नेचर पार्क में प्रकृति प्रेम (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Mar 01, 2025

प्रकृति प्रेम उगाने के लिए नेचर पार्क बनाया गया। पेड़ पौधे भी चाहते थे कि पार्क का उदघाटन मंत्री करे। कई महीने इंतज़ार के बाद शानदार उदघाटन, छोटे नहीं मोटे व्यक्ति यानी मंत्री ने किया। उदघाटन एक उत्सव होता है जिसके बारे काफी महंगा सूचना पट यहां लगाया है। लोहे का बड़ा मुख्य गेट लगाया है जिसके दोनों तरफ सीमेंट के मोटे पेड़ बनाए गए हैं। पत्थर की पक्की सुरक्षा दीवारें चिन दी गई है जिन पर एनेमल पेंट कर चमका दिया गया है। 

पार्क में एंगल आयरन पर साइन बोर्ड फिट किए गए हैं। इन्हें सीमेंट कंक्रीट में अच्छी तरह जमाया गया है ताकि आसानी से चोरी न हो पाएं। नेचर पार्क के अन्दर शेर, गेंडा, भालू, मोर, तीतर की मूर्तियां स्थापित की हैं। बच्चों के खेलने के लिए स्लाइडर वगैरा भी हैं। बैठने के लिए पत्थर की सीढियां हैं। टहलने के रास्ते पर बीच में जहां वृक्ष मिले, उन्हें काटा नहीं आसपास कंक्रीट बिछा दी। इस रास्ते पर जूते भी न फटेंगे। समाज की संजीदा सेवा करने वाली, अनेक संस्थाओं द्वारा पर्यटकों का हार्दिक स्वागत करने वाले नामपट्ट भी उपलब्ध हैं। 

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वन विभाग दवारा नेचर पार्क को स्थापित करने में ज्यादा नहीं कई लाख रूपए की लागत आई है। विकास के लिए किए गए निर्माण में तो खर्च होता ही है। सिर्फ वृक्ष तो लगाए नहीं हैं कि सरकारी नर्सरी से मुफ्त में उठा लाए और लगा दिए। कुछ दिन खाद पानी किया बाद में कुदरत ने संभाल लिए। बारिश नहीं भी हुई तो कौन पूछता है और कौन बताता है। यहां रेन शेल्टर बनाया है शायद तभी इस क्षेत्र में रेन अब कम हो रही है।

पार्क में आकर आंखों से देखो तो लगता है यहां प्रकृति को पार्क किया गया है। नेचर पार्क में जो चीज़ें बनाई गई हैं वे ध्यान आकर्षित करती हैं। कई हेक्टेयर ज़मीन पर बने पार्क में आने वाले प्रकृति प्रेमियों और भूले भटके पर्यटकों के लिए, सबसे ज़रूरी और आकर्षक जगह यानी कैंटीन का निर्माण किया गया ताकि भूखे न रहें। चैक डैम बनाया है, जिन्हें चैक डैम बारे पता नहीं है वे यहां आकर सामान्य ज्ञान चैक कर सकते हैं। 

बहुत आकर्षक महंगी सोलर लाइट्स लगाईं गई हैं ताकि जो लोग दिन में नहीं घूम सकते, रात को दूधिया रोशनी में प्रकृति के आंगन में मज़ा ले सकें। प्रेशर पाथ भी बनाया गया है जिस पर नेट फेंसिंग की गई है ताकि पार्क में घूमने वाले सामाजिक जानवर आराम से घूम सकें और असली जानवर उन्हें तंग न कर सकें। नेचर पार्क को एक अखबार ने नेचुरल पार्क लिखकर उचित ही किया क्यूंकि जब इंसान  अपनी नेचर के मुताबिक नेचर पार्क बनाता है तो मानवीय मनमानियों को बहुत फायदा होता है। थोडा बहुत नुक्सान कुदरत का हो जाए तो वह बुरा नहीं मानती।

- संतोष उत्सुक

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