हाइपरसोमनिया से पीड़ित हैं तो घबराएं नहीं, ऐसे करें इलाज

By मिताली जैन | Oct 15, 2018

क्या आप हर जगह बैठे−बैठे झपकी लेने लगते हैं ? क्या रात्रि में आठ से दस घंटे सोने के बाद भी आपकी नींद पूरी नहीं होती ? क्या आप हरदम सुस्ती महसूस करते हैं और सोने के बहाने ढूंढते हैं ? अगर इन सभी सवालों के जवाब हां हैं तो यह हाइपरसोमनिया के लक्षण हो सकते हैं। बेहतर नींद भले ही अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हो लेकिन जरूरत से ज्यादा सोना भी हेल्थ के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इतना ही नहीं, कुछ लोगों को स्लीपिंग डिसआर्डर होता है और उन्हें इसके बारे में पता भी नहीं होता। तो चलिए जानते हैं हाइपरसोमनिया के बारे में−

हाइपरसोमनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को हरदम नींद आती है। इतना ही नहीं, वह कोई भी काम करते हुए सो सकते हैं। जरा सोचिए कि अगर किसी व्यक्ति को कार या बाइक चलाते हुए नींद आ जाए तो यह स्थिति उसके व अन्य लोगों के लिए कितनी घातक होगी। इसके अतिरिक्त इस स्लीप डिसआर्डर में व्यक्ति के भीतर ऊर्जा का स्तर काफी कम होता है। जिसके कारण वह हमेशा ही थकान व सुस्ती का अनुभव करता है।

होते हैं यह कारण

हाइपरसोमनिया स्लीप डिसऑर्डर कई कारणों से विकसित होता है। सबसे पहले तो दिन में सोने की आदत कब स्लीप डिसऑर्डर में तब्दील हो जाती है, इसका व्यक्ति को पता ही नहीं चलता। इसके अतिरिक्त रात में ठीक तरह से न सोना, सोते हुए खर्राटे लेना, आवश्यकता से अधिक वजन, किसी ड्रग या अल्कोहल का सेवन, सिर पर चोट लगने या कोई न्यूरोलॉजिकल बीमारी व कुछ खास तरह की दवाईयां व डिप्रेशन आदि भी हाइपरसोमनिया का कारण बनती हैं।

ऐसे करें पहचान

हाइपरसोमनिया की पहचान का सबसे आसान तरीका यह है कि अगर आपको दिन में भी व कभी भी नींद आने लग जाए तो समझ जाइए कि अब डॉक्टर से मिलने का वक्त आ गया है। आप डॉक्टर से मिलने पर अपनी स्लीपिंग रूटीन के बारे में बताएं। साथ ही अगर आप किसी खास तरह की दवाई का सेवन कर रहे हैं या इमोशनली आपको किसी तरह की परेशानी है तो उसके बारे में भी अवश्य बताएं। इसके बाद ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन, ईईजी व पॉलिओमोग्राफी एक तरह का नींद परीक्षण करके इस डिसऑर्डर के बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता है।

आसान है ट्रीटमेंट

अगर आप सच में हाइपरसोमनिया स्लीपिंग डिसऑर्डर से पीड़ित हैं तो इसका इलाज करना बेहद आसान है। इसके लिए कुछ दवाईयां, व रात में पर्याप्त नींद लेने, अल्कोहल या कैफीन का सेवन न करने से आप अपनी स्थिति में आसानी से सुधार कर सकते हैं।

-मिताली जैन

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