जम्मू कश्मीर में एक साथ चुनावों के हालातों पर केंद्र ने दी EC को जानकारी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 19, 2019

नयी दिल्ली। केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में आगामी लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव कराने को लेकर चुनाव आयोग को सोमवार को राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति से अवगत कराया है। केन्द्रीय गृह सचिव राजीव गौबा की अगुवाई में गृह मंत्रालय के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा में पिछले दिनों हुये आतंकवादी हमले से राज्य में उत्पन्न हालात की आयोग को जानकारी दी। इस हमले में सुरक्षा बल के 40 जवान शहीद हो गये थे। 

सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय के अधिकारियों की चुनाव आयोग में हुयी समीक्षा बैठक का मकसद देश में लोकसभा चुनाव की तैयारियों और इसके साथ ही जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने पर विचार विमर्श करना था। उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा भंग किये जाने के कारण राष्ट्रपति शासन लागू है। सूत्रों के मुताबिक लगभग एक घंटे तक चली बैठक के दौरान गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने जम्मू कश्मीर के जमीनी हालात, राज्य में तैनात सुरक्षा बलों की संख्या और चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा बलों की अतिरिक्त जरूरत की जानकारी दी।

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मंत्रालय द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर आयोग इस बात का फैसला करेगा कि जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव के साथ या इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव कराये जायें। बैठक में मंत्रालय ने देश में आंतरिक सुरक्षा की मौजूदा स्थिति से भी अवगत कराते हुये चुनाव की जरूरत को देखते हुये सुरक्षा बलों की उपलब्धता की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि आयोग सभी राज्यों से चुनाव की तैयारियों की समीक्षा रिपोर्ट मिलने के बाद मार्च के पहले पखवाड़े में चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है। लोकसभा चुनाव के साथ ही ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव कराये जा सकते है।

जम्मू कश्मीर के हालात पर नजर रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने राज्य में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव कराने की जरूरत पर बल देते हुये कहा कि कुछ एक घटनाओं के कारण इस तरह के अहम फैसलों को लंबित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने दलील दी कि एक साथ चुनाव कराने पर उतने ही सुरक्षा बलों की जरूरत होगी जितने कि अलग अलग चुनाव कराने पर होती। उन्होंने कहा कि सिर्फ उम्मीदवारों को सुरक्षा मुहैया कराने पर ही अतिरिक्त सुरक्षा बलों की जरूरत होगी।

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उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर में पिछले साल सत्तारूढ़ पीडीपी सरकार से भाजपा के समर्थन वापस लेने से सरकार के अल्पमत में आने के कारण 19 जून को राज्य में राज्यपाल शासन लगाया गया था। इसके बाद राज्यपाल ने विधायकों की खरीद फरोख्त की आशंका के मद्देनजर 21 नवंबर को विधानसभा भंग कर दी। राज्यपाल शासन की अवधि समाप्त होने पर केन्द्र सरकार ने 19 दिसंबर को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।

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