By अभिनय आकाश | Oct 29, 2026
इज़राइल के संसदीय चुनाव के जो शुरुआती नतीजे सामने आए हैं, उसने वहां के पूरे सियासी समीकरण को उलटकर रख दिया है। 120 सदस्यों वाली नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें चाहिए, लेकिन न तो नेतान्याहू की सत्ताधारी लॉबी इसे छू पाई और न ही गादी आइजनकोट का विपक्षी गठबंधन। इस राजनीतिक गतिरोध के बीच सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह है कि इज़राइल की अरब-बहुल पार्टियां कुल 19 सीटें जीतकर सत्ता के केंद्र में आ खड़ी हुई हैं। 'जॉइंट लिस्ट' और 'रा'अम'ये दो ऐसी ताकतें हैं जिनकी विचारधारा भले ही जुदा हो, लेकिन इज़राइल में अगली सरकार किसके सहारे टिकेगी, यह अब पूरी तरह इनके रुख पर निर्भर करता है।
राअम, या 'यूनाइटेड अरब लिस्ट', मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली एक इस्लामी-रूढ़िवादी पार्टी है। यह अरब समुदायों के लिए बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक अवसरों की वकालत करती है, साथ ही अरब नागरिकों के सामूहिक अधिकारों को मान्यता देने की भी मांग करती है। इसकी प्राथमिकताओं में संगठित अपराध से निपटना, आवास और बुनियादी ढांचे में सुधार करना, शैक्षिक असमानताओं को कम करना और अरब नगरपालिकाओं के लिए अधिक संसाधन जुटाना शामिल है। यह पार्टी फिलिस्तीनी राज्य के गठन, कब्जे की समाप्ति और इजरायली बस्तियों को हटाए जाने का भी समर्थन करती है। अब्बास ने गठबंधन की राजनीति में एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है। उनका तर्क है कि अरब सांसद, इजरायली सरकारों से पूरी तरह दूर रहने के बजाय, उनके साथ बातचीत करके ठोस लाभ हासिल कर सकते हैं। 2021 में, 'राआम' (Ra’am) इजरायली सत्ताधारी गठबंधन में शामिल होने वाली पहली स्वतंत्र अरब पार्टी बनी, जिसने नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन किया। इस चुनाव के लिए, 'राआम' की रणनीति खुद को एक संभावित वार्ता साझेदार के रूप में पेश करने पर केंद्रित रही है। इनकी सूची में इजरायल के पूर्व उप सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री योआव सेगालोविट्ज भी शामिल हैं। वे एक यहूदी राजनेता हैं, जो पहले मध्यमार्गी 'यश अतिद' (Yesh Atid) पार्टी से जुड़े हुए थे।
संयुक्त सूची अलग-अलग राजनीतिक परंपराओं वाले तीन दलों को एक साथ लाती है। यहूदी-अरब वामपंथ से जुड़ा 'हदाश' (Hadash) समानता, सामाजिक न्याय, श्रमिकों के अधिकारों और यहूदी व अरब नागरिकों के बीच सहयोग पर जोर देता है। ओफ़ेर कासिफ़ इसके प्रमुख प्रतिनिधियों में से एक हैं। अहमद तिबी द्वारा स्थापित 'ताअल' (Ta’al), फिलिस्तीनी राष्ट्रीय हितों की वकालत करने के साथ-साथ इजरायली संसदीय राजनीति में भी भागीदारी निभाता है। तिबी इजरायल में सबसे जाने-माने अरब सांसदों में से एक हैं। सामी अबू शेहादेह के नेतृत्व वाला 'बालाद' (Balad), अरब-राष्ट्रवादी और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है। यह मांग करता है कि इजरायल केवल यहूदी राष्ट्रीय पहचान को प्राथमिकता देने के बजाय, अपने सभी नागरिकों का एक साझा राज्य बने। अबू शेहादेह ने अक्टूबर में 'जॉइंट लिस्ट' (Joint List) की उम्मीदवार सूची से अपना नाम वापस ले लिया था, हालांकि वे अभी भी 'बालाद' के अध्यक्ष बने हुए हैं। यूसुफ जबरीन और अहमद तिबी 'जॉइंट लिस्ट' की चुनावी सूची का नेतृत्व करते हैं। यह गठबंधन फिलिस्तीनी राज्य के गठन, कब्जे (occupation) के विरोध, नागरिक समानता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए मजबूत सुरक्षा का समर्थन करता है।
इन दोनों पार्टियों की कुल 19 सीटें यह तय करने में निर्णायक साबित हो सकती हैं कि इज़राइल में अगली सरकार किसकी बनेगी। नेतन्याहू के गुट को 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि आइज़ेनकोट के विपक्षी गुट के पास 48 सीटें हैं। इनमें से कोई भी अपने दम पर सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 61 सीटों के आंकड़े तक नहीं पहुँच पा रहा है। नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी आइज़ेनकोट ने कुछ शर्तों के साथ अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के साथ सहयोग करने की संभावना खुली रखी है। इन शर्तों में यह शामिल है कि वे इज़राइल को एक 'यहूदी राज्य' के रूप में मान्यता दें और हमास को एक 'चरमपंथी समूह' मानें। जबरिन ने भी संकेत दिया है कि 'जॉइंट लिस्ट' बाहर से आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाली अल्पसंख्यक सरकार को समर्थन दे सकती है, लेकिन गाज़ा और लेबनान के मुद्दों पर असहमति के कारण वे सरकार में शामिल नहीं होंगे। इसके विपरीत, अब्बास ने गठबंधन सरकार में शामिल होने की इच्छा जताई है। अरब मतदाताओं की भारी भागीदारी ने भी इन पार्टियों के राजनीतिक महत्व को बढ़ा दिया है। मतदाताओं ने बढ़ते नस्लवाद और दक्षिणपंथी बयानों को लेकर चिंता जताई है। साथ ही, उन्होंने अपराध पर कार्रवाई, निवेश, समानता और शांति प्रयासों को फिर से शुरू करने की मांग भी रखी है।