By अभिनय आकाश | Jun 25, 2021
दिल्ली का बहादुर साह जफर मार्ग, रोजाना कि तरह टक-टक करके चलने वाली टाइपराइटर की आवाज़ से अखबार का दफ्तर गुलजार था। अचानक रात को बिजली चली जाती है या फिर यूं कहे काट दी जाती है। ताकी अखबार निकल ही न पाए। अगले दिन सवेरा होते-होते मौसम और राजनीति दोनों का तापमान काफी चढ़ गया। अन्य सुबहों से काफी भिन्न थी ये सुबह। आठ बजे आकाशवाणी पर समाचारों की जगह समूचे देश ने रेडियो पर इंदिरा गांधी की आवाज में संदेश सुना- 'भाइयों और बहनों, राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है। इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है।'
रामलीला मैदान बारिश के बावजूद खचाखच भरा था रात के 9:30 बज रहे थे अटल बिहारी वाजपेयी अपनी सीट से भाषण देने के लिए उठते हैं और रात के 11:00 बजे तक अनवरत बोलते रहे। पूरा रामलीला मैदान तालियों के शोर से अगले 15 मिनट तक गूंजता रहा।
"बाद मुद्दत के मिले हैं दीवाने, हने सुनने को बहुत हैं अफसाने।
खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने"
जनता पार्टी की इस रैली के बाद उस दौर के एक उस दौर के एक अखबार ने अगले दिन हैडलाइन बनाई कि आज बाबूजी बॉबी से जीत गए!