हिमाचल में पहाड गिरने से चंद्रभागा नदी का बहाव रूका कई गांव खतरे में

तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा प्रदेश के मुख्यसचिव रामसुभग सिंह एवम पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू के साथ हेलीकॉप्टर के माध्यम से एनाडेल शिमला से लाहौल के नालडा गांव के लिये रवाना हो गये हैं। प्रशासन ने नदी के किनारे जितने भी गांव है। उन्हें जल्द से जल्द घरों को खाली कर सुरक्षित स्थान पर चले जाने को कहा है। अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गये हैं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में जिला किन्नौर के न्यूगलसेरी हादसे की आंच अभी ठंडी ही नहीं हुई थी कि एक बार फिर कुदरत कहर बरपाने को तैयार है। इस बार बारी लाहौल स्पिती के उदयपुर इलाके की है। मिल रही जानकारी के मुताबिक यहां एक पहाडी खिसक कर चंद्रभागा नदी में समा गई है। जिससे नदी का बहाव रूक गया है। जिससे बडी अनहोनी का अंदेशा जताया जा रहा है।
तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा प्रदेश के मुख्यसचिव रामसुभग सिंह एवम पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू के साथ हेलीकॉप्टर के माध्यम से एनाडेल शिमला से लाहौल के नालडा गांव के लिये रवाना हो गये हैं। प्रशासन ने नदी के किनारे जितने भी गांव है। उन्हें जल्द से जल्द घरों को खाली कर सुरक्षित स्थान पर चले जाने को कहा है। अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गये हैं।
नदी का बहाव रुकने से लाहुल स्पीति समेत चंबा के किलाड़ व जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ तक भी खतरा बढ़ गया है। नदी बांध का रूप लेती जा रही है।
मिल रहे समाचारों के मुताबिक लाहौल-स्पीति के उदयपुर सब डिविजन में हो रही बारिश की वजह से े नालडा के सामने पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा गिरकर चंद्रभागा नदी में गिर गया है। जिससे नदी का बहाव रुक गया और इलाके के कई गांवों को खतरा पैदा हो गया है। चंद्रभागा नदी का बहाव रूकने से जूंडा, तडंग और जसरथ गांव की सैकड़ों बीघा जमीन फसल के साथ जलमग्न हो गई है।
बताया जा रहा है कि जसरथ और तंडग गांव के लोग अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर भाग गये हैं। स्थिति समाचार लिखे जाने तक सामान्य नहीं हुई है। चार घर डूब गए हैं। लोगों में दहशत का माहौल है। पानी रुकने से साथ लगते जसरथ व हालिंग गांव की जमीन व गावं को खतरा बड़ गया है। जसरथ में लोगों के घर खाली करवाए जा रहे हैं।
जसरथ गांव अभी भी खतरे की जद में है। जसरथ पुल के एक छोर तक पानी पहुंच गया है। सुबह के समय पहाड़ी से भूस्खलन के बाद लोगों में हड़कंप मच गया। पानी का बहाव रूकने के बाद जिस तरह से स्थिति बनी हुई है। अगर यह पानी का रूकाव अचानक टूट गया तो लाहौल के कई गांवों के साथ पुलों को खतरा हो सकता है।
नदी रुकने से जाहलमा से किलाड़ घाटी तक सड़क किनारे रह रहे लोगों को खतरा पैदा हो गया है। नदी का बहाव रुकने से जुंडा से जोबरंग की ओर नदी किनारे की जमीन पानी मे डूबने लगी है। जसरथ गांव के लोग अधिक खतरे में पड़ गए हैं। मूलतः चंद्रा और भागा दो नदियां तांदी में मिलती हैं। जम्मू कश्मीर में प्रवेश करते ही इसका नाम चंद्रभागा हो जाता है। गौरतलब है कि जुलाई और अगस्त में हिमाचल प्रदेश में कई प्राकृतिक आपदाएं आई हैं। किन्नौर में ही करीब दिनों के अंतराल में दो बड़े भूस्खलन हो चुके हैं। इस बीच लाहुल घाटी में भी बाढ़ जैसे दृश्य उत्पन्न हुए हैं।
इधर स्थिति को देखते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा शिमला में मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे हैं। पुलिस अधीक्षक लाहौल-स्पीति मानव वर्मा ने घाटी के सभी प्रधानों से ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा है।
गुरुवार को किन्नौर में नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसेरी के समीप भूस्खलन हो गया था, जिसमें अभी तक राहत एवं बचाव कार्य चल रहा है। भयावह भूस्खलन के तीसरे दिन शुक्रवार को रेस्क्यू टीमों ने मलबे से दो ओर लोगों के शवों को निकाला है। मरने वालों की संख्या 16 पहुंच गई है। गुरुवार को हादसे के करीब 20 घंटों बाद हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) बस के कुछ टुकड़े और टायरों को भी खोज निकाला गया था। हालांकि, बस में सवार यात्रियों में से 14 अब भी लापता हैं।
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