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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[भारत बनेगा अगला सऊदी? 150 कुओं की खुदाई चालू कर रचने वाला है इतिहास]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/will-india-become-the-next-saudi-arabia-it-is-set-to-make-history-by-drilling-150-wells]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>मिडिल ईस्ट जल रहा है। रूस यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है और इन सबके बीच भारत की धड़कनें तेज हैं। क्योंकि हम अपनी जरूरत का 89% तेल विदेशों से मंगाते हैं। अगर कल सप्लाई रुक गई तो भारत थम जाएगा। लेकिन दिल्ली के गलियारों में एक ऐसी योजना को हरी झंडी दे दी गई है जो दुनिया के तेल बाजारों में हलचल पैदा कर सकती है। नाम है समुद्र मंथन। बजट है 8484 करोड़ और लक्ष्य है भारत के गहरे समुद्र से तेल के भंडार को निचोड़ लेना। यह मेगा रिपोर्ट&nbsp; केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के उस आधिकारिक ऐलान पर आधारित है जिसमें 8484 करोड़ की नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम को मंजूरी दे दी गई है। तेल की खोज कोई नल लगाना नहीं है। यह एक वैज्ञानिक तपस्या होती है। यही वो कुएं हैं जो आने वाले समय में आपकी गाड़ी के पेट्रोल की कीमत तय करेंगे। भारत सरकार ने 8484 करोड़ को दो बड़े हिस्सों में बांट दिया है। पहला हिस्सा है 28000 करोड़ का। यह समुद्र के सीने का डिजिटल एक्सरे है और इसे कहते हैं सिस्मिक डाटा। इनमें अत्याधुनिक जहाज समुद्र की गहराई में तरंगे भेजते हैं ताकि पता चल सके कि चट्टानों के नीचे तेल है या सिर्फ पानी।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/our-friend-russia-has-hit-the-jackpot-for-india-what-is-world-first-nuclear-powered-icebreaker" target="_blank">दोस्त रूस ने तो भारत की लॉटरी लगा दी! क्या है दुनिया का पहला परमाणु आइसब्रेकर?</a></h3><div>दूसरा हिस्सा 43,200 करोड़ का है। यह वो पैसा है जो ड्रिलिंग मशीनों और उत्पादन के लिए इस्तेमाल होगा। भारत सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030-31 तक हम अपने समुद्रों का पूरा नक्शा तैयार कर लें। अब समुद्र मंथन की सबसे बड़ी खबर यह है कि ओएनजीसी ने आने वाले समय में 150 गहरे पानी के कुएं यानी डी वाटर वेल्स खोदने की योजना बनाई है। एक गहरा कुआं खोदने का खर्च 500 करोड़ से 1000 करोड़ तक हो सकता है। 150 कुओं का मतलब है कि हज़ारों करोड़ का दाव और भारत सरकार को उम्मीद है कि इन कुओं से 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल के बराबर संसाधन मिल सकते हैं। गहराई में ड्रिलिंग शुरू करना कोई आसान खेल नहीं है। हाल ही में ओएनजीसी की टीम ने प्लैटिनम एक्सप्लोरर पर एमए डीडब्ल्यू जैसे व्हेल के लिए 84 इंच बिट प्रोटोजन की जांच की है। समुद्र की लहरों के बीच हज़ारों फीट नीचे एक ड्रिल बीट को सटीक तरीके से पहुंचाना जहां दबाव इतना ज़्यादा होगा कि लोहा भी चिपका दे। ये इस भारत के इंजीनियरिंग की वो चुप्पी है जो आने वाले समय में धमाका करने वाली है और यहां सुरक्षा और सटीकता ही सबसे बड़ा हथियार है। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है। हमारा 88 से 89% तेल बाहर से आता है। जब हम आयात करते हैं तो हम सिर्फ तेल नहीं खरीदते हैं। हम अपनी मेहनत की कमाई यानी कि विदेशी मुद्रा जिसे हम फॉरेक्स कहते हैं वो बाहर भेजते हैं।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/america-ambitions-for-hormuz-left-unfulfilled-deal-sealed-between-iran-and-oman" target="_blank">Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान-ओमान में डील डन!</a></h3><div>समुद्र मंथन के जरिए अगर हम 150 कुओं से तेल निकालने में सफल रहे तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा। रुपया मजबूत होगा और हम खाड़ी देशों की दादागिरी से मुक्त हो पाएंगे। यह मिशन सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि सामरिक भी है। लेकिन सवाल उठता है सवाल यह है कि आखिर भारत को इस मिशन की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?&nbsp; भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है। रूस की बात करें तो रूस वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्ति यानी सप्लायर बन गया है। जिसकी हिस्सेदारी बढ़कर 35 से 40% से भी अधिक हालिया आंकड़ों में 50% से अधिक है। हालिया कुल द्विपक्षीय व्यापार के मामले में अमेरिका और चीन के बाद रूस शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और भारत के कुल आयात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में रूस से ही आ रहा है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/ukraine-launches-major-attack-1300-km-deep-inside-russia" target="_blank">Deep Strike: Russia के अंदर 1300km दूर Ukraine का बड़ा हमला, Zelenskyy ने मांगी और Patriot Missiles</a></h3><div>जुलाई 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़कर 27.8 लाख बैरल प्रतिदिन के ऑल टाइम रिकॉर्ड पर पहुंच गया। जो कुल आयात का 55% से अधिक है। बात करें इराक और सऊदी अरब की तो यह भारत के पारंपरिक और भरोसेमंद साथी हैं जो दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। अमेरिका और यूएई की बात करें तो तो इन देशों से भी हम अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। संकट यह है कि हम हर साल करीब 150 बिलियन विदेशी तेल पर खर्च कर देते हैं। यह पैसा भारत के टैक्स पेयर्स का है जो विदेशों में जा रहा है। अगर हम इसमें से थोड़ा हिस्सा भी बचा लें तो भारत की अर्थव्यवस्था रॉकेट की रफ्तार से दौड़ेंगी। समुद्र मंथन भारत की ऊर्जा सुरक्षा की वो महागाथा है जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। ₹84,000 करोड़ का यह निवेश जोखिम भरा हो सकता है लेकिन बिना जोखिम के कोई भी राष्ट्र महाशक्ति नहीं बन सकता है। समुद्र की गहराइयों में होने वाली यह खोजे भारत की कल की बुनियाद है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 12:30:03 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Bangladesh ने मारा यू-टर्न, भारत से मांग ली बड़ी मदद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/bangladesh-makes-a-u-turn-seeks-major-assistance-from-india]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>एक तरफ बांग्लादेश भारत की खिलाफत कर रहा है। भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहा है। लेकिन सब कुछ करने के बाद भी बांग्लादेश भारत की मदद चाहता है। अभी कुछ दिन पहले बांग्लादेश की सरकार भारत पर नाराजगी जता रही थी। वजह बनी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की नई दिल्ली से हुई लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस। बांग्लादेश ने तब कहा था कि भारत ने हसीना को मंच देकर दोनों देशों के रिश्ते सुधारने की कोशिशों को नुकसान पहुंचाया। यहां तक कि बांग्लादेश ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान बताया और भारत से शेख हसीना को प्रत्यार्पित करने की मांग दोहराई। यह सब कुछ बांग्लादेश ने तीन दिन पहले किया और अब खबर है कि बांग्लादेश भारत से मदद चाहता है। मतलब जिस भारत पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसी भारत के दरवाजे पर बांग्लादेश मदद मांगने पहुंच गया। वजह बनी ऊर्जा संकट।&nbsp;</div><div>बांग्लादेश में डीजल, गैस और बिजली की भारी कमी हो गई है। कई इलाकों में लोड शेडिंग हो रही है। बिजली उत्पादन प्रभावित है और ऐसे में बांग्लादेश ने भारत से कहा है कि उसे पहले से ज्यादा डीजल सप्लाई करें। यानी कि एक तरफ भारत की खिलाफत करो। भारत के खिलाफ बयानबाजी करो और दूसरी तरफ जब संकट पड़े तो भारत से मदद मांग लो। दरअसल भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच बिजली और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक के बाद खुद बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री ने माना कि गैस और डीजल की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है और इसलिए भारत से अतिरिक्त डीजल की मांग की गई। भारत पहले से ही बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा सहारा बना हुआ है और दोनों देशों के बीच इंडिया बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन बनाई गई जो भारत के असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी से निकलकर पश्चिम बंगाल के रास्ते पर्वतीपुर डिपो तक जाती है करीब 131 किमी लंबी ये पाइप लाइन 2023 में शुरू हुई थी ताकि डीजल तेजी से और कम लागत में बांग्लादेश पहुंच सके। इसी पाइपलाइन के जरिए भारत हर साल करीब 1880 मीट्रिक टन डीजल बांग्लादेश को सप्लाई करता है और हाल ही में लगभग 5000 मीट्रिक टन डीजल की नई खेप भेजी गई।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/mea-randhir-jaiswal-fcra-amendment-us-comments-india-parliament-press-briefing" target="_blank">MEA Press Briefing : FCRA पर अमेरिकी टिप्पणी को भारत ने किया खारिज, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया, 'हमारी संसद ही लेगी फैसला'</a></h3><div>हर घंटे करीब 113 मेट्रिक टन डीजल पंप किया जा रहा है ताकि बांग्लादेश में बिजली उत्पादन परिवहन और खेती के लिए ईंधन की कमी ना हो और यह सब कुछ करने के बाद क्या हो रहा है शेख हसीना की सरकार गिरी मोहम्मद यूनुस आए उन्होंने भरभर के भारत की खिलाफत की तारिक रहमान आए और उसके बाद भी भारत बांग्लादेश के जो द्विपक्षीय रिश्ते हैं उनमें थोड़ी खटास देखी गई और हाल ही में जो प्रेस कॉन्फ्रेंस शेख हसीना ने दिल्ली से बैठकर की थी उसके बाद बांग्लादेश मीडिया में और बांग्लादेश की तरफ से भारत के खिलाफ बयानबाजी की गई और सोचिए इन सबके बावजूद बांग्लादेश ने अब अगले 4 महीनों में इसी पाइपलाइन के जरिए अतिरिक्त 500 मीट्रिक टन डीजल देने का अनुरोध भी किया है। इसके अलावा बांग्लादेश ने ऊर्जा क्षेत्र में करीब 25 अलग-अलग क्षेत्रों में भारत से सहयोग मांगा है। इसमें पावर ग्रिड टेक्नोलॉजी, स्मार्ट ग्रिड सिस्टम, बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों की ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता जैसी मांग शामिल है। यानी साफ है। मुश्किल की घड़ी में बांग्लादेश की सबसे बड़ी उम्मीद भारत है। लेकिन दूसरी तरफ राजनीतिक रिश्तों में तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। ये सब कुछ बांग्लादेश की सरकार की तरफ से जब हो रहा था यानी कि एक तरफ बयानबाजी हो रही थी, एक तरफ मदद मांगी जा रही थी।