रिलायंस हरित ऊर्जा में 75,000 करोड़ रुपये निवेश करेगी, सस्ता स्मार्ट फोन लाएगी: अंबानी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 25, 2021

मुंबई। जाने-माने उद्योगपति मुकेश अंबानी ने हरित ऊर्जा क्षेत्र में रिलायंस उद्योग समूह की नयी महत्वाकांक्षी और नवोन्मेषी भूमिका निभाने के लिए अगले तीन साल में 75,000 करोड़ रुपये निवेश करने की बृहस्पतिवार को घोषणा की। उन्होंने 2030 तक एक लाख मेगवाट सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता स्थापित करने और गुजरात में जामनगर को इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और उपकरणों के विनिर्माण का बड़ा केंद्र विकसित करने की योजना प्रस्तुत की। अंबानी ने गूगल- और रिलायंस जियो के संयुक्त रूप से विकसित वैश्विक स्तर पर सबसे किफायती स्मार्टफोन पेश करने का भी ऐलान किया। साथ ही उन्होंने सऊदी अरामको के साथ 15 अरब डॉलर का सौदा इस साल पूरा हो जाने की उम्मीद जतायी।

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रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अंबानी ने शेयरधारकों के साथ कंपनी की 44वीं सालाना आम बैठक में कहा कि रिलायंस सौर सेल, ऊर्जा भंडारण के लिये बैटरी, फ्यूल सेल और हरित हाइड्रोजन के लिये चार वृहत आकार के संयंत्र गुजरात के जामनगर में लगाएगी। तेल से लेकर दूरसंचार क्षेत्र में काम कर रही कंपनी 2030 तक कम-से-कम 1,00,000 मेगावाट सौर बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित करने के साथ साथ कार्बन फाबइर संयंत्र में भी निवेश करेगी। अंबानी ने कहा कि सऊदी अरामको के चेयरमैन और वहां के प्रमुख संपत्ति कोष पीआईएफ के प्रमुख 51 वर्षीय यासिर ओथमान अल-रुमायन रिलायंस इंडस्ट्रीज के निदेशक मंडल में बतौर स्वतंत्र निदेशक शामिल होंगे। उनकी नियुक्ति कंपनी की तेल-रसायन कारोबार इकाई (तेल रिफाइनरी, पेट्रोरसायन संयंत्र और खुदरा ईंधन कारोबार) में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी सऊदी अरामको बेचे जाने के सौदे के पूरा होने से पहले हुई है।

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उन्होंने कहा, ‘‘हम ओ2सी कारोबार में सऊदी अरामको को रणनीतिक भागीदार के रूप में स्वागत करने के लिये उत्सुक है...मुझे उम्मीद है कि हमारी भागीदारी को इस साल शीघ्रता से औपचारिक रूप दे दिया जाएगा।’’ शुरू में यह सौदा मार्च 2020 में पूरा होना था और इसका मूल्य 15 अरब डॉलर आंका गया था। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने कारोबार को अलग-अलग खंडों में बांटा है। जहां जियो प्लेटफार्म्स कंपनी की डिजिटल और दूरसंचार इकाई से संबद्ध है वहीं खुदरा क्षेत्र एक अलग इकाई है। जबकि तेल रिफाइनिंग और पेट्रोरसायन को ओ2सी (तेल-रसायन) कारोबार के अंतर्गत रखा गया है। अंबानी ने गूगल के साथ मिलकर तैयार सस्ता फोन पेश किये जाने की भी घोषणा की। इसका मकसद 2जी से 4जी अपनाये जाने में तेजी लाना है। हालांकि इसकी कीमत की जानकारी नहीं दी गयी। उन्होंने कहा, ‘‘भारत को 2जी मुक्त बनाने के लिए एक काफी सस्ता 4जी स्मार्टफोन जरूरी है। नया स्मार्टफोन जियो और गूगल के फीचर्स और ऐप से लैस होगा। उन्होंने कहा कि देश में अभी भी 30 करोड़ फोन उपयोगकर्ता हें जो अकुशल 2जी सेवा को छोड़ पाने में असमर्थ हैं। इसका एक बड़ा कारण 4जी स्मार्टफोन का महंगा होना है। अल्फाबेट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुंदर पिचाई ने वीडियो कांफ्रेन्स के जरिये कहा, ‘‘गूगल और जियो का किफायती स्मार्टफोन खासतौर से भारत के लिए बनाया गया है और यह उन लाखों नए उपयोगकर्ताओं के लिए नई संभावनाएं खोलेगा जो पहली बार इंटरनेट का अनुभव करेंगे। हैंडसेट 10 सितंबर से उपल्ब्ध होगा।

