By अंकित सिंह | Aug 03, 2026
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को विपक्ष पर NEET परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे का राजनीतिकरण करने और राजनीतिक फायदे के लिए छात्रों की भावनाओं का फायदा उठाने का आरोप लगाया। 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर राज्यसभा में बहस के दौरान उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह विवाद BJP और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि मेरिट और माफिया तथा मेहनत और सेटिंग के बीच है।
बीजेपी नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की कि उन्होंने एक प्रधानमंत्री और एक अभिभावक, दोनों ही भूमिकाओं में छात्रों की चिंताओं पर ध्यान दिया। उन्होंने पेपर लीक के मामलों को गंभीर अपराध मानकर उनके लिए फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने के सरकार के फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि छात्रों की आवाज़ मायने रखती है। जब आपने अपनी चिंता ज़ाहिर की और मांग की कि प्रधानमंत्री आपकी बात न सिर्फ़ एक प्रधानमंत्री के तौर पर, बल्कि एक अभिभावक के तौर पर भी सुनें, तो उन्होंने परिवार के मुखिया की तरह आपकी बात सुनी। फास्ट-ट्रैक कोर्ट गंभीर अपराधों, जैसे महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध, रेप और POCSO जैसे अपराधों के लिए बनाए जाते हैं। आज हमने पेपर लीक को भी उन्हीं गंभीर अपराधों की श्रेणी में शामिल किया है।
विपक्ष से बात करते हुए चड्ढा ने कहा कि राजनीतिक याददाश्त चुनिंदा हो सकती है" लेकिन पब्लिक रिकॉर्ड नहीं; उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि NEET छात्रों की चिंताओं को उतना ही जायज़ माना जाना चाहिए जितना कि विपक्ष शासित राज्यों में परीक्षा का पेपर लीक होने से प्रभावित छात्रों की चिंताओं को। उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी राष्ट्रीय परीक्षा का पेपर लीक होना एक राष्ट्रीय संकट है, तो विपक्ष शासित राज्य में पेपर लीक होना कोई स्थानीय घटना कैसे हो सकती है? अगर NEET छात्रों का दर्द असली है, तो पंजाब में फ़ार्मेसी परीक्षा और कर्नाटक में SSLC परीक्षा के छात्रों का दर्द भी असली है।
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