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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
    <link>https://www.prabhasakshi.com/</link>
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      <title><![CDATA[आसमान में Gripen Jets और एयरपोर्ट पर PM Ulf Kristersson, Sweden में PM Modi का हुआ ग्रैंड वेलकम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/swedens-gripen-jets-give-pm-modi-special-air-escort]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूरोप दौरे के अगले चरण में रविवार को स्वीडन पहुंच गए हैं। जैसे ही उनका विमान स्वीडन की हवाई सीमा में दाखिल हुआ, वैसे ही स्वीडिश वायुसेना के आधुनिक ग्रिपेन लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को चारों तरफ से घेरकर एस्कॉर्ट किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे किसी विदेशी नेता को दिए जाने वाले विशेष सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इससे पहले पीएम मोदी के यूएई पहुंचने पर भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था, जहां वहां की वायुसेना के एफ-16 जेट विमानों ने पीएम मोदी के विमान को सुरक्षा दी थी।</div><div><br></div>



<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Swedish Gripen fighter jets escort PM Narendra Modi’s plane as he enters Sweden <br><br>PM Modi is visiting Gothenburg, Sweden, on May 17-18 at the invitation of Swedish Prime Minister Ulf Kristersson.<br><br>(Source: MEA) <a href="https://t.co/GjALiU3ILv">pic.twitter.com/GjALiU3ILv</a></p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/2055984369085644873?ref_src=twsrc%5Etfw">May 17, 2026</a></blockquote>




<div><br></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/taliban-new-law-afghan-woman-silence-is-marriage-consent" target="_blank">Afghanistan में Taliban का नया महिला विरोधी कानून, शादी पर लड़की की चुप्पी मानी जाएगी 'हां'</a></h3><div><br></div><h2><b>एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट स्वागत</b></h2><div>स्वीडन पहुंचने पर एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का बेहद भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया। यहां के गुटेनबर्ग हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने के लिए स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन खुद मौजूद थे। पीएम मोदी के विमान से नीचे उतरते ही उल्फ क्रिस्टर्सन ने बेहद गर्मजोशी और अदब के साथ उनसे हाथ मिलाया और गले मिलकर उनका स्वागत किया।</div><div><br></div><h2><b>दो दिन की महत्वपूर्ण यात्रा</b></h2><div>गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 और 18 मई को स्वीडन के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। यह यात्रा स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के विशेष निमंत्रण पर हो रही है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बड़े नेता भारत और स्वीडन के बीच पुराने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे। साथ ही व्यापार, निवेश और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर गहन चर्चा की जाएगी।</div><div><br></div><h2><b>इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर होगी बातचीत</b></h2><div>भारत और स्वीडन के बीच आपसी व्यापार वर्ष 2025 में 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर के बड़े आंकड़े तक पहुंच चुका है। अब इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पर्यावरण के ग्रीन टेक्नोलॉजी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नई उभरती तकनीकें, स्टार्टअप, मजबूत सप्लाई चेन, डिफेंस, अंतरिक्ष और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/pm-modi-historic-norway-trip-eyes-100billion-dollar-deal" target="_blank">43 साल बाद Norway में भारतीय पीएम, वैश्विक उथल-पुथल के बीच Modi की यह यात्रा क्यों है अहम?</a></h3><div><br></div><h2><b>'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को करेंगे संबोधित</b></h2><div>अपने इस व्यस्त दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मिलकर ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ कार्यक्रम को भी संयुक्त रूप से संबोधित करेंगे। इस मंच को यूरोप की सबसे बड़ी कंपनियों और उद्योग जगत के प्रमुख दिग्गजों का एक बेहद महत्वपूर्ण समूह माना जाता है। आपको बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए स्वीडन गए थे।</div><div><br></div><h2><b>बेहद शक्तिशाली और आधुनिक हैं ग्रिपेन फाइटर जेट्स</b></h2><div>जिन ग्रिपेन लड़ाकू विमानों ने आसमान में पीएम मोदी का स्वागत किया, उन्हें स्वीडन की मशहूर कंपनी 'साब' ने तैयार किया है। ये सिंगल-इंजन वाले, चौथी पीढ़ी के सुपरसोनिक मल्टी-रोल लड़ाकू विमान हैं। अपनी बेहतरीन उड़ान क्षमता, कम खर्च और दुश्मनों के रडार को चकमा देने वाली आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के लिए पूरी दुनिया इन विमानों की ताकत को मानती है।</div><div><br></div><div>ये जेट्स हवा से हवा में लड़ाई करने के साथ-साथ जासूसी करने और आसमान से बमबारी करने जैसे सभी तरह के सैन्य अभियानों को बखूबी अंजाम दे सकते हैं। इनमें फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल, डेल्टा विंग और अत्याधुनिक रडार सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इनका रखरखाव इतना आसान और बेहतर है कि युद्ध के मैदान में भी इस विमान का इंजन महज एक घंटे के भीतर बदला जा सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 17 May 2026 18:41:41 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/swedens-gripen-jets-give-pm-modi-special-air-escort</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Afghanistan में Taliban का नया महिला विरोधी कानून, शादी पर लड़की की चुप्पी मानी जाएगी 'हां']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/taliban-new-law-afghan-woman-silence-is-marriage-consent]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अफगानिस्तान में तालिबान ने शादी, तलाक और बाल विवाह से जुड़ा एक नया विवादित कानून लागू किया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों और जानकारों ने इस कानून की बड़े पैमाने पर आलोचना की है। अफगानी मीडिया आउटलेट 'अमू टीवी' के मुताबिक, 31 अनुच्छेदों वाले इस कानून को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने मंजूरी दी है। मई के मध्य में इसे शासन के सरकारी रिकॉर्ड में प्रकाशित किया गया था, जिसका शीर्षक 'पति-पत्नी के बीच अलगाव के सिद्धांत' रखा गया है।</div><div><br></div><h2><b>लड़की की चुप्पी ही होगी उसकी 'हां'</b></h2><div>इस नए कानून के सबसे विवादित नियमों में से एक यह है कि जवानी की उम्र में कदम रखने के बाद, अगर किसी कुंवारी लड़की से उसकी शादी के बारे में पूछा जाए और वह चुप रहे, तो उसकी इस चुप्पी को ही शादी के लिए उसकी रजामंदी मान लिया जाएगा। हालांकि, कानून में यह भी साफ किया गया है कि किसी लड़के या पहले से शादीशुदा महिला (विधवा या तलाकशुदा) की चुप्पी को अपने-आप सहमति नहीं माना जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/pm-modi-historic-norway-trip-eyes-100billion-dollar-deal" target="_blank">43 साल बाद Norway में भारतीय पीएम, वैश्विक उथल-पुथल के बीच Modi की यह यात्रा क्यों है अहम?</a></h3><div><br></div><h2><b>बाल विवाह और शादी रद करने के नियम</b></h2><div>इस आदेश में 'खियार अल-बुलूग' यानी 'जवानी आने पर मिलने वाले विकल्प' का भी जिक्र किया गया है। यह इस्लामिक कानून का एक ऐसा नियम है जिसके तहत अगर किसी बच्चे की शादी कम उम्र में कर दी जाती है, तो वह बड़ा होने के बाद अपनी शादी को रद करवा सकता है। नए नियम के अनुच्छेद 5 के अनुसार, अगर किसी बच्चे के पिता या दादा के अलावा कोई दूसरा रिश्तेदार किसी नाबालिग की शादी तय करता है, तो भी उस शादी को कानूनी रूप से सही माना जा सकता है। इसके लिए शर्त यह है कि होने वाला जीवनसाथी सामाजिक रूप से बराबर का हो और दहेज भी उचित हो।</div><div><br></div><h2><b>अदालत की भूमिका</b></h2><div>कम उम्र में तय की गई शादी को बच्चा बाद में रद करवाने की मांग तो कर सकता है, लेकिन ऐसा सिर्फ तालिबान की अदालत के आदेश के बाद ही संभव हो पाएगा। कानून यह भी कहता है कि अगर जीवनसाथी सामाजिक रूप से मेल न खाता हो या दहेज ठीक न हो, तो ऐसी शादियों को अमान्य माना जाएगा। यह नया नियम पिता और दादा को बाल विवाह के मामले में बहुत ज्यादा अधिकार देता है। हालांकि, इसमें एक राहत यह भी दी गई है कि अगर बच्चे के अभिभावक जुल्म करने वाले, मानसिक रूप से कमजोर या चरित्रहीन पाए जाते हैं, तो उनके द्वारा तय की गई शादियों को रद किया जा सकता है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/ebola-kills-88-in-congo-sparks-who-emergency" target="_blank">Congo और Uganda में Ebola का कहर, 88 मौतों के बाद WHO ने घोषित की Public Health Emergency</a></h3><div><br></div><h2><b>तालिबान के जजों को मिले असीमित अधिकार</b></h2><div>इस नए कानून के तहत तालिबान के जजों को पारिवारिक विवादों में सीधे दखल देने का बड़ा अधिकार मिल गया है। अब जज उन मामलों की सुनवाई और फैसला करेंगे जिनमें गलत संबंध, धर्म-परिवर्तन, पति के लंबे समय तक लापता रहने और जिहार जैसे आरोप शामिल हों। आपको बता दें कि जिहार एक पुरानी अरबी प्रथा है, जिसमें पति अपनी पत्नी की तुलना अपनी मां या किसी ऐसी महिला रिश्तेदार से कर देता है जिससे शादी करना पूरी तरह मना होता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:20:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/taliban-new-law-afghan-woman-silence-is-marriage-consent</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[43 साल बाद Norway में भारतीय पीएम, वैश्विक उथल-पुथल के बीच Modi की यह यात्रा क्यों है अहम?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/pm-modi-historic-norway-trip-eyes-100billion-dollar-deal]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18-19 मई 2026 को नॉर्वे की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी। खास बात यह है कि पिछले 43 वर्षों में भारत की तरफ से किसी प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा है। इस दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के राजा हेराल्ड V और रानी सोन्या से मुलाकात करेंगे। साथ ही, वे वहां के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे।</div><div><br></div><h2><b>शिखर सम्मेलन को करेंगे संबोधित</b></h2><div>अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर 'भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन' को भी संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और रिसर्च के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/ebola-kills-88-in-congo-sparks-who-emergency" target="_blank">Congo और Uganda में Ebola का कहर, 88 मौतों के बाद WHO ने घोषित की Public Health Emergency</a></h3><div><br></div><h2><b>भारतीय राजदूत का बयान और वैश्विक स्थिति</b></h2><div>नॉर्वे में भारत की राजदूत ग्लोरिया गांगटे ने इस यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "यह यात्रा भारत से किसी प्रधानमंत्री की यात्रा के 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही है। यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली नॉर्वे यात्रा है और यह ऐसे समय में हो रही है जब पूरी दुनिया में काफी उथल-पुथल मची हुई है। साथ ही, पिछले कुछ समय में भारत और नॉर्वे के संबंधों में भी काफी प्रगति हुई है। इसलिए, यह यात्रा दोनों देशों के पुराने रिश्तों की समीक्षा करने और विकास के नए मौकों को तलाशने का एक बेहतरीन अवसर है।"</div><div><br></div><h2><b>100 अरब डॉलर के निवेश और रोजगार के नए अवसर</b></h2><div>राजदूत ग्लोरिया गांगटे ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार के ये नए अवसर 'भारत-EFTA-TEPA समझौते' के लागू होने से मिले हैं। यह समझौता EFTA के चार देशों के साथ किया गया है। इस समझौते की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें निवेश से जुड़ा एक बड़ा हिस्सा शामिल है। इसके तहत आने वाले 15 वर्षों में इन देशों की तरफ से भारत में 100 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा, जिससे भारत में 1 मिलियन नए रोजगार पैदा होंगे।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-has-raised-the-world-heartbeat-with-this-move-creating-a-new-traffic-mechanism-for-hormuz" target="_blank">Iran ने अपने इस कदम से बढ़ाई दुनिया की धड़कनें, होर्मुज के लिए तैयार किया नया ट्रैफिक मैकेनिज्म</a></h3><div><br></div><h2><b>नॉर्वेजियन कंपनियों की भारत में दिलचस्पी</b></h2><div>उन्होंने आगे बताया कि दोनों देशों के बीच कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनका पूरा लाभ उठाना अभी बाकी है। वर्तमान में कई नॉर्वेजियन कंपनियां भारत के बाजारों में पहले से ही सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। ये सभी कंपनियां 'भारत-EFTA-TEPA समझौते' से मिलने वाले नए और बड़े अवसरों का पूरा फायदा उठाने के लिए बेहद उत्सुक हैं।</div><div><br></div>




<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Oslo, Norway: On PM Modi's visit to Norway, Ambassador of India to Norway, Gloria Gangte says "The visit is taking place after a gap of 43 years of a Prime Ministerial visit from India and this is Prime Minister Modi's first ever visit to Norway and it is taking place in… <a href="https://t.co/BZi76PaJ7y">https://t.co/BZi76PaJ7y</a> <a href="https://t.co/XdDyG5NtvL">pic.twitter.com/XdDyG5NtvL</a></p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/2055853837324530092?ref_src=twsrc%5Etfw">May 17, 2026</a></blockquote>]]></description>
      <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:09:24 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/pm-modi-historic-norway-trip-eyes-100billion-dollar-deal</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Congo और Uganda में Ebola का कहर, 88 मौतों के बाद WHO ने घोषित की Public Health Emergency]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/ebola-kills-88-in-congo-sparks-who-emergency]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने रविवार को कांगो और युगांडा में फैले इबोला बीमारी को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। इस खतरनाक वायरस के कारण अब तक 300 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 88 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने एक पोस्ट में साफ किया कि यह बीमारी कोरोना की तरह पूरी दुनिया में फैलने वाली महामारी जैसी नहीं है। इसलिए संगठन ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बंद न करने की सलाह दी है।</div><div><br></div><h2><b>बेहद संक्रामक है इबोला वायरस</b></h2><div>इबोला एक बहुत ही तेजी से फैलने वाली बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति की उल्टी, खून या वीर्य जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलती है। इससे होने वाली बीमारी वैसे तो दुर्लभ है, लेकिन यह बहुत गंभीर और जानलेवा होती है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि इस बार यह बीमारी 'बुंडीबुग्यो वायरस' के कारण फैली है। यह इबोला का एक बहुत ही दुर्लभ प्रकार है, जिसके इलाज के लिए फिलहाल कोई दवा या वैक्सीन मौजूद नहीं है। कांगो और युगांडा में पहले भी 20 से ज्यादा बार इबोला फैल चुका है, लेकिन बुंडीबुग्यो वायरस का यह सिर्फ तीसरा मामला है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-has-raised-the-world-heartbeat-with-this-move-creating-a-new-traffic-mechanism-for-hormuz" target="_blank">Iran ने अपने इस कदम से बढ़ाई दुनिया की धड़कनें, होर्मुज के लिए तैयार किया नया ट्रैफिक मैकेनिज्म</a></h3><div><br></div><h2><b>कांगो और युगांडा में बीमारी का असर</b></h2><div>विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, केवल दो मामलों को छोड़कर बाकी सभी मरीज कांगो के रहने वाले हैं। वे दोनों मामले पड़ोसी देश युगांडा में मिले हैं। अधिकारियों ने सबसे पहले शुक्रवार को कांगो के पूर्वी प्रांत 'इतुरी' में इस बीमारी के फैलने की जानकारी दी थी, जो युगांडा और दक्षिण सूडान के बॉर्डर के पास है। इसके बाद, शनिवार को अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने कुल 336 संदिग्ध मामले और 87 मौतों की पुष्टि की थी।