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/india-distances-from-sheikh-hasina-media-interaction-in-new-delhi" target="_blank">Sheikh Hasina के दिल्ली बयान से भारत ने बनाई दूरी, MEA बोले- सरकार की भूमिका नहीं</a></h3><div>उस बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उनके बेटे का एक बड़ा बयान भी बहुत चर्चा में था। सबसे पहले शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस की बात करते हैं। नई दिल्ली से हुई उनकी वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश सरकार भड़क गई थी। ढाका ने आरोप लगाया था कि भारत ने हसीना को मंच देकर द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाया। उसने यह भी कहा कि जुलाई 204 के आंदोलन में मारे गए लोगों का यह अपमान है। हालांकि भारत पहले साफ कर चुका है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन एक निजी मीडिया संस्था ने किया था और सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं था। उधर प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने भी बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह इस साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। चाहे उन्हें जेल भेज दिया जाए या उनकी हत्या कर दी जाए। लेकिन वह वापस अपने देश जरूर जाएंगी।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 12:22:15 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[भारत के पड़ोस में हो गया बड़ा खेल! नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए सरकार लेगी बड़ा फैसला?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/government-big-decision-to-make-nepal-a-hindu-nation-once-again]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>नेपाल के अंदर इस वक्त जो भी हो रहा है उसने सबको चौंका दिया है क्योंकि इस बार नेपाल के अंदर आंदोलन देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हो रहा है। नेपाल 240 साल तक हिंदू राष्ट्र रहा है। 2008 में राजतंत्र के अंत के साथ इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना दिया गया था। अब फिर से इस विरासत को वापस बहाल करने के लिए नेपाल में नया आंदोलन खड़ा हो गया है। नेपाल में इसके लिए दम भर रहे प्रदर्शनकारी हिंसक होते जा रहे हैं और यह सब शुरू हुआ है हाल ही में कावड़ यात्रा के दौरान हुई पत्थरबाजी के बाद। 26 जुलाई को हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद नेपाल के हिंदू संगठन सड़कों पर आ चुके हैं और हिंसक विरोध प्रदर्शन के साथ सरकार पर हिंदू राष्ट्र बनाने का दबाव बना रहे हैं। नेपाल में इस वक्त हर शख्स की एक ही आवाज है कि नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करो। हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन पिछले दो दिनों में ज्यादा हिंसक हो चला है। सरकारी दफ्तरों में आग और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं आम हो चुकी है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/india-halts-chinese-exports-uproar-in-nepal" target="_blank">Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका,  रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवाल</a></h3><div>मस्जिदों पर हमले किए जा रहे हैं। मुसलमानों की टोपियां जलाई जा रही हैं। जिसके चलते कई नेपाल में मौजूद मुस्लिम घुसपैठिए देश छोड़कर भाग रहे हैं। देवानगंज में हुई हिंसा के बाद नेपाल के संयुक्त हिंदू मोर्चे और दूसरे संगठनों ने नेपाल से घुसपैठियों को बाहर करने और संसद में हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव लाने की मांग कर रहे हैं। नेपाल के अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन इतना हिंसक है कि लोग प्रदर्शनकारियों की आहट सुनते ही दुकानें बंद कर रहे हैं। सड़कों पर पुलिस की तैनाती जरूर है लेकिन इन्हें अभी शांति बरतने के निर्देश हैं। नेपाल सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने और सीमाओं पर सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री बालिन शाह ने साफ किया है कि हिंदू राष्ट्र के प्रस्ताव के नेपाल का वर्तमान संघीय व्यवस्था प्रभावित हो सकता है। हालांकि हालात खराब होता देखकर अब सरकार भी इस मुद्दे पर विचार कर रही है। चलिए आपको बताता हूं कि नेपाल कब से कब तक हिंदू राष्ट्र रहा है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/major-announcement-regarding-hindu-nation-in-nepal-following-the-expulsion-of-muslim-infiltrators" target="_blank">घुसपैठिए मुस्लिमों को खदेड़ते ही नेपाल में हिंदू राष्ट्र पर बड़ा ऐलान, शुरू हुआ इलाज!</a></h3><div>दरअसल आधिकारिक रूप से नेपाल सन 1768 से 2008 तक 240 साल हिंदू राष्ट्र था। 1768 में पृथ्वी नारायण शाह ने गोरखा साम्राज्य का विस्तार कर इसे हिंदू राष्ट्र घोषित किया। 1975 में राजा वीरेंद्र नेपाल को आधिकारिक रूप से हिंदू आधिराज्य दर्जा दिया। 2006 से 2008 तक जन आंदोलन और राजशाही के पतन के बाद अंतरिम संविधान पर बहस चली। मई 2008 में देश से राजतंत्र खत कर इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना दिया गया। लेकिन अब 18 साल बाद नेपाल में वही बहस फिर से छिड़ गई है। क्या नेपाल को हिंदू राष्ट्र फिर से घोषित किया जाना चाहिए? प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जेंजी आंदोलन के साथ उन्होंने नेपाल की पुरानी सरकार का विरोध इसी भरोसे के साथ किया था कि नई सरकार हिंदू राष्ट्र का अपना वादा पूरा करेगी। लेकिन प्रधानमंत्री और पूरी कैबिनेट को डर है कि हिंदू राष्ट्र की मांग माने जाने के बाद संवैधानिक जटिलताएं और बढ़ जाएंगी।&nbsp;</div><div><br></div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 12:12:07 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/government-big-decision-to-make-nepal-a-hindu-nation-once-again</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[सालों बाद भारत ने निकाला बाहुबली, पाकिस्तान में मची खलबली]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/after-years-india-has-unleashed-its-baahubali-causing-a-stir-in-pakistan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत ने मैदान में उतार दिया है अपना नया और अचूक ब्रह्मास्त्रस शत्रुंज। अब आसमान से आए हर हमले का पूरा-पूरा हिसाब होगा। पाकिस्तान, चीन और उनकी हर नापाक ड्रोन साजिश को अब हवा में ही नस्तनाबूत कर दिया जाएगा बल्कि दुश्मन के मंसूबे वहीं के वहीं राख कर दिए जाएंगे। हर उड़ते हुए खतरे का पीछा करेगा शत्रुंजय क्योंकि इसके प्रहार से अब बचना मुश्किल ही नहीं बल्कि पूरी तरह नामुमकिन है। पिछले कुछ सालों में सरहद पर मंडराते ड्रोन आतंकवाद और जासूसी का सबसे बड़ा यह जरिया बन चुके हैं। चाहे हथियारों की तस्करी हो, नशे की खेप पहुंचाने की साजिश हो। दुश्मन ने कई बार भारत को अस्थिर करने की कोशिश की है। लेकिन अब पूरी तरह से खेल जो है बदल चुका है, पलट चुका है। मैदान में वो उतर चुका है जो दुश्मनों के लिए अकेला ही काफी है। जिसका नाम है शत्रुंजय। शत्रु यानी दुश्मन और जय यानी विजय। जिसके नाम में ही विजय का हुंकार हो वो दुश्मनों से कैसे डर सकता है? यह स्वदेशी एंट्री ड्रोन सिस्टम ना सिर्फ पाकिस्तान और चीन बल्कि भारत की तरफ बुरी नजर उठाने वाले हर शत्रु की नींद उड़ाने के लिए काफी है।&nbsp;</div><div>सूत्रों के अनुसार दिल्ली स्थित रक्षा कंपनी भूमि एंड द्वारा विकसित यह काउंटर अनमेड एरियल सिस्टम यानी कि सीयूएएस सीधे तौर पर भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य हमारे सीमावर्ती इलाकों, संवेदनशील सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रतिष्ठानों को दुश्मन के ड्रोन हमलों से पूरी तरह सुरक्षित करना है। शत्रुंजय रेडियो फ्रीक्वेंसी यानी कि आरएफ डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह लगभग 4 कि.मी. की दूरी तक दुश्मन के ड्रोन की मौजूदगी का सटीक पता लगा सकता है। सिस्टम की एंटीना आधारित सिग्नेचर डिटेक्शन और डायरेक्शन फाइंडिंग तकनीक पलक झपकते ही यह पहचान लेती है कि ड्रोन किस दिशा से संचालित किया जा रहा है। सबसे बड़ी और घातक बात यह है कि यह बिना एक भी गोली चलाए दुश्मन के ड्रोन को नेस्तनाबूत कर सकता है। यह सॉफ्ट किल तकनीक पर आधारित है। यानी ड्रोन को हवा में नष्ट करने के बजाय यह उसके कंट्रोल सिग्नल को पूरी तरह से जाम कर देता है। इसके अलावा जीपीएस, स्पूफिंग और जीएसएस डिरप्शन तकनीक की मदद से यह दुश्मन के नेविगेशन सिस्टम को भटका भी देता है। जिससे ड्रोन अपने तय लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में लाचार होकर बेकार हो जाता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/mea-randhir-jaiswal-fcra-amendment-us-comments-india-parliament-press-briefing" target="_blank">MEA Press Briefing : FCRA पर अमेरिकी टिप्पणी को भारत ने किया खारिज, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया, 'हमारी संसद ही लेगी फैसला'</a></h3><h2>शत्रुंजय की अजय क्षमता क्या है?&nbsp;</h2><div>डिटेक्शन रेंज 4 कि.मी. की है। आरएफ सिग्नेचर आधारित है। बता दें कि इसमें ओमनी डायरेक्शनल जैमिंग भी है। दूसरी खासियत यह 5 कि.मी. या 4 कि.मी. तक की मुख्य तकनीक पर काम करता है। दुश्मन चाहे तुर्की के ड्रोन ले आए या फिर चीन के शत्रुंजय के चक्रव्यूह से बच पाना अब असंभव है। इसमें दो तरह की अचूक जैमिंग क्षमताएं दी गई हैं। ओमनी डायरेक्शनल जैमि लगभग 2 कि.मी. तक यह प्रभावी है और दूसरा डायरेक्शनल जैमि सीधे 5 कि.मी. तक दुश्मन के तंत्र को तहस-नहस करने में यह सक्षम है। यह सिस्टम सिर्फ ताकतवर नहीं बल्कि बेहद लचीला भी है। इसे भारीभरकम सैन्य वाहनों पर आसानी से माउंट किया जा सकता है। या फिर जरूरत पड़ने पर सैनिक खुद इसे उठाकर सीधे मोर्चे पर पैदल ही दुश्मन के मुहाने तक पहुंचा सकते हैं। यह स्टैंड अलोन और मोबाइल दोनों तरह की रणनीतिक तैनाती के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। मौसम चाहे कितना भी चरम पर क्यों ना हो शत्रुंजय कभी नहीं थकता। यह लगभग 3000 मीटर की ऊंचाई तक पूरी ताकत से काम कर सकता है।