By रेनू तिवारी | Dec 16, 2025
जम्मू और कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने सोमवार को फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज डिपार्टमेंट के 103 कर्मचारियों की सेवाओं को खत्म करने का आदेश दिया। एक जांच और एंटी-करप्शन ब्यूरो की जांच में पाया गया कि 2020 में एक हेरफेर वाली भर्ती प्रक्रिया के ज़रिए उनकी नियुक्तियां की गई थीं। यह कार्रवाई सरकार द्वारा नियुक्त जांच समिति की फाइंडिंग्स और उसके बाद ACB द्वारा पांच साल पहले फायरमैन और ड्राइवरों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद की गई।
उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले जम्मू-कश्मीर गृह विभाग द्वारा जारी आदेश में प्रधान सचिव चंद्राकर भारती ने बताया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ओएमआर शीट में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़, उत्तर पुस्तिकाओं की जाली स्कैन की गई छवियों और मेरिट सूची में हेरफेर किया गया था। इसने 106 उम्मीदवारों के पक्ष में परिणाम में हेरफेर की पुष्टि की, जिन्हें वास्तविक प्राप्त अंकों से बहुत अधिक अंक दिए गए थे। यह सब आपराधिक साजिश का हिस्सा था।
भारती ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से स्थापित हो चुका है कि इन 106 उम्मीदवारों की नियुक्तियां धोखाधड़ी और आपराधिक तरीकों से यानी परिणाम में हेरफेर करके प्राप्त की गईं, जिसके कारण उनकी नियुक्तियां शुरू से ही अमान्य मानी जाती हैं। आदेश में कहा गया कि इन कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखना अवैधता को कायम रखना है, जो सार्वजनिक विश्वास और भर्ती प्रक्रियाओं की पवित्रता को कमजोर करता है। पहचाने गए 106 अवैध नियुक्त व्यक्तियों में से तीन की नियुक्ति पहले ही रद्द की जा चुकी थी। इसलिए शेष 103 उम्मीदवारों की नियुक्तियां अवैध घोषित करते हुए तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती हैं।