूद वह इस संशोधन को अपनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।