&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/nia-files-charge-sheet-in-amritsar-train-attack-plot" target="_blank">NIA ने 2 आरोपियों पर दाखिल की Charge Sheet, यात्री ट्रेन पर आईईडी हमले की रची थी साजिश</a></h3><div>सियाचीन जैसी -20° सेल्सियस की भयंकर ठंड हो या फिर रेगिस्तान का 55 डिग्री सेल्सियस झुलसा देने वाला तापमान इसकी कार्य क्षमता पर कभी आंच नहीं आने देता। इतना ही नहीं इसमें एआई आधारित इलेक्ट्रो आर्टिफिशियल ट्रैकिंग सब सिक्स जीएच जेड आरएफ स्पेक्ट्रम सर्िलंस और एईएस 256 इंक्रिप्शन पर आधारित सुरक्षित संचार जैसी अत्याधुनिक तकनीकें भी इसमें जोड़ी गई हैं जो निगरानी को अचूक बनाती है। दुश्मन के लिए कैसे शत्रुंजय काल है उसे समझिए। पाकिस्तान और चीन की तरफ से आते ड्रोन शत्रुंजय के बीम से हवा में ही ढेर हो जाते हैं। मुख्य इसकी टैगलाइन जो है हवा में ही भस्म होना है। नो एंट्री और एआई बेस्ड ट्रैकिंग। सेना ने भले ही आधिकारिक तौर पर इसकी तादाद का खुलासा ना किया हो। लेकिन शत्रुंजय का भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि अब भारत हमला होने का इंतजार नहीं करता बल्कि खतरे को हवा में ही भस्म कर देता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 12:07:07 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[US Senate Russia Sanctions Bil | अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल किया पास: जानें भारत और चीन के लिए क्यों बढ़ी चिंता?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/us-senate-passes-bill-imposing-sanctions-on-russia-find-why-concerns-risen-for-india-and-china]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों (तेल और प्राकृतिक गैस) को खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक (Bill) पास कर दिया है। 86-11 के भारी बहुमत से पारित इस बिल के दायरे में भारत और चीन जैसे बड़े देश भी सीधे तौर पर आ सकते हैं। बिल के समर्थकों का तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देश अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए फंड दे रहे हैं।</div><div>&nbsp;</div><div>इस बिल का नाम बदलकर 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' कर दिया गया है और अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (अमेरिकी संसद का निचला सदन) में भेजा जाएगा। ग्राहम एक रिपब्लिकन सीनेटर थे जिनका 11 जुलाई को निधन हो गया था; उन्होंने यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर प्रतिबंध लगाने की पुरजोर वकालत की थी।</div><div><br></div><div>हालांकि, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस पर वोटिंग सितंबर में ही होगी क्योंकि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) में गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं।</div><div><br></div><div>AFP के अनुसार, सीनेट की विदेश संबंध समिति के चेयरमैन रिपब्लिकन जिम रिस्क ने कहा, "इससे रूस बातचीत की मेज पर आ सकता है और यह संघर्ष खत्म हो सकता है। इसका ऐसा निर्णायक असर होगा जो युद्ध के मैदान में हासिल होने वाले नतीजों से कहीं ज़्यादा होगा। इससे पुतिन की युद्ध मशीन को चलाने वाले कैश का फ्लो रुक जाएगा।"</div><div><br></div><div><b>क्या बिल का निशाना भारत और चीन हैं?</b></div><div>इस बिल का निशाना रूस का एनर्जी सेक्टर है और यह ट्रंप प्रशासन को रूस से होने वाले आयात (जिसमें गैस और तेल शामिल हैं) पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की इजाज़त देगा। यह US को रूसी कच्चे तेल के पांच बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की भी इजाज़त देता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">फिलहाल, रूसी तेल और गैस के पांच मुख्य आयातक चीन, भारत, अज़रबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया हैं।</span></div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/india-had-no-role-in-sheikh-hasina-press-conference-mea-gives-blunt-response-to-us" target="_blank">Sheikh Hasina Press Conference | शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की कोई भूमिका नहीं, FCRA कानून पर अमेरिका को MEA का दोटूक जवाब</a></h3><div><br></div><div>एनर्जी सेक्टर के अलावा, यह बिल रूसी नेताओं और अधिकारियों (जिनमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं), साथ ही रईस कारोबारियों (ओलिगार्क्स) और वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाएगा। यह 'ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996' की समय-सीमा को भी 2031 तक बढ़ा देगा; यह कानून उन कंपनियों को दंडित करता है जो ईरान के एनर्जी सेक्टर में निवेश करती हैं।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/gajendra-singh-shekhawat-speaks-at-brics-cultural-festival-in-bhopal" target="_blank">Gajendra Singh Shekhawat बोले: BRICS देश केवल आर्थिक नहीं, साझा संस्कृति से जुड़े हैं</a></h3><div><br></div><div>हालांकि, डेमोक्रेट्स ने इस बिल की आलोचना की है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टैरिफ का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर करने का आरोप लगाया है। न्यूज़ एजेंसी PTI के अनुसार, डेमोक्रेट कांग्रेस सदस्य ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने कहा, "हम यूक्रेन का समर्थन करने और रूस के लगातार गैर-कानूनी युद्ध के लिए उसे सज़ा देने की दिशा में सीनेट में अपने सहयोगियों की तत्काल कोशिशों का स्वागत करते हैं, लेकिन यह बिल उन लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाएगा। इसके बजाय, यह राष्ट्रपति ट्रंप को रूस को जवाबदेह ठहराने से बचने और अपने विनाशकारी व्यापार युद्धों में और अधिक टैरिफ लगाने की छूट देगा, जिसका खामियाजा अमेरिकियों को भुगतना पड़ेगा।"</div><div>&nbsp;</div><div><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">on Prabhasakshi</span>&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 10:14:13 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/us-senate-passes-bill-imposing-sanctions-on-russia-find-why-concerns-risen-for-india-and-china</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[UN ने PoK में प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की जवाबदेही तय करने और प्रतिबंध हटाने की मांग की]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/un-demands-accountability-for-action-on-peaceful-protesters-in-pok]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, आठ अगस्त संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने शुक्रवार को यहां कहा, ‘‘महासचिव अपने उच्चायुक्त के काम का समर्थन करते हैं और हमें वास्तव में उम्मीद है कि तुर्क (संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क) की अपीलों पर ध्यान दिया जाएगा।’’
उन्होंने पीओके की स्थिति और वहां हाल के घटनाक्रम को लेकर महासचिव के रुख के बारे में ‘पीटीआई’ के एक सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पिछले महीने पीओके के हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताई थी।</p><p>उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मौत मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराए जाने तथा पाकिस्तान द्वारा ‘संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति’ पर प्रतिबंध लगाने एवं उसके नेताओं को गिरफ्तार किए जाने का मुद्दा उठाया था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण रूप से एकत्र होने के अधिकार का उल्लंघन करते हुए इंटरनेट के इस्तेमाल और सार्वजनिक सभाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हक ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग से जुड़े सवाल पर कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह सभी प्राधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दें और निश्चित रूप से यहां भी ऐसा ही होना चाहिए।</p><p>अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण लोगों को नुकसान पहुंचा है तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।’’
पिछले महीने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा गया था कि तुर्क ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले पीओके में पैदा हुई अशांति के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील की। बयान में विशेष रूप से कहा गया था कि 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव से पहले जून से अब तक कई लोगों के मारे जाने की खबर है। मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अशांति के कारण प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की हुई सभी मौतों की गहन और निष्पक्ष जांच तत्काल कराए जाने का आह्वान किया था।</p><p>संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने इन प्रदर्शनों की अगुवाई की। इनमें ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील, कार्यकर्ता एव अन्य लोग शामिल हैं। सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में समिति पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है।</p><p>बयान में कहा गया था, ‘‘हम अधिकारियों से पूरे क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।’’
