कहानी सुखोई डील बचाए जाने की, जब अटल ने सुरक्षा जरूरतों को चुनाव से ऊपर रखा

By अभिनय आकाश | Jan 11, 2021

कंकरियाँ जिनकी सेज सुघर, छाया देता केवल अम्बर, विपदाएँ दूध पिलाती हैं, लोरी आँधियाँ सुनाती हैं। जो लाक्षा-गृह में जलते हैं वे ही शूरमा निकलते हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की अमर रचना  रश्मिरथी की यह पंत्तियां महाभारत के परिपेक्ष्य में थी। जिसके छंद आज भी प्रासंगिक हैं। महाभारत के बार में यह कहा जाता है कि ये कहानी हर दौर की कहानी है। कमोबेश वही कहानी इस दौर में भी कई बार दोहराई गई। सत्ता के लिए नैतिकता के मूल्य जानबूझकर तोड़े गए, भाषा की मर्यादा भी टूटती रही। महाभारत क्या है? सत्ता के लिए निरंतर टूटती हुई मर्यादा पर ताना गया युद्ध का एक मचान। वैद्य-अवैद्य का युद्ध नैतिक और अनैतिक का युद्ध, विश्वास और अविश्वास का युद्ध। महाभारत के युद्ध के वक्त तमाम तरह के कायदें तय हुए थे जैसे सूर्यास्त के बाद कोई शस्त्र नहीं उठाऐगा, स्त्रियों, बच्चों और निहत्थों पर कोई वार नहीं करेगा। महाभारत तो परंपराओं की कहानी है लेकिन हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी परंपरा लोकतंत्र में भी कई ऐसी कहानियां हैं जिसने समय-समय पर ये साबित किया है कि राजनीति में भी कई राजनेता ऐसे भी होते हैं जिसने सियासत की काली कोठरी में पांच दशक बिताने के बाद भी अपने दामन पर कभी भी एक दाग तक नहीं लगने दिय। इसके साथ ही जिसने राजनीति को एक नए सिरे से रंगा, लिखा, समझा और देशहित के लिए चुनावी मुद्दों को तिलांजलि देना सहजता से स्वीकार भी किया। 

इसे भी पढ़ें: मुरैना में रोड शो के दौरान पार्टी नेताओं पर बरसे फूल, गूंजे भाजपा के समर्थन में नारे

अब आते हैं इस डिफेंस डील वाली कहानी के विस्तार पर। इंडियन एक्सप्रेस में खबर प्रकाशित होने के बाद ये थोड़ी देर के लिए ही सही पर चर्चा में रही कि नरसिम्हा राव सरकार के अंतिम दिनों में जल्दबाजी में डील फाइनल हुई। इसके साथ ही सरकार ने कोई अंतिम कीमत तय किए बिना एडवांस के रूप में 35 करोड़ डाॅलर की राशि का भुगतान किया। डील साइन करने के पीछे हड़बड़ाहट की भी बात उठी। लेकिन बाद में ऐसी भी बातें सामने आई कि रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने खुद के देश में चुनाव नजदीक होने और सुखोई फैक्टरी उनके क्षेत्र में आने की बात राव को बताई। इसके साथ ही हालत खराब होने से स्टाफ को वेतन नहीं दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में भारत के एडवांस पेमंट से उन्हें वेतन दिया जा सकेगा और ये बात जादू की तरह चुनाव में असर भी करेगा।

इसे भी पढ़ें: भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश भर में मनायेगा वाल्मीकि जयंती

मसला जो भी रहा हो लेकिन अक्सर जैसा कि कई रक्षा समझौतों के साथ होता रहा है, गंभीर आरोप लगाए जाते रहे, बड़ा चुनावी मुद्दा भी बना और कई सरकारें भी गंवानी पड़ी। लेकिन भाजपा ने इस मामले में चुप्पी साध ली। शक्ति सिन्हा की किताब के अनुसार वाजपेयी को इस बात का भय था कि यदि यह अच्छा एयरक्राफ्ट है तो घोटाले की अप्रमाणित बातों से डील खराब हो सकती है। जिसके बाद 1996 के लोकसभा चुनाव अभियान में वाजपेयी ने इस मुद्दे को नहीं उठाने का फैसला लिया। सिन्हा लिखते हैं कि क्योंकि वाजपेयी को लगा कि भारत की सुरक्षा जरूरतों से समझौता नहीं किया जा सकता। वर्तमान समय में इस तरह की घटनाएं रक्षा सौदों पर राजनीतिक लड़ाई के विपरीत एक प्रस्ताव पेश करती है। केंद्र में वाजपेयी की सरकार बनी, लेकिन वो 13 दिन ही चल पाई। 

इसे भी पढ़ें: अटल योजना के तहत 2024 तक 35 हजार युवाओं का होगा कौशल विकास

मुलायम सिंह यादव और वाजपेयी की मुलाकात

नरसिम्हा राव की शब्दों में कहे तो 'विवादास्पद लेकिन सही निर्णय' के बाद कांग्रेस चुनाव हार गई। फिर ये सौदा सपा सदस्य और संयुक्त मोर्चा सरकार में रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने पूरा किया। आज के दौर में जब संसद परिसर राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप और सियासी अखाड़ों का केंद्र बना रहता है। ऐसे दौर में किसी अच्छे काम की सराहना तो दूर की बात है उसको लेकर मंशा तक पर गंभीर सवाल उठाए जाते हैं। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में मुलायम सिंह की सराहना की और उनकी प्रशंसा के कुछ शब्द तो भाजपा के कई सदस्यों को आश्चर्यतकित कर गए थे। बाद में मुलायम सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी और जसवंत सिंह को साउथ ब्लाॅक आमंत्रित किया और सैन्य अनुबंधों की परिस्थितियों को समझाने हुए ब्रिफिंग की व्यवस्था रखी। वाजपेयी प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर घरेलू आम सहमति का संकेत देना चाहते थे, विशेष रूप से रूस के संबंध जो अंतरराष्ट्रीय मंचों में भारत प्रबल समर्थक था। वाजपेयी ने रूसी सरकार द्वारा स्वायत्त गारंटी का प्रावधान जिसके अंतर्गत ऐसे प्रावधान रखने की बात सुझाई। इसके लिए किसी भी प्रकार की रिश्वत नहीं दी गई हैं और यदि ऐसा कुछ भविष्य में सामने आता है तो वे भारत सरकार को इसकी भरपाई करेंगे। राजनीति के कट्टर प्रतिद्वंदी मुलायम सिंह और भाजपा ने बंद दरवाजों के पीछे एक इतने बड़े संवेदनशील मुद्दे के दस्तावेज साझा किए, ये अपने आप में रजनाीति में किसी मिसाल सरीखा है। - अभिनय आकाश

प्रमुख खबरें

Bhopal Dowry Case: नम आंखों से Tvisha Sharma को अंतिम विदाई, पिता बोले- न्याय का इंतजार

Glowing Skin का Secret है सही pH Balance, एक्सपर्ट से समझें Healthy Skin का पूरा साइंस

S. Jaishankar से वार्ता के बाद बोले Marco Rubio- भारत संग ऐतिहासिक Trade Deal जल्द होगी

Falta Assembly सीट पर BJP का भगवा परचम, Debangshu Panda ने 1 लाख वोटों से दर्ज की रिकॉर्ड जीत