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/rawalpindi-suffers-from-thirst-as-authorities-fail-to-control-deepening-water-crisis" target="_blank">Pakistan के Rawalpindi में भीषण जल संकट, बूँद-बूँद पानी को तरस रहे लोग, गहराया Water Crisis</a></h3><div><br></div><h2><b>अभी बनी हुई है अनिश्चितता</b></h2><div>विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस ने बताया कि इस समय संक्रमित मरीजों की सही संख्या और यह बीमारी किन-किन इलाकों तक फैल चुकी है, इसे लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही, डॉक्टरों और विशेषज्ञों के पास अभी इस बात की भी बहुत सीमित जानकारी है कि यह बीमारी एक मरीज से दूसरे मरीज में किस तरह और किन कड़ियों के जरिए फैल रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 17 May 2026 12:57:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/ebola-kills-88-in-congo-sparks-who-emergency</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[Iran ने अपने इस कदम से बढ़ाई दुनिया की धड़कनें, होर्मुज के लिए तैयार किया नया ट्रैफिक मैकेनिज्म]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iran-has-raised-the-world-heartbeat-with-this-move-creating-a-new-traffic-mechanism-for-hormuz]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी के हवाले से बताया कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात को विनियमित करने के लिए एक नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रहा है। अज़ीज़ी ने कहा कि तेहरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक निर्धारित मार्ग को अंतिम रूप दे दिया है और जल्द ही इसके बारे में और जानकारी दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दी जाने वाली विशेष सेवाओं के लिए ईरान आवश्यक शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। अज़ीज़ी के अनुसार, यह मार्ग अमेरिकी नेतृत्व वाली 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' समुद्री पहल से जुड़े ऑपरेटरों के लिए सुलभ नहीं होगा, जिसे वाणिज्यिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किया गया था। तेहरान ने इस अभियान की आलोचना करते हुए इसे वाशिंगटन और उसके सहयोगियों द्वारा महत्वपूर्ण शिपिंग कॉरिडोर तक पहुंच पर ईरान के प्रभाव को कम करने का प्रयास बताया है। उन्होंने आगे कहा कि इस व्यवस्था से केवल वाणिज्यिक जहाजों और ईरान के साथ सहयोग करने वाले पक्षों को ही लाभ उठाने की अनुमति होगी। अमेरिका या इज़राइल का नाम लिए बिना, अज़ीज़ी ने दोहराया कि यह जलमार्ग उन देशों के लिए बंद रहेगा जिन्हें ईरान का शत्रु माना जाता है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/how-to-understand-the-strategic-side-effects-of-the-intensifying-dialogue-between-us-and-china" target="_blank">अमेरिका और चीन की बढ़ती संवाद-प्रक्रिया के रणनीतिक साइड इफेक्ट्स को यूँ समझिए</a></h3><div>अज़ीज़ी ने एक्स पर लिखा कि यह मार्ग तथाकथित 'स्वतंत्रता परियोजना' के संचालकों के लिए बंद रहेगा। ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रहा है और सीमित तेल आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच कई देशों को मितव्ययिता उपायों को अपनाने के लिए मजबूर कर रहा है। साथ ही, नाजुक युद्धविराम के बावजूद अमेरिका-ईरान वार्ता अनिश्चित बनी हुई है, और दोनों पक्ष एक-दूसरे को धमकियां दे रहे हैं। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा कि तेहरान को अमेरिका से संदेश मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से बातचीत जारी रखने के लिए तैयार है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/did-pakistan-a-favor-what-did-trump-say-about-the-ceasefire-with-iran" target="_blank">पाकिस्तान पर एहसान किया, ईरान के साथ सीजफायर को लेकर ये क्या बोल गए ट्रंप</a></h3><div>ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए अराघची ने कहा कि वाशिंगटन द्वारा ईरान के प्रस्ताव को खारिज करने की पहले की खबरें ट्रम्प द्वारा कुछ दिन पहले दिए गए बयानों पर आधारित थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका के नए संदेशों से बातचीत और सहयोग जारी रखने की इच्छा का संकेत मिलता है। अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के साथ"युद्ध में शामिल देशों को छोड़कर सभी देशों के लिए खुला है, और कहा कि तेहरान जलमार्ग के माध्यम से समुद्री पारगमन को सुविधाजनक बनाने के लिए तैयार है।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:08:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iran-has-raised-the-world-heartbeat-with-this-move-creating-a-new-traffic-mechanism-for-hormuz</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Pakistan के Rawalpindi में भीषण जल संकट, बूँद-बूँद पानी को तरस रहे लोग, गहराया Water Crisis]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/rawalpindi-suffers-from-thirst-as-authorities-fail-to-control-deepening-water-crisis]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>रावलपिंडी और उसके छावनी क्षेत्रों में पानी का संकट और भी गंभीर होता जा रहा है, जिससे निवासियों के अनुसार वर्षों की प्रशासनिक लापरवाही और खराब शहरी नियोजन की खामियां उजागर हो रही हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, भीषण गर्मी और पुरानी अवसंरचनाओं के ध्वस्त होने से शहर के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, भूमिगत जल भंडार में तेजी से गिरावट के कारण संकट और भी गहरा गया है। अधिकारियों ने बताया कि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर लगभग 800 फीट तक गिर गया है, जिससे दशकों पुराने कई ट्यूबवेल बेकार हो गए हैं। सरकार द्वारा स्थापित बड़ी संख्या में मोटरें, जिनमें से कई 1990 के दशक से चल रही हैं, या तो जल गई हैं या अत्यधिक दबाव के कारण काम करना बंद कर चुकी हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/politics-articles/tarique-rahman-is-training-his-officers-in-pakistan-instead-of-india" target="_blank">Mussoorie की जगह Bangladesh को भाने लगा Lahore, भारत की बजाय पाक में अपने अफसरों को ट्रेनिंग दिला रहे हैं Tarique Rahman</a></h3><div> </div><div>बार-बार बिजली कटौती और अनियोजित लोड-शेयरिंग ने स्थिति को और भी खराब कर दिया है। यहां तक ​​कि चालू ट्यूबवेल भी निर्बाध आपूर्ति प्रदान करने में असमर्थ हैं, जिससे हजारों घरों को प्रतिदिन लंबे समय तक पानी नहीं मिल पा रहा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">निवासियों की शिकायत है कि पिछले वर्षों में बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद, अधिकारियों ने गर्मी के मौसम में पानी की मांग में होने वाली अनुमानित वृद्धि के लिए तैयारी नहीं की। सादिकबाद, धोके हस्सू, पीरवाधाई और चकलाल सहित कई घनी आबादी वाले इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन इलाकों में परिवारों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिसमें महिलाओं और बच्चों का बोझ सबसे अधिक है। नागरिकों में निराशा तेजी से बढ़ रही है और वे नगर निगम एजेंसियों पर उदासीनता का आरोप लगा रहे हैं।</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/bmc-imposes-10-percent-water-cut-as-lake-levels-drop-amidst-intense-heatwave" target="_blank">चिलचिलाती तपन में मुंबई में जल संकट! BMC ने लागू की 10% पानी की कटौती, भीषण गर्मी के बीच झीलों का जलस्तर गिरा</a></h3><div>इस बीच, बढ़ती मांग के कारण निजी टैंकर संचालकों ने दरों में भारी वृद्धि की है। छोटे पानी के टैंकर लगभग 1,500 रुपये में बिक रहे हैं, जबकि बड़े टैंकरों की कीमत अब 3,000 से 3,300 रुपये के बीच है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, अपेक्षाकृत सस्ती सरकारी टैंकर सेवाओं की तलाश कर रहे निवासियों का कहना है कि पानी की आपूर्ति अक्सर कई दिनों के इंतजार के बाद ही होती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कई शोधन संयंत्रों के बंद होने से जन स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। शोधन सुविधाओं के बंद होने के बाद से लगभग दो महीने से स्वच्छ पेयजल अनुपलब्ध है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद पंजाब आब-ए-पाक प्राधिकरण ने पौधों को बहाल करने में विफल रहा है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए तो वे प्रदर्शन करेंगे।</span></div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:48:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/rawalpindi-suffers-from-thirst-as-authorities-fail-to-control-deepening-water-crisis</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mahrang Baloch का Pakistan पर सीधा हमला, कहा- बलूचिस्तान में Activists को किया जा रहा 'गायब']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/mahrang-baloch-directly-attacked-pakistan-saying-activists-are-being-disappeared-in-balochistan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलूच यकजेहती कमेटी की मुख्य आयोजक डॉ. महरंग बलूच ने बलूचिस्तान में असहमति से निपटने के पाकिस्तान के रवैये की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं के खिलाफ जबरन गायब किए जाने, गैर-न्यायिक हत्याओं और डराने-धमकाने की रणनीति को तेज कर रही है। बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, डॉ. बलूच ने बलूचिस्तान की स्थिति को "बेहद चिंताजनक" बताया और कहा कि राजनीतिक सक्रियता और मानवाधिकारों की वकालत के लिए गुंजाइश तेजी से कम हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि न्याय की मांग करने वाली शांतिपूर्ण आवाजों को डर, उत्पीड़न और सरकारी दबाव के जरिए दबाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शांतिपूर्ण राजनीतिक मंचों को कथित तौर पर अधिकारियों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, तो आम नागरिकों के पास क्या विकल्प बचते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/did-pakistan-a-favor-what-did-trump-say-about-the-ceasefire-with-iran" target="_blank">पाकिस्तान पर एहसान किया, ईरान के साथ सीजफायर को लेकर ये क्या बोल गए ट्रंप</a></h3><div>जेल में बंद कार्यकर्ता ने पाकिस्तान की न्यायिक और सरकारी संस्थाओं की भी आलोचना करते हुए दावा किया कि वे दुर्व्यवहार के पीड़ितों की रक्षा करने में विफल रही हैं और बलूच परिवारों की पीड़ा पर चुप्पी साधे रही हैं। उन्होंने बीवाईसी सदस्य और मानवाधिकार कार्यकर्ता नज़र मर्री बलूच के लापता होने का मुद्दा उठाया और कहा कि उनके परिवार की बार-बार अपील के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल पाया है। डॉ. बलूच ने ज़ीशान ज़हीर बलूच के मामले का भी जिक्र किया, जिनके पिता कथित तौर पर अप्रैल 2015 से जबरन लापता हैं। उन्होंने कहा कि ज़ीशान ने अपना पूरा जीवन जबरन लापता होने के सदमे से ग्रस्त होकर बिताया और जून 2025 में कथित तौर पर उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार को लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उनकी बहन अदीबा बलूच पर दबाव डाला जा रहा है कि वह एक जबरन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए खुद को बीवाईसी से सार्वजनिक रूप से अलग कर लें।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/decide-yourself-whether-you-want-to-be-a-part-of-history-or-geography-army-chief-warns-pakistan" target="_blank">खुद तय कर ले कि इतिहास या भूगोल का हिस्सा बनना है, सेना प्रमुख की PAK को चेतावनी</a></h3><div>इस बयान में कार्यकर्ता फौजिया बलूच का भी जिक्र किया गया है, जिनके भाई, लेखक दाद शाह को कथित तौर पर अप्रैल 2026 में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उनके घर से ले जाया गया था। डॉ. बलूच ने दावा किया कि जब फौजिया ने विरोध किया, तो उन्हें और उनके रिश्तेदारों को हिरासत में लिया गया और रिहा होने से पहले उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, जैसा कि बलूचिस्तान पोस्ट ने उजागर किया है। संगठन के रुख की पुष्टि करते हुए, डॉ. बलूच ने जोर देकर कहा कि बीवाईसी उत्पीड़न और जबरन गायब किए जाने के खिलाफ अपना शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप करने और पाकिस्तान को बलूचिस्तान में चल रहे मानवाधिकार संकट के लिए जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया, जैसा कि बलूचिस्तान पोस्ट ने रिपोर्ट किया है।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:44:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/mahrang-baloch-directly-attacked-pakistan-saying-activists-are-being-disappeared-in-balochistan</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पाकिस्तान पर एहसान किया, ईरान के साथ सीजफायर को लेकर ये क्या बोल गए ट्रंप]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/did-pakistan-a-favor-what-did-trump-say-about-the-ceasefire-with-iran]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में शत्रुता का पूर्ण समाधान निकालने के लिए राजनयिक बातचीत शुरू करने के उद्देश्य से ईरान के साथ घोषित युद्धविराम समझौता पाकिस्तान पर एहसान के तौर पर किया गया था। पाकिस्तान वाशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अन्य देशों ने भी युद्धविराम का अनुरोध किया था। चीन की अपनी दो दिवसीय "महत्वपूर्ण" यात्रा से लौटते हुए एयर फ़ोर्स वन में एंकरेज जाते समय प्रेस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने संकेत दिया कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय दबाव ने शत्रुता को रोकने के निर्णय को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि हमने वास्तव में अन्य देशों के अनुरोध पर युद्धविराम किया। मैं वास्तव में इसके पक्ष में नहीं होता, लेकिन हमने इसे पाकिस्तान पर एहसान के तौर पर किया। फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे हैं। मेरा मतलब है, राष्ट्रपति शी और मैं कई बातों पर सहमत हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/how-to-understand-the-strategic-side-effects-of-the-intensifying-dialogue-between-us-and-china" target="_blank">अमेरिका और चीनी की बढ़ती संवाद-प्रक्रिया के रणनीतिक साइड इफेक्ट्स को यूँ समझिए</a></h3><div>ट्रंप ने आगे कहा कि उन्होंने रणनीतिक जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए ईरान पर दबाव डालने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कोई एहसान नहीं मांगा था। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को एक महीने तक चले युद्धविराम के बाद "थोड़ा सफाई कार्य" करने की आवश्यकता हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैं किसी से कोई एहसान नहीं मांग रहा हूँ, क्योंकि जब आप एहसान मांगते हैं, तो बदले में एहसान करना पड़ता है। हमें एहसान की ज़रूरत नहीं है। हमने ईरान की सेना को लगभग पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। एक महीने के छोटे से युद्धविराम के बाद हमें शायद थोड़ा सफाई अभियान चलाना पड़े, लेकिन हमारी नाकाबंदी इतनी प्रभावी है कि इसीलिए हमने युद्धविराम किया था। हालाँकि, बाद में ट्रंप ने संकेत दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान पर दबाव बनाने में बीजिंग की भूमिका हो सकती है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/career/us-visa-rejection-top-mistakes-by-indian-students" target="_blank">US Student Visa का 61% रिजेक्शन रेट! भारतीय छात्र भूलकर भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां</a></h3><div>अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि शी जिनपिंग उनसे दबाव डालने के लिए कह सकते हैं क्योंकि मुझे किसी के एहसान की ज़रूरत नहीं है। मुझे लगता है कि वे ऐसा करेंगे। मुझे लगता है कि वे स्वाभाविक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलते देखना चाहेंगे। उन्हें अपनी लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा, या तेल, इसी जलडमरूमध्य से मिलता है। हमें कुछ भी नहीं मिलता। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्र में एक महीने तक चले तनाव के बाद 7 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम की घोषणा की गई थी। पाकिस्तान क्षेत्र में तनाव का पूर्ण समाधान खोजने के लिए दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, पाकिस्तान पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में खुद को लगातार मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश में दोहरी चाल चलता दिख रहा है। पाकिस्तान की दोनों पक्षों को साधने की रणनीति ने अमेरिकी प्रशासन के भीतर अविश्वास पैदा कर दिया है, क्योंकि ट्रंप ने अपने शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को खारिज कर दिया था।