विकलांगों की सहायता के लिए बनाए नकली हाथ, लगाया गया शिविर

By सुयश भट्ट | Feb 16, 2022

भोपाल। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में अनोखा दृश्य देखने को मिला है। 13 फरवरी को यहां एक शिविर लगाया गया जिसमें शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को कृत्रिम हाथ प्रदान किए गए। जिसके बाद शहर में कई लोगों के लिए आशा की किरण लेकर आया है। सिन्धु नेत्रालय, जिल्हारी घाट, जबलपुर में हरि-कृष्णा फाउंडेशन के सहयोग से शिविर लगाकर विकलांगों की सहायता के लिए स्वयंसेवी संस्था घर की पाठशाला आगे आई है।

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स्वैच्छिक निकाय अदूरदर्शी को प्रकाश और मृतकों को जीवन प्रदान करने का काम करते हैं। इस उद्देश्य ने उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को कृत्रिम हाथ प्रदान करने के लिए काम किया है।

वहीं घर की पाठशाला की सह-संस्थापक पल्लवी गुप्ता ने कहा कि शिविर के पहले चरण में 100 से अधिक लोगों को कृत्रिम हाथ प्रत्यारोपित किए गए। और कहा कि आने वाले दिनों में लगभग 150 विकलांग व्यक्तियों को कृत्रिम हाथ लगाया जाएगा। गुप्ता ने कहा कि अमेरिका में बने कृत्रिम हाथ की बाजार कीमत करीब 15,000 रुपये थी लेकिन उनकी संस्था विकलांग लोगों को मुफ्त मुहैया करा रही है।

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उन्होंने आगे कहा कि इस हाथ को प्राप्त करने के बाद व्यक्ति कई काम कर सकता है जैसे लिखना, चम्मच से खाना, बाइक, कार या साइकिल चलाना, सब्जी काटना, रसोई का काम, सामान उठाना, श्रम का काम करना आदि। इन हाथों को ठीक करने के लिए किसी तरह के ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती है। ये हाथ एक घड़ी की तरह है। इसे किसी भी समय जोड़ा या अलग किया जा सकता है।

एक अन्य लाभार्थी राधेश्याम नामदेव ने कहा मैं एक दर्जी था लेकिन ट्रेन की घटना में मैंने अपने दोनों हाथ खो दिए। जीवन जीना वास्तव में कठिन था लेकिन अब, मैं अपना हाथ पाकर खुश हूं। वहीं एक और व्यक्ति पंकज ने बताया कि तीन साल पहले उनके दोनों हाथ किसी मशीन से कट गए थे। तब से वह अपने आप को असहाय महसूस कर रहा था। लेकिन इन कृत्रिम हाथों को पाकर मैं बहुत खुश हूं और मुझे अब दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मैं अब अपना काम खुद कर सकता हूं।

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कार्यक्रम का उद्घाटन करने पहुंचे आयुक्त निःशक्तजन मध्य प्रदेश संदीप रजक ने कहा कि घर की पाठशाला द्वारा 100 से अधिक विकलांगों को कृत्रिम हाथ दिए गए है। जबलपुर के लिए यह खुशी का पल था क्योंकि इन कृत्रिम हाथों को पाकर विकलांग लोग अपना काम खुद कर लेंगे। उन्होंने सरकार की ओर से संगठन को बधाई भी दी।

 रजक ने कहा कि आने वाले दिनों में आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में भी इस तरह के कैंप लगाए जाएंगे। सरकार हर विकलांग के लिए यूडीआईडी कार्ड बना रही थी। दिव्यांगजन कार्ड की मदद से देश में कहीं भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।

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उन्होंने कहा कि सरकार आंशिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को 600 रुपये और पूरी तरह से विकलांग व्यक्तियों को 1200 रुपये पेंशन प्रदान कर रही है। साथ ही शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़े छात्रों को 600 स्कॉलरशिप के साथ 2,000 रुपये हर महीने दिए जा रहे हैं। रजक ने आगे कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार, पूरे राज्य में 15 लाख विकलांग व्यक्ति थे, जिनमें 66,000 से अधिक 40% से अधिक विकलांग व्यक्ति शामिल थे।

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