हिमाचल हाईकोर्ट के निर्णय की भाषा पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई

By विजयेन्दर शर्मा | Jan 19, 2022

शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट की इस बार किसी ऐतिहासिक निर्णय को लेकर चर्चा नहीं हो रही, बल्कि अदालत की ओर से दिये गये एक निर्णय को लेकर है।इस निर्णय पर देश की सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि इसकी भाषा समझ नहीं आ रही।  यह पहली बार नहीं हुआ।ऐसा ही मामला इससे पहले भी अदालत में आया था।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से एक मामले में सुनाए गए निर्णय की भाषा पर नाराजगी जताई है। दो न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता करते हुए जस्टिस के एम जोसेफ ने अपीलकर्ता के वकील निधेश गुप्ता से पूछा कि हाईकोर्ट क्या कहना चाहता है। जस्टिस ने कहा कि ’हम इसे क्या समझें? क्या यह लैटिन है।’ जस्टिस जोसेफ ने गुप्ता के जवाब पर हैरानी जताई, जब उन्होंने कहा कि वह भी इसे समझ नहीं पर रहे हैं।

 

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बेंच में शामिल जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि उसे फिर से लिखनेके लिए फैसला हाईकोर्ट को वापस करना पड़ सकता है। सीनियर वकील ने तब बेंच कोबताया कि यह संपत्ति पर विवाद था और वह ट्रायल कोर्ट के फैसले से यह बता सकतेहैं, जो बहुत साफ था। इस पर अदालत ने दूसरे पक्ष के वकील के साथ बैठने और यहदेखने के लिए कहा कि क्या मामले को दो सप्ताह में बातचीत से सुलझाया जा सकताहै।

 

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यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस तरहफैसलों पर निराशा जताई हो। मार्च 2021 में जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और एमआर शाहकी बेंच ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले से अपनी झुंझलाहट जाहिर कीऔर कहा कि हम अपनी बुद्धि के अंत में हैं। ऐसा बार-बार हो रहा है।27 नवंबर, 2020 में हाईकोर्ट के ऐसे ही फैसले के खिलाफ भारतीयस्टेट बैंक की ओर से याचिका दायर की गई थी। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने हिंदी मेंपूछा था, “यह क्या फैसला लिखा गया है? मैं कुछ समझ नहीं पाया। लंबे-लंबे वाक्य हैं। फिर, कहीं एक अजीब अल्पविराम दिखाई दे रहा है। मुझे कुछ समझ नहीं आरहा। मुझे अपनी ही समझ पर शक होने लगा है। शायद मुझे टाइगर बाम का इस्तेमाल करना था।

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