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:33:05 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/did-pakistan-a-favor-what-did-trump-say-about-the-ceasefire-with-iran</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[क्या झालमुड़ी यहां भी पहुंच गई? PM मोदी ने नीदरलैंड्स में बंगाल पर ली चुटकी, खूब लगे ठहाके]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/has-jhalmuri-reached-here-too-pm-modi-takes-a-dig-at-bengal-in-the-netherlands]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को नीदरलैंड्स की राजकीय यात्रा के आरंभ में हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए अपने चुनावी अभियान के एक जाने-माने नारे को यूरोप तक ले गए। उन्होंने अपने चर्चित "झालमुरी" वाले बयान को फिर से दोहराया।&nbsp; सभा को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में देखी गई व्यापक जनभागीदारी का जिक्र किया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/how-muslims-suffered-a-major-setback-just-before-namaz-what-is-the-history-of-bhojshala" target="_blank">Yes Milord: जुमे की नमाज़ से ठीक पहले मुसलमानों को कैसे लगा करारा झटका, क्या है भोजशाला का इतिहास</a></h3><h2>क्या झालमुरी यहाँ तक भी पहुँच गई है?</h2><div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि क्या झालमुरी यहाँ तक भी पहुँच गई है? हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत 80-90% रहा, जिसमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक रही। हर साल मतदान के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं।&nbsp;&nbsp;</div><div>ट्यूलिप और कमल यह दर्शाते हैं कि सही पोषण मिलने पर सुंदरता और शक्ति कहीं भी पनप सकती है। पिछले महीने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी झाड़ग्राम में सड़क किनारे एक स्टॉल पर झालमुरी का एक कोन चखने के लिए रुके, और यह एक राजनीतिक प्रतीक बन गया जिसने तुरंत लोगों के दिलों को छू लिया। भीड़ को यह इशारा साफ समझ आ गया। यह मज़ाक तुरंत असरदार साबित हुआ, और पूरा हॉल हंसी और तालियों से गूंज उठा, जिससे यह साबित हो गया कि कुछ चुनावी चुटकुले आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों से भी ज़्यादा असरदार होते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/4-big-dreams-of-pm-modi-for-india-which-will-change-the-global-power" target="_blank">ओलंपिक की मेजबानी, AI और सेमीकंडक्टर क्रांति, भारत के लिए PM मोदी के वो 4 बड़े सपने, जो बदल देंगे ग्लोबल पॉवर!</a></h3><div>हेग में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्यूलिप और कमल के बीच प्रतीकात्मक तुलना करते हुए कहा कि दोनों फूल लचीलेपन और विकास का गहरा संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे पौधा पानी में उगे या जमीन पर, सही पोषण मिलने पर वह सुंदरता और शक्ति दोनों विकसित करता है। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रतीकवाद व्यापक मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों को भी दर्शाता है, जहां उचित पोषण मिलने पर हर परिस्थिति में विकास संभव है, जिससे आशावाद और साझा प्रगति के उनके संदेश को बल मिलता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/india-and-iraq-relations-will-deepen-pm-modi-congratulated-and-wished-the-new-prime-minister" target="_blank">India और Iraq के रिश्ते होंगे और गहरे, PM Modi ने नए प्रधानमंत्री को दी बधाई और शुभकामनाएं</a></h3><h2>असम से बंगाल, केरल से पुडुचेरी तक, भारत का लोकतंत्र पहले से कहीं अधिक जीवंत: प्रधानमंत्री मोदी</h2><div>हेग में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की लोकतांत्रिक भागीदारी की शक्ति और व्यापकता पर प्रकाश डाला और कहा कि असम, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में हुए चुनावों में रिकॉर्ड मतदान हुआ है, कुछ मामलों में यह 80-90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी पर विशेष जोर दिया और इसे भारत की चुनावी यात्रा में एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक प्रवृत्ति बताया। उन्होंने कहा, "आज भारत के मतदाता बेहद उत्साहित हैं," और कहा कि देश में 9 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मतदाताओं में से एक बनाता है। 2024 के लोकसभा चुनावों का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 64 करोड़ से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो यूरोपीय संघ की कुल जनसंख्या से भी अधिक है, जो भारत में लोकतांत्रिक भागीदारी के व्यापक पैमाने को रेखांकित करता है। उन्होंने भारत को "लोकतंत्र की जननी" बताते हुए कहा कि यह पहचान हर नागरिक के लिए गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि जब भारत प्रगति करता है, तो इससे पूरी दुनिया को लाभ होता है, खासकर वैश्विक अनिश्चितता के दौर में। उन्होंने कोविड-19 महामारी, चल रहे संघर्षों और वैश्विक ऊर्जा संकट जैसी हालिया चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन व्यवधानों ने विश्व अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर गंभीर दबाव डाला है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में, लचीलेपन और स्थिर आपूर्ति प्रणालियों पर वैश्विक ध्यान बढ़ा है, और भारत और नीदरलैंड इस दिशा में सहयोग को मजबूत करने और साझा वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 16:01:07 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/has-jhalmuri-reached-here-too-pm-modi-takes-a-dig-at-bengal-in-the-netherlands</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[China में चल रहा कौन सा बड़ा गेम? ट्रंप के लौटते ही जिनपिंग से मिलने जाएंगे पुतिन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/big-game-going-on-in-china-putin-will-meet-xi-jinping-as-soon-as-trump-returns]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 19 और 20 मई को आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है। दो दिवसीय यात्रा के दौरान, पुतिन और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। बीजिंग में उच्च स्तरीय बैठकों के तहत रूसी राष्ट्रपति की चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात तय है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/attack-on-india-friend-russia-now-19-us-ships-will-be-accounted-for" target="_blank">भारत के दोस्त रूस पर हमला, अब होगा US के 19 जहाजों का हिसाब!</a></h3><h2>ट्रंप की चीन यात्रा के कुछ दिनों बाद बना प्रोग्राम</h2><div>पुतिन की आगामी यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा समाप्त होने के तुरंत बाद हो रही है, जहां उन्होंने शी जिनपिंग के साथ ताइवान सहित कई संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत की। बीजिंग से रवाना होने के बाद एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति के साथ उनकी मुलाकात के दौरान ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भविष्य में हथियारों की बिक्री पर अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने पहले तो इस मुद्दे पर चर्चा से इनकार किया, लेकिन बाद में पुष्टि की कि बातचीत में ताइवान का जिक्र हुआ था। स्वशासित द्वीप को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव जारी रहने के कारण उनके इस बयान ने सबका ध्यान खींचा है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/modi-secret-conversation-with-putin-regarding-ukraine" target="_blank"> यह युद्ध का युग नहीं ...यूक्रेन को लेकर मोदी की पुतिन से सीक्रेट बातचीत?</a></h3><h2>रूस और चीन के बीच घनिष्ठ समन्वय जारी</h2><div>पुतिन और शी जिनपिंग के बीच लंबे समय से राजनीतिक संबंध हैं और वे वर्षों में 40 से अधिक बार मिल चुके हैं। यूक्रेन संघर्ष शुरू होने से ठीक पहले, 2022 की शुरुआत में रूस और चीन द्वारा "बिना किसी सीमा के" रणनीतिक साझेदारी की घोषणा के बाद से उनकी साझेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पश्चिमी देशों से बढ़ते दबाव और प्रतिबंधों के बीच, चीन रूस के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनयिक साझेदारों में से एक के रूप में उभरा है। दोनों देशों ने ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में भी सहयोग का विस्तार किया है। इस वर्ष की शुरुआत में यूक्रेन युद्ध की वर्षगांठ से पहले दोनों नेताओं ने एक लंबी वीडियो कॉल की, जिसके दौरान पुतिन ने शी जिनपिंग के चीन दौरे के निमंत्रण को स्वीकार किया। दोनों देशों के अधिकारियों ने कहा है कि वे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर घनिष्ठ समन्वय जारी रखेंगे।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 15:50:10 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/big-game-going-on-in-china-putin-will-meet-xi-jinping-as-soon-as-trump-returns</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[India और Iraq के रिश्ते होंगे और गहरे, PM Modi ने नए प्रधानमंत्री को दी बधाई और शुभकामनाएं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/india-and-iraq-relations-will-deepen-pm-modi-congratulated-and-wished-the-new-prime-minister]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अली फलीह काजिम अल-जैदी को इराक के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर बधाई दी और कहा कि भारत इराक के साथ अपने दीर्घकालिक एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों को बहुत महत्व देता है तथा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।
 इराक में अगली सरकार का नेतृत्व करने के लिए सर्वसम्मति वाले उम्मीदवार का चयन करने के उद्देश्य से समन्वय ढांचे के सदस्य दलों के बीच हफ्तों की आंतरिक चर्चा के बाद, व्यवसायी अल-जैदी प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार के रूप में उभरे।</p><p>
 प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इराक के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर अली फलीह काजिम अल-जैदी को हार्दिक बधाई। भारत इराक के साथ अपने दीर्घकालिक एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों को अत्यंत महत्व देता है तथा सभी क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।’’
 मोदी ने कहा, ‘‘मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं और हमारे दोनों देशों की साझा प्रगति एवं समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की आशा करता हूं।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 15:34:09 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/india-and-iraq-relations-will-deepen-pm-modi-congratulated-and-wished-the-new-prime-minister</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[ओलंपिक की मेजबानी, AI और सेमीकंडक्टर क्रांति, भारत के लिए PM मोदी के वो 4 बड़े सपने, जो बदल देंगे ग्लोबल पॉवर!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/4-big-dreams-of-pm-modi-for-india-which-will-change-the-global-power]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नीदरलैंड्स की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान भारत के लिए चार बड़ी आकांक्षाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की महत्वाकांक्षाएं अब देश की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। हेग में एक कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत ओलंपिक की मेजबानी करना चाहता है, वैश्विक विनिर्माण और हरित ऊर्जा केंद्र बनना चाहता है और विश्व के आर्थिक विकास का इंजन बनना चाहता है। उन्होंने सभा के समक्ष भारत की विकास गाथा प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत में आकांक्षाएं असीमित हैं और प्रयास भी असीमित होते जा रहे हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/are-fuel-prices-rising-at-trumps-behest-aap-sanjay-singh-attack-on-the-modi-government" target="_blank">Trump के कहने पर बढ़ रही Fuel Price? AAP के Sanjay Singh का Modi सरकार पर बड़ा हमला</a></h3><h2>'मेक इन इंडिया'</h2><div>मोदी ने कहा कि भारत एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जिसमें देश के युवा आधुनिक प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के युवा, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं, उनकी बदौलत हमारा देश अब विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्रांति की ओर मुड़ते हुए, मोदी ने भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया और पिछले वर्ष भारत में आयोजित सबसे सफल और सबसे बड़े एआई शिखर सम्मेलन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 12 सेमीकंडक्टर संयंत्रों पर काम चल रहा है, जिनमें से दो में उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि दूसरे शब्दों में, अब चिप्स भी 'डिजाइन इन इंडिया' और 'मेड इन इंडिया' होंगे।&nbsp;</div><div>मोदी ने भारत में मोबाइल फोन निर्माण में आई क्रांति पर प्रकाश डाला और विश्व में दूसरे सबसे बड़े मोबाइल फोन निर्माता के रूप में देश की स्थिति को दोहराया। उन्होंने कहा, "एक दशक पहले हम मोबाइल फोन आयात करते थे। यह आज के भारत की एक और पहचान बन गया है, जो नवाचार की शक्ति है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/how-muslims-suffered-a-major-setback-just-before-namaz-what-is-the-history-of-bhojshala" target="_blank">Yes Milord: जुमे की नमाज़ से ठीक पहले मुसलमानों को कैसे लगा करारा झटका, क्या है भोजशाला का इतिहास</a></h3><h2>'हरित ऊर्जा, वैश्विक विकास का इंजन'</h2><div>मोदी ने अपने कार्यकाल में भारत के बुनियादी ढांचे के विकास पर भी प्रकाश डाला, जिसमें हरित ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा, "भारत में बन रहे सौर पार्क विश्व के सबसे बड़े सौर पार्कों में से हैं और साथ ही यह भी कहा कि भारत की आकांक्षाओं में से एक वैश्विक हरित ऊर्जा केंद्र बनना है। सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के 2014 में पदभार संभालने के बाद से सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 53.28 गुना बढ़ गई है। मार्च 2014 में 2.82 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 में 150.26 गीगावाट हो गई है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 15:25:18 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/4-big-dreams-of-pm-modi-for-india-which-will-change-the-global-power</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[PM Modi का Netherlands से संदेश: पासपोर्ट बदल सकता है, लेकिन हमारी भारतीयता नहीं]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/pm-modis-message-from-the-netherlands-passports-can-be-changed-but-not-our-indianness]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री मोदी का नीदरलैंड के हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने&nbsp; भारत और भारतीयों की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट का रंग, पता या समय क्षेत्र बदल सकता है, लेकिन भारतीयता नहीं बदल सकती। उन्होंने भारतीय समुदाय द्वारा उनके गर्मजोशी से स्वागत के लिए भी आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि इतना प्यार और उत्साह... सच कहूँ तो, कुछ पल के लिए तो मैं भूल ही गया था कि मैं नीदरलैंड्स में हूँ। ऐसा लग रहा है जैसे भारत में कहीं कोई त्योहार चल रहा हो।&nbsp;मैं यहाँ रहने वाले भारतीय समुदाय से भलीभांति परिचित हूँ। यहाँ बसे कई परिवारों की कहानियाँ महज़ पलायन की कहानियाँ नहीं हैं। ये अनगिनत संघर्षों के बीच प्रगति की कहानियाँ हैं। उन दिनों किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि समुद्र पार करने के बाद भी भारतीयों की पहचान इतनी जीवंत बनी रहेगी।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/expertopinion/which-hospital-in-your-city-can-you-use-your-ayushman-card-for-free-treatment" target="_blank">आयुष्मान कार्ड से आप अपने शहर के किस अस्पताल में करवा सकते हैं मुफ्त इलाज? यहां जानें</a></h3><div>पीएम मोदी ने कहा कि मानव इतिहास गवाह है कि समय के साथ कई संस्कृतियाँ लुप्त हो गईं। लेकिन भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति आज भी यहाँ के लोगों के दिलों में धड़कती है। पीढ़ियाँ बदल गईं, देश बदल गए, वातावरण बदल गया... लेकिन पारिवारिक मूल्य नहीं बदले, अपनेपन की भावना नहीं बदली। क्योंकि आपने अपने पूर्वजों की भाषा नहीं छोड़ी है। आज 16 मई है, और यह दिन एक और कारण से भी बेहद विशेष है।