Prabhasakshi Newsroom। भीषण गर्मी के बीच गहराया बिजली संकट, मेट्रो हो सकती है प्रभावित, नेपाल पर भी असर

By अनुराग गुप्ता | Apr 29, 2022

भारत भीषण गर्मी के साथ-साथ बिजली संकट का सामना कर रहा है और इसका असर पड़ोसी मुल्क नेपाल पर भी दिखाई देने लगा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, भारत से पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने की वजह से नेपाल जल्द ही अपने औद्योगिक गलियारों की बिजली काट सकता है। इन दिनों नेपाल को भारत से 100 मेगावाट बिजली मिल रही है जबकि पड़ोसी मुल्क 400 मेगावाट बिजली की मांग कर रहा है। जिसका असर आने वाले दिनों में नेपाल के औद्योगिक गलियारों में दिखाई दे सकता है। 

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नेपाल बिजली प्राधिकरण के योजना उपप्रबंध निदेशक प्रदीप ठिके ने बताया कि अभी हमारे पास 300 मेगावॉट बिजली की कमी है क्योंकि हमें भारत से पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही, वह खुद बिजली संकट से गुजर रहा है। इससे नेपाल के तीन औद्योगिक गलियारों बीरगंज, बिराटनगर और भैरवा में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी। इससे मुख्यत: बड़े उद्योगों पर असर पड़ेगा, छोटे उद्योगों को कोई दिक्कत नहीं आएगी।

आपको बता दें कि भीषण गर्मी और कोयले की किल्लत के चलते भारत के कई राज्यों में बिजली संकट गहरा गया है। बिजली संयंत्रों में कम उत्पादन के बीच राज्य भारी मांग को पूरा करने के लिए जूझ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर से लेकर आंध्र प्रदेश तक उपभोक्ताओं को 2 से 8 घंटे तक की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। 

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दिल्ली में गहरा सकता है बिजली संकट

दिल्ली सरकार ने चेतावनी दी कि बिजली संकट की वजह से मेट्रो और अस्पतालों समेत महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने स्थिति का आकलन करने के लिए एक आपातकालीन बैठक की और केंद्र को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि वह राष्ट्रीय राजधानी को बिजली की आपूर्ति करने वाले बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करे।

एक सरकारी बयान के मुताबिक, दादरी-द्वितीय और ऊंचाहार बिजली स्टेशनों से बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण दिल्ली मेट्रो और सरकारी अस्पतालों समेत कई आवश्यक संस्थानों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति में दिक्कत हो सकती है।

सत्येंद्र जैन ने कहा कि वर्तमान में दिल्ली में बिजली की 25-30 प्रतिशत मांग इन बिजली स्टेशनों के माध्यम से पूरी की जा रही है और वे कोयले की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सरकार स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि लोगों को राजधानी के कुछ इलाकों में बिजली की कमी का सामना न करना पड़े।

रेलवे ने संभाला मोर्चा

मौजूदा संकट से देश को उबारने के लिए रेलवे ने मोर्चा संभाला है। आपको बता दें कि कोयले की सप्लाई ट्रेनों के माध्यम से की जाएगी। रेल मंत्रालय ने 24 मई तक यात्री ट्रेनों की करीब 670 फेरों को रद्द करने की अधिसूचना जारी की है। जिसमें मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। 

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दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में रोजाना करीब 16 मेल/एक्सप्रेस और पैसेंजन ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है क्योंकि अलग-अलग जगहों पर स्थिति बिजली संयंत्रों के लिए कोयला ढोने वाली ट्रेनों को अतिरिक्त रास्ता मिल सके और समय पर कोयले की आपूर्ति की जा सके।

देश में एक तरफ बिजली संकट गहराता जा रहा है और दूसरी रेलवे को विरोध प्रदर्शन का भी सामना करना पड़ रहा है। यात्री ट्रेनों के रद्द होने की वजह से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि हालात बेहद कठिन हैं और हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है।

इसी बीच केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि थर्मल पावर प्लांट में 21 से 22 मिलियन टन कोयला है, जो 10 दिनों के लिए पर्याप्त है।

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