By अनुराग गुप्ता | Nov 04, 2021
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टियां नए समीकरण बनाने में जुटी हुई हैं। जहां एक तरफ जयंत चौधरी की बातचीत अखिलेश यादव चल रही थी वहीं कांग्रेस रालोद के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उसके तरफ खिंची चली आ रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन के चलते रालोद का प्रभाव बढ़ा है, ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर जयंत को साइकिल से उतारकर कांग्रेस की प्रतिज्ञा यात्रा के साथ जोड़ दिया जाए तो संभवत: सीटें बढ़ सकती हैं। हालांकि दूसरी तरफ अखिलेश यादव लगातार छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन करने में जुटे हुए हैं।
जयंत संग दिखीं प्रियंका गांधीउत्तर प्रदेश में चुनाव से ठीक पहले नए-नए समीकरण बनते बिगड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रालोद नेता जयंत चौधरी से मुलाकात की है। इस दौरान नेताओं के बीच में गठबंधन को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक कांग्रेस ने जयंत चौधरी को पंजाब विधानसभा चुनाव में सीटें देने और राज्यसभा भेजने का ऑफर दिया गया है। हालांकि यह गठबंधन तभी कारगार साबित होगा जब रालोद, कांग्रेस और बसपा एक साथ आ जाए। लेकिन कांग्रेस, बसपा के साथ गठबंधन नहीं करेगी।समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को साफ कर दिया था कि जयंत चौधरी के साथ गठबंधन है अब बस सीट बंटवारे को लेकर बातचीत होनी है। लेकिन जयंत चौधरी की प्रियंका गांधी के साथ हुई मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में तो अलग तरह की ही चर्चा है। इतना ही नहीं जयंत चौधरी ने तो अखिलेश यादव के साथ जाने वाली फ्लाइट भी छोड़ दी थी और फिर कांग्रेस के निजी विमान से दिल्ली पहुंचे। इस विमान में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मौजूद थे।
ऐसा माना जा रहा है अगर कांग्रेस को रालोद का साथ मिल गया तो उनके पक्ष में वोट ज्यादा पड़ेंगे और उनकी सीटें भी दुगनी आ सकती हैं। हालांकि मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच में होता हुआ दिखाई दे रहा है। लेकिन जयंत के कांग्रेस के साथ हाथ मिला लेने से अखिलेश कमजोर पड़ जाएगा। जबकि कांग्रेस को ज्यादा कुछ फायदा नहीं मिलेगा।