सरकार पर भले ही लगे हों कई आरोप पर ईमानदार प्रधानमंत्री बने रहे मनमोहन

By अनुराग गुप्ता | Sep 26, 2019

देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का आज 87वां जन्मदिन है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी समेत तमाम दिग्गज नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। आपको बता दें कि 10 साल तक सरकार चलान वाले डॉ. मनमोहन सिंह की छवि चुप्पी साधे रहने वाले प्रधानमंत्री के तौर पर देखी जाती है।

बेदाग छवि के बावजूद डॉ. मनमोहन सिंह को कई बार ताने भी सुनने पड़े कि ऐसी व्यक्तिगत ईमानदारी किस काम की, जब आपकी नाक के नीचे ही भ्रष्टाचार हो रहा हो। 

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जीवन परिचय

26 सितंबर 1932 के दिन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत (उस वक्त का अविभाजित भारत) में एक सिख परिवार में जन्मे डॉ. मनमोहन सिंह लगातार छठे बार राज्यसभा के सदस्य बने। वह 1991 से 2019 तक उच्च सदन के सदस्य रहे। और कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें राजस्थान से राज्यसभा लाया गया, जिसके बाद वह छठी बार राज्यसभा पहुंचे। वह इस दौरान लगातार दो बार देश के प्रधानमंत्री रहे। इसके अलावा वह मार्च 1998 से मई 2004 के बीच राज्य सभा में विपक्ष के नेता रहे। वह 2004 से 2014 तक सदन के नेता भी रहे।

साल 2004 में पूरा देश देख रहा था कि एक अर्थशास्त्री बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के 7 रेसकोर्स रोड पहुंचे। देश की दशा और दिशा में अहम योगदान देने वाले डॉ सिंह ने अपने अनुभवों और दूरदृष्टि की वजह से विकासशील देश को विकसित भारत बनाने के दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाया था। इतना ही नहीं प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद पहली बार ऐसा देखा गया था कि किसी प्रधानमंत्री ने अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया हो।

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दिलचस्प वाक्या

डॉ. मनमोहन सिंह का यूं तो आज यानी की 26 सितंबर को जन्मदिन मनाया जाता है। हम बस नहीं, सारा हिन्दुस्तान मनाता है लेकिन यह दावे के साथ नहीं कह सकते कि उनका जन्मदिन 26 सितंबर को ही होता है क्योंकि उनके परिवार में किसी को भी याद नहीं कि उनके जन्म की तारीख क्या थी।

विदेश में ली थी शिक्षा

पंजाब विश्वविद्यालय (Punjab University) से कक्षा 10 की परीक्षा पास करने के बाद डॉ सिंह आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चले गए थे। उन्होंने साल 1957 में ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (Cambridge University) से अर्थशास्त्र (Economics) में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी और फिर 1962 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (University of Oxford) के नूफील्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में पीएचडी (Phd) की।

पढ़ाई करने के बाद वह भारत वापस आ गए और दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (Delhi School of Economics) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बन गए। समय का चक्र चलता गया और डॉ. सिंह जिनेवा में दक्षिण आयोग में महासचिव के रूप में भी नियुक्त किए गए थे। साल 1971 में डॉ. सिंह को वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया फिर 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बने।

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वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार के बाद उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक का गवर्नर और  प्रधानमंत्री का आर्थिक सलाहकार बनाया गया था। 

पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार में वित्तमंत्री रहे डॉ. सिंह का नाम कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने अचानक से आगे कर दिया था। तत्पश्चात वामदलों से समर्थन लेने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके कार्यकाल के दौरान कोयला घोटाला, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला जैसे कई घोटाले हुए। लेकिन फिर भी डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल को याद किया जाएगा।

उनके कार्यकाल के दौरान सूचना का अधिकार (RTI), आधार कार्ड (Aadhar Card), मनरेगा (MGNREGA, शिक्षा का अधिकार कानून (Right To Education Law) बड़े फैसलों में से एक हैं। हालांकि उनके कार्यकाल के दौरान बड़े फैसलों में अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील भी शामिल है। इस डील के बाद भारत न्यूक्लियर पॉवर देशों के बीच में एक बड़ी शक्ति बनकर उभरा था। हालांकि इस डील को लेकर कई बार वामदलों ने सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी तक दे डाली थी।

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2008 में मची थी आर्थिक तबाही

साल 2008 में विश्व आर्थिक मंदी से जूझ रहा था। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को तो बुरे दौर से निकाला ही साथ ही विश्व की बड़ी शक्तियों को भी उनके देश की अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने के लिए अहम सुझाव दिए।

शालीन व्यक्ति हैं डॉ सिंह

जब डॉ. मनमोहन सिंह का असम से राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हुआ था उस वक्त उपराष्ट्रपति वेकैंया नायडू ने सिंह को बहुत ही भद्र, शांत और शालीन व्यक्ति बताया था। उन्होंने कहा था कि डॉ सिंह राष्ट्र के विकास एवं कल्याण से संबंधित विभिन्न् मुद्दों विशेषकर आर्थिक मामलों में होने वाली चर्चाओं में भाग लेकर सदन की सामूहिक बुद्धिमत्ता को समृद्ध करने में काफी योगदान किया। वेंकैया नायडू ने कुजूर का जिक्र करते हुए कहा कि वह जून 2013 से जून 2019 तक उच्च सदन के सदस्य रहे। उन्होंने आदिवासियों और असम के चाय बागानों में काम करने वाले लोगों के लिए काफी काम किया। नायडू ने दोनों सदस्यों को उनके अच्छे स्वास्थ्य, प्रसन्नता और लंबे समय तक राष्ट्र की सेवा में सक्रिय रहने की कामना की थी।

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