By एकता | Jun 07, 2026
मणिपुर में मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा का एक बेहद दर्दनाक चेहरा सामने आया है। राज्य के गृह विभाग द्वारा सूचना का अधिकार के तहत दी गई एक रिपोर्ट से पता चला है कि तब से लेकर अब तक राहत शिविरों और अस्थाई घरों में शरण लिए हुए 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
मणिपुर में संघर्ष शुरू होने के तीन साल बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। आरटीआई से खुलासा हुआ है कि राज्य भर में 43,000 से अधिक लोग आज भी राहत शिविरों और प्री-फैब्रिकेटेड घरों में रहने को मजबूर हैं। 30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कांगपोकपी जिले में सबसे ज्यादा 15,694 विस्थापित लोग रह रहे हैं। इसके अलावा बिष्णुपुर में 10,092 और चूराचांदपुर में 6,365 लोग अभी भी शिविरों में ही अपनी जिंदगी काट रहे हैं।
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, राहत शिविरों और बस्तियों में कम से कम 25 अप्राकृतिक मौतें भी दर्ज की गई हैं। चूराचांदपुर में ऐसी 6 मौतें हुईं, जिनमें डूबने की चार घटनाएं, करंट लगने का एक मामला और यौन उत्पीड़न का एक मामला शामिल है। इस यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
दूसरी तरफ, इंफाल वेस्ट में 4 अप्राकृतिक मौतें हुईं, जिनमें फांसी लगाकर खुदकुशी करने के दो मामले, ड्रग ओवरडोज का एक मामला और गोली लगने से हुई एक मौत शामिल है। इन घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने शिविरों में काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए हैं।
राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को अपने घर से दूर होने के दर्द के साथ-साथ गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से भी जूझना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, इंफाल ईस्ट जिले के शिविरों में 217 लोग गंभीर या लाइलाज बीमारियों से पीड़ित हैं। इसी तरह इंफाल वेस्ट में 41 और बिष्णुपुर में 26 मरीज ऐसी ही असाध्य बीमारियों से लड़ रहे हैं। जिला प्रशासनों ने बताया कि बीमार लोगों को मेडिकल ट्रीटमेंट, मानसिक काउंसलिंग, दवाइयां, व्हीलचेयर और सर्जरी के लिए आर्थिक मदद जैसी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं।