By अंकित सिंह | Jul 16, 2026
20 जुलाई से 13 अगस्त तक होने वाले संसद के मॉनसून सत्र में परिसीमन विधेयक पेश किए जाने की संभावना को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने गुरुवार को कहा कि संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी करने वाले किसी भी प्रस्ताव के लिए सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा की ज़रूरत होगी। राउत ने विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के एकजुट रुख पर ज़ोर देते हुए कहा कि वे सत्ताधारी सरकार के किसी भी एकतरफ़ा कदम का विरोध करेंगे।
उन्होंने दल बदलने वाले नेताओं के उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि उनके कदम संवैधानिक नियमों के मुताबिक थे। उन्होंने इन दल-बदलावों को "पर्दे के पीछे की चालें" बताया और चेतावनी दी कि ऐसा करने वाले सांसदों की संसदीय सदस्यता जा सकती है। राउत ने कहा कि मैं उन दावों को पूरी तरह खारिज करता हूं कि पार्टी बदलने वाले नेताओं ने 'सभी कानूनी औपचारिकताएं' पूरी कर ली हैं। इस तरह के दल-बदलाव 'गैर-कानूनी प्रक्रियाओं' के जरिए किए जाते हैं और कानून के खिलाफ हैं। ऐसे हालात में अपनी पार्टी छोड़ने वाले सांसदों की संसदीय सदस्यता आखिरकार चली जाएगी।
ये बातें NCP (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के पहले के रुख से मेल खाती हैं। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों की निंदा की थी जिनमें कहा गया था कि उनकी पार्टी केंद्र के परिसीमन बिल (Delimitation Bill) का समर्थन कर सकती है। X पर एक बयान में, सुले ने ऐसी रिपोर्टों को "गलत और अटकलबाज़ी" बताया और साफ़ किया कि पार्टी का रुख़ पूरी तरह से आंतरिक बातचीत और INDIA गठबंधन के साथ तालमेल से तय होता है।
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