इसमें कहा गया था कि मानवाधिकार उच्चायुक्त ने स्थानीय लोगों की मूल समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए सार्थक और समावेशी राजनीतिक संवाद का भी आह्वान किया है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 09:28:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/un-demands-accountability-for-action-on-peaceful-protesters-in-pok</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[US Senate ने 100% Tariff प्रावधान वाला रूस प्रतिबंध विधेयक पारित किया, भारत पर होगा असर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/us-senate-passes-russia-sanctions-bill-impacting-india-tariffs]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, आठ अगस्त अमेरिकी सीनेट ने रूस तथा उसके पेट्रोलियम उत्पादों के चीन एवं भारत जैसे प्रमुख खरीदार देशों को दंडित करने के उद्देश्य से लाए गए एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। विधेयक में दावा किया गया है कि रूस के साथ इस प्रकार का व्यापार यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में मदद कर रहा है। सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस विधेयक को 11 के मुकाबले 86 मतों से मंजूरी दी।</p><p>यह विधेयक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार देता है। चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देश हैं। रूस पर प्रतिबंधों के अलावा विधेयक में 1996 के ‘ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ की अवधि 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान है।</p><p>इस कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। इस द्विदलीय विधेयक को रिपब्लिकन पार्टी के नेता एवं सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट पार्टी के नेता एवं सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रस्तावित किया था। ग्राहम का 11 जुलाई को निधन हो गया था।</p><p>कीव की यात्रा के बाद ग्राहम के अचानक निधन के पश्चात दोनों दलों के नेताओं ने विधेयक को पारित कराने और यूक्रेन के समर्थक के रूप में दिवंगत सांसद की विरासत का सम्मान करने के लिए नए सिरे से प्रयास तेज किए। ग्राहम के निधन के बाद उनकी सीट से सीनेटर चुनी गईं उनकी बहन डारलाइन ग्राहम ने कहा, ‘‘यह विधेयक रूस की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले प्रमुख देशों को एक सरल लेकिन बेहद महत्वपूर्ण विकल्प चुनने के लिए मजबूर करता है-अमेरिका के साथ कारोबार करना या सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदना।’’
विधेयक में रूस के नेताओं और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। इसके तहत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूस के धनाढ्य कारोबारियों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाया गया है।</p><p>मतदान के बाद सीनेटर ब्लूमेंथल ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमने जो किया है, ग्राहम को उस पर गर्व होता।’’
ब्लूमेंथल ने कहा, ‘‘ये बेहद कड़े प्रतिबंध और शुल्क उन सभी को रोकेंगे जो बहादुर और स्वतंत्र लोगों के खिलाफ इस जानलेवा और आपराधिक आक्रामक युद्ध में सहभागी हैं।’’
ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर समेत कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने हालांकि आगाह किया है कि यह विधेयक ऐसे समय में ट्रंप को शुल्क लगाने की नयी शक्तियां देगा, जब उन्होंने शुल्क को अपनी व्यापार नीति का प्रमुख आधार बनाया हुआ है। यह विधेयक मंजूरी के लिए अब प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा, जिसका सत्र 31 अगस्त को फिर शुरू होगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 09:27:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/us-senate-passes-russia-sanctions-bill-impacting-india-tariffs</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[US Wildfire: उताह में सिकोरस्की हेलीकॉप्टर क्रैश, ओरेगन में चालक की जान गई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/us-wildfire-utah-helicopter-crash-oregon-operator-death]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>रिचफील्ड (अमेरिका), आठ अगस्त (एपी) अमेरिका के उताह राज्य में जंगल की भीषण आग पर काबू पाने के अभियान में जुटा हेलीकॉप्टर शुक्रवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हेलीकॉप्टर में दो लोग सवार थे। वहीं, ओरेगन में जंगल की बेकाबू आग से निपटने के दौरान एक बुलडोजर ऑपरेटर की मौत हो गई।</p><p>अधिकारियों ने बताया कि उताह में दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलीकॉप्टर में सवार दो लोगों की स्थिति के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल सकी है, क्योंकि अधिकारी अभी तक दुर्घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाए हैं। उन्होंने बताया कि ओरेगन में आग बुझाने के अभियान के दौरान बुलडोजर चला रहे 47 वर्षीय जेसन एनसाइन की बृहस्पतिवार को मौत हो गई। स्थानीय शेरिफ विभाग ने बताया कि राइट्स स्प्रिंग क्षेत्र में लगी आग ने अचानक और तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे एनसाइन के बच निकलने का रास्ता बंद हो गया।</p><p>यह आग बुधवार को दक्षिण-मध्य ओरेगन में चिलोक्विन शहर के पूर्व में लगी थी। अमेरिकी वन सेवा के अनुसार, शुक्रवार तक यह आग करीब 14 वर्ग मील (36 वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र में फैल चुकी थी और इस पर अभी तक पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका था। अधिकारियों ने बताया कि अत्यधिक गर्म और शुष्क मौसम के कारण आग लगने की घटना हुई।</p><p>उताह के मध्य क्षेत्र में लगी आग पर काबू पाने के अभियान में सात हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही थी, जिनमें से एक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह आग 27 जुलाई को बिजली गिरने के कारण लगी थी। संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) ने बताया कि हेलीकॉप्टर साल्ट लेक सिटी से करीब 258 किलोमीटर दक्षिण में स्थित रिचफील्ड के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ।</p><p>यह ‘सिकोरस्की एस-64’ हेलीकॉप्टर था और यह पहाड़ी एवं दुर्गम इलाके में आग बुझाने के काम में लगा था। दुर्घटना के बाद वहां एक और आग भड़क गई। अधिकारियों ने बताया कि आग की लपटों के कारण बचाव दल शुक्रवार शाम तक दुर्घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके।</p><p>हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि अगले 24 घंटे में वहां पहुंचा जा सकेगा। सेवियर काउंटी के शेरिफ नाथन कर्टिस ने कहा, ‘‘हम उन्हें और बड़े खतरे में नहीं डालना चाहते थे। जैसे ही संभव होगा, हम वहां पहुंचेंगे।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 09:26:22 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/us-wildfire-utah-helicopter-crash-oregon-operator-death</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Iran ने Saudi Arabia, पाकिस्तान और Turkey के रक्षा समझौते को बताया बेअसर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iran-mp-criticizes-saudi-arabia-turkey-pakistan-defense-pact]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>दुबई, सात अगस्त (एपी) ईरान के एक प्रमुख सांसद ने शुक्रवार को सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए संयुक्त रक्षा समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि यह रियाद को सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाएगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत इनमें से किसी एक भी देश पर किए गए हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के सदस्य इब्राहिम रेजाई ने ‘एक्स’ पर इस समझौते की आलोचना की।</p><p>उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘सऊदी अरब को यह समझना चाहिए कि तुर्किये और पाकिस्तान के साथ कागजी समझौता उसे सुरक्षा नहीं दिला सकता, ठीक उसी तरह जैसे अमेरिका द्वारा वर्षों तक किए गए एकतरफा दोहन से भी उसे सुरक्षा नहीं मिली। अपनी नीतियों में बदलाव करें, ताकि आपको दूसरों से सुरक्षा की गुहार न लगानी पड़े।’’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। तुर्किये सरकार के एक अधिकारी ने इस समझौते को ‘‘पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति’’ का बताया।</p><p>उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने केवल रक्षा के क्षेत्र में एक-दूसरे को समर्थन देने का वादा किया है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 03:07:35 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iran-mp-criticizes-saudi-arabia-turkey-pakistan-defense-pact</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Israel ने China के चेंगदू में बंद किया अपना Consulate, रिश्तों में बढ़ा तनाव]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/israel-closes-consulate-in-chengdu-china-amid-growing-tensions]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>बीजिंग, सात अगस्त इजराइल ने चीन में अपना एक वाणिज्य दूतावास बंद कर दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है। तनाव की वजह चीन का ईरान और अरब देशों के करीब आना तथा पश्चिम एशिया की अपनी व्यापक नीति में बदलाव करना बताया जा रहा है।</p><p>हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की एक खबर में कहा गया है कि इजराइल ने चेंगदू स्थित अपना वाणिज्य दूतावास बंद कर दिया है। इस दूतावास ने पिछले महीने अपना कामकाज रोक दिया था। बुधवार को प्रकाशित एक पत्र में निवर्तमान इजराइली महावाणिज्यदूत गादी हरपाज ने चीन के दक्षिण-पश्चिमी शहर चेंगदू में बिताए अपने पांच वर्षों को ‘‘अपने राजनयिक करियर का सबसे यादगार समय’’ बताया।</p><p>उन्होंने कहा कि वह ‘‘गहरे दुख और पुरानी यादों के एहसास’’ के साथ यहां से विदा ले रहे हैं। हरपाज ने कहा, ‘‘वाणिज्य दूतावास बंद हो रहा है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में हमने दोस्ती, आपसी सम्मान और साझा यादों के जो पुल बनाए हैं, वे हमेशा कायम रहेंगे।’’
