उद्धव और आदित्य पड़ गए अकेले? रफ्ता-रफ्ता सारे बाला साहेब के करीबी और 'ठाकरे' को शिंदे अपनी तरफ करने में लगे

By अभिनय आकाश | Jul 29, 2022

महाराष्ट्र का सियासी बैटल भले ही मुख्यमंत्री के पद पर एकनाथ शिंदे और उनके डिप्टी देवेंद्र फडणवीस के सत्ता संभालने के साथ समाप्त हो गया है। लेकिन शिवसेना को लेकर चल रही जंग में सियासी शह और मात का खेल अभी भी जारी है। सत्ता की जंग में सबसे बड़े लड़ैया बनकर उभरे एकनाथ शिंदे अब शिवसेना पर दावे को लेकर भी अपनी कोशिशे तेज करते नजर आ रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने बाला साहेब के साथ काम कर चुके पार्टी के दिग्गज नेताओं से जाकर मुलाकात करना शुरू कर दिया है। वहीं ठाकरे परिवार के लोगों संग भी शिंदे की मुलाकात का सिलसिला चल पड़ा है। ऐसे में शिवसेना के भीतर उद्धव ठाकरे और आदित्य दिनों-दिन अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं।  

शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे की बहु और फिल्म निर्माता स्मिता ठाकरे ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की और कहा कि वह (शिंदे) शिवसेना के “पुराने” शिवसैनिक हैं। दक्षिण मुंबई में सरकारी अतिथि गृह ‘सहयाद्री’ में शिंदे से मुलाकात के बाद उन्होंने संवाददाताओं को बताया, “एकनाथ शिंदे एक पुराने शिवसैनिक हैं जो मुख्यमंत्री बन गए हैं। मैं यहां उन्हें बधाई देने आयी हूं। मैं उन्हें और उनके काम को पिछले कई सालों से जानती हूं। स्मिता बाल ठाकरे के बेटे जयदेव ठाकरे की पत्नी हैं। वहीं आज बिंदु माधव ठाकरे के बेटे और उद्धव ठाकरे के भतीजे निहार ठाकरे ने एकनाथ शिंदे का समर्थन किया है। वह अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में करेंगे।

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बाला साहेब के साथ काम कर चुके नेताओं से भेंट

इससे पहले शिवसेना नेता लीलाधर डाके और मनोहर जोशी से उनके घर जाकर मुलाकात की। लीलाधर डाके और मनोहर जोशी बालासाहेब ठाकरे के समय के नेता है। ये दोनों वरिष्ठ नेता शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे के साथ काम कर चुके हैं। शिवसेना-बीजेपी के गठबंधन में पहली 'शिवशाही सरकार' में मनोहर जोशी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और लीलाधर डाके उद्योग मंत्री रहे हैं। इन दोनों नेताओं के घर में एकनाथ शिंदे का जोरदार ढंग से स्वागत भी हुआ है।

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संगठन पर कब्जे को लेकर शिंदे बढ़ा रहे मुलाकातों के दौर

शिवसेना द्वारा साल 2018 में चुनाव आयोग की तरफ से राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल 14 नेताओं की सूची दी है। उसमें मनोहर जोशी, लीलाधर डाके, रामदास कदम जैसे नाम शामिल हैं। रामदास कदम पहले ही शिंदे के समर्थन में नेता पद से इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में जोशी, डाके भी उद्धव का साथ छोड़कर शिंदे को अपना समर्थन देते हैं तो चुनाव आयोग में उनकी राह काफी आसान हो जाएगी। उन्हें ये साबित करना आसान होगा कि केवल विधायक या संसदीय दल में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी फूट है।  

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