By अनुराग गुप्ता | Aug 13, 2021
कानपुर। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद साल 1984 में हुए सिख विरोधी दंगे के 36 साल बीत चुके हैं। इसी से संबंधित एक मामले की जांच कानपुर की एसआईटी कर रही है। इसी बीच एसआईटी को कुछ अहम सुराग मिले हैं। दरअसल, पुलिस ने इस मामले की फाइल बंद कर दी थी लेकिन फिर उन्हें कुछ सुराग मिल गए।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक पीड़त परिवार के दिल्ली रवाना हो जाने बाद घर को बेच दिया गया और नए मालिकों को फर्स्ट फ्लोर पर रखा गया ताकि हत्या वाले स्थान को बंद रखा जा सके और वहां पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।एसएसपी ने बताया कि फॉरेंसिक टीम मंगलवार को जब सबूत जुटाने के लिए घटनास्थल पर पहुंची तो उन्हें वहां पर खून के धब्बे मिले। इसके अलावा भी कई अहम सुराग एकत्रित किए। उन्होंने बताया कि इस मामले से जुड़े कोई भी दस्तावेज नहीं मिले थे इसलिए पहले इसकी जांच नहीं की गई थी।जब इंस्पेक्टर सुनील अवस्थी और कमलेश कुमार अन्य मामलों की जांच के सिलसिले में दिल्ली गए थे तो वहां पर उन्होंने सत्यवीर सिंह के बेटे चरणजीत सिंह से मुलाकात की थी। इस दौरान चरणजीत सिंह ने पुलिस अधिकारियों को पूरी आपबीती सुनाई और एफआईआर की कॉपी दी। आपको बता दें कि 61 साल के चरणजीत सिंह इस घटना के चश्मदीद गवाह हैं।