इजराइल वर्तमान में चीन में शंघाई, ग्वांगझू और हांगकांग में वाणिज्य दूतावासों के अलावा बीजिंग में अपना दूतावास संचालित करता है। पिछले साल के अंत में इजराइल ने चीन में अपने एक राजनयिक मिशन को बंद करने की घोषणा की थी।</p><p>हालांकि उसने इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की थी। दोनों देशों के संबंधों में तनाव के संकेत तब दिखे जब चीन ने अक्टूबर 2023 में हमास आतंकवादियों द्वारा इजराइल पर किए गए हमले की तत्काल निंदा नहीं की और गाजा संघर्ष में फलस्तीन के समर्थन में अपना रुख रखा।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:41:09 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/israel-closes-consulate-in-chengdu-china-amid-growing-tensions</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Pakistan सेना ने Khyber Pakhtunkhwa में 10 TTP आतंकवादियों को ढेर किया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-security-forces-kill-ten-ttp-terrorists-in-khyber-pakhtunkhwa]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा बलों ने दो अलग-अलग अभियानों में 10 आतंकवादियों को मार गिराया। सेना की मीडिया इकाई ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ये दोनों घटनाएं बृहस्पतिवार को दक्षिण वजीरिस्तान और अपर दीर जिलों में प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हुईं।</p><p>सरकार टीटीपी आतंकवादियों के लिए ‘फितना अल खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल करती है। पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर) के अनुसार, दक्षिण वजीरिस्तान के आजम वारसक इलाके में आतंकवादियों के एक समूह ने सुरक्षा बलों की चौकियों पर हमला करने का प्रयास किया। आईएसपीआर ने बताया कि सैनिकों ने हमले का प्रभावी ढंग से जवाब दिया और आठ आतंकवादियों को मार गिराया।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/cricket/wtc-points-table-pakistan-makes-a-massive-leap-after-defeating-west-indies-into-the-top-8" target="_blank" rel="noopener">WTC Points Table: West Indies को हराकर Pakistan ने लगाई लंबी छलांग, टॉप 8 में की धमाकेदार वापसी</a></h3><p>दूसरी घटना दीर जिले में हुई, जहां सुरक्षा बलों ने दो और आतंकवादियों को ढेर कर दिया। अभियान के दौरान हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए। आईएसपीआर ने कहा कि मारे गए आतंकवादी इलाके में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल थे।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/shehbaz-sharif-and-asim-munir-to-visit-saudi-arabia" target="_blank" rel="noopener">Shehbaz Sharif तीन दिवसीय यात्रा पर Saudi Arabia जाएंगे, रक्षा संबंधों पर होगी वार्ता</a></h3><p>इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 10 आतंकवादियों को मार गिराने के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के पूरी तरह खात्मे तक इसके खिलाफ अभियान पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पिछले कई वर्षों से उग्रवादी हिंसा, अफगानिस्तान से लड़ाकों की सीमा पार आवाजाही और लगातार सैन्य अभियानों के कारण अशांति का सामना करता रहा है।</p><p>पाकिस्तान की संघीय सरकार का आरोप है कि नवंबर 2022 में संघर्षविराम समझौता समाप्त होने के बाद प्रतिबंधित टीटीपी ने प्रांत में कई हमले किए हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 16:26:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/pakistan-security-forces-kill-ten-ttp-terrorists-in-khyber-pakhtunkhwa</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Strait of Hormuz Conflict | समझौते के बेहद करीब ईरान, अमेरिका और ओमान! जानिए क्या है 5-7% टोल टैक्स का विवाद?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/strait-of-hormuz-iran-the-us-and-oman-very-close-to-an-agreement-find-out-what-the-dispute-over]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>मध्य पूर्व में पिछले पांच महीनों से जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। ईरान ने दावा किया है कि वह ओमान के मध्यस्थता वाले 'होर्मुज़ समझौते' (Hormuz Deal) के बेहद करीब पहुंच गया है। इस समझौते का मकसद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और एलएनजी (LNG) आपूर्ति मार्ग—'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz)—को जहाजों के आवागमन के लिए फिर से खोलना है। हालांकि, तेहरान को अभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वाशिंगटन की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इसी बीच, ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ़ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर "थिएटर डिप्लोमेसी" (दिखावे की कूटनीति) करने का आरोप लगाया है।</p><p>होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो खाड़ी (Gulf) को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और जिसके एक तरफ ओमान और संयुक्त अरब अमीरात तथा दूसरी तरफ ईरान है, मध्य पूर्व में तनाव का एक बड़ा केंद्र बन गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सामान्य समय में दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति इसी रास्ते से की जाती है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/bollywood/akanksha-chamola-wants-to-remove-gaurav-khanna-surname-from-instagram-username" target="_blank">Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच</a></h3><p>&nbsp;</p><p><b>घालीबाफ़ ने क्या कहा</b></p><p>अपने X अकाउंट पर, घालीबाफ़ ने तनाव बढ़ाने की ट्रंप की बार-बार दी जा रही धमकियों पर निशाना साधा और कहा, "बड़ा हमला होने वाला है... यह बात बार-बार दोहराई जा रही है।"</p><p>धौंस जमाना, वादे तोड़ना और फ़र्ज़ी ख़बरों का इस्तेमाल करना एक नाकाम रणनीति है। तथ्यों को स्वीकार करें और अपने वादे पूरे करें। उन्होंने कहा, "हमें और ज़्यादा दिखावे की ज़रूरत नहीं है।"</p><p><b>होरमुज़ डील की मौजूदा स्थिति</b></p><p>ईरान ने कहा है कि ओमान के साथ होरमुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़) को फिर से खोलने का समझौता "लगभग तय हो चुका है"। दोनों देशों ने इस अहम जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाज़ों के रास्तों के लिए कोऑर्डिनेट्स (निर्देशांक) पर सहमति की पुष्टि की है। इस प्रस्ताव पर अमेरिका की ओर से अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है।</p><p>हालांकि ट्रंप ने कहा है कि जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का समझौता जल्द ही हो जाएगा, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार ज़ोर देकर कहा है कि वे कभी भी इस बात के लिए सहमत नहीं होंगे कि ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग तक पहुँच का नियंत्रण ईरान के पास हो।</p><p>ईरान के एक सांसद ने फार्स न्यूज़ एजेंसी को बताया कि एक संसदीय समिति एक शुरुआती बिल की समीक्षा कर रही है। इस बिल में होरमुज़ जलडमरूमध्य से अमेरिका, इज़राइल और अन्य दुश्मन माने जाने वाले देशों के जहाज़ों के गुज़रने पर रोक लगाने और प्रस्तावित प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों पर कार्गो (सामान) की कीमत का 20 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/vande-mataram-to-resonate-from-the-red-fort-on-independence-day" target="_blank">Independence Day पर Lal Qila से गूँजेगा Vande Mataram, राष्ट्रगीत को मिला ऐतिहासिक संवैधानिक सम्मान</a></h3><p>&nbsp;</p><p><b>होरमुज़ डील से हर पक्ष क्या चाहता है</b></p><p>रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान इस जलडमरूमध्य का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों के कार्गो की कीमत का 5 से 7 प्रतिशत शुल्क लेना चाहता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ओमान लगभग 3 प्रतिशत शुल्क पर बातचीत कर रहा है, जबकि वाशिंगटन कोई शुल्क नहीं चाहता है।</p><p>इस समझौते से ईरान को जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले ट्रैफ़िक पर अधिकार मिल जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि फरवरी में अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध के परिणामस्वरूप क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में तेहरान के पक्ष में बड़ा बदलाव आया है। युद्ध से पहले, यह जलडमरूमध्य सभी जहाज़ों के लिए बिना किसी शुल्क के खुला रहता था।</p><p><b>खाड़ी देशों को ईरान की चेतावनी</b></p><p>इस बीच, पाँच सूत्रों के अनुसार, ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि अगर उसके क्षेत्र पर अमेरिका का कोई नया हमला होता है, तो वह पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढाँचे के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई करेगा। तेहरान वाशिंगटन के करीबी क्षेत्रीय सहयोगियों को धमकाकर सैन्य कार्रवाई की कीमत बढ़ाना चाहता है।</p><p>खाड़ी क्षेत्र के एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया, "ईरान की चेतावनी स्पष्ट थी: अगर अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया, तो वे खाड़ी के ऊर्जा केंद्रों और अन्य क्षेत्रीय ठिकानों पर हमला करके जवाबी कार्रवाई करेंगे।"</p><p>ईरान इस क्षेत्र में वाशिंगटन के सहयोगियों के ख़िलाफ़ मिसाइलों और ड्रोनों से जवाबी हमले कर रहा है और साथ ही अपनी अनुमति के बिना जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यावसायिक जहाज़ों को भी निशाना बना रहा है।</p><p><b>ट्रंप की धमकी</b></p><p>लास वेगास में एक रैली में समर्थकों को संबोधित करते हुए, ट्रंप ने कूटनीति को प्राथमिकता दी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">ट्रंप ने कहा</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">"मैं समझौता करना पसंद करूँगा क्योंकि मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता।" ट्रंप ने कहा, "मैं लोगों को मारना नहीं चाहता, लेकिन किसी न किसी मोड़ पर हमें ऐसा करना ही पड़ेगा।"</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के युद्ध शुरू करने के बाद से ईरान में 3,400 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि अमेरिका के 18 सैन्य कर्मियों की मौत की खबर है।