&nbsp; आज से ठीक 12 वर्ष पहले, 16 मई 2014 को, देश में एक ऐतिहासिक घटना घटी थी। इसी दिन 2014 के लोकसभा चुनावों के परिणाम घोषित हुए थे। दशकों बाद यह तय हुआ था कि भारत में एक स्थिर और पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनेगी। वो भी एक दिन था, और आज का यह दिन भी एक दिन है। करोड़ों भारतीयों का विश्वास ही मुझे न रुकने देता है और न ही थकने देता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/andaman-will-become-the-second-hormuz-china-condition-will-worsen-due-to-indias-dominance" target="_blank">अंडमान बनेगा दूसरा Hormuz, भारत के दबदबे से होगी चीन की हालत खराब!</a></h3><h2>प्रधानमंत्री ने समुदाय को संबोधित करने से पहले राजस्थानी लोक नृत्य का आनंद लिया</h2><div>हेग में समुदाय को संबोधित करने से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय प्रवासी समुदाय के बच्चों द्वारा प्रस्तुत राजस्थानी लोक नृत्य का लुत्फ उठाया।</div><h2>भारत-नीदरलैंड साझेदारी को बढ़ावा देने पर प्रधानमंत्री मोदी का बयान</h2><div>एम्स्टर्डम पहुंचने के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए इस यात्रा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते ने व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के नए अवसर पैदा किए हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देश जल प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में और अधिक निकटता से काम कर सकते हैं।&nbsp;</div><h2>व्यापार, प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा वार्ता के प्रमुख बिंदु रहेंगे</h2><div>प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच होने वाली चर्चा में व्यापार विस्तार, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, नवाचार और रक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि यह दौरा भारत-नीदरलैंड संबंधों के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रहा है, क्योंकि दोनों देश रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और गहरा करना चाहते हैं।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 14:16:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/pm-modis-message-from-the-netherlands-passports-can-be-changed-but-not-our-indianness</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[अंडमान बनेगा दूसरा Hormuz, भारत के दबदबे से होगी चीन की हालत खराब!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/andaman-will-become-the-second-hormuz-china-condition-will-worsen-due-to-indias-dominance]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हिंद महासागर में इस वक्त एक ऐसा गेम शुरू हो चुका है जिसका कंट्रोल जिसके हाथ में होगा भविष्य के एशिया की ताकत भी उसी के हाथ में होगी और अब भारत उसी गेम में अपना सबसे खतरनाक दांव खेलने जा रहा है। भारत की मुख्य भूमि से 1800 किलोमीटर दूर हिंद महासागर के बीचों-बीच मौजूद एक छोटा सा द्वीप, जिसे देखकर शायद दुनिया को कभी अंदाजा भी नहीं था कि एक दिन यही जगह चीन के लिए सबसे बड़ी टेंशन बन जाएगी और इसका नाम है ग्रेट निकोबार। सिर्फ 166 किमी दूर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते मलक्का स्टेट के ठीक पास भारत बना रहा है ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट। एक ऐसा प्रोजेक्ट जो सिर्फ पोर्ट नहीं सिर्फ एयरपोर्ट नहीं बल्कि हिंद महासागर में भारत का पावर स्विच है। क्योंकि यहां बनने जा रहा है इंटरनेशनल ट्रंपशिपमेंट पोर्ट। ड्यूल यूज़ एयरपोर्ट, नई टाउनशिप और एक ऐसा सामरिक हब जो सीधे-सीधे चीन की सबसे बड़ी कमजोरी के सामने खड़ा होगा।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/first-transport-aircraft-made-in-india-the-air-force-arrived-to-see-it" target="_blank">भारत में तैयार हुआ पहला ट्रांसपोर्ट विमान, देखने पहुंची वायुसेना, अमेरिका ने ईरान में पायलटों को बचाने के लिए किया था इस्तेमाल</a></h3><div>याद रखिए चीन की जो फैक्ट्रियां हैं यह चलती है तेल से और चीन का तेल आता है मलक्का स्ट्रेट से। चीन के लगभग 80% ऊर्जा सप्लाई और अरबों डॉलर का व्यापार इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। दुनिया के लगभग 1/3 समुद्री व्यापार की लाइफ लाइन है मलक्का स्ट्रीट। यानी अगर हिंद महासागर की राजनीति समझनी है तो मलक्का स्ट्रेट को समझना पहले जरूरी है और अब भारत ठीक उसी रास्ते के मुहाने पर अपना स्ट्रेटेजिक बेस बना रहा है। मतलब अगर भविष्य में कभी भी हिंद महासागर में तनाव बढ़ा तो भारत सिर्फ चीन की समुद्री गतिविधियों पर नजर नहीं रखेगा बल्कि जरूरत पड़ने पर उसकी सप्लाइन लाइन पर भी दबाव बनाएगा। उसे भी प्रभावित कर सकता है और इसीलिए चीन सालों से मलक्का डलेमा से डरता है और इसी वजह से चीन जो है यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, श्रीलंका के पोर्ट, म्यांमार के पोर्ट और इतना ही नहीं हिंद महासागर के कई बंदरगाहों में भारी निवेश कर रहा है। क्योंकि चीन यह भली-भांति जानता है कि जिस देश का मलक्का स्ट्रेट पर प्रभाव होगा, भविष्य के एशिया की ताकत उसी के हाथ में होगी। और अब बता दें कि भारत उसी गेम में एंट्री कर चुका है। ग्रेट निकोबार सिर्फ एक द्वीप नहीं है। यह भारत का जवाब है चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति का। भारत पहले से ही अंडमान निकोबार में अपनी ट्राई सर्विस कमांड चला रहा है। यानी कि यहां पर सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों मिलकर हिंद महासागर की निगरानी करती है। अब ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट उस ताकत को अगले स्तर पर ले जाने वाला है। अब आपको यह समझना बेहद जरूरी है कि यह प्रोजेक्ट इतना बड़ा क्यों माना जा रहा है?&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/dangerous-women-were-planning-against-india-even-russia-was-shaken" target="_blank"> भारत के खिलाफ प्लान बना रही थी खतरनाक महिलाएं, रूस भी हिल गया!</a></h3><div>आज एशिया के ज्यादातर जो जहाज हैं, यह सिंगापुर और श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट पर रुकते हैं। जहाजों को ईंधन चाहिए होता है, मेंटेनेंस चाहिए होता है। कारगो ट्रांसफर करना होता है और इसी से सिंगापुर और कोलंबो अरबों डॉलर कमाते हैं। लेकिन भारत यह चाहता है कि भविष्य में यही जहाज ग्रेट निकोबार में रुके। इसका मतलब यह हुआ कि ट्रेड भी भारत के पास, रणनीतिक नियंत्रण भी भारत के पास और हिंद महासागर की निगरानी भी भारत के पास। और यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट को सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बल्कि भारत का भविष्य का जियोपॉलिटिकल वेपन कहा जाता है। माना जाता है। लेकिन जैसे ही भारत ने हिंद महासागर में अपना सबसे बड़ा स्ट्रेटेजिक दांव खेलना शुरू किया वैसे ही देश की राजनीति भी इस द्वीप पर पहुंच गई। राहुल गांधी ग्रेट निकोबार पहुंचे। जंगलों में गए और उन्होंने सवाल उठाए कि यहां लाखों पेड़ काटे जाएंगे। कोरल रीफ खत्म होगी और आदिवासी समुदाय इससे प्रभावित होंगे। लेकिन अब सोशल मीडिया पर बड़ा सवाल पूछा जा रहा है।&nbsp;</div><div>क्या भारत अपनी ही जमीन पर इतना बड़ा सामरिक प्रोजेक्ट भी नहीं बना सकता?&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/how-pm-modi-met-indians-in-the-netherlands-slogans-like-sher-has-come-lion-has-come-echoed" target="_blank">Netherlands में भारतीयों से ऐसे मिले PM मोदी, गूंजा शेर आया, शेर आया का नारा</a></h3><div>चीन की समुद्री लाइफ लाइन गुजरती है और इसी वजह से अब यह बहस सिर्फ पर्यावरण बनाम विकास की नहीं रही है। यह आपको समझना होगा बल्कि यह बहस अब भारत के समुद्री ताकत बनाम चीन की रणनीति की लड़ाई बन गई है। बीजेपी और सरकार समर्थक लगातार आरोप लगा रहे हैं कि जब चीन हिंद महासागर में बंदरगाहों का जाल बिछा रहा है तब भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रेटेजिक प्रोजेक्ट का विरोध क्यों हो रहा है? सोशल मीडिया पर लोग पुराना मुद्दा भी याद दिला रहे हैं। साल 2004 और पांच में जब यूपीए सरकार ने सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। जहां रामसेतु क्षेत्र में समुद्री रास्ता बनाने की योजना थी। तब कोरल रीफ और मरीन लाइफ को लेकर इतनी बड़ी बहस क्यों नहीं हुई?&nbsp; आज जब भारत मलक्का स्टेट के पास अपना सामरिक हब बना रहा है तो अचानक पर्यावरण सबसे बड़ा मुद्दा कैसे बन गया?</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 13:34:25 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/andaman-will-become-the-second-hormuz-china-condition-will-worsen-due-to-indias-dominance</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[ भारत के खिलाफ प्लान बना रही थी खतरनाक महिलाएं, रूस भी हिल गया!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/dangerous-women-were-planning-against-india-even-russia-was-shaken]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>कमरे में बैठकर सीक्रेट मीटिंग कर रही महिलाएं भारत के खिलाफ प्लान बना रही थी। तस्वीर बांग्लादेश से आई है। पिछले कई दिनों से बांग्लादेशी भारत पर हमले की बातें कर रहे हैं। बंगाल को बांग्लादेश का हिस्सा बनाने की धमकियां दे रहे हैं। लेकिन इसी बीच बांग्लादेश की कट्टरपंथी महिलाएं भी भारत के खिलाफ षड्यंत्र करती पकड़ी गई हैं। बांग्लादेशियों ने रूस में भी ऐसा कांड कर दिया है जिसकी वजह से इनकी जमकर कुटाई हुई है। दरअसल बंगाल में सरकार बदलते ही बांग्लादेश में जमात इस्लामी और आईएसआई एक्टिव हो गए हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान जमात इस्लामी की एक बड़ी नेता ने ढाका में जमात इस्लामी की महिलाओं के साथ लगभग 4 घंटे तक बैठक की। इन महिलाओं का मकसद पाकिस्तान और बांग्लादेश में जमात इस्लामी की सरकार लाना है। इनका मानना है कि इसी तरह से पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्लाह का राज आएगा।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/massive-uproar-against-india-in-bangladesh-outcry-erupts-amidst-strict-border-measures" target="_blank">Bangladesh में भारत के खिलाफ भीषण बवाल, Border पर सख्ती से मचा चीख पुकार!</a></h3><div>आपको बता दें कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में काम करने वाले जमात इस्लामी के लोग लगातार भारत पर हमले की बातें करते रहे हैं। इसी कड़ी में बांग्लादेश की कट्टरपंथी महिलाएं भी बैठकें करने लगी हैं। यह जानकारी बांग्लादेश के एक बड़े पत्रकार शोहेब चौधरी ने दी है। बहरहाल अब आते हैं रूस पर। रूस के एक पोल्ट्री फॉर्म में बांग्लादेशी व्यक्ति ने उज़्बेकिस्तान के एक दूसरे व्यक्ति को चूम लिया। यानी बांग्लादेशी आदमी ने उज्बेकिस्तान के आदमी के साथ अश्लील हरकतें की। यानी बांग्लादेशी लोग जहां काम करते हैं, वहां तो अब आदमी भी सुरक्षित नहीं है। आदमियों को भी अपनी इज्जत बांग्लादेशियों से बचानी पड़ रही है। रूस में बैठकर यह बांग्लादेशी उज़्बेकिस्तान के आदमी को छेड़ रहा था। जिसके बाद पीड़ित व्यक्ति के पिता ने अपने लोगों को बुलवा लिया। पोल्ट्री फार्म में काम कर रहे सभी बांग्लादेशियों को कूट दिया गया। इस मारपीट में 60 से ज्यादा लोग शामिल थे। 20 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सात की हालत गंभीर है। बताया जा रहा है कि उज्बेकिस्तान के लोगों ने बांग्लादेशियों को दौड़ा दौड़ा कर मारा है। कईयों की तो टांगे तोड़ दी हैं।</div><div><br></div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">🚨 Pakistani Jamaat-e-Islami leaders in Bangladesh!<br><br>On the one hand, alongside the frequent visits to Bangladesh by the Pakistani military officers and key figures of the country's spy agency agency ISI -- the activity of Pakistani political leaders has also increased.<br><br>As part… <a href="https://t.co/PsWReMFQlW">pic.twitter.com/PsWReMFQlW</a></p>— Salah Uddin Shoaib Choudhury (@salah_shoaib) <a href="https://twitter.com/salah_shoaib/status/2054389016804610058?ref_src=twsrc%5Etfw">May 13, 2026</a></blockquote> ]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 13:15:16 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/dangerous-women-were-planning-against-india-even-russia-was-shaken</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[मोदी के यूरोप दौरे से लौटते ही ईरान पर कहर बरपाने वाला है अमेरिका? Operation Epic Fury 2.0 को लेकर आया दुनिया हिलाने वाला अपडेट]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/operation-epic-fury-2-us-poised-wreak-havoc-on-iran-as-soon-as-modi-returns-from-his-europe-visit]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले फिर से शुरू करने की योजना बनाई है, न्यूयॉर्क टाइम्स ने शुक्रवार को यह खबर दी। सैन्य समाधान के लिए यह नया प्रयास अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चीन की दो दिवसीय यात्रा पूरी होने के बाद आया है, जहां उन्होंने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के निरंतर बंद होने पर चर्चा की। सहायकों ने प्रकाशन को बताया कि ट्रंप ने अभी तक हमलों को फिर से शुरू करने के बारे में फैसला नहीं किया है, जिन्हें 7 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा के बाद से रोक दिया गया है। ट्रंप ईरान के शांति प्रस्तावों को यह कहते हुए खारिज करते रहे हैं कि वे अमेरिका की मांगों को पूरा नहीं करते हैं - ईरान को परमाणु हथियार नहीं दिए जाने चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाना चाहिए। एयर फ़ोर्स वन में सवार होकर वाशिंगटन डीसी लौटते समय उन्होंने अपने रुख को दोहराया।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/why-did-xi-jinping-take-china-secrets-to-the-white-house" target="_blank">China के सीक्रेट 'White House' में ट्रंप को लेकर क्यों गए जिनपिंग? जहां पहुंच US प्रेसिडेंट ने कह दी अपने दिल की बात</a></h3><div>हालांकि, नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रम्प के सामने एक कठिन राजनीतिक रणनीति है। युद्ध तेजी से अलोकप्रिय होता जा रहा है और इसका वित्तीय बोझ आम अमेरिकियों पर पड़ रहा है। सहयोगी देश ट्रम्प पर दबाव डाल रहे हैं कि वे एक ऐसे समझौते पर पहुंचें जिससे ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए राजी हो जाए और ट्रम्प जीत की घोषणा कर सकें।</div><h2>ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0 की तैयारियां</h2><div>ईरान को परमाणुमुक्त करने का अपना प्राथमिक लक्ष्य अभी तक हासिल न कर पाने के कारण, नए सिरे से आक्रमण की संभावनाएँ मंडरा रही हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि पेंटागन आने वाले दिनों में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0 की योजना बना रहा है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस सप्ताह कांग्रेस में गवाही देते हुए सांसदों से कहा, "जरूरत पड़ने पर हम स्थिति को और बिगाड़ने की योजना बना रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर दो मध्य पूर्व अधिकारियों ने प्रकाशन को बताया कि अमेरिका और इज़राइल अगले सप्ताह की शुरुआत में ही ईरान पर हमले फिर से शुरू करने की संभावना के लिए गहन तैयारियों में लगे हुए हैं। चीन रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा, या तो वे समझौता करेंगे या उनका सफाया हो जाएगा। इसलिए, किसी भी तरह से, जीत हमारी ही होगी।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-major-claim-us-and-nigerian-armies-have-killed-islamic-state-no-2-commander" target="_blank">'अब हमें और नहीं डराएगा', Donald Trump का बड़ा दावा US-Nigerian Army ने मार गिराया Islamic State का नंबर-2 कमांडर</a></h3><h2>राष्ट्रपति ट्रंप के सामने विकल्प</h2><div>अमेरिकी अधिकारियों ने प्रकाशन को बताया कि अगर ट्रंप हमले फिर से शुरू करने का फैसला करते हैं, तो ईरानी सैन्य और बुनियादी ढांचे के ठिकानों पर और भी अधिक बल से हमला किया जा सकता है। ट्रंप ने पहले युद्धविराम से पहले ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कसम खाई थी - इस धमकी की व्यापक रूप से संभावित युद्ध अपराध के रूप में निंदा की गई थी। दूसरा विकल्प है विशेष अभियान सैनिकों को जमीन पर उतारकर जमीन के नीचे गहराई में दबे परमाणु सामग्री का पता लगाना। हालांकि, ऐसे अभियान में हजारों सहायक सैनिकों की आवश्यकता होगी, जिससे ईरानी सेनाओं के साथ सीधे टकराव और भारी जानमाल के नुकसान का खतरा बढ़ जाएगा। तीसरा विकल्प है ईरान के तेल निर्यात के प्रमुख केंद्र खारग द्वीप पर कब्जा करने के लिए सैनिकों का उपयोग करना। लेकिन द्वीप पर कब्जा बनाए रखने के लिए काफी बड़ी जमीनी उपस्थिति की आवश्यकता होगी, जिससे संघर्ष और इसकी लागत दोनों में काफी वृद्धि होगी।