By अभिनय आकाश | Aug 11, 2026
देश की राजधानी और उसका दिल होने के नाते, दिल्ली से शहरी उम्मीदें बहुत ज़्यादा हैं। फिर भी, टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने एक समीक्षा बैठक में पाया कि वर्ल्ड बैंक के 'बिज़नेस रेडी' (B-Ready) असेसमेंट के पैमानों पर राजधानी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। इससे एक विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ़ दिल्ली की पहचान भारत के एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के तौर पर बन रही है, तो दूसरी तरफ़ यहाँ उन सुविधाओं और माहौल की कमी है जो 'ईज़ ऑफ़ बिज़नेस' (आसानी से व्यापार करने) के लिए ज़रूरी हैं और जिनके लिए यहाँ के नागरिक हकदार हैं। इनमें प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और रजिस्ट्रेशन, कंस्ट्रक्शन की मंज़ूरी और पानी की क्वालिटी की बेसिक मॉनिटरिंग जैसी सेवाएँ शामिल हैं।
वर्ल्ड बैंक का 'बिज़नेस रेडी' (B-READY) असेसमेंट यह पता लगाता है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था का बिज़नेस माहौल प्राइवेट सेक्टर में गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कितना अनुकूल है। इस असेसमेंट का मकसद यह देखना है कि क्या बिज़नेस को सरकारी सेवाएँ आसानी से मिल पाती हैं और ये सेवाएँ कितनी अच्छी तरह काम करती हैं। इसका आकलन करने के लिए तीन मुख्य पैमानों का इस्तेमाल किया जाता है – नियम, सार्वजनिक सेवाएँ और उन्हें कितनी कुशलता से उपलब्ध कराया जाता है। हाल ही में आए 2025 के एडिशन में 101 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया था और तीनों पैमानों में से हर एक को 0 से 100 के बीच स्कोर दिया गया। इन पैमानों में बिज़नेस शुरू करना, कंस्ट्रक्शन परमिट लेना, यूटिलिटी सेवाएँ पाना, टैक्स भरना, फ़ाइनेंस हासिल करना, सीमा-पार व्यापार करना और विवादों को सुलझाना जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसलिए, देश इस असेसमेंट के नतीजों का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए करते हैं कि किस खास क्षेत्र में सुधार की ज़रूरत है।
चीफ़ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने पाया कि वर्ल्ड बैंक के मूल्यांकन में दिल्ली का स्कोर अभी शून्य से लेकर आंशिक (partial) स्तर तक है। रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' (आसानी से कारोबार करने) को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यहाँ का बिखरा हुआ ज़मीन-रिकॉर्ड सिस्टम है। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, ज़मीन के मालिकाना हक, म्यूटेशन, रजिस्ट्रेशन और प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ी जानकारी कई विभागों और एजेंसियों में बंटी हुई है। इस वजह से प्रॉपर्टी से जुड़ी सारी जानकारी एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर पाना मुश्किल हो गया है। समीक्षा में यह भी पता चला कि DDA, MCD और NDMC के पास मौजूद ज़मीन और लीज़ के कई पुराने रिकॉर्ड अभी भी डिजिटाइज़ नहीं किए गए हैं। चुनौती को और बढ़ाते हुए, शहर की प्रॉपर्टीज़ के लिए कोई यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर नहीं है, जिससे डिजिटाइज़ेशन की प्रक्रिया और भी मुश्किल हो जाती है।