स्वच्छ ऊर्जा कारोबार के क्षेत्र में घोषणा करते हुए अंबानी ने कहा, ‘‘अगले तीन साल में, हम हरित ऊर्जा क्षेत्र में विनिर्माण और अन्य संबंधित कार्यों पर 60,000 करोड़ रुपये निवेश करेंगे। इसके जरिये रिलायंस पूर्ण रूप से एकीकृत और जरूरतों के हिसाब से ऊर्जा परिवेश सृजित करेगी और उसकी पेशकश करेगी।’’ अंबानी ने कहा, ‘‘इसके अलावा, हम इन कारखानों के कच्चे माल और अन्य जरूरी उत्पादों के विनिर्माण के लिये इकाइयां तथा जरूरी ढांचागत सुविधाओं में 15,000 करोड़ रुपये खर्च करेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकार, नए ऊर्जा कारोबार में हमारे अपने आंतरिक संसाधनों से कुल शुरूआती निवेश तीन वर्षों में 75,000 करोड़ रुपये (10 अरब डालर से अधिक) रुपये होगा।’’ अंबानी ने कहा, ‘‘कंपनी ने जामनगर में 5,000 एकड़ में धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स (हरित ऊर्जा वृहत परिसर) को विकसित करने का काम शुरू कर दिया है। यह दुनिया में सबसे बड़ी एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा निर्माण सुविधाओं में से एक होगी। अंबानी ने कहा, ‘‘रिलायंस 2030 तक 1,00,000 मेगावाट सौर ऊर्जा स्थापित करेगी और क्षमता सृजित करने में योगदान देगी। इसमें छतों पर लगायी जाने वाले सौर संयंत्रों और गांवों में विकेंद्रित सौर संयंत्रों का बड़ा योगदान होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जामनगर हमारे पुराने ऊर्जा केंद्र के विकास का केंद्र था अब नये ऊर्जा करोबार के विकास का भी केंद्र बनेगा।’’

अंबानी ने कंपनी के भीतर दो अतिरिक्त विभागों- नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना प्रबंधन और निर्माण विभाग तथा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना वित्त विभाग-के गठन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम भारत के विकेंद्रित हरित अर्थव्यवस्था को वास्तविक रूप देने में मददगार होंगे। अंबानी ने यह भी कहा अगर हम सौर ऊर्जा का उपयोग कर पाये भारत जीवाश्म ईंधन यानी कच्चे तेल के आयातक से स्वच्छ ऊर्जा का निर्यातक देश बन जाएगा। अपनी कुल आय का 68 प्रतिशत हाइड्रोकार्बन ऊर्जा कारोबार से हासिल करने वाली कंपनी ने पिछले साल 2020 में अगले 15 वर्ष यानी 2035 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा था।

कंपनी ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब दुनिया की तमाम प्रमुख ऊर्जा कंपनियों पर पर्यावरण संरक्षण में मदद के लिये कम कार्बन उत्सर्जन की ओर बढ़ने को लेकर दबाव है। अंबानी ने कहा, ‘‘पिछले साल मैंने 2035 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा था। आज मुझे इसे क्रियान्वित करने के लिये महत्वकांक्षी रणनीति और योजना पेश करने को लेकर खुशी है...जीवाश्म (कोयला, पेट्रोल और डीजल) ईंधन से करीब तीन सदी तक आर्थिक वृद्धि को गति मिली। हम अब बहुत लंबे समय तक इसे जारी नहीं रख सकते।

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