By रेनू तिवारी | Sep 26, 2026
दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर मुंबई नगरी भक्ति, उत्साह और आस्था के अनूठे रंगों में सराबोर नजर आई। "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" के गूंजते जयकारों, ढोल-ताशों की पारंपरिक और गूंजती थाप तथा आसमान में उड़ते लाल-गुलाल और फूलों की वर्षा के बीच विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की मूर्तियों का विसर्जन किया गया। गिरगांव चौपाटी से लेकर ददर, जुहू और परेल की सड़कों पर श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।
नगर निकाय ने बताया कि दिनभर में गणेश मंडलों की 772 गणपति प्रतिमाओं, 14,864 घरेलू प्रतिमाओं और गौरी/हरतालिका देवी की 518 प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। बीएमसी के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, विसर्जन प्रक्रिया के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। प्रसिद्ध लालबागजा राजा गणपति की विसर्जन यात्रा रात करीब 11 बजे खड़ा पारसी स्टेच्यू पहुंची, वहीं चिंचपोकली चिंतामणि की प्रतिमा आर्थर रोड जंक्शन पहुंची। गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। इस दिन श्रद्धालु गणपति की मूर्तियों का प्राकृतिक जलाशयों या कृत्रिम तालाबों में विसर्जन कर भगवान गणेश को विदाई देते हैं। इस अवसर पर मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में पूरे उल्लास के साथ शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।
उत्सव के अंतिम दिन मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में रंग-बिरंगी और भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जिनमें अक्सर देर रात तक और अगले दिन सुबह तक भी उत्सव जारी रहता है। लालबाग-परेल इलाके में महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु विसर्जन शोभायात्राएं एवं गणपति की मूर्तियों पर पुष्पवर्षा देखने तथा उत्सव का आनंद लेने के लिए सड़कों के किनारे एकत्र हुए।
नगर निकाय ने शहर के 67 प्राकृतिक विसर्जन स्थलों और 383 कृत्रिम तालाबों पर ‘लाइफगार्ड’ (डूबने से बचाने के लिए तैनात प्रशिक्षित कर्मी), एम्बुलेंस, चिकित्सकीय दल, क्रेन और अन्य आपात सेवाओं की व्यवस्था की है। बीएमसी ने समुद्र तट के आसपास ‘ब्लू-बटन जेलीफिश’ और ‘स्टिंगरे’ मछलियों की मौजूदगी के मद्देनजर लोगों से विसर्जन के लिए समुद्र में उतरते समय विशेष सावधानी बरतने और नगर निकाय एवं पुलिस अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की भी अपील की।
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