</div><div>ईरान संघर्ष के लिए तैयार&nbsp;</div><div>इस बीच, ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे युद्ध की वापसी के लिए तैयार हैं।&nbsp; ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया हमारी सेना किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है; गलत रणनीति और गलत फैसले हमेशा गलत नतीजों की ओर ले जाते हैं। हम सभी विकल्पों के लिए तैयार हैं; वे हैरान रह जाएंगे। खुफिया आकलन के अनुसार, ईरान ने कथित तौर पर अपने अधिकांश मिसाइल बुनियादी ढांचे, जिसमें प्रक्षेपण स्थल और भूमिगत सुविधाएं शामिल हैं, तक परिचालन पहुंच फिर से स्थापित कर ली है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 12:58:51 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/operation-epic-fury-2-us-poised-wreak-havoc-on-iran-as-soon-as-modi-returns-from-his-europe-visit</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[China के सीक्रेट 'White House' में ट्रंप को लेकर क्यों गए जिनपिंग? जहां पहुंच US प्रेसिडेंट ने कह दी अपने दिल की बात]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/why-did-xi-jinping-take-china-secrets-to-the-white-house]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'झोंगनानहाई' का एक बेहद खास दौरा कराया। झोंगनानहाई चीन के कम्युनिस्ट नेताओं का मुख्य केंद्र (मुख्यालय) है और यहां सुरक्षा बहुत ज्यादा कड़ी रहती है। बीजिंग में दोनों नेताओं के बीच एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें मुख्य रूप से ताइवान, व्यापार, ईरान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के तनाव पर चर्चा हुई। इस बैठक के खत्म होने के बाद ही ट्रंप को यह जगह घुमाई गई। इस दौरे के बहुत खास मायने निकाले जा रहे हैं। शी जिनपिंग खुद ट्रंप के साथ झोंगनानहाई के शांत और शाही बागों में टहले। उन्होंने ट्रंप को चाय पिलाई, उनके साथ दोपहर का खाना (लंच) खाया और उन्हें यह सदियों पुरानी जगह दिखाई। झोंगनानहाई एक ऐसी जगह है जो लंबे समय से बीजिंग की ऊंची लाल दीवारों और देश की सबसे कड़ी सुरक्षा के पीछे आम लोगों की नज़रों से छिपी रही है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/us-china-tension-trump-xi-meeting-reveals-strained-relations-huge-uproar-over-protocol" target="_blank">US-China Tension: Trump-Xi मुलाकात में दिखी रिश्तों की तल्खी, Protocol पर भारी हंगामा</a></h3><div>शी जिनपिंग ने कहा कि उन्होंने इस स्थान को इसलिए चुना क्योंकि ट्रंप ने 2017 में फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में उनके पहले शिखर सम्मेलन के दौरान उनकी मेजबानी की थी। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, शी जिनपिंग ने ट्रंप से कहा किझोंगनानहाई वह जगह है जहां चीन की पार्टी और केंद्र सरकार के नेता काम करते हैं और रहते हैं, जिनमें मैं भी शामिल हूं। झोंगनानहाई की यह यात्रा ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ताइवान, व्यापारिक तनाव, ईरान और व्यापक हिंद-प्रशांत सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित दो दिवसीय वार्ता के बाद हुई। ट्रंप की बीजिंग यात्रा लगभग नौ वर्षों में चीन की उनकी पहली यात्रा थी, जिसने बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक संबंधों में से एक को पुनर्जीवित किया।</div><h2>ऊंची-ऊंची दीवारों के पीछे सरकार का मुख्य अड्डा</h2><div>झोंगनानहाई, चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) और सरकार (स्टेट काउंसिल) का मुख्य अड्डा है। बीजिंग के मशहूर 'फॉरबिडन सिटी' के पास स्थित यह बहुत बड़ा इलाका ऊंची-ऊंची दीवारों से सुरक्षित है। यहीं पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत चीन के सभी शीर्ष नेताओं के घर और दफ्तर मौजूद हैं। आम लोगों के लिए यह जगह पूरी तरह से बंद रहती है और इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित तथा रहस्यमयी राजनीतिक जगहों में गिना जाता है। चीन का भविष्य और नीतियां तय करने वाले सबसे बड़े फैसले इसी चारदीवारी के भीतर लिए जाते हैं, लेकिन यहां तक बहुत कम लोगों की ही पहुंच है। केवल कुछ बेहद खास और चुनिंदा विदेशी मेहमानों को ही इस शानदार परिसर के अंदर ले जाने की इजाजत मिलती है, ताकि वे चीन की इस भव्यता को देख सकें।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/xi-jinping-insulted-him-at-home-and-trump-blamed-biden" target="_blank">बर्बादी की तरफ बढ़ रहा अमेरिका, जिनपिंग ने घर बुलाकर की बेइज्जती तो ट्रंप ने बाइडेन पर फोड़ा ठीकड़ा</a></h3><h2>शाही बगीचा बना सत्ता का केंद्र</h2><div>आज, 1,500 एकड़ में फैला यह परिसर प्राचीन मंडपों, झीलों और मंदिरों को आधुनिक कार्यालयों और नेतृत्व के आवासों के साथ मिश्रित करता है। शी जिनपिंग ने दौरे के दौरान इस स्थल की ऐतिहासिक निरंतरता पर प्रकाश डाला और ट्रंप को सैकड़ों साल पुराने पेड़ दिखाए - जिनमें से एक के बारे में उन्होंने कहा कि वह लगभग 500 साल पुराना है। एक समय शी जिनपिंग ने ट्रंप को प्राचीन पेड़ों को छूने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी दीर्घायु और लचीलेपन की प्रशंसा की। इस एकांत परिसर से स्पष्ट रूप से प्रभावित ट्रंप ने जवाब दिया, "सुंदर जगह है। मुझे यह पसंद है। मुझे इसकी आदत पड़ सकती है। झोंगनानहाई में सुनियोजित ढंग से किया गया यह भ्रमण केवल राजनयिक आतिथ्य सत्कार से कहीं अधिक था। यह शी जिनपिंग की निरंतरता, नियंत्रण और आत्मविश्वास का प्रदर्शन भी था, जिन्होंने चीन के सबसे सुरक्षित राजनीतिक परिसर का उपयोग कम्युनिस्ट पार्टी की गहरी ऐतिहासिक जड़ों और सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ को रेखांकित करने के लिए किया।</div><div>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 12:48:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/why-did-xi-jinping-take-china-secrets-to-the-white-house</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पत्रकार के Phone पर आया रूसी मंत्री Lavrov को गुस्सा, बोले- Security बंदूक निकाल लेगी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/he-pulled-out-a-gun-russian-foreign-minister-warns-journalist-in-delhi]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली दौरे पर आए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से जुड़ा एक तनावपूर्ण क्षण वायरल हो गया है। मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने एक पत्रकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर व्यवधान जारी रहा तो सुरक्षाकर्मी बंदूक निकाल सकते हैं। रूसी विदेश मंत्री के सवालों के जवाब देते समय एक पत्रकार ने कथित तौर पर फोन पर बात करते हुए कई बार बातचीत में बाधा डाली। बार-बार हो रही इस बाधा के कारण लावरोव को रुकना पड़ा और सुरक्षा अधिकारियों को हस्तक्षेप करने के लिए कहना पड़ा। ब्रीफिंग फिर से शुरू करने से पहले लावरोव ने कहा कि क्या आप हमें अकेला छोड़ सकते हैं? या तो आप खुद को छोड़ दें या अपना फोन। लेकिन कुछ ही देर बाद फिर से व्यवधान हुआ, जिसके बाद रूसी विदेश मंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/british-radical-creates-stir-by-pasting-modi-picture-on-his-mouth" target="_blank">मुंह पर चिपकाई मोदी की तस्वीर, ब्रिटेन के कट्टरपंथी ने मचाया हड़कंप</a></h3><div>उन्होंने कहा कि क्या आप हमें अकेला छोड़ सकते हैं? मैं मजाक नहीं कर रहा हूं। अगर आप अपना फोन नहीं सौंपते हैं, तो वे बंदूक निकाल लेंगे।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए लावरोव भारत में थे और इस दौरान उन्होंने भारतीय नेताओं के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकें भी कीं। उन्होंने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति सहित मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, लावरोव ने प्रधानमंत्री को दिसंबर 2025 में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई मुलाकात के बाद से भारत-रूस सहयोग में हुए घटनाक्रमों की जानकारी दी। एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति के संबंध में लावरोव द्वारा दी गई जानकारी की सराहना की।</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/why-is-there-a-commotion-over-modi-announcement-82-countries-have-taken-a-major-decision" target="_blank">मोदी के ऐलान पर बवाल क्यों? 82 देशों ने लिया बड़ा फैसला!</a></h3><div>दोनों पक्षों ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया सहित प्रमुख भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति भारत के दीर्घकालिक रुख को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात से पहले, लावरोव ने बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस वार्ता में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ नई दिल्ली और मॉस्को के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक के बाद बोलते हुए, जयशंकर ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत-रूस साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। इस बीच, लावरोव ने कहा कि मॉस्को ब्रिक्स, संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन और जी20 सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की प्राथमिकताओं का समर्थन करना जारी रखेगा।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 12:33:37 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/he-pulled-out-a-gun-russian-foreign-minister-warns-journalist-in-delhi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Netherlands में भारतीयों से ऐसे मिले PM मोदी, गूंजा शेर आया, शेर आया का नारा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/how-pm-modi-met-indians-in-the-netherlands-slogans-like-sher-has-come-lion-has-come-echoed]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अपने पांच देशों के दौरे के दूसरे चरण के लिए नीदरलैंड पहुंचे। उनका व्यस्त कार्यक्रम यूरोपीय देश के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है। इस दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और जल प्रबंधन पर महत्वपूर्ण वार्ता करने की उम्मीद है। वे नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से भी मुलाकात करेंगे। यह दौरा भारत-यूरोप संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है, खासकर हाल ही में हुए भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते के बाद जिसने व्यापार और निवेश संबंधी चर्चाओं को नई गति दी है। यूएई का दौरा समाप्त करने के बाद एम्स्टर्डम पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह यात्रा सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार सहित भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने का अवसर प्रदान करती है।</div><h2>भारत-नीदरलैंड साझेदारी को बढ़ावा देने पर प्रधानमंत्री मोदी का बयान</h2><div>एम्स्टर्डम पहुंचने के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए इस यात्रा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते ने व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के नए अवसर पैदा किए हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देश जल प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में और अधिक निकटता से काम कर सकते हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/india-uae-historic-deal-the-uae-to-store-30-million-barrels-of-strategic-oil-reserves-in-india" target="_blank"> India-UAE Energy Partnership | भारत-UAE की ऐतिहासिक डील! भारत में 30 मिलियन बैरल रणनीतिक तेल भंडार रखेगा संयुक्त अरब अमीरात</a></h3><h2>व्यापार, प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा वार्ता के प्रमुख बिंदु रहेंगे</h2><div>प्रधानमंत्री मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच होने वाली चर्चा में व्यापार विस्तार, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, नवाचार और रक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि यह दौरा भारत-नीदरलैंड संबंधों के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रहा है, क्योंकि दोनों देश रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और गहरा करना चाहते हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/prime-minister-modi-arrived-in-the-netherlands-for-the-second-leg-of-his-five-nation-tour" target="_blank">PM Modi Netherlands Visit | प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों के दौरे के दूसरे चरण में नीदरलैंड पहुंचे, व्यापार और तकनीक पर बातचीत होगी बातचीत</a></h3><h2>प्रधानमंत्री मोदी महत्वपूर्ण नीदरलैंड दौरे के लिए एम्स्टर्डम पहुंचे</h2><div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के दौरे के तहत शुक्रवार को एम्स्टर्डम पहुंचे। हवाई अड्डे पर उनका स्वागत वरिष्ठ डच अधिकारियों ने किया, जिनमें डच विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसेन और रियर एडमिरल लुडगर ब्रुमेलार शामिल थे। प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए नीदरलैंड में भारत के राजदूत कुमार तुहिन भी उपस्थित थे।</div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | The Hague | Prime Minister Narendra Modi receives an enthusiastic welcome by the members of the Indian diaspora at the hotel he is staying at while on a visit to Netherlands.<br><br>Prime Minister Narendra Modi is in Netherlands, on the second leg of his 5-nation visit.… <a href="https://t.co/BF5cdilX7T">pic.twitter.com/BF5cdilX7T</a></p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/2055372909263409189?ref_src=twsrc%5Etfw">May 15, 2026</a></blockquote>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 12:03:40 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/how-pm-modi-met-indians-in-the-netherlands-slogans-like-sher-has-come-lion-has-come-echoed</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Prabhasakshi NewsRoom: अपने बिल से जैसे ही बाहर आया Terrorist Abu Bilal al Minuki, Nigeria में पहले से मौजूद थे अमेरिकी सैनिकों ने उसे उड़ा डाला]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/notorious-terrorist-al-minuki-killed-in-joint-operation-by-us-and-nigeria]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनिया से आतंक के एक और बड़े नाम का खात्मा हो गया है। अमेरिका और नाइजीरिया की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस का वैश्विक स्तर का दूसरा सबसे बड़ा कमांडर अबु बिलाल अल मिनुकी मारा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस आशय की घोषणा करते हुए कहा कि यह एक बेहद जटिल, सुनियोजित और गुप्त सैन्य मिशन था, जिसे उनके निर्देश पर अंजाम दिया गया। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सैनिकों और नाइजीरिया की सशस्त्र सेनाओं ने मिलकर दुनिया के सबसे सक्रिय आतंकियों में शामिल अल मिनुकी को खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि अल मिनुकी अफ्रीका में छिपकर अपनी गतिविधियां चला रहा था, लेकिन अमेरिकी खुफिया तंत्र लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए था। ट्रंप ने दावा किया कि इस कार्रवाई से आईएसआईएस के वैश्विक नेटवर्क को भारी झटका लगा है और अब वह अफ्रीका में आतंक फैलाने या अमेरिकियों को निशाना बनाने की साजिश नहीं कर सकेगा।</div><div><br></div><div>अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाइजीरिया सरकार का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि दोनों देशों के सहयोग से यह अभियान सफल हो सका। हम आपको बता दें कि हाल के महीनों में अमेरिका ने पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजीरिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। फरवरी में अमेरिकी सैनिकों को वहां सुरक्षा बलों को सलाह और सहयोग देने के लिए भेजा गया था, ताकि लंबे समय से जारी आतंकी हिंसा और विद्रोह से निपटा जा सके।