डोनाल्ड ट्रंप ने खोया अपनों को भरोसा

By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Aug 20, 2025

यह तो भविष्य के गर्व में छिपा है कि रुस यूक्रेन युद्ध को लेकर दोनों देशों का क्या निर्णय होगा या युद्ध कब तक समाप्त होगा या सहमति के हालात बनेंगे या नहीं पर एक बात साफ हो गई है कि अमेरिका के लोगों को ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्णय को लेकर भरोसा नहीं है। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव के समय 81 प्रतिशत अमेरिकियों को भरोसा था कि ट्रंप द्वारा जो निर्णय लिया जाएगा वह भरोसे लायक होगा। यानी कि वह सोच समझ भरा निर्णय होगा। कहने का अर्थ यह है कि अमेरिका के 81 फीसदी नागरिक यह मानकर चल रहे थे कि ट्रंप द्वारा रुस यूक्रेन युद्ध को लेकर लिया जाने वाला निर्णय भरोसे लायक होगा। राष्ट्रपति बनने के बाद से जिस तरह से ट्रंप द्वारा एक के बाद एक तुगलकी निर्णय लिए जा रहे हैं और जिस तरह से विश्व के देशों को धमकाना शुरु किया है उससे ट्रंप ने स्वयं के साथ ही अमेरिका की फजीयत ही अधिक कराई है। विश्व का दादा बनने के प्रयास में ट्रंप और अमेरिका दोनों की ही साख में तेजी से गिरावट आई है। ट्रंप-पुतिन मुलाकात के बाद भी साफ हो गया है कि कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है और भले ही यूक्रेन की जेलेंस्की को ट्रंप ने चर्चा के लिए अमेरिका बुलाया हो और बातचीत भी हुई हो पर लब्बोलुबाब तो यही रहेगा कि इस मुलाकात के बाद अमेरिका की हेटी तो साफ दिखाई दे ही रही है। इससे पहले जेलेंस्की और ट्रंप की गत मुलाकात के समय जिस तरह से अमेरिका की हेटी हुई वह भी सबके सामने हैं। भले ही पुतिन जेलेंस्की मुलाकात करने को राजी हो गये हो पर सीज फायर हो भी गया तो वह स्थाई सीजफायर होगा इसमें पूरी तरह से संदेह है। 

इसे भी पढ़ें: भारत की धरती से चीन के मंत्री ने कैसे हिलाई ट्रंप की जमीन, अमेरिका की उल्टी गिनती हो गई शुरू?

भविष्य में क्या होता है यह तो अलग बात हैं पर चाहे रुस यूक्रेन युद्ध हो, चाहे इजरायल हमास या फिर भारत पाक ट्रंप किसी बहुरूपिये की तरह से एक्सपोज हो गए हैं। इससे रुस और पुतिन का विश्व राजनीति में उभार का अवसर मिला है वही दुनिया के देशों की कोरोना व अन्य नीतियों के कारण चीन के प्रति बनी सोच में भी बदलाव आने लगा है। इसके साथ ही दुनिया के देशों में आज भारत की छवि भी बदलाव आया है और भारत को सशक्त और दुनिया का नेतृत्व करने में सक्षम देश के रुप में देखा जाने लगा है। टैरिफ वार के नाम पर भारत को धमकाना और पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष के साथ लंच करने से अमेरिका और ट्रंप दोनों की साख नकारात्मक रुप से प्रभावित हुई है। ट्रंप के निर्णय के यही हालात रहे तो अमेरिका हाशियें में आ जाएं तो कोई अनपेक्षित बात नहीं होगी। ऐसे में ट्रंप के सलाहकारों को यह समझाना होगा कि ड़राने धमकाने का या दादागिरी का समय नहीं रहा है छोटा से छोटा देश अपनी अस्मिता के लिए लंबा संघर्ष करने में पीछे हटने वाला या झुकने वाला नहीं हैं। रुस यूक्रेन युद्ध इसका जीता जागता उदाहरण है। ट्रंप को अपनी हैसियत बनाये रखनी है तो उसे अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा नहीं तो वह अपने देश में ही बदनामी के शीर्ष पर पहुंच जाएगा। ट्रंप को अपने पराये की पहचान करनी होगी। एलन मस्क ने आज साथ छोड़ दिया है बल्कि ट्रंप के खिलाफ झंडा उठा लिया है, भारत और मोदी ने तबज्जु देना बंद कर दिया है ऐसे में वो दिन दूर नहीं जब दुनिया के देश अमेरिका को आंख दिखाना शुरु कर देंगे। कहीं ऐसा ना हो कि छब्बे जी बनने के चक्कर में दुबे जी भी ना रहे ट्रंप महाशय।

- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

प्रमुख खबरें

Rishabh Pant की Delhi Capitals में वापसी पर AB de Villiers बोले- यह बिल्कुल भी चौंकाने वाला नहीं था

Tazmin Brits के शतक का तूफान, South Africa की बड़ी जीत ने बदला Semifinal का पूरा समीकरण

England में Kiwi बल्लेबाजों का कहर, 96 साल पुराना Test Record तोड़ रचा नया इतिहास

FIFA World Cup 2026 में गोलों की बौछार, Lionel Messi की Golden Boot की दावेदारी हुई मजबूत