&nbsp;</span></p><p><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">on Prabhasakshi</span><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 16:21:08 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/strait-of-hormuz-iran-the-us-and-oman-very-close-to-an-agreement-find-out-what-the-dispute-over</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vishwakhabram: दुनिया के सबसे 'मजबूत' से सबसे 'मजबूर' नेता बने US President, Iran War ने Trump को ऐसे जाल में फंसाया जहां से हर रास्ता हार की ओर जाता है]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-iran-war-hormuz-strait-crisis-middle-east-geopolitics]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वैसे तो अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर बैठने वाले व्यक्ति को दुनिया का सबसे शक्तिशाली नेता माना जाता है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आक्रामक नीतियों और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से खुद ही ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी हैं कि आज व्हाइट हाउस में बैठे होने के बावजूद वह दुनिया के सबसे मजबूर नेताओं में से एक नजर आ रहे हैं। छह महीने से जारी ईरान युद्ध ने ट्रंप को ऐसे रणनीतिक चौराहे पर ला खड़ा किया है, जहां हर रास्ता उनकी राजनीतिक और कूटनीतिक विफलता की कहानी लिखता दिखाई देता है। यदि वह ओमान की मध्यस्थता में तैयार हो रहे अंतरिम समझौते को स्वीकार करते हैं तो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान को वह प्रभाव मिल सकता है, जिसे रोकना ही अमेरिकी सैन्य अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य बताया गया था। लेकिन यदि ट्रंप सैन्य कार्रवाई को और तेज करते हैं तो उन्हें एक लंबे, महंगे और राजनीतिक रूप से विनाशकारी युद्ध में फंसने का खतरा है, जिसका खामियाजा आगामी मध्यावधि चुनावों में भी भुगतना पड़ सकता है। यानी ट्रंप के सामने ऐसा कोई विकल्प नहीं बचा है जो उन्हें सम्मानजनक तरीके से इस संकट से बाहर निकाल सके; हर फैसला इतिहास में उनकी किसी न किसी नाकामी को और अधिक उजागर करने वाला साबित हो सकता है।</div><div><br></div><div>देखा जाये तो दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और एलएनजी व्यापार का मार्ग हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो ईरान को इस समुद्री मार्ग पर निगरानी और प्रभाव का ऐसा अधिकार मिल सकता है, जिसे रोकना ही अमेरिका और उसके सहयोगियों के सैन्य अभियान का प्रमुख उद्देश्य बताया गया था। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस जलमार्ग को पूरी तरह मुक्त अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बनाए रखने की बात कर रहे हैं, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि परिस्थितियां ट्रंप को अंततः समझौते की ओर धकेल सकती हैं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-dismisses-reports-of-us-arms-shortage-as-fake-news-warns-of-jail-time" target="_blank">Trump ने US में हथियारों की कमी की खबर को बताया Fake News, दी जेल की चेतावनी</a></h3><div>स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि लगातार सैन्य दबाव के बावजूद अमेरिका अपने घोषित उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर सका है। ट्रंप ने कई बार ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने और उसके नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया, लेकिन विश्लेषकों का आकलन है कि ईरान अब भी निर्णायक रूप से झुका नहीं है। उल्टा, अमेरिकी राष्ट्रपति अब घरेलू राजनीतिक दबाव, बढ़ती ईंधन कीमतों, घटती लोकप्रियता और आगामी मध्यावधि चुनावों की चुनौती से घिर गए हैं। ऐसे में लंबा युद्ध उनके लिए राजनीतिक बोझ बनता जा रहा है। साथ ही अमेरिका से इस तरह की भी खबरें आ रही हैं कि उसका गोला बारूद, मिसाइलों और हथियारों का जखीरा खत्म होता जा रहा है तथा अमेरिका को दूसरे देशों में मौजूद अपने सैन्य अड्डों पर मौजूद मिसाइलों को वापस मंगवाना पड़ा है।</div><div><br></div><div>इसी बीच, ईरान ने सैन्य मोर्चे के समानांतर अत्यंत आक्रामक कूटनीतिक अभियान भी शुरू कर दिया है। तेहरान ने सऊदी अरब, कतर, ओमान, तुर्किये और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ उच्चस्तरीय संपर्क स्थापित कर स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि अमेरिका ने ईरानी ऊर्जा अवसंरचना पर नए हमले किए तो जवाब केवल अमेरिकी ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि खाड़ी देशों के तेल क्षेत्र, रिफाइनरियां, बिजली ग्रिड, जल संयंत्र, परिवहन नेटवर्क और अन्य रणनीतिक प्रतिष्ठान भी जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य बन सकते हैं।</div><div><br></div><div>इस चेतावनी का असर भी दिखाई दिया। रिपोर्टों के अनुसार सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से बातचीत कर सैन्य कार्रवाई टालने, युद्धविराम और वार्ता को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। हालांकि रियाद ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि उसके क्षेत्र पर हमला हुआ तो वह सैन्य जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। यह घटनाक्रम बताता है कि पूरा खाड़ी क्षेत्र किसी व्यापक युद्ध की आशंका से चिंतित है और ऊर्जा सुरक्षा अब केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामरिक अस्तित्व का प्रश्न बन चुकी है।</div><div><br></div><div>देखा जाये तो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर प्रभाव स्थापित करना ईरान के लिए केवल समुद्री नियंत्रण का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। यदि तेहरान इस मार्ग पर अपनी भूमिका संस्थागत रूप से स्थापित कर लेता है तो भविष्य में वह पश्चिमी देशों के विरुद्ध आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव का अधिक प्रभावी उपकरण हासिल कर सकता है। दूसरी ओर अमेरिका के लिए यह उसकी समुद्री प्रभुत्व रणनीति और पश्चिम एशिया में विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा होगी।</div><div><br></div><div>दूसरी ओर, इस संघर्ष को चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देश भी बेहद करीब से देख रहे हैं। अमेरिकी सीमाओं, उसकी सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का आकलन भविष्य के वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। यदि अमेरिका निर्णायक परिणाम हासिल किए बिना समझौते के लिए मजबूर होता है तो यह उसके प्रतिद्वंद्वियों के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक संदेश माना जाएगा।</div><div><br></div><div>उधर, ईरान के भीतर भी सत्ता संरचना को लेकर सवाल गहराते जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से मुलाकात अत्यंत गोपनीय और असामान्य परिस्थितियों में हुई। दावा है कि मुलाकात कुछ मिनटों तक सीमित रही, दोनों एक-दूसरे को देख भी नहीं सके और बातचीत केवल आवाज के माध्यम से हुई। यहां तक कि राष्ट्रपति ने बाद में यह संदेह भी व्यक्त किया कि जिनसे उनकी बातचीत हुई, वे वास्तव में सर्वोच्च नेता थे या नहीं। दरअसल, मोजतबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से लगातार अनुपस्थित रहने और उनके संबंध में विरोधाभासी दावों ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को लेकर रहस्य और गहरा कर दिया है।</div><div><br></div><div>बहरहाल, कुल मिलाकर पश्चिम एशिया इस समय ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है जहां एक गलत सैन्य निर्णय पूरे खाड़ी क्षेत्र को व्यापक युद्ध में धकेल सकता है। दूसरी ओर यदि समझौता होता है और ईरान हॉर्मुज़ पर अधिक प्रभाव प्राप्त करता है, तो यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा। ऐसे में आने वाले सप्ताह न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>-नीरज कुमार दुबे</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 16:14:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-iran-war-hormuz-strait-crisis-middle-east-geopolitics</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nonthaburi School Attack: थाईलैंड में गोलीबारी के बाद पुलिस जांच जारी, 6 की मौत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/nonthaburi-school-attack-police-investigation-underway-following-shooting-in-thailand-6-dead]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को थाईलैंड के नोंथाबुरी प्रांत के एक हाई स्कूल में एक छात्र ने गोलीबारी की, जिसमें तीन टीचर और तीन छात्रों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए। रॉयल थाई पुलिस के प्रवक्ता ट्राइरोंग पिवपान ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि गोलीबारी बैंकॉक के उत्तर-पश्चिम में स्थित डेबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल में हुई। पिवपान ने बाद में चैनल 3 को बताया कि संदिग्ध शूटर की हालत गंभीर है और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि घायल हुए 15 लोगों में से दो की हालत गंभीर थी।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/turkey-saudi-arabia-pakistan-joint-defence-agreement-iran-middle-east-security-alliance" target="_blank">3 मुस्लिम राष्ट्रों ने चला बड़ा दाँव, Turkey, Saudi Arabia और Pakistan के बीच Defence Pact से दुनिया हैरान</a></h3><div><br></div><div>पुलिस ने कहा कि गोलीबारी के पीछे की वजह की अभी जांच चल रही है। माना जा रहा है कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार छात्र के परिवार के किसी सदस्य से लिया गया था। प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित लोगों की मदद और देखभाल करने का निर्देश दिया है। गोलीबारी के लगभग एक घंटे बाद घटनास्थल की तस्वीरों में लोगों को स्कूल के बाहर इकट्ठा होकर एक-दूसरे को दिलासा देते हुए देखा गया, जबकि पुलिस अधिकारी और इमरजेंसी रिस्पॉन्डर परिसर में मौजूद थे।</div><div><br></div><div>पुलिस ने कहा कि छात्र पर स्कूल में गोलीबारी करने का शक है। गोलीबारी की खबर मिलने के बाद प्लाई बैंग पुलिस स्टेशन के अधिकारियों को कैंपस भेजा गया और उन्होंने इलाके को सुरक्षित किया। अधिकारियों ने कहा कि हताहतों की संख्या अभी शुरुआती है क्योंकि बचाव अभियान चल रहा था। पुलिस ने लोगों से यह भी अपील की कि जब अधिकारी स्थिति को संभाल रहे हों, तो वे इस घटना की लाइव-स्ट्रीमिंग न करें।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-dismisses-reports-of-us-arms-shortage-as-fake-news-warns-of-jail-time" target="_blank">Trump ने US में हथियारों की कमी की खबर को बताया Fake News, दी जेल की चेतावनी</a></h3><div><br></div><div><br></div><div>शुक्रवार को हुई गोलीबारी, इस साल थाईलैंड में स्कूल में गोलीबारी की दूसरी घटना थी। फरवरी में, 17 साल के एक लड़के ने कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी से बंदूक चुराई और दक्षिणी थाईलैंड के एक पब्लिक हाई स्कूल में गोलीबारी की, जिसमें एक टीचर की मौत हो गई, एक छात्र घायल हो गया और कुछ समय के लिए लोगों को बंधक बना लिया गया।