पुरानी सरकारों की वजह से पूरा होगा 5 ट्रिलियन $ की इकोनॉमी का लक्ष्य

By अनुराग गुप्ता | Jul 19, 2019

2019 के लोकसभा चुनाव में भारी मतों से विजयी होकर दोबारा सत्ता में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा मंत्रिमंडल देश को आने वाले 5 सालों में 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात कर रहे हैं और तो और मोदी कार्यकाल- 2 का पहला बजट पेश कर रही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था पर काफी जोर देते हुए इसे महत्वपूर्ण भी बताया लेकिन पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रणब मुखर्जी के हालिया बयान से सरकार को धक्का जरूर लगा होगा।

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डॉ मुखर्जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि जो लोग 55 साल के कांग्रेस शासन की आलोचना करते हैं, वे यह बात नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि आज़ादी के वक्त भारत कहां था और हम कितना आगे आ चुके हैं। डॉ मुखर्जी इतने में ही नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि हां, अन्य लोगों ने भी योगदान दिया लेकिन आधुनिक भारत की नींव हमारे उन संस्थापकों ने रखी थी, जिन्हें योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में मज़बूती से भरोसा था। जबकि आज ऐसा नहीं है, जब योजना आयोग को ही खत्म कर दिया गया है।

कांग्रेस सरकारों की आलोचना करने वालों पर बरसते हुए डॉ मुखर्जी ने कहा कि जो लोग 50-55 साल के कांग्रेस शासन की आलोचना करते हैं वह यह भूल गए कि हमने कहां से शुरू किया था और कहां जा कर खत्म किया। उन्होंने आगे कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक ले जाने की नींव पुरानी सरकारों ने रखी थी। जिसमें जवाहरलाल नेहरू, मनमोहन सिंह और पी.वी. नरसिम्हा राव शामिल थे और हमने तो भारतीय अर्थव्यवस्था को 18 खरब डॉलर की मज़बूत नींव के साथ छोड़ा था जो लगभग शून्य से शुरू हुई थी।

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डॉ मुखर्जी ने अपने संबोधन में किया बजट भाषण का जिक्र 

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि वित्त मंत्री यह कह सकते हैं कि भारत 2024 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर वाला देश बन जाएगा। लेकिन यह आसमान से उतरकर नहीं आएगा और इसके लिए एक मजबूत नींव मौजूद हैं। जिसे अंग्रेजों ने नहीं बल्कि आजादी के बाद से भारतीयों ने बनाया था। 

PM मोदी ने भाषण में क्या कहा था 

बजट भाषण के ठीक एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में बीजेपी के देशव्यापी सदस्यता अभियान की शुरूआत करते हुए कहा था कि कल आपने बजट के बाद टीवी पर और आज अखबारों में एक बात पढ़ी, सुनी और देखी होगी- वो है पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी। इस फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य का मतलब क्या है? एक आम भारतीय की जिंदगी का इससे क्या लेना-देना है, ये आपके लिए, सबके लिए जानना बहुत जरूरी है। क्योंकि कुछ लोग हैं जो हम भारतीयों के सामर्थ्य पर शक कर रहे हैं, वो कह रहे हैं कि भारत के लिए ये लक्ष्य प्राप्त करना बहुत मुश्किल है। इसके अतिरिक्त उन्होंने केक का उदाहरण देते हुए कहा था कि केक का आकार जितना बड़ा होगा लोगों को उतना ही बड़ा हिस्सा मिलेगा। इसलिए हमने भारत की अर्थव्यवस्था को पांच हजार अरब डॉलर का बनाने का लक्ष्य रखा है। अर्थव्यवस्था का आकार जितना बड़ा होगा यह देश में उतनी ही समृद्धि लाएगा।

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पहले भी डॉ मुखर्जी ने की थी अर्थव्यवस्था की बात

यशवंत सिन्हा की आत्मकथा के विमोचन में पहुंचे डॉ मुखर्जी ने किताब का एक अंश पढ़ते हुए कहा था कि सिन्हा ने बिल्कुल सही कहा है कि भारत में सियासतदान के लिए अर्थव्यवस्था अंतिम प्राथमिकता होती है। इसी के साथ सिन्हा की किताब का विमोचन करते हुए मुखर्जी ने कहा था कि वह देश के पहले सुधारवादी वित्त मंत्री हो सकते थे। सिन्हा चंद्रशेखर की 1990 से 1991 तक चली सरकार में वित्त मंत्री थे। चंद्रशेखर की सरकार नवंबर 1990 में बनी थी जिसे कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया था लेकिन जून 1991 में कांग्रेस के समर्थन वापस लेने की वजह से वह गिर गई थी।

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