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-major-claim-us-and-nigerian-armies-have-killed-islamic-state-no-2-commander" target="_blank">'अब हमें और नहीं डराएगा', Donald Trump का बड़ा दावा US-Nigerian Army ने मार गिराया Islamic State का नंबर-2 कमांडर</a></h3><div>हम आपको याद दिला दें कि अबु बिलाल अल मिनुकी को जून 2023 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन के दौरान वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया था। अमेरिकी विदेश विभाग ने उसे कई अन्य नामों जैसे अबुबकर मैनोक और अबोर मैनोक से भी पहचाना था। अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत उसे आईएसआईएस की वैश्विक आतंकी गतिविधियों में शामिल एक प्रमुख संचालक माना गया था।</div><div><br></div><div>बताया जाता है कि अल मिनुकी का जन्म वर्ष 1982 में नाइजीरिया के बोर्नो प्रांत में हुआ था। वह लंबे समय से आईएसआईएस से जुड़े पश्चिम अफ्रीकी नेटवर्क में सक्रिय था। आतंकवाद पर नजर रखने वाली संस्थाओं के अनुसार वर्ष 2018 में इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रांत यानी आईएसडब्ल्यूएपी के प्रमुख मम्मन नूर की हत्या के बाद अल मिनुकी क्षेत्रीय नेतृत्व की दौड़ में तेजी से उभरा। उसे नूर के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में गिना जाता था और बाद में वह संगठन का एक कट्टर तथा प्रभावशाली चेहरा बन गया।</div><div><br></div><div>क्षेत्रीय विशेषज्ञों के अनुसार, अल मिनुकी के संबंध बोको हराम के कुख्यात सरगना अबुबकर शेकाउ से भी तनावपूर्ण रहे थे। वर्ष 2015 और 2016 के बीच आईएसआईएस ने लीबिया में लड़ाकों को भेजने का निर्देश दिया था, लेकिन शेकाउ ने इसका विरोध किया। उस समय झील चाड क्षेत्र के कमांडर रहे अल मिनुकी ने लड़ाकों की तैनाती में मदद की, जिससे दोनों नेताओं के बीच मतभेद और गहरे हो गए। माना जाता है कि अल मिनुकी आईएसआईएस के अल फुरकान कार्यालय से भी जुड़ा हुआ था, जो संगठन के सबसे सक्रिय क्षेत्रीय नेटवर्क में शामिल है। यह कार्यालय नाइजीरिया और उसके पड़ोसी देशों के साथ पश्चिमी साहेल क्षेत्र में सक्रिय आतंकी संगठनों को दिशा और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता था।</div><div><br></div><div>हम आपको बता दें कि नाइजीरिया पिछले दो दशकों से गंभीर सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। देश के उत्तरी हिस्सों में आतंकी हिंसा लगातार जारी है। वहां आईएसआईएस से जुड़े दो बड़े संगठन सक्रिय हैं। पहला संगठन आईएसडब्ल्यूएपी है, जो मुख्य रूप से पूर्वोत्तर इलाकों और अदामावा प्रांत में सक्रिय रहता है। दूसरा संगठन लाकुरावा नाम से जाना जाता है, जिसने उत्तर पश्चिम और उत्तर मध्य क्षेत्रों के गांवों में कई हमले किए हैं।</div><div><br></div><div>हम आपको यह भी बता दें कि ट्रंप पहले भी नाइजीरिया को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि वहां ईसाई समुदाय के लोगों पर अत्याचार हो रहे हैं। हालांकि इस बार उनका ध्यान आतंकवाद विरोधी अभियान और दोनों देशों की साझेदारी पर केंद्रित रहा। बहरहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि अल मिनुकी की मौत आईएसआईएस के अफ्रीकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है, लेकिन नाइजीरिया और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय आतंकी संगठनों की जड़ें अब भी मजबूत हैं। ऐसे में केवल एक शीर्ष आतंकी के मारे जाने से क्षेत्र में पूरी तरह शांति स्थापित होना आसान नहीं माना जा रहा।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 11:24:18 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/notorious-terrorist-al-minuki-killed-in-joint-operation-by-us-and-nigeria</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA['अब हमें और नहीं डराएगा', Donald Trump का बड़ा दावा US-Nigerian Army ने मार गिराया Islamic State का नंबर-2 कमांडर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-major-claim-us-and-nigerian-armies-have-killed-islamic-state-no-2-commander]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><div>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक सनसनीखेज घोषणा करते हुए दावा किया है कि दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन 'इस्लामिक स्टेट' (IS) का दूसरे नंबर का शीर्ष कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी एक बेहद साहसी और जटिल सैन्य ऑपरेशन में मारा गया है। ट्रंप के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल मिशन को अमेरिकी सेना और नाइजीरियाई सशस्त्र बलों ने एक संयुक्त खुफिया ऑपरेशन के तहत अंजाम दिया।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">बेहद गुप्त रहने वाले नाइजीरियाई नागरिक अल-मिनुकी की मौत को इस्लामिक स्टेट के वैश्विक नेटवर्क और खासकर अफ्रीका में उसके ऑपरेशनों के लिए एक ताबूत में आखिरी कील की तरह देखा जा रहा है।</span></div><div>&nbsp;</div></div><div>अपने हमेशा के शेखी बघारने वाले अंदाज़ में, ट्रंप ने कहा कि यह ऑपरेशन "बहुत बारीकी से प्लान किया गया था," और इसे नाइजीरिया में एक "बहुत ही जटिल मिशन" बताया। यह आतंकी समूह, जो 2010 के दशक में अपने चरम पर होने के बाद से अब काफी कमज़ोर हो चुका है, उसने इस दावे पर कोई टिप्पणी नहीं की। अमेरिकी अधिकारियों ने CNN को बताया कि अल-मिनुकी को IS का संगठनात्मक और वित्तीय मास्टरमाइंड माना जाता था, और माना जाता था कि वह अमेरिका और विदेशों में उसके हितों के खिलाफ "हमलों की साज़िश रच रहा था।"</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/swiggy-zomato-blinkit-and-zepto-employees-announce-strike-know-their-demands" target="_blank">Delivery Workers India | ऑनलाइन डिलीवरी पर लगेगा ब्रेक! Swiggy, Zomato, Blinkit और Zepto के कर्मचारियों ने किया हड़ताल का ऐलान, जानें मांगें</a></h3><div><br></div><div>ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया, "आज रात, मेरे निर्देश पर, बहादुर अमेरिकी सेनाओं और नाइजीरिया की सशस्त्र सेनाओं ने दुनिया के सबसे सक्रिय आतंकवादी को युद्ध के मैदान से खत्म करने के लिए, बहुत बारीकी से प्लान किए गए और बहुत ही जटिल मिशन को पूरी तरह से सफल बनाया।"&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना के अफ्रीका में ज़मीन पर ऐसे सूत्र थे, जो उन्हें अल-मिनुकी के ठिकाने के बारे में लगातार जानकारी दे रहे थे।</span></div><div><br></div><div>उन्होंने आगे कहा, "वह अब अफ्रीका के लोगों को और नहीं डराएगा, न ही अमेरिकियों को निशाना बनाने वाले ऑपरेशनों की योजना बनाने में मदद करेगा। उसके खात्मे के साथ, ISIS के वैश्विक ऑपरेशन काफी हद तक कम हो गए हैं।"</div><div><br></div><div>विश्लेषकों ने कहा कि हालांकि अबू-बिलाल अल-मिनुकी की हत्या निस्संदेह अफ्रीका में IS के नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन यह संगठन अभी भी विकेंद्रीकृत (decentralized) बना हुआ है।</div><div><br></div><h2>कौन था अबू-बिलाल अल-मिनुकी?</h2><div>'काउंटर एक्सट्रीमिज़्म प्रोजेक्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिसे अबू बक्र मुहम्मद अल-मैनुकी के नाम से भी जाना जाता था, वह मुख्य रूप से अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में सक्रिय था। एक रहस्यमयी शख्सियत, अल-मैनुकी 'इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस' (ISWAP) के एक वरिष्ठ कमांडर के तौर पर काम करता था।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/sports/pv-sindhu-fumes-over-bwf-new-format-saying-it-will-be-extremely-mentally-and-physically-exhausting" target="_blank">BWF के नए फॉर्मेट पर भड़कीं PV Sindhu? कहा- मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद थकाने वाला होगा</a></h3><div><br></div><div>अमेरिकी विदेश विभाग ने जून 2023 में उसे 'विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी' (SDGT) के तौर पर वर्गीकृत किया था, क्योंकि वह इस्लामिक स्टेट के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडिंग जुटाने और आतंकी गुटों को निर्देश देने में अहम भूमिका निभा रहा था।</div><div><br></div><div>हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने नाइजीरिया में कथित इस्लामिक स्टेट आतंकवादियों पर जानलेवा हमला करने का आदेश दिया है। पिछले साल, ट्रंप ने आरोप लगाया था कि नाइजीरिया में ईसाइयों को सताया जा रहा है - इस दावे को उस अफ्रीकी देश की सरकार ने नकार दिया था।</div><div><br></div><div>उनके इस आरोप के कुछ ही दिनों बाद, अमेरिका ने नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में इस्लामिक स्टेट के कथित ठिकानों पर एक ज़बरदस्त और जानलेवा हमला किया। ट्रंप ने इस हमले को सही ठहराते हुए दावा किया कि ISIS के आतंकवादी बेकसूर ईसाइयों को मार रहे थे।</div><div><br></div><div>फरवरी में, US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट के 30 से ज़्यादा ठिकानों पर कई हमले किए। इस ऑपरेशन में, जिसमें बुनियादी ढांचे और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया गया था, फिक्स्ड-विंग, रोटरी-विंग और बिना पायलट वाले विमानों का इस्तेमाल किया गया था।</div><div>&nbsp;</div><div><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Read </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/national" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">Latest
National News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">only on Prabhasakshi&nbsp;</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 10:46:57 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-major-claim-us-and-nigerian-armies-have-killed-islamic-state-no-2-commander</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Tragic Accident in Maldives | पानी के नीचे की गुफा की खोज के दौरान 5 इतालवी गोताखोरों की मौत, देश के इतिहास की सबसे बदतर दुर्घटना]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/tragic-accident-in-the-maldives-5-italian-divers-die-during-underwater-cave-exploration]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>मालदीव में एक बेहद दर्दनाक और बड़ा हादसा सामने आया है। वावू एटोल (Vaavu Atoll) में समुद्र की सतह से लगभग 50 मीटर की गहराई पर स्थित पानी के नीचे की रहस्यमयी गुफाओं (Underwater Caves) की खोज करने उतरे पांच इतालवी गोताखोरों (Divers) की मौत हो गई है। स्थानीय अधिकारियों और गोताखोरी विशेषज्ञों ने इसे मालदीव के इतिहास की अब तक की सबसे भीषण गोताखोरी दुर्घटना करार दिया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">गुरुवार को हुए इस हादसे के बाद से बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन खराब मौसम शवों को बाहर निकालने के प्रयासों में लगातार बाधा बन रहा है।</span></div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/india-uae-historic-deal-the-uae-to-store-30-million-barrels-of-strategic-oil-reserves-in-india" target="_blank"> India-UAE Energy Partnership | भारत-UAE की ऐतिहासिक डील! भारत में 30 मिलियन बैरल रणनीतिक तेल भंडार रखेगा संयुक्त अरब अमीरात</a></h3><div>&nbsp;</div><div>पाँचों गोताखोरों ने वावू एटोल में, जो 50 मीटर की गहराई पर स्थित है, पानी के नीचे की गुफाओं की खोज का अपना अभियान शुरू किया था, लेकिन वे कभी भी सतह पर वापस नहीं आए। उनकी मौत के कारणों की जाँच चल रही है। बचाव अभियान शनिवार को फिर से शुरू होने की उम्मीद है। मालदीव सरकार ने पीड़ितों की पहचान मोनिका मोंटेफाल्कोन, जियोर्जिया सोमाकाल, फेडेरिको गुआल्टिएरी, म्यूरियल ओडेनीनो और जियानलुका बेनेडेटी के रूप में की है। इस समूह ने अभियान के लिए 'ड्यूक ऑफ यॉर्क' नामक एक नौका (यॉट) का इस्तेमाल किया था।</div><div><br></div><h2>पीड़ित</h2><div>पाँच में से कम से कम चार लोग जेनोआ विश्वविद्यालय से जुड़े थे। पाँचवें व्यक्ति, बेनेडेटी, 'ड्यूक ऑफ यॉर्क' पर नाव संचालन प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे। अब तक केवल उन्हीं का शव बरामद किया गया है।</div><div><br></div><div>इतालवी मीडिया के अनुसार, मोंटेफाल्कोन एक समुद्री जीवविज्ञानी थीं और जेनोआ विश्वविद्यालय में उष्णकटिबंधीय समुद्री पारिस्थितिकी तथा पानी के नीचे के विज्ञान की प्रोफेसर थीं; साथ ही, वे एक द्वीप निगरानी अभियान की वैज्ञानिक निदेशक के रूप में भी कार्यरत थीं।</div><div><br></div><div>उनकी बेटी, सोमाकाल, भी अपनी माँ की तरह समुद्र और गोताखोरी के प्रति जुनून रखती थीं, और उन्होंने उसी विश्वविद्यालय से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की थी।</div><div><br></div><div>ओडेनीनो (31 वर्ष) एक समुद्री जीवविज्ञानी और पारिस्थितिकीविद् थीं। एक अनुभवी गोताखोर होने के नाते, उन्होंने कई वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रकाशित किए थे।</div><div><br></div><div>गुआल्टिएरी (31 वर्ष) ने भी हाल ही में उसी विश्वविद्यालय से समुद्री जीवविज्ञान और पारिस्थितिकी में डिग्री के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी, और वे एक प्रमाणित स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षक थे।</div><div><br></div><div>बेनेडेटी (44 वर्ष) 2017 में मालदीव आने से पहले बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में कार्यरत थे; मालदीव आकर उन्होंने गोताखोरी के अपने जुनून को आगे बढ़ाया और अंततः नाव संचालन प्रबंधक बन गए।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-report-warns-that-falling-rupee-will-neutralize-the-hike-in-petrol-and-diesel-prices" target="_blank">SBI रिपोर्ट की चेतावनी: गिरता Rupee पेट्रोल-डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी को कर देगा बेअसर!</a></h3><div><br></div><h2>अब तक के बचाव प्रयास</h2><div>बचाव अधिकारियों के अनुसार, बेनेडेटी का शव पानी के नीचे की गुफा प्रणाली के प्रवेश द्वार के पास मिला, जबकि माना जा रहा है कि बाकी गोताखोर अभी भी गुफा के अंदर ही हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">मालदीव के राष्ट्रपति के प्रवक्ता मोहम्मद हुसैन शरीफ ने बताया कि शुक्रवार को चलाए गए खोज अभियान में आठ गोताखोरों ने हिस्सा लिया। दो-दो गोताखोरों ने मिलकर स्थल के गहरे हिस्सों की छानबीन की, लेकिन मौसम बिगड़ने के कारण उन्हें अभियान रोकना पड़ा। हालांकि, वे शनिवार को होने वाले आगे के खोज अभियान के लिए एक प्रारंभिक नक्शा तैयार करने में सफल रहे।</span></div><div><br></div><div>शरीफ ने यह भी बताया कि दो इतालवी गोताखोरी विशेषज्ञ स्थानीय टीमों की सहायता के लिए चल रहे बचाव अभियान में शामिल होने वाले हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इतालवी सरकार ने कहा है कि वह विशेषज्ञ गोताखोरी संगठन, डाइवर्स अलर्ट नेटवर्क के साथ समन्वय कर रही है, ताकि शव बरामद होने के बाद उन्हें स्वदेश वापस भेजा जा सके।</span></div><div><br></div><div>एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, पांचों गोताखोरों द्वारा प्रवेश की गई गुफा प्रणाली में संकरे रास्तों से जुड़े तीन बड़े कक्ष हैं। बचाव दल पहले ही इनमें से दो कक्षों की तलाशी ले चुके हैं, लेकिन दबाव कम होने के कारण अभियान सीमित रहा।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">मालदीव के गोताखोर शनिवार को खोज जारी रखने वाले हैं, और उनका ध्यान तीसरे और शेष कक्ष पर केंद्रित होगा।</span></div><div><br></div><h2>मृत्यु का संभावित कारण</h2><div>गोताखोरों की मृत्यु का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, हालांकि जांचकर्ताओं और गोताखोरी विशेषज्ञों ने कई सिद्धांत सामने रखे हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">मालदीव पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या खराब मौसम की वजह से गोताखोरी स्थल पर दृश्यता बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जहां कथित तौर पर 25 से 30 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इतालवी समाचार पत्र ला रिपब्लिका के अनुसार, खराब मौसम के कारण दृश्यता कम होने से पांचों गोताखोर पानी के अंदर गुफा में रास्ता भटक गए होंगे।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">जांचकर्ता इस संभावना पर भी विचार कर रहे हैं कि एक गोताखोर फंस गया होगा, जबकि अन्य या तो हवा खत्म होने के कारण या अपने साथी को बचाने की कोशिश में घबरा गए होंगे।</span></div><div><br></div><div>बीबीसी के अनुसार, कुछ गोताखोरी विशेषज्ञों को संदेह है कि ऑक्सीजन विषाक्तता की भी इसमें भूमिका हो सकती है। यह स्थिति तब उत्पन्न हो सकती है जब गोताखोरी टैंक में सांस लेने वाली गैस का मिश्रण कुछ निश्चित गहराइयों के लिए अनुपयुक्त हो, जिससे उच्च दबाव में ऑक्सीजन विषाक्त हो जाती है।