<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 15:03:38 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/nonthaburi-school-attack-police-investigation-underway-following-shooting-in-thailand-6-dead</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[3 मुस्लिम राष्ट्रों ने चला बड़ा दाँव, Turkey, Saudi Arabia और Pakistan के बीच Defence Pact से दुनिया हैरान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/turkey-saudi-arabia-pakistan-joint-defence-agreement-iran-middle-east-security-alliance]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पश्चिम एशिया में युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच आज मुस्लिम दुनिया के तीन महत्वपूर्ण देश तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान एक ऐतिहासिक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। यह समझौता ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों को भी निशाने पर लिया है और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।</div><div><br></div><div>इस समझौते पर जेद्दा में तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की मौजूदगी में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ हस्ताक्षर किए जाएंगे। तुर्किये के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस रक्षा समझौते की पुष्टि भी की है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/column/pm-modi-slams-pakistan-on-article-370-anniversary-kashmir-development-pojk-hypocrisy" target="_blank">Article 370 पर बदजुबानी कर रहे थे जरदारी और शहबाज शरीफ, मोदी ने खुद आगे आकर दिया करारा जवाब</a></h3><div>करीब एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद यह समझौता अंतिम रूप तक पहुंचा है। इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि ईरान के साथ जारी संघर्ष ने खाड़ी देशों की सुरक्षा कमजोरियों को उजागर कर दिया है। साथ ही, दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।</div><div><br></div><div>हालांकि समझौते के सभी प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि इससे सुन्नी मुस्लिम देशों के बीच सामरिक और सैन्य सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। यह गठजोड़ क्षेत्र में उभरते नए शक्ति संतुलन का संकेत माना जा रहा है।</div><div><br></div><div>तीनों देशों की सामरिक क्षमता इस समझौते को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। तुर्किये नाटो का सदस्य है और उसकी सैन्य क्षमता पश्चिम एशिया में सबसे मजबूत मानी जाती है। वहीं सऊदी अरब अमेरिका का प्रमुख सहयोगी होने के साथ दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल है और खाड़ी क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली शक्ति है। वहीं पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न मुस्लिम देश है।</div><div><br></div><div>रिपोर्टों के मुताबिक, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अंकारा क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा मंच के पक्ष में है। ऐसे में यह नया रक्षा समझौता उसी रणनीतिक सोच का विस्तार माना जा रहा है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से ही एक रक्षा समझौता मौजूद है, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाता है और आवश्यकता पड़ने पर "सभी सैन्य साधनों" के उपयोग का प्रावधान है। अब तुर्किये के इस ढांचे से जुड़ने के बाद पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने की संभावना है।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के बीच यह रक्षा गठबंधन केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की रक्षा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी नई दिशा दे सकता है। देखा जाये तो ऐसे समय में जब हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है, यह समझौता आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 14:23:33 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/turkey-saudi-arabia-pakistan-joint-defence-agreement-iran-middle-east-security-alliance</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Russia की युद्ध अर्थव्यवस्था को झटका देने के लिए UK ने 6 बैंकों और जहाजों पर लगाया प्रतिबंध]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/uk-imposes-new-sanctions-on-russia-targeting-banks-and-shadow-fleet]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>ब्रिटेन ने यूक्रेन के समर्थन में बृहस्पतिवार को रूस पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की, जिनमें बैंक और ‘छद्म बेड़े’ के जहाजों को निशाना बनाया गया है। यह प्रतिबंध पैकेज एड मिलिबैंड के ब्रिटेन का विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद पहला है। उन्होंने पिछले महीने यह जिम्मेदारी संभाली थी।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/russia-drone-factory-director-vladimir-tkachuk-injured-in-car-blast" target="_blank" rel="noopener">Russia में Drone फैक्टरी के प्रमुख Vladimir Tkachuk कार धमाके में घायल, चालक की मौत</a></h3><p>ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) ने बताया कि प्रतिबंधों के दायरे में 19 लक्ष्य शामिल हैं। इनमें छह रूसी बैंक हैं, जिन पर रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को समर्थन देने का आरोप है। इसके अलावा छह नए अधिग्रहीत ‘छद्म बेड़े’ (शैडो फ्लीट) टैंकर को भी प्रतिबंधित किया गया है, जिन पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है।</p><p>साथ ही प्रतिबंधों में चार रूसी कंपनियां भी शामिल हैं, जो टैंटलम और नियोबियम जैसी दुर्लभ धातुओं का आयात करती हैं। इन धातुओं का इस्तेमाल यूक्रेन के युद्ध में इस्तेमाल होने वाले सैन्य उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। मिलिबैंड ने कहा, ‘‘आज के नए प्रतिबंध यूक्रेन के समर्थन और क्रेमलिन की आक्रामकता को बढ़ावा देने वालों पर दबाव बनाने की ब्रिटेन की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यूक्रेन की लड़ाई हमारी लड़ाई है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/lion-brewery-returns-to-indian-market-after-sixty-years" target="_blank" rel="noopener">Lion Brewery बीयर: ब्रिटेन की लॉयन ब्रूअरी ने 60 साल बाद भारतीय बाजार में की वापसी</a></h3><p>जो लोग यूक्रेन की स्वतंत्रता और लोकतंत्र को खतरा पहुंचाते हैं, वे ब्रिटेन की घरेलू सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। इसलिए हम रूस पर तब तक दबाव बढ़ाते रहेंगे, जब तक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित नहीं हो जाती।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 13:10:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/uk-imposes-new-sanctions-on-russia-targeting-banks-and-shadow-fleet</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Syria की राजधानी Damascus के जरामना में मिनीवैन टैक्सी में विस्फोट से 2 की मौत, 13 घायल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/two-killed-in-syria-damascus-suburb-jaramana-minivan-blast]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सीरिया की राजधानी दमिश्क के एक उपनगर में बृहस्पतिवार को हुए विस्फोट में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। सीरिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। सीरिया के सरकारी टेलीविजन ने एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि जरामना में यह विस्फोट एक मिनीवैन टैक्सी में लगाए गए विस्फोटक उपकरण के कारण हुआ।</p><p>स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई और कम से कम 13 अन्य घायल हुए हैं। घटनास्थल पर मौजूद ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के एक पत्रकार ने मलबे से एक शव निकाले जाते देखा। इस हमले की फिलहाल किसी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है।</p><p>जरामना में ड्रूज धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। यहां ड्रूज समुदाय के कुछ सदस्यों और देश की इस्लामवादी नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार का समर्थन करने वाले सुन्नी मुसलमानों के बीच तनाव रहा है। ड्रूज बंदूकधारियों और सरकार समर्थक लड़ाकों के बीच अप्रैल 2025 में सांप्रदायिक झड़पों में कम से कम 10 लोग मारे गए थे।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 13:05:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/two-killed-in-syria-damascus-suburb-jaramana-minivan-blast</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[15 आकर्षक झांकियों के साथ Boston में मनेगा Independence Day, दिखेगी भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/boston-indian-community-to-hold-international-india-day-parade]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>बोस्टन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय भारत के स्वतंत्रता दिवस को पूरे उत्साह के साथ मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस अवसर पर भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जो भारत और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी को भी प्रदर्शित करेंगे। ‘फाउंडेशन ऑफ इंडियन-अमेरिकन्स’ (एफआईए)- न्यू इंग्लैंड द्वारा नौ अगस्त को बोस्टन में 5वीं ‘इंटरनेशनल इंडिया डे परेड’ आयोजित की जाएगी।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/boston-to-host-international-india-day-parade-on-august-9" target="_blank" rel="noopener">Boston में 9 अगस्त को होगी International India Day Parade, जुटेंगे हजारों लोग</a></h3><p>इसे न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में भारत के स्वतंत्रता दिवस, उसकी सांस्कृतिक विरासत और भारत-अमेरिका की स्थायी मित्रता के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस वर्ष की परेड का विषय ‘स्वतंत्रता का उत्सव एवं अमेरिका-भारत मित्रता’ रखा गया है। परेड में 15 आकर्षक झांकियां शामिल होंगी।