स्टार्ट अप के लिये एंजल कोष निवेश पर कर छूट प्रक्रिया को सुगम बनाया गया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 16, 2019

नयी दिल्ली। सरकार ने स्टार्ट अप में एंजल कोषों से मिलने वाले निवेश पर आयकर छूट लेने की प्रक्रिया को सुगम बना दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को कहा कि उभरते उद्यमियों की चिंताओं को दूर करने के प्रयासों के तहत यह कदम उठाया गया है। कई स्टार्टअप कंपनियों के संस्थापकों ने हाल में कहा था कि उन्हें एंजल कोषों से प्राप्त निवेश के लिए आयकर विभाग से धारा 56(2) (7बी) के तहत कर नोटिस मिला है।

सूत्रों ने कहा कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने इस धारा से संबंधित मामले में अधिसूचना को अनुमति दे दी है। औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग इस बारे में जल्द औपचारिक अधिसूचना जारी करेगा। यह छूट लेने के लिए किसी स्टार्टअप को सभी दस्तावेजों के साथ डीआईपीपी के पास आवेदन करना होगा। मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के आवेदन को जरूरी दस्तावेजों के साथ विभाग केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के पास भेजेगा। 

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सूत्रों ने कहा कि सीबीडीटी को इस उद्देश्य के लिए छूट की मंजूरी देने का अधिकार होगा। यदि उसे मंजूरी नहीं देनी है तो डीआईपीपी से आवेदन मिलने के 45 दिन के भीतर इस पर फैसला लेना होगा। पहले इस धारा के तहत मंजूरी के लिए अंतर मंत्रालयी प्रमाणन बोर्ड के पास आवेदन करना होता था। इसे अब हटा दिया गया है। सूत्रों ने कहा कि आवेदन की प्रक्रिया को सरल किया गया है। इसमें डीआईपीपी के जरिये सीबीडीटी के पास आवेदन किया जाएगा। इसके अलावा पहले मर्चेंट बैंकर की रिपोर्ट जमा करानी होती थी जिसमें शेयरों का उचित बाजार मूल्य बताना होता था। अब इसे भी समाप्त कर दिया गया है। संशोधित प्रक्रिया के तहत डीआईपीपी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद यह छूट ले सकेंगे। 

स्टार्टअप को खाते का ब्योरा और पिछले तीन साल की आयकर रिटर्न जमा करानी होगी। इसके अलावा निवेशकों को भी अपने नेटवर्थ तथा आयकर रिटर्न का ब्योरा देना होगा। सरकार ने इससे पहले स्टार्टअप को एंजल कोषों सहित निवेशकों से 10 करोड़ रुपये तक के निवेश पर पूरी कर छूट लेने की अनुमति दी थी। 

आयकर कानून की धारा 56(2) (7बी) में कहा गया है कि स्टार्टअप की उचित बाजार मूल्य के मुकाबले जुटाई गई अतिरिक्त राशि पर 30 प्रतिशत की दर से कर लगाया जायेगा। इसे कंपनी की अन्य स्रोतों से आय के रूप में माना जायेगा। सुरेश प्रभु ने मामले को वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाया था। सामान्य तौर पर हर साल 300 से 400 स्टार्टअप एंजल कोषों से निवेश प्राप्त करते हैं। 

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