</div><div><br></div><h2>पानी के अंदर गुफा में गोताखोरी के खतरे</h2><div>गुफा में गोताखोरी एक अत्यधिक तकनीकी और स्वाभाविक रूप से खतरनाक गतिविधि है जिसके लिए विशेष प्रशिक्षण, उन्नत उपकरण और सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन आवश्यक है। अधिक गहराई और खुले वातावरण में, विशेष रूप से खराब परिस्थितियों में, जोखिम काफी बढ़ जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी के भीतर गुफा प्रणालियों में गोताखोर आसानी से दिशाभ्रमित हो सकते हैं, जहां तलछट के हलचल से दृश्यता तेजी से घटकर लगभग शून्य हो सकती है।</div><div><br></div><div>इटली के गोताखोरों द्वारा कथित तौर पर की गई 50 मीटर की गहराई तक गोताखोरी भी मनोरंजक स्कूबा गोताखोरी के लिए अनुशंसित सीमाओं से अधिक है। 40 मीटर से अधिक की गोताखोरी को तकनीकी गोताखोरी के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और इसके लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण, अनुभव और विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है।</div><div><br></div><div>मालदीव में मनोरंजन के लिए डाइविंग की मानक सीमा 30 मीटर है।&nbsp;BBC के अनुसार, मालदीव — जो कई एटोल से बना एक द्वीपसमूह है — में डाइविंग और स्नोर्कलिंग से जुड़ी घटनाएँ अपेक्षाकृत कम होती हैं।</div><div>&nbsp;</div><div><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 10:04:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/tragic-accident-in-the-maldives-5-italian-divers-die-during-underwater-cave-exploration</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ India-UAE Energy Partnership | भारत-UAE की ऐतिहासिक डील! भारत में 30 मिलियन बैरल रणनीतिक तेल भंडार रखेगा संयुक्त अरब अमीरात]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/india-uae-historic-deal-the-uae-to-store-30-million-barrels-of-strategic-oil-reserves-in-india]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजार के बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी ऊर्जा साझेदारी को एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अबू धाबी की रणनीतिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। इसके तहत UAE भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve - SPR) में 30 मिलियन (3 करोड़) बैरल कच्चा तेल जमा करेगा। यह कदम वैश्विक संकट के समय भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगा।</div><div>&nbsp;</div><div>यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई व्यापक बातचीत का नतीजा है। इस बातचीत के दौरान, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच "सुरक्षित पारगमन मार्ग और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बिना किसी रुकावट के आवागमन" के महत्व पर भी जोर दिया। एक बयान में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने "इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच एक रणनीतिक सहयोग समझौते के पूरा होने का स्वागत किया। इस समझौते का उद्देश्य भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में UAE की भागीदारी को बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल तक ले जाना है।"</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/mega-deal-for-boeing-aircraft-with-china-trump-gives-g-2-status-to-meeting-with-xi-jinping" target="_blank">China संग Boeing विमानों की मेगा डील, Trump ने Xi Jinping संग बैठक को दिया G-2 का दर्जा</a></h3><div><br></div><div>इस कदम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में होने वाली किसी भी उथल-पुथल के कारण वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहता है।</div><div><br></div><div>दोनों देशों ने भारत में रणनीतिक गैस भंडार स्थापित करने पर मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई। साथ ही, उन्होंने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और ADNOC के बीच लंबी अवधि के लिए LPG आपूर्ति हेतु किए गए एक अलग समझौते का भी स्वागत किया।</div><div><br></div><div>UAE को "भारत की ऊर्जा सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भागीदार" बताते हुए, विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष "एक व्यापक ऊर्जा साझेदारी के लिए नई पहल" करने पर सहमत हुए हैं। इस साझेदारी में कच्चे तेल, LNG और LPG की आपूर्ति जैसे विषय शामिल होंगे।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/global-energy-crisis-two-large-lpg-tankers-carrying-66000-tons-of-cooking-gas-return-to-india-simi" target="_blank">Global Energy Crisis | ऊर्जा संकट के बीच राहत! 66,000 टन कुकिंग गैस लेकर भारत लौट रहे दो बड़े LPG टैंकर, 'सिमी' आज पहुंचेगा कांडला बंदरगाह</a></h3><div><br></div><div>ऊर्जा क्षेत्र के अलावा, इस यात्रा के दौरान बैंकिंग, बुनियादी ढांचा और वित्त क्षेत्रों में भारत में 5 अरब डॉलर के UAE निवेश की घोषणा भी की गई। इसके साथ ही, रक्षा, समुद्री सहयोग, जहाज निर्माण और उन्नत कंप्यूटिंग के क्षेत्रों में भी नए समझौते किए गए।</div><div><br></div><div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अबू धाबी यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान, प्रधानमंत्री ने UAE पर हुए हमलों की भारत द्वारा कड़ी निंदा किए जाने की बात को दोहराया और उस देश के नेतृत्व तथा वहां की जनता के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की।</div><div><br></div><div>क्षेत्रीय संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों के बाधित होने की आशंकाएं बढ़ने के बीच, भारत और UAE ने क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षित व्यापार मार्गों और मजबूत आर्थिक सहयोग के महत्व पर विशेष जोर दिया।</div><div>&nbsp;</div><div><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 09:55:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/india-uae-historic-deal-the-uae-to-store-30-million-barrels-of-strategic-oil-reserves-in-india</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[China संग Boeing विमानों की मेगा डील, Trump ने Xi Jinping संग बैठक को दिया G-2 का दर्जा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/mega-deal-for-boeing-aircraft-with-china-trump-gives-g-2-status-to-meeting-with-xi-jinping]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा से लौट आए और उन्होंने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ हुई वार्ता को ‘‘दो महान देशों के नेताओं की मुलाकात’’ बताया।
ट्रंप शुक्रवार शाम मैरीलैंड स्थित ‘जॉइंट बेस एंड्रूज’ पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि इस यात्रा के दौरान कई अहम व्यापारिक समझौते हुए, जिनमें बोइंग के 200 विमानों की चीन को बिक्री तथा भविष्य में 750 अतिरिक्त विमान खरीदने का वादा शामिल है। उन्होंने चीन द्वारा अमेरिकी कृषि क्षेत्र को समर्थन देने की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।
</p><p>बृहस्पतिवार को शी चिनफिंग के साथ मुलाकात के बाद ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, ‘‘ये दो महान देश हैं। मैं इसे ‘जी-2’ कहता हूं। मुझे लगता है कि इतिहास में इसे एक बेहद अहम क्षण के रूप में याद किया जाएगा।’’
‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने अपनी खबर में कहा कि ट्रंप के इस बयान से चीन को वह दर्जा मिला, जिसकी राष्ट्रपति शी लंबे समय से अपेक्षा कर रहे थे यानी अमेरिका के समकक्ष एक महाशक्ति के रूप में पहचान।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘दो दिनों तक चली बैठकों के दौरान सुनियोजित समारोह, भव्य स्वागत और दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं के बीच मित्रता तथा पारस्परिक सम्मान के प्रदर्शन ने उस भू-राजनीतिक समीकरण को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया, जिसकी चीन लंबे समय से इच्छा रखता रहा है और जिसका अमेरिका अब तक प्रतिरोध करता आया था।’’
</p><p>ट्रंप ने ‘फॉक्स न्यूज’ से बातचीत में यह भी कहा कि शी चिनफिंग के साथ अच्छे संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक वह सत्ता में हैं, तब तक चीन संभवतः ताइवान के खिलाफ कोई आक्रामक कदम नहीं उठाएगा।
ट्रंप ने कहा, ‘‘यह ताइवान पर कब्जे का मामला नहीं है। वे (चीन) सिर्फ यह नहीं चाहता कि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित करे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब तक मैं (सत्ता) में हूं, मुझे नहीं लगता कि वे कुछ करेंगे। लेकिन मेरे बाद वे ऐसा कर सकते हैं।’’
ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि चीन शांत रहे। हम युद्ध नहीं चाहते। अगर मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो मुझे लगता है कि चीन भी इससे संतुष्ट रहेगा।’’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उन्होंने शी चिनफिंग को सितंबर में वाशिंगटन आने का निमंत्रण दिया है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 09:52:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/mega-deal-for-boeing-aircraft-with-china-trump-gives-g-2-status-to-meeting-with-xi-jinping</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Global Stage पर भारत का संतुलित रुख, BRICS में S Jaishankar ने दी कूटनीति की नसीहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/indias-balanced-stance-on-the-global-stage-s-jaishankar-gave-advice-on-diplomacy-in-brics]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है। ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कहा कि वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि स्थिरता चुनिंदा नहीं हो सकती और शांति भी टुकड़ों में संभव नहीं हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार, इस बैठक में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार भी शामिल हुए। जयशंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं।</div><div><br></div><div>बता दें कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है। ऐसे में मध्य पूर्व में किसी भी तरह का सैन्य तनाव या समुद्री बाधा भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए चिंता का कारण बन सकता हैं।</div><div><br></div><div>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नींव देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि ब्रिक्स बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच भी तनाव देखने को मिला। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद इतने बढ़ गए कि बैठक में तीखी बहस की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को बीच में हस्तक्षेप कर माहौल शांत कराना पड़ा हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान ने बैठक में अमेरिका और इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश अवैध विस्तारवाद और युद्ध जैसी नीतियों का शिकार बना हुआ हैं। उन्होंने ब्रिक्स देशों से अमेरिका और इजराइल की कथित कार्रवाई की खुलकर निंदा करने की अपील भी की हैं।</div><div><br></div><div>वहीं भारत ने संतुलित रुख अपनाते हुए सभी पक्षों से तनाव कम करने और शांति बहाल करने की दिशा में काम करने की बात कही। जयशंकर ने कहा कि भारत किसी भी सकारात्मक पहल में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।</div><div><br></div><div>बता दें कि ब्रिक्स समूह अब दुनिया की बड़ी आर्थिक और राजनीतिक ताकतों में गिना जाता है। इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं। यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता हैं।</div><div><br></div><div>इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शुक्रवार से चार देशों के दौरे पर रवाना होने वाले हैं। इस दौरे में उनका पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात रहेगा, जहां वह राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 22:14:10 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/indias-balanced-stance-on-the-global-stage-s-jaishankar-gave-advice-on-diplomacy-in-brics</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[US-China Tension: Trump-Xi मुलाकात में दिखी रिश्तों की तल्खी, Protocol पर भारी हंगामा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/us-china-tension-trump-xi-meeting-reveals-strained-relations-huge-uproar-over-protocol]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिका और चीन के बीच हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने दोनों देशों के रिश्तों में मौजूद तनाव को एक बार फिर उजागर कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दो दिवसीय शिखर वार्ता के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, मीडिया नियंत्रण और अधिकारियों के व्यवहार को लेकर कई बार टकराव की स्थिति पैदा हुई।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार, बीजिंग में आयोजित इस बैठक के दौरान चीनी अधिकारियों ने सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त इंतजाम किए थे। इसी दौरान अमेरिकी और चीनी मीडिया कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की घटना भी सामने आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक के दौरान चीनी पत्रकारों का एक समूह अचानक बैठक स्थल की ओर बढ़ा, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस दौरान व्हाइट हाउस के एक अधिकारी को धक्का लगने से वह नीचे गिर गए और उन्हें चोट भी आई थीं।</div><div><br></div><div>बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने चीनी मीडिया दल के व्यवहार पर नाराजगी जताई और इसे आक्रामक रवैया बताया।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि बैठक के दौरान एक और बड़ा विवाद तब सामने आया जब बीजिंग स्थित टेंपल ऑफ हेवन में अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के एक एजेंट को प्रवेश से रोक दिया गया। चीनी अधिकारियों का कहना था कि एजेंट अपने साथ हथियार लेकर अंदर नहीं जा सकते, जबकि अमेरिकी सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रपति की सुरक्षा टीम के पास हथियार होना जरूरी माना जाता है।</div><div><br></div><div>करीब आधे घंटे तक दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर बहस चलती रही। बाद में दूसरे अमेरिकी एजेंट ने मीडिया प्रतिनिधियों को अंदर पहुंचाया, जबकि हथियार वाले एजेंट को बाहर ही रुकना पड़ा।</div><div><br></div><div>इसके अलावा अमेरिकी पत्रकारों को भी कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिकी मीडिया कर्मियों की आवाजाही सीमित कर दी गई थी। यहां तक कि पानी की बोतलें भी जब्त कर ली गईं और उन्हें बार-बार सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार, ट्रंप और शी जिनपिंग जब टेंपल ऑफ हेवन परिसर का दौरा कर रहे थे, उस समय अमेरिकी पत्रकारों को एक कमरे में रोक दिया गया और उन्हें राष्ट्रपति के काफिले तक पहुंचने से अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। इसके बाद अमेरिकी और चीनी अधिकारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई थीं।</div><div><br></div><div>बताया जा रहा है कि अमेरिकी अधिकारियों ने चीनी पक्ष से कहा कि अगर चीनी अधिकारी अमेरिका आते तो उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता। बाद में व्हाइट हाउस के कर्मचारियों और पत्रकारों ने सुरक्षा अवरोध पार करते हुए काफिले तक पहुंचने की कोशिश की थीं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि पूरे दौरे के दौरान साइबर जासूसी और हैकिंग को लेकर भी अमेरिकी पक्ष सतर्क दिखाई दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने अपने प्रतिनिधियों और पत्रकारों को अस्थायी मोबाइल फोन और अलग ईमेल खातों का इस्तेमाल करने की सलाह दी थीं।</div><div><br></div><div>बीजिंग में जगह-जगह निगरानी कैमरे लगाए गए थे और सुरक्षा एजेंसियां लगातार गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और चीन के बीच भरोसे की कमी और बढ़ते कूटनीतिक तनाव को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 21:54:07 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/us-china-tension-trump-xi-meeting-reveals-strained-relations-huge-uproar-over-protocol</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मुंह पर चिपकाई मोदी की तस्वीर, ब्रिटेन के कट्टरपंथी ने मचाया हड़कंप ]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/british-radical-creates-stir-by-pasting-modi-picture-on-his-mouth]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सुरक्षा की परवाह किए बगैर संयुक्त अरब अमीरात जाने के लिए सिर्फ दो गाड़ियों के काफिले में एयरपोर्ट पहुंचे तो वहीं दूसरी तरफ ब्रिटेन में कुछ जिहादियों ने एक शख्स को पीएम मोदी के चेहरे वाला मास्क पहनाया और उसके बाद बहुत खतरनाक ऐलान कर दिया। मामला इतना गंभीर है कि ब्रिटेन के एक सांसद बॉब ब्लैकमैन ने इस वीडियो को रीट्वीट करते हुए एक्शन की मांग की है। दरअसल पाकिस्तानी मुस्लिमों के कब्जे में आ चुके बर्मिंघम शहर में इस्लामिक कट्टरपंथी शकील अफसर ने बर्मिंघम में भारतीय काउंसिलेट के पास एक वीडियो शूट की। इस वीडियो में एक व्यक्ति को दिखाया गया जिसने पीएम मोदी का मास्क पहना हुआ है। चमकीले नारंगी रंग का जंप सूट पहना हुआ है। तीन नकाबपश लोगों ने पीएम मोदी का मास्क पहने इस शख्स को पकड़ रखा है। वैसे जिसने पीएम मोदी का मास्क पहना है वह भी इन कट्टरपंथियों का ही दोस्त है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/modi-steals-the-show-in-uae-by-calling-him-brother" target="_blank">मोदी ने ब्रदर बोलकर लूट ली UAE की महफिल, ईरान दंग, ट्रंप परेशान</a></h3><div>एक नकली लाइव ब्रेकिंग न्यूज़ के अंदाज में बनाई गई इस वीडियो में कट्टरपंथियों ने पीएम मोदी का मास्क पहने शख्स को मारने का ड्रामा किया है। उन्होंने दिखाया है कि वह आईएस आईएस स्टाइल में एक्शन लेंगे। इन कट्टरपंथियों ने पोस्टर लहराते हुए कहा कि कश्मीर आजाद होगा। इन्होंने कहा कि यह पीएम मोदी से इसलिए नफरत करते हैं क्योंकि पीएम मोदी इजराइल के दोस्त हैं। ऐसे में हमारा मानना है कि पीएम मोदी को अपनी सुरक्षा में कमी नहीं लानी चाहिए। काफिले में उतनी ही गाड़ियां रखनी चाहिए जितनी एसपीजी प्रोटोकॉल में लिखी हैं। बहरहाल यह वीडियो वायरल हुआ तो ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने इस पर घोर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह घटना पूरी तरह से घिनौनी है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/campaign-to-save-fuel-maharashtra-cm-fadnavis-sets-an-example-travels-in-indigo-economy-class" target="_blank">ईंधन बचाने की मुहिम: Maharashtra CM Fadnavis बने मिसाल, Indigo की Economy Class में किया सफर</a></h3><div>बॉब ब्लैकमैन ने कहा कि ब्रिटेन की सड़कों पर लोकतांत्रिक रूप से चुने गए एक विश्व नेता को निशाना बनाते हुए इस तरह की आईएसआईएस स्टाइल वीडियो बनाना साफ तौर पर उकसाने की कार्यवाही है। बॉब ब्लैकमैन ने ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों को भी यह वीडियो टैग किया है ताकि दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जा सके। आपको बता दें कि ब्रिटेन की सरकार और पुलिस कट्टरपंथियों पर एक्शन लेने में नाकाम है। आप जानते ही हैं कि भारत में भी पीएम मोदी को कई बार धमकियां मिल चुकी हैं। पीएम मोदी के दुश्मनों की कमी नहीं है।</div><blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/BobBlackman?ref_src=twsrc%5Etfw">@BobBlackman</a> - Chair of All Party Parliamentary Group UK, Demands Police Action against a Muslim Group "Denified" for staging an act of executing Prime Minister Narendra Modiendra Modi in ISIS style on British Streets, to intimidate, threaten and incite violence against the the… <a href="https://t.co/K5UK8SJGdq">pic.twitter.com/K5UK8SJGdq</a></p>— Mahesh Vasu (@maheshmvasu) <a href="https://twitter.com/maheshmvasu/status/2054830162068517190?ref_src=twsrc%5Etfw">May 14, 2026</a></blockquote> ]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:45:24 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/british-radical-creates-stir-by-pasting-modi-picture-on-his-mouth</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ Pakistan Soldiers Killed: पाकिस्तान में मौत की तबाही, 15 सैनिकों की मौत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/terrorist-attacks-rock-pakistan-15-soldiers-killed]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पाकिस्तान एक बार फिर बड़े आतंकी हमले से दहल गया है। खैबर पख्तून ख्वा के बाजौर इलाके में पाकिस्तानी सेना के कैंप पर ऐसा हमला हुआ जिसने पूरे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इस आत्मघाती हमले में कम से कम 15 पाकिस्तानी सैनिकें मारे गए हैं। जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि हमला बेहद प्लानिंग के साथ किया गया। आतंकियों ने सबसे पहले सेना के कैंप के एक हिस्से में जोरदार धमाका किया। धमाका इतना तेज था कि पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई। इसी भगदड़ का फायदा उठाकर भारी हथियारों से लैस आतंकी कैंप के अंदर घुस गए। इसके बाद सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच काफी देर तक गोलीबारी और मुठभेड़ चलती रही। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन तहरीक तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी ने ली है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/taliban-gives-india-contract-for-afghan-pak-border-huge-deal-worth-46-million" target="_blank">Taliban ने दिया भारत को अफगान-पाक बॉर्डर का ठेका,  46 मिलियन डॉलर की बड़ी डील!</a></h3><div>संगठन ने बयान जारी कर कहा कि हमला उनकी स्पेशल इस्त शहादी फोर्सेस यानी सुसाइड स्क्वाड ने किया। बताया जा रहा है कि अक्टूबर 2025 में क्वटा हमले के बाद यह पहला मौका है जब टीटीपी ने खुले तौर पर किसी आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है। बाजौर इलाका लंबे समय से आतंकवाद से प्रभावित रहा है। यह खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आता है। जहां आए दिन सेना और आतंकियों के बीच संघर्ष की खबरें सामने आती रहती है। हमले के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सेना और सुरक्षा एजेंसियां लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है ताकि हमले में शामिल बाकी आतंकियों का पता लगाया जा सके। गौर करने वाली बात यह है कि सिर्फ एक हफ्ते के अंदर खैबर पख्तून ख्वा में यह दूसरा बड़ा आत्मघाती हमला है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/rajnath-singh-warning-to-pak--if-you-look-at-it-something-will-happen-that-hasnt-happened-before" target="_blank">Rajnath Singh की Pakistan को सीधी चेतावनी, नजर उठाई तो वो होगा जो अब तक नहीं हुआ</a></h3><div>&nbsp;</div><div>इससे पहले लक्की मरवत जिले में के नौरंग बाजार में भी विस्फोटकों से भरे ऑटो रिक्शा में धमाका किया गया था। उस हमले में दो पुलिसकर्मियों और एक महिला समेत कई लोगों की मौत हुई थी। फरवरी महीने में भी इसी इलाके में बड़ा आतंकी हमला हुआ था। जिसमें पांच पुलिसकर्मी और दो आम नागरिक मारे गए थे। लगातार हो रहे इन हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद विरोधी रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:41:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/terrorist-attacks-rock-pakistan-15-soldiers-killed</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[मोदी ने ब्रदर बोलकर लूट ली UAE की महफिल, ईरान दंग, ट्रंप परेशान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/modi-steals-the-show-in-uae-by-calling-him-brother]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनिया की नजरें इस वक्त ट्रंप के चीन दौरे पर टिकी हुई है। अमेरिका और चीन के बीच चल रही टकराहट पूरी दुनिया की सुर्खियां बनी हुई है इस वक्त। लेकिन इसी बीच बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक एक ऐसा बड़ा दांव चल दिया है जिसने चीन में बैठे ट्रंप तक को हिला कर रख दिया है। हैरान कर दिया है और पूरी दुनिया में बेचैनी बढ़ा दी है। हालात ये हैं कि इस वक्त ट्रंप के चीन दौरे से ज्यादा चर्चा हो रही है पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा की। ऐसे में अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या होने जा रहा है? क्यों दुनिया के बड़े देश अचानक भारत की तरफ देखने लगे हैं और कैसे पीएम मोदी दुनिया में फैले सबसे बड़े संकट को भारत के लिए सबसे बड़े मौके में बदलने की तैयारी कर रहे हैं। दुनिया में फैलते संकट के बीच भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक तैयारी मानी जा रही है। क्योंकि बता दें कि इस वक्त पूरी दुनिया जिस चीज से सबसे ज्यादा डर रही है और वो&nbsp; ऊर्जा संकट है और पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर पहुंचे हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/campaign-to-save-fuel-maharashtra-cm-fadnavis-sets-an-example-travels-in-indigo-economy-class" target="_blank">ईंधन बचाने की मुहिम: Maharashtra CM Fadnavis बने मिसाल, Indigo की Economy Class में किया सफर</a></h3><div>यूएई में पीएम मोदी ने कहा कि ब्रदर इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं आपका हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं और जैसा आपने कहा मैं अपने दूसरे कराया ये शब्द ये भाव मेरे जीवन की बहुत बड़ी पूंजी है आज भी जिस प्रकार से आपकी वायु सेना के जहाजों ने किया। ये भारत के लोगों का सम्मान है। आपने पिछले दिनों प्राकृतिक आपदा के कारण कुछ इलाकों में जो परेशानियां आई उन पीड़ित परिवारों के लिए संवेदना व्यक्त की। इसके लिए भी मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। वेदर पिछले कुछ समय से आपसे फोन पर तो बात होती रहती थी परंतु मैं स्वयं आपसे मिलने के लिए बहुत ही बेता आता पता नहीं क्यों लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि मुझे जितना हो सके उतना जल्दी आपके पास आना चाहिए आपको मिलना चाहिए आज आपसे मिलकर के मुझे सचमुच बहुत खुशी हुई है ब्रदर जैसा मैंने आपको पहले भी कहा है यूएई पर हुए हमलों की हम कठोर निंदा करते हैं यूएई को जिस तरह निशाना बनाया गया है ये किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है ब्रदर इन कठिन परिस्थितियों में आपने जिस संयम करेज और विल का परिचय दिखाया है। यह बहुत ही सराहनीय है। राष्ट्रीय एकता सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने आपके नेतृत्व में उठाए गए कदमों का हम अभिनंदन करते हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/akhilesh-yadav-counterattack-on-pm-modi-appeal-if-you-want-to-move-forward-cycle-is-only-option" target="_blank">PM Modi की अपील पर Akhilesh Yadav का पलटवार: बोले - 'आगे बढ़ना है तो Cycle एकमात्र विकल्प'</a></h3><div>पीएम मोदी ने कहा कि कठिन समय यूएई में रहने वाले भारतीय समुदाय की चिंता करने और उनकी देखभाल की जिस प्रकार से आपने उनको अपने परिवार के सदस्यों को संभाला है। मैं भी सरकार का आपका रॉयल फैमिली का हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। ब्रदर पश्चिम एशिया क्षेत्र में युद्ध की परिस्थिति का प्रभाव आज पूरे विश्व पर दिखाई दे रहा है। भारत ने हमेशा समस्याओं के समाधान के लिए डायलॉग और डिप्लोमेसी पर प्राथमिकता दी है। और उसको फ्री ओपन और सेफ बनाए रखना ये हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस विषय में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन आवश्यक है। ब्रदर भारत हर परिस्थिति में यूए के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और आगे भी खड़ा रहेगा। जल्द से जल्द शांति और वीरता की बहाली के लिए भारत हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। ब्रदर हमारी कॉम्प्रहेंसिव स्ट्रेटजी पार्टनरशिप को निरंतर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मैं आपका हृदय से बहुत-बत अभिनंदन करता हूं। जनवरी में आपकी भारत यात्रा के दौरान हमने आपस सहयोग को क्वालिटेटिवली अपग्रेड करने पर सहमति जताई। इतने कम समय में भी हमने सभी विषयों में उल्लेखनीय प्रगति की। दोनों के बीच भी करीबी संपर्क रहा।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:36:25 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/modi-steals-the-show-in-uae-by-calling-him-brother</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Donald Trump और शी जिनपिंग की बैठक से Taiwan की बढ़ी टेंशन, क्या होगी कोई Big Deal?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/taiwan-tension-increased-due-to-the-meeting-between-donald-trump-and-xi-jinping]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>बीजिंग में हुई बैठक में दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों के नेताओं ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अपने अमेरिकी समकक्ष शी जिनपिंग से मुलाकात की और उनका भव्य स्वागत किया। हालांकि, दोनों पक्षों में विश्वास और संदेह का भाव हावी रहा।</div><div>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा ने उन्हें एक तरह से विनम्र व्यक्ति की भूमिका में ला दिया। शी जिनपिंग की अमेरिका की आखिरी यात्रा 2023 में एपेक शिखर सम्मेलन के लिए थी, और उससे पहले उनकी आखिरी राजकीय यात्रा 2015 में हुई थी।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.comhttps://cms9.prabhasakshi.com/international/any-role-by-india-is-welcome-iran-endorses-russia-trust" target="_blank">भारत की किसी भी भूमिका का स्वागत... रूस के भरोसे पर ईरान ने लगाई मुहर</a></h3><div>ट्रंप कई बार अपने भव्य स्वागत से अभिभूत दिखे। बच्चों को उत्साह से उछलते-कूदते देखकर ट्रंप ने शी जिनपिंग से कहा, "मैं उन बच्चों से विशेष रूप से प्रभावित हुआ। वे खुश थे, वे सुंदर थे। वे बच्चे अद्भुत थे। <span style="font-size: 1rem;">ट्रंप खुद को एक कुशल वार्ताकार मानते हैं, लेकिन अन्य लोगों का मानना ​​है कि उन्हें आसानी से प्रभावित किया जा सकता है, खासकर सत्तावादी हस्तियों की उपस्थिति में। उन्होंने शी जिनपिंग से शुरुआत में ही कहा, आप एक महान नेता हैं। कभी-कभी लोगों को मेरा यह कहना पसंद नहीं आता, लेकिन मैं फिर भी कहता हूं, क्योंकि यह सच है।" यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शी जिनपिंग की महानता का प्रभाव ट्रंप पर भी पड़ता है और क्या आने वाले हफ्तों में ट्रंप चीनी विचारों को दोहराना शुरू कर देते हैं।</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.comhttps://cms9.prabhasakshi.com/international/xi-jinping-insulted-him-at-home-and-trump-blamed-biden" target="_blank">बर्बादी की तरफ बढ़ रहा अमेरिका, जिनपिंग ने घर बुलाकर की बेइज्जती तो ट्रंप ने बाइडेन पर फोड़ा ठीकड़ा</a></h3><div>अपने सामने भाषण के मुख्य बिंदुओं की एक फाइल रखे शी जिनपिंग ने अपने लिखित भाषण और सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित किया। वहीं, ट्रंप ने ऐसी किसी सहायता का सहारा नहीं लिया। इसके बजाय, उन्होंने शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों पर बिना तैयारी के भाषण दिए, उनकी प्रशंसा की और वादा किया कि उनका रिश्ता पहले से बेहतर होगा। ईरान के साथ युद्ध के कारण एक महीने की देरी से 14-15 मई को हुए शिखर सम्मेलन में चार मुख्य विषय - ताइवान, तेहरान, व्यापार और प्रौद्योगिकी - हावी रहे। शायद ही किसी ने ताइवान जितनी आशंका के साथ इस बैठक की उम्मीद की हो। ट्रंप का इतिहास रहा है कि वे दूसरों को बलि का बकरा बनाते हैं, उदाहरण के लिए यूक्रेन को ही ले लीजिए। यह कहना उतना महत्वपूर्ण नहीं है कि ट्रंप ताइवान को चीन के हवाले कर देंगे, बल्कि यह कहना है कि ताइवान चीन और अमेरिका के बीच एक व्यापक समझौते का हिस्सा बन सकता है। क्या ताइवान अमेरिका का प्रमुख सुरक्षा साझेदार है, या इसे उनके संबंधों के तहत एक समस्या के रूप में देखा जाता है जिसका समाधान आवश्यक है? हालांकि, ड्रू थॉम्पसन ने कहा, ट्रंप ताइवान को मुट्ठी भर के लिए नहीं बेचेंगे। मुझे लगता है कि ट्रंप द्वारा ताइवान को 'सौदे' के रूप में सौंपने की आशंकाएं अतिरंजित हैं। सीधी बात यह है कि शी जिनपिंग चीन के बाज़ार नहीं खोलेंगे और ट्रंप को वह नहीं देंगे जो वे सबसे ज़्यादा चाहते हैं। ट्रंप भी शी को वह नहीं देंगे जो वे सबसे ज़्यादा चाहते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एनबीसी न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में कुछ आश्वासन दिया। वे हमेशा अपनी तरफ से यह मुद्दा उठाते हैं। हम हमेशा अपना रुख स्पष्ट करते हैं और अन्य विषयों पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ताइवान के प्रति अमेरिकी नीति "अपरिवर्तित" है, लेकिन चेतावनी दी कि चीन द्वारा ताइवान को बलपूर्वक लेना "एक भयानक गलती" होगी।</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:15:57 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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