By रेनू तिवारी | Oct 15, 2026
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी क्षमता के बीच बढ़ते गहरे संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) अपने शैक्षणिक अनुसंधान को रक्षा क्षेत्र की परिचालन संबंधी (operational) जरूरतों और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालकर देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। रक्षा मंत्री दिल्ली में आईआईटी-कानपुर के ‘ग्रेटर देन अस’ (Greater Than Us) धनसंग्रह अभियान (fundraising campaign) की शुरुआत के अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
सिंह ने कहा कि सरकार की आत्मनिर्भर भारत के लिये प्रतिबद्धता उसके विकसित भारत के दृष्टिकोण के केंद्र में है। इसका उद्देश्य एक ऐसा राष्ट्र बनाना है जो तकनीकी रूप से सक्षम, आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषी और आत्मविश्वास से भरपूर हो तथा जो केवल ज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता न होकर उनके सृजन में भी ‘‘सक्रिय योगदानकर्ता’’ बने। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियां, मानवरहित प्लेटफॉर्म, उन्नत सेंसर, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष आधारित प्रौद्योगिकियां ‘‘सैन्य परिदृश्य को बदल रही हैं’’।
Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi