शत्रुओं पर विजय प्राप्ति हेतु किया जाता है गुरु प्रदोष व्रत

By प्रज्ञा पाण्डेय | Sep 26, 2019

हर महीने के कृष्ण पक्ष तथा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत होता है। हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व होता है। इस व्रत में शिवजी की आराधना की जाती है। प्रदोष व्रत में सोम प्रदोष, मंगल प्रदोष और शनि प्रदोष का विशेष महत्व होता है तो आइए हम आपको प्रदोष व्रत की महिमा के बारे में कुछ रोचक बातें बताते हैं।

26 सितम्बर, बृहस्पतिवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत खास है क्योंकि इस व्रत को करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है और दुश्मनों का नाश होता है। बृहस्पतिवार को पड़ने वाले व्रत को गुरु प्रदोष भी कहा जाता है।

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प्रदोष व्रत में दिन के हिसाब से मिलता है फल

वैसे तो प्रदोष व्रत बहुत फलदायी होता है लेकिन प्रदोष व्रत का विभिन्न अवसरों पर करने का अलग महत्व होता है। रविवार को पड़ने वाले प्रदोष को रवि प्रदोष कहते हैं। रवि प्रदोष का व्रत रहने से लम्बी आयु और निरोगी काया मिलती है। सोमवार के दिन होने वाले प्रदोष को सोम प्रदोष या चन्द्र प्रदोष कहते हैं और इसे करने से आपकी इच्छाएं पूरी होती है। मंगलवार के प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है। भौम प्रदोष व्रत से रोगों से मुक्ति मिलती है और आप स्वस्थ रहते हैं। बुधवार के दिन बुध प्रदोष होता है। इस व्रत को करने से कामनाएं सिद्ध होती है। बृहस्पतिवार के दिन व्रत से शत्रुओं का नाश होता है। शुक्र प्रदोष व्रत से सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसके अलावा शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत से उत्तम पुत्र की प्राप्ति होती है।

व्रत से जुड़ी कथा 

स्कंद पुराण में कही गयी कथा के अनुसार एक गांव में एक विधवा ब्राह्मणी अपने बच्चे के साथ रहती थी। वह भिक्षा मांग कर अपना गुजारा करती थी। एक दिन रास्ते में लौटते समय उसे नदी किनारे एक बालक मिला। वह बालक कोई सामान्य बालक नहीं था बल्कि वह विदर्भ देश का राजुकमार धर्मगुप्त था। दुश्मनों ने उसके पिता का राज्य हड़प कर उसके पिता की हत्या कर दी थी। उसकी माता का देहांत पहले ही हो चुका था। ब्राह्मण महिला ने उस बच्चे को अपना लिया। एक दिन ऋषि शांडिल्य ने उस ब्राह्मण महिला को प्रदोष व्रत करने को कहा। प्रदोष व्रत करने से राजकुमार धर्मगुप्त का विवाह गंधर्व राज की कन्या से हो गया। उसके बाद धर्मगुप्त को उसका खोया राज्य मिल गया।

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प्रदोष व्रत के फायदे भी जानें

प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनोवांछित फल देते हैं। इस व्रत को करने से जीवन में किसी प्रकार का अभाव या परेशानी नहीं होती है। प्रदोष व्रत करने से बीमारियों दूर रहती है और रोगों पर होने वाले खर्च में कमी आती है। अगर आप आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं तो उसे दूर करने के लिए प्रदोष का व्रत कर सकते हैं। अविवाहित युवक और युवतियों को प्रदोष का व्रत करने से मनचाहे वर-वधु मिलते हैं और जीवन में सुख बना रहता है। साथ ही भगवान शिव ज्ञान और मोक्ष के देवता हैं। अध्यात्म की राह पर चलने की इच्छा रखने वालों को प्रदोष का व्रत करने से लाभ मिलता है।

प्रज्ञा पाण्डेय

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