Anant Chaturdashi पर घर में Ganesh Visarjan करते समय अपनाएं यह सही विधि

Ganesh Visarjan
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भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी यानी अनंत चतुर्दशी पर 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन गणेश विसर्जन के साथ होता है। इस दिन भगवान विष्णु और गणपति की पूजा कर बप्पा को पाथेय पोटली के साथ विदा किया जाता है। घर पर विसर्जन करते समय साफ जल और गंगाजल के पात्र में विधिपूर्वक प्रतिमा समर्पित करें।

आज यानी की भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव का समापन हो रहा है। इस दिन गणपति विसर्जन किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और भदगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। इससे व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इस दिन देशभर में गणेश विसर्जन को लेकर विशेष तैयारी और रौनक देखने को मिलती है। ऐसे में अगर आप भी अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं इस दिन कि तिथि, मुहूर्त, महत्व और कुछ जरूरी नियमों के बारे में...

विसर्जन विधि और पाथेय की परंपरा

विसर्जन वाले दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर बप्पा की विधिविधान से पूजा करें और उनको फूल, माला, अक्षत, सिंदूर और मोदक अर्पित करें। फिर धूप-दीप जलाकर भगवान गणेश की आरती उतारें।

वहीं ध्यान रखें कि गणपति को विदा करने से पहले उनको एक पोटली बांधकर जरूर दें। इस पोटली को पाथेय कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बप्पा को देवलोक लौटते समय रास्ते में भोजन के लिए यह पोटली दी जाती है। इसके लिए पीले या लाल कपड़े में थोड़ा सा दूर्वा, अक्षत, सिक्का, मोदक, सुपारी और फल बांधकर गणपति के साथ रखें।

ऐसे करें विसर्जन

अगर आप घर पर विसर्जन कर रहे हैं, तो साफ पात्र में जल भरें और इसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं। अब हाथ में पुष्प लेकर पवित्र नदियों का स्मरण करें और फूल को जल में अर्पित करें। फिर श्रद्धापूर्वक बप्पा की प्रतिमा को जल में विसर्जित करें। इस दौरान बप्पा के मंत्र का जाप करें और 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' का उद्घोष करें। फिर प्रतिमा को पूरी तरह से जल में समर्पित करें। आप बाद में उस जल को दुर्वा या कोई पवित्र पौधे में डाला जा सकता है।

महत्व

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू हुआ गणेश उत्सव का पर्व अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा-अर्चना के अलावा गणपति विसर्जन किया जाता है। इस बात अनंत चतु्र्दशी के मौके पर कई शुभ और दुर्लभ योग बन रहे हैं, जिससे बप्पा की पूजा और विसर्जन से भक्तों को कई गुना शुभ फल प्राप्त होंगे।

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