Amroha Case: निकाह हलाला की आड़ में नाबालिग से Gang Rape? High Court ने लगाई फटकार

By अभिनय आकाश | Jul 03, 2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि निकाह हलाला और तीन तलाक़ जैसी प्रथाओं की आड़ में महिलाओं का यौन शोषण नहीं होने दिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्सनल लॉ (निजी कानूनों) की आड़ में अपराधों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब वे एक महिला के पूर्व पति, एक मौलवी, रिश्तेदारों और अन्य आरोपियों की उन याचिकाओं को खारिज कर रहे थे जिनमें उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी। यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का है, जहां एक महिला ने कम उम्र में शादी, तीन तलाक़, निकाह हलाला और दोबारा शादी की आड़ में बार-बार यौन शोषण का आरोप लगाया था। निकाह हलाला के तहत, तलाकशुदा महिला को अपने पूर्व पति से दोबारा शादी करने से पहले किसी दूसरे पुरुष से शादी करनी होती है और फिर उससे अलग होना पड़ता है। ट्रिपल तलाक, जिसे 'तलाक-ए-बिद्दत' भी कहा जाता है, एक ऐसी प्रथा है जिसमें मुस्लिम पुरुष एक ही बार में तीन बार "तलाक" कहकर अपनी पत्नी को तलाक दे देता है। भारत में 2019 में इस प्रथा को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया था।

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FIR के मुताबिक, शिकायत करने वाली महिला को अप्रैल 2015 में, जब वह लगभग 15 साल की थी, कथित तौर पर अज़हर नवाज़ से शादी करने के लिए मजबूर किया गया था। जनवरी 2016 में अज़हर द्वारा कथित तौर पर तीन तलाक़ देने के बाद, उसे 2017 में अज़हर से दोबारा शादी करने से पहले मौलाना क़य्यूम के साथ निकाह हलाला करने के लिए मजबूर किया गया। 'लॉबीट' (LawBeat) की रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट ने गौर किया कि पहले हलाला के समय वह नाबालिग रही होगी। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि 2021 में एक और तलाक़ के बाद, अज़हर ने सुलह की कोशिश की। उसके भाई शाहनवाज़ चौधरी और रिश्तेदार हकीम निशात उर्फ़ निशात ने कथित तौर पर महिला से कहा कि चूंकि उसे दो बार तलाक़ दिया जा चुका है, इसलिए उसे अज़हर से दोबारा शादी करने से पहले दो बार निकाह हलाला करना होगा। एफआईआर के अनुसार, इस रस्म को पूरा करने के बहाने शाहनवाज़ और निशात ने कथित तौर पर फरवरी 2025 में महिला के साथ रेप किया और विरोध करने पर उसे और उसकी बेटी को जान से मारने की धमकी दी। 

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LawBeat की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत करने वाली महिला ने आगे आरोप लगाया कि मौलाना नदीम ने अकील, शाहनवाज़ चौधरी, हकीम निशात और अज़हर नवाज़ की मदद से एक नकली शादी करवाई। इसका मकसद उसे यह यकीन दिलाना था कि उसने अज़हर से कानूनी तौर पर दोबारा शादी कर ली है, ताकि वह उसके साथ फिर से वैवाहिक संबंध बनाने के लिए तैयार हो जाए। LawBeat के अनुसार, याचिकाकर्ताओं (जिनमें तैयब, शाहनवाज़ चौधरी, हकीम निशात, आसिम और मुर्तज़ा उर्फ़ कारी मुर्तज़ा शामिल थे) ने अदालत में दलील दी कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत 'निकाह हलाला' को मान्यता प्राप्त है और 2016 में 'तीन तलाक़' कानूनी रूप से वैध था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि FIR जोड़े की बेटी की कस्टडी और संपत्ति से जुड़े चल रहे विवाद के कारण दर्ज कराई गई थी। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि कथित घटनाओं में कुछ आरोपियों की भूमिका बहुत मामूली थी। हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जांच के शुरुआती चरण में FIR रद्द करने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच जारी रहेगी और आरोपों की जांच करने वाली एजेंसी द्वारा व्यापक जांच की आवश्यकता है। 

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