By एकता | Jun 03, 2026
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे में अच्छी आदतें आएं। लेकिन परवरिश के इस सफर में, पेरेंट्स अक्सर अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे बच्चे स्वभाव से जिद्दी होने लगते हैं। अगर आपका बच्चा भी बात-बात पर अड़ जाता है, अपनी मर्जी चलाता है, चिल्लाता है या आपकी बात बिल्कुल नहीं सुनता, तो यह थोड़ा रुककर सोचने का वक्त है। मुमकिन है कि बच्चे के इस व्यवहार के पीछे आपकी ही कुछ आदतें हों। आइए जानते हैं माता-पिता की उन आम आदतों के बारे में, जो धीरे-धीरे बच्चों को जिद्दी बना देती हैं।
एक फिक्स रूटीन होने से बच्चों को पता होता है कि आगे क्या होने वाला है। इससे उनका मन शांत रहता है और वे सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन जब कोई फिक्स रूटीन नहीं होता, तो बच्चे कन्फ्यूज होने लगते हैं। बिना रूटीन के जब पेरेंट्स अचानक बच्चों को कोई काम करने के लिए कहते हैं, तो बच्चे उसका विरोध करते हैं। जिसे पेरेंट्स जिद समझ लेते हैं, वह असल में बच्चे का कन्फ्यूजन या इनसेक्योरिटी होती है।
अगर आप बच्चों को एक ही बात बार-बार बोलते हैं, तो बच्चे को समझ आ जाता है कि पहली, दूसरी या तीसरी बार में काम करने की कोई जरूरत नहीं है। वे जान जाते हैं कि जब तक मम्मी या पापा गुस्सा नहीं होंगे या चिल्लाएंगे नहीं, तब तक कोई कदम उठाने की जरूरत नहीं है। यह आदत बच्चों को बात टालने और जिद्दी बनने की ट्रेनिंग देती है। इसलिए हमेशा क्लीयर ऑर्डर दें और एक बात को एक या दो बार से ज्यादा न बोलें।
यह लगभग हर घर की कहानी है। किसी खिलौने या चॉकलेट के लिए पेरेंट्स पहले तो साफ ना कह देते हैं, लेकिन जैसे ही बच्चा रोना शुरू करता है, पैर पटकता है या मॉल के बीच में तमाशा करता है, पेरेंट्स शर्मिंदगी या सिरदर्द से बचने के लिए उसे वह चीज दिला देते हैं। इससे बच्चे को समझ आता है कि अगर वह ज्यादा जोर से रोएगा या जिद करेगा, तो उसकी बात मान ली जाएगी। बच्चा इसे हथियार बनाकर अपनी सारी बातें मनवाता है।