हिमाचल में सीएम जय राम ठाकुर की बढ़ती ताकत के साथ नया राजनैतिक महौल तैयार होने लगा

By विजयेन्दर शर्मा | Jul 17, 2021

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ दल भाजपा व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बढते प्रभाव से राजनिति बदली बदली नजर आ रही है हालांकि कुछ माह पहले तक यही कयास लगाये जा रहे थे कि प्रदेश में पार्टी नेतृत्व अगले चुनावों को देखते हुये उत्तराखंड की तर्ज पर नया सीएम बना सकती है लेकिन बदले हालातों में जय राम ठाकुर की कुर्सी पर खतरा टलता नजर आ रहा है जिससे उन्हें मजबूती मिली है। दरअसल, केन्द्रीय मंत्रिमंडल में अनुराग ठाकुर की केबिनेट मंत्री के तौर पर पदोन्नति से सारे समीकरण बदल गये हैं पिछले विधानसभा चुनावों में अपनी हार की वजह से अनुराग ठाकुर के पिता पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ऐन वक्त पर सीएम की कुर्सी पर बैठने से चूक गये थे हालांकि चुनावों से पहले पार्टी ने उन्हें सीएम के चेहरे के तौर पर पेश कर चुनाव लडा लेकिन सुजानपुर विधानसभा से धूमल चुनाव हारे तो उनके सपने धराशायी हो गये। व उसके बाद जय राम ठाकुर को सीएम की कुर्सी मिली। हार के बाद से धूमल अपने राजनैतिक पुर्नवास की बाट जोह रहे हैं। लेकिन बदले हालातों ने उनके मंसूबों पर भी पानी फेर दिया है।

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बाद में भले ही सीएम की कुर्सी पर जय राम ठाकुर काबिज हो गये लेकिन उन्हें धूमल खेंमे से लगातार चुनौती मिलती रही है सीएम जय राम ठाकुर से नाराज नेता व विधायक धूमल खेमें में ताल ठोंकते रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी के केन्द्रिय नेतृत्व को दखल देकर लगातार शिमला से लेकर धर्मशाला तक बैठकें करनी पडीं ताकि पार्टी को एकजुट रखा जा सके यह उन बैठकों का ही नतीजा था कि अनुराग ठाकुर को केबिनेट मंत्री बनाया गया। बताया जाता है कि संगठन के राष्टरीय महामंत्री बी एल संतोष के हिमाचल दौरे के बाद ही यह फार्मूला निकाला गया था। अनुराग ठाकुर की ताजपोशी ने सरकार और संगठन में मौजूदा मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर को नई ऊर्जा दी है। वह अब मजबूत होकर उभरे हैं। इससे पहले जय राम ठाकुर अपनी ही पार्टी के नाराज नेताओं से खासी चुनौती मिल रही थी। प्रदेश संगठन मंत्री पवन राणा और ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला के बीच तकरार से अच्छा खासा विवाद पैदा हुआ था।  जिससे पार्टी में बगावत का खतरा पैदा होने लगा था।  चूंकि धवाला जहां आरोप लगा रहे थे,कि संगठन मंत्री उनके कामकाज में दखल दे रहे हैं  विधायक रमेश धवाला ने संगठन महामंत्री पवन राणा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि वह हिमाचल में समानांतर सरकार चला रहे हैं। राणा केवल उनके ही नहीं, बल्कि हर विधायक के कामकाज में टांग अड़ा रहे हैं। विधायकों के यहां समानांतर खड़े लोगों को अगली बार टिकट दिलाने के वादे तक कर रहे हैं। धवाला ने चेताया था कि हिमाचल में समानांतर सरकार नहीं चलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को ज्वालामुखी में पार्टी से निकाला, उन्हें ही अधिमान देकर पदाधिकारी बना दिया।

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इससे पहले विधानसभा उपचुनावों में टिकट आबंटन में पार्टी आलाकमान ने सीधे तौर पर  सीएम जय राम ठाकुर को खुली छूट दी और उन्होंने धर्मशाला से विशाल नैहरिया और पच्छाद से रीना कशयप को टिकट की पैरवी की तो पार्टी में बगावत हो गई।  और भाजपा के बागियों ने चुनाव लडऩे का एलान कर दिया। जिससे लगने लगा कि भाजपा शायद ही चुनाव जीत पाये। लेकिन चुनावों परिणामों ने सभी को चौंका कर दिया,सभी समीकरण गलत साबित हुये और  दोनों सीटों पर भाजपा को जीत मिली। अब अनुराग की ताजपोशी ने धूमल खेमें को अपनी गतिविधियां सिमित करने पर मजबूर कर दिया है बदले हालातों में पार्टी धूमल खेमें को शायद ही तव्वजो दे व अगले चुनाव के लिये भी जय राम ठाकुर ही पार्टी का चेहरा होंगे इसेक पीछे पार्टी के राष्टरीय अध्यक्ष जे पी नडडा का जय राम ठाकुर का खुलकर सर्मथन करना है धूमल व जे पी नडडा के रिशते शुरू से ही तनातनी भरे रहे हैं दोनों में मनमुटाव उस समय उभरा था जब धूमल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो नडडा को उनकी केबिनेट से निकाल दिया गया था बाद में नडडा राष्टरीय राजनिति में चले गये लेकिन दोनों नेताओं में आपसी मनमुटाव आज भी बरकरार है। 

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संकेत साफ हैं कि  हिमाचल भाजपा में अब न तो शांता कुमार  की चलेगी न ही धूमल खेमें का दबदबा दिखाई देगा। आने वाले समय में प्रेम कुमार धूमल जय राम ठाकुर को उसी सूरत में चुनौती दे पायेंगे जब उनके बेटे अनुराग ठाकुर केन्द्रिय मंत्रिमंडल से बाहर हों। या फिर आने वाले मंडी लोकसभा उप चुनावों के साथ होने जा रहे तीन विधानसभा उपचुनावों में भाजपा को शिकस्त मिले। लेकिन ऐसा होता भी नजर नहीं आ रहा।  विपक्षी दल कांग्रेस में भी वीरभद्र सिंह के निधन के बाद नेतृत्व संकट उभरने लगा है। जेपी नड्डा के वरदहस्त के चलते जय राम ठाकुर के सामने कोई चुनौती नजर नहीं आ रही । पार्टी के भीतर उनके विरोधियों को भी खासा सबक मिला है। अब सीएम के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने वाले विधायकों के तेवर भी ठंडे पड़ गये हैं। प्रदेश भाजपा की राजनिति बदली बदली नजर आ रही है।  सीएम की बढ़ती ताकत के साथ  नया राजनैतिक महौल तैयार होने लगा है।

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