</p><p>इसके साथ ही एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सामुदायिक संगठनों, पूर्व सैनिकों, आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों और न्यू इंग्लैंड के भारतीय-अमेरिकी समुदाय की विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारों लोगों की भागीदारी होगी। इस समारोह के ग्रैंड मार्शल कर्नल इंदर प्रीत सिंह (युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित पूर्व सैनिक) और अमेरिकी नौसेना की खुफिया विशेषज्ञ मैगी लेहमन होंगे। उन्हें देश की सेवा और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया जाएगा।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/massachusetts-proclaims-august-15-as-india-day-maura-healey-order" target="_blank" rel="noopener">Massachusetts ने 15 अगस्त को किया India Day घोषित, गवर्नर मॉरा हेली ने दिया आदेश</a></h3><p>इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बोस्टन में भारत के पहले महावाणिज्यदूत रघुराम शास्त्री होंगे। उनकी उपस्थिति भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और न्यू इंग्लैंड में तेजी से बढ़ते भारतीय-अमेरिकी समुदाय के समर्थन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड के कार्यकारी निदेशक दीपक राठौर ने कहा कि इस वर्ष की परेड अब तक का सबसे बड़ा और सबसे रंगारंग आयोजन होगा, जिसमें स्वतंत्रता, लोकतंत्र, सांस्कृतिक विविधता और भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी के मूल्यों का उत्सव मनाया जाएगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 13:05:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/boston-indian-community-to-hold-international-india-day-parade</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Thailand के देबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल में गोलीबारी के बाद प्रधानमंत्री Anutin Charnvirakul ने दिए उचित देखभाल के निर्देश]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/thailand-school-shooting-in-nonthaburi-six-killed-fifteen-injured]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>थाईलैंड में बैंकॉक के बाहरी इलाके में स्थित एक हाई स्कूल में शुक्रवार को एक छात्र द्वारा की गई गोलीबारी में तीन शिक्षकों और तीन विद्यार्थियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। ‘रॉयल थाई पुलिस’ के प्रवक्ता त्रैरोंग पिवपन ने बताया कि गोलीबारी की यह घटना देश की राजधानी के उत्तर-पश्चिम में स्थित नोंथाबुरी प्रांत के ‘देबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल’ में हुई।</p><p>बाद में उन्होंने समाचार प्रसारक ‘चैनल 3’ को बताया कि हमलावर छात्र की हालत गंभीर है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि घटना में 15 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि गोलीबारी के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/indiscriminate-shooting-school-in-thailand-over-15-students-injured-multiple-fatalities-feared" target="_blank" rel="noopener">Thailand School Shooting | थाईलैंड के स्कूल में अंधाधुंध गोलीबारी! 15 से ज्यादा छात्र घायल, कई मौतों की आशंका, पुलिस ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन</a></h3><p>ऐसा माना जा रहा है कि बंदूक छात्र के परिवार के ही किसी सदस्य की थी। प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने इस घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पीड़ितों कीउचित देखभाल करने का निर्देश दिया है। घटना के लगभग एक घंटे बाद सामने आई तस्वीरों में लोग स्कूल के बाहर एक-दूसरे को सांत्वना देते दिखे, जबकि पुलिस और बचाव दल स्कूल के अंदर स्थिति का जायजा ले रहे थे।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/greater-noida-itbp-jawan-shoots-shopkeeper-over-gutkha-dispute" target="_blank" rel="noopener">Greater Noida में ITBP जवान ने गुटखा विवाद के बाद दुकानदार को मारी गोली, गिरफ्तार</a></h3><p>एक प्रत्यक्षदर्शी ने संवाददाताओं को बताया कि जब अन्य भवन से गोलियां चलने की आवाजें आईं तो छात्र एक कक्षा के अंदर छिप गए। बाद में पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें बाहर निकाला। इसी साल फरवरी में दक्षिणी थाईलैंड के एक सरकारी हाई स्कूल में 17 वर्षीय एक लड़के ने पुलिस की बंदूक चुराकर अंधाधुंध गोलीबारी की थी और लोगों को बंधक बना लिया था।</p><p>इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हुए थे। इससे पहले 2023 में बैंकॉक के एक शॉपिंग मॉल में 14 वर्षीय लड़के द्वारा गोलीबारी किए जाने का मामला सामने आया था।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 13:05:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/thailand-school-shooting-in-nonthaburi-six-killed-fifteen-injured</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Trump ने US में हथियारों की कमी की खबर को बताया Fake News, दी जेल की चेतावनी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/trump-dismisses-reports-of-us-arms-shortage-as-fake-news-warns-of-jail-time]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वॉशिंगटन में हथियारों और गोला-बारूद की कमी हो रही है। उन्होंने इस दावे का भी खंडन किया कि उन्होंने इस कमी को लेकर अपने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से कोई तीखी बहस की थी। उन्होंने इन खबरों को फर्जी खबर करार दिया और पेंटागन के हथियारों के भंडार से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद मामले की नई जांच के आदेश दिए हैं।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/mehbooba-mufti-tiranga-controversy-bjp-photo-iltija-mufti-fir" target="_blank">National Flag का अपमान बर्दाश्त नहीं करती BJP, तिरंगे को उल्टा पकड़ने वाली Mehbooba Mufti की तस्वीर ही उल्टी कर दी</a></h3><div><br></div><div>यह बात तब सामने आई जब 'द वॉशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप ने पिछले हफ़्ते हेगसेथ से पूछताछ की थी। उन्हें पता चला था कि हेगसेथ को गोला-बारूद की भारी कमी के बारे में गलत जानकारी दी गई थी, जिससे ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी सेना के विकल्प सीमित हो सकते थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के पास हथियारों का भारी भंडार है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जो लोग कमी के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं, उन्हें जेल हो सकती है।</div><div><br></div><div>उन्होंने गुरुवार को 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि पीट हेगसेथ जो काम कर रहे हैं, उससे मैं बहुत खुश हूँ। सब कुछ असाधारण रहा है, जिसमें वेनेजुएला पर हमारा हमला भी शामिल है, और इसी तरह ईरान में भी, "जहाँ देश को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के पास भारी मात्रा में 'गोला-बारूद है, खासकर कुछ खास तरह का, लेकिन उन्होंने इसके बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ज़रूरत के हिसाब से बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बनाया जा रहा है और अमेरिका भेजा जा रहा है। डिफेंस कंपनियाँ हमारे देश के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्लांट और फ़ैक्ट्रियाँ बना रही हैं।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/modi-government-opposes-creamy-layer-in-sc-st-reservation-supreme-court" target="_blank">Prabhasakshi NewsRoom: SC ST Reservation पर कोई आंच नहीं आने देगी Modi Government, Creamy Layer पर Supreme Court में कह दी बड़ी बात</a></h3><div><br></div><div>ट्रंप ने इन रिपोर्टों की आलोचना करते हुए कहा कि देशद्रोह वाली बातें लीक करने वालों को ढूंढा जा रहा है और उनके लिए लंबी जेल की सज़ा की मांग की जाएगी! व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने भी इन दावों को खारिज कर दिया और हेगसेथ के साथ हुई कथित बातचीत को "फ़ेक न्यूज़" बताया! उन्होंने X पर लिखा कि मैं राष्ट्रपति ट्रंप और सेक्रेटरी हेगसेथ के साथ कैंप डेविड में थी। ऐसा असल में कभी हुआ ही नहीं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:31:56 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/trump-dismisses-reports-of-us-arms-shortage-as-fake-news-warns-of-jail-time</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[ईरान से चौंकाने वाली रिपोर्ट: अंधेरे में कार की पिछली सीट पर Mojtaba Khamenei से मिले राष्ट्रपति, पहचान पर बना सस्पेंस]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/iran-president-met-mojtaba-khamenei-in-back-seat-of-car-in-dark-suspense-remains-over-identity]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के ठिकाने और उनकी स्थिति को लेकर अनिश्चितता के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने तेहरान में एक अत्यंत गुप्त स्थान पर सुप्रीम लीडर से कुछ ही मिनटों की मुलाकात की। यह मुलाकात पूरी तरह अंधेरे में एक कार के भीतर हुई, जिससे मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी और उनकी वास्तविक सेहत को लेकर फिर से अटकलें तेज हो गई हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दावा किया था कि अमेरिकी हमलों में सुप्रीम लीडर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।</span></div><div><br></div><div>'ईरान इंटरनेशनल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेज़ेशकियन ने खामेनेई से एक "अंधेरी, टिंटेड-विंडो वाली कार" में मुलाकात की, जहाँ एक व्यक्ति ने उन्हें सुप्रीम लीडर के तौर पर पेश किया। हालाँकि, ऐसा लगता है कि पेज़ेशकियन को इस पर पूरा यकीन नहीं था और उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा कि क्या वे सच में खामेनेई ही हैं।</div><div><span style="font-size: 1rem;">यह रिपोर्ट पेज़ेशकियन के पहले के दावों से बिल्कुल अलग है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मई में उन्होंने खामेनेई से ढाई घंटे तक मुलाकात की थी और बातचीत "सौहार्दपूर्ण माहौल" में हुई थी।</span></div><div><br></div><div>'ईरान इंटरनेशनल' ने सूत्रों के हवाले से कहा कि पेज़ेशