भारत को मिलेगा यूरेनियम का बंपर खजाना, होने वाली है बड़ी डील!

By अभिनय आकाश | Jul 06, 2026

दक्षिण प्रशांत महासागर की नीली लहरों के बीच एक बहुत बड़ा खेल शुरू हो चुका है। एक ऐसा खेल जिसके बिसात कैनबरा में बिछाई गई है जिसकी गूंज बीजिंग तक सुनाई देगी और जिसका फायदा भारत की राजधानी नई दिल्ली को होगा। खबर बड़ी है और इसके दो मुख्य पहलू हैं। पहला ऑस्ट्रेलिया और फिजी के बीच एक ऐतिहासिक सुरक्षा समझौता हुआ है जिसे वह वाले यूनियन कहा जा रहा है और दूसरा जिसका भारत को दशकों से इंतजार था। ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की सप्लाई का रास्ता साफ होना है। इस हफ्ते होने वाली हाई लेवल मीटिंग्स ना केवल ऑस्ट्रेलिया की रक्षा नीति को बदल देंगी बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा की तस्वीर भी बदल जाएगी। 

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यूरेनियम डील आखिर क्या है?

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम की कहानी उतार-चढ़ाव से भरी रही है। ऑस्ट्रेलिया के पास लगभग दुनिया का 30% यूरेनियम भंडार है। लंबे समय तक ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम देने से मना कर दिया था। क्योंकि भारत ने परमाणु व प्रसार संधि एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। लेकिन साल 2008 में जब भारत को परमाणु व्यापार के लिए विशेष छूट मिली तब रास्ते खुले। 2014 में तात्कालीन पीएम टोनी अवार्ड ने भारत के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। लेकिन तकनीकी पेच हमेशा फंसे रहे। सबसे बड़ी समस्या थी सेफगार्ड्स यानी सुरक्षा मानक। ऑस्ट्रेलिया चाहता था कि उसका यूरेनियम केवल नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए इस्तेमाल हो ना कि हथियारों के लिए। द ऑस्ट्रेलियन की रिपोर्ट कहती है कि दोनों देशों ने अब इस तकनीकी मुद्दे को सुलझा लिया है। इसका मतलब यह है कि अब कागजी कारवाई खत्म हो चुकी है और जल्द ही भारत ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सप्लाई शुरू होने वाली है।

भारत के लिए डील इतनी इंपॉर्टेंट क्यों है?

भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और इसके लिए भारत को बेतहाशा बिजली चाहिए। फिलहाल भारत अपनी अधिकांश बिजली कोयले से बनाता है जिससे प्रदूषण होता है। भारत ने लक्ष्य रखा है कि साल 2070 तक वो नेट जीरो उत्सर्जन करने वाला देश बनेगा। इसके लिए हमें कोयले को छोड़कर परमाणु ऊर्जा की तरफ जाना होगा। भारत में वर्तमान समय में 22 से ज्यादा परमाणु रिएक्टर हैं और कई नए बन रहे हैं। इन रिएक्टर्स को चलाने के लिए यूरेनियम की भारी जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम भारत के न्यूक्लियर पावर प्लांट्स को नई जिंदगी देगा। यह ना केवल सस्ती बिजली देगा बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। अब बात करते हैं कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की यह यूरेनियम डील चीन के लिए कैसे झटका हो सकती है। इस पूरी खबर के केंद्र में एक ही देश है चीन। चाहे वो फीजी में ऑस्ट्रेलिया का सुरक्षा समझौता हो या भारत को यूरेनियम की सप्लाई। ये सब चीन की घेराबंदी का एक हिस्सा है।  

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