Teenage बच्चों और Grand Parents में कैसे बैठाएं तालमेल? ये Expert Tips हर Family के काम आएंगे

बच्चों और ग्रैंड पेरेंट्स के बीच बढ़ते जेनरेशन गैप को कम करने में माता-पिता की भूमिका अहम होती है। यह लेख कुछ आसान पेरेंटिंग टिप्स बताता है, जैसे साथ में फैमिली टाइम बिताना और एक-दूसरे की खूबियों को समझना, जिससे इस रिश्ते को फिर से मजबूत किया जा सकता है।
बच्चे जैसे-जैसे बड़े होने लगते हैं, वैसे-वैसे ग्रैंड पेरेंट्स के साथ उनका बॉन्ड फीका पड़ने लगता है। ऐसा नहीं है कि बच्चे अपने ग्रैंड पेरेंट्स से प्यार नहीं करते हैं, बस बड़े होते ही वह अपनी दुनिया में खो जाते हैं। एक समय के बाद बच्चों और ग्रैंड पेरेंट्स के बीच ऐज गैप की वजह से तकरार शुरू हो जाती है, खासकर उस समय जब बच्चे टीनएजर हो जाते हैं। ऐसे में कैसे एक पेरेंट्स के तौर पर आप ग्रैंड पेरेंट्स और बच्चों का बॉन्ड मजबूत कर सकते हैं? आइए जानते हैं कुछ आसान तरीके।
आपसे ही सीखेंगे बच्चे
बच्चे हमेशा अपने माता-पिता की आदतों को देखकर सीखते हैं। इसलिए सबसे पहले आपको अपने व्यवहार पर ध्यान देना होगा कि आप खुद बुजुर्गों के प्रति कितने केयरिंग हैं। हाल ही में एक जापानी परिवार का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक छोटा बच्चा अपनी मां से फल लेकर खुद खाने से पहले अपने दादा-दादी और भाई-बहनों को देता है।
यह साफ दिखाता है कि अगर आप अपने माता-पिता या सास-ससुर का सम्मान करेंगे, तो बच्चे भी बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के यह अच्छी आदत सीख जाएंगे। जब बुजुर्गों के साथ आपका व्यवहार अच्छा होगा, तो बच्चे भी उन्हें परिवार का अहम हिस्सा मानकर पूरा प्यार और सम्मान देंगे।
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फैमिली टाइम है जरूरी
रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए साथ में समय बिताना और बातचीत करना बहुत जरूरी है। कोरोना-काल के बाद हम सबने फैमिली टाइम की अहमियत को समझा है। हालांकि, अब ऑफिस और स्कूल खुलने से व्यस्तता बढ़ गई है, फिर भी कोशिश करें कि पूरा परिवार रात का खाना एक साथ खाए।
इसी बहाने सबको एक-दूसरे से बात करने का मौका मिलता है। अगर कभी बच्चे या बुजुर्ग एक-दूसरे की शिकायत करें, तो उनकी बात को शांति से सुनें और मिलकर उसका समाधान निकालें।
एक-दूसरे की खूबियों को पहचानें
आजकल के टीनएजर्स टेक्नोलॉजी में बहुत आगे हैं, जबकि बुजुर्गों को मोबाइल ऐप्स या इंटरनेट चलाने में दिक्कत होती है। आप बच्चों को जिम्मेदारी दे सकते हैं कि वे ग्रैंड पेरेंट्स को फोन चलाना सिखाएं। इससे दोनों पीढ़ियों को अच्छा लगेगा। आजकल कई बच्चे इंस्टाग्राम पर अपने ग्रैंड पेरेंट्स के साथ मजेदार वीडियो भी बनाते हैं, जिसे लोग खूब पसंद करते हैं।
इसके अलावा, बच्चे बुजुर्गों के अनुभव से बहुत कुछ सीख सकते हैं। दादा-दादी बच्चों को पढ़ाई, होमवर्क या किसी आर्ट प्रोजेक्ट में मदद कर सकते हैं। साथ मिलकर काम करने से उनका आपसी रिश्ता और मजबूत होगा।
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दिलों में न हों दूरियां
नौकरी या किसी और वजह से आज कई लोग अपने होम टाउन से दूर रहते हैं, या फिर आस-पास के ही किसी दूसरे फ्लैट में रहते हैं। ऐसे में स्मार्ट फोन और इंटरनेट की मदद से दूरियों को कम किया जा सकता है।
जिन परिवारों में दादा-दादी दूर रहते हैं, वहां माता-पिता को चाहिए कि वे वीडियो कॉल के जरिए बच्चों की उनसे बात करवाते रहें। सच तो यह है कि परिवार के लोग चाहे कहीं भी रहें, उनके दिलों में दूरी नहीं होनी चाहिए।
समझें अपनी अहमियत
अगर आपके घर में बुजुर्ग और टीनएजर्स दोनों हैं, तो आप इन दोनों पीढ़ियों को जोड़ने वाले सबसे जरूरी सदस्य हैं। आपको अपनी जिम्मेदारी समझते हुए दोनों के बीच तालमेल बिठाना होगा।
इसके लिए आप आउटिंग या पिकनिक का प्लान बना सकते हैं, जिससे घर का माहौल खुशनुमा रहे। इसके साथ ही, आपको अपनी सेहत और खुशी का भी ध्यान रखना होगा, तभी आप परिवार को अच्छी तरह संभाल पाएंगे।
इन छोटी बातों का भी रखें ध्यान
जिम्मेदारी दें: बुजुर्गों को स्पेशल फील कराने के लिए उनकी क्षमता के हिसाब से उन्हें घर की कुछ जरूरी जिम्मेदारियां सौंपें।
बच्चों को समझाएं: टीनएजर्स को सिखाएं कि अगर दादा-दादी उन्हें टोकते हैं, तो वह उनकी भलाई के लिए ही होता है।
अकेले में समझाएं: टीनएज उम्र में मूड स्विंग्स होना आम बात है। अगर बच्चा गुस्सा करे, तो उसे सबके सामने डांटने के बजाय अकेले में प्यार से समझाएं।
डिजिटल डिटॉक्स: घर में एक नियम बनाएं कि रोज एक घंटे के लिए कोई भी मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करेगा। उस समय सब साथ बैठकर बातें करेंगे या कोई बोर्ड गेम खेलेंगे।
खास दिनों को मनाएं: बुजुर्गों के जन्मदिन या शादी की सालगिरह पर बच्चों के साथ मिलकर तैयारी करें और बच्चों की तरफ से उन्हें गिफ्ट दिलाएं। इससे उनका रिश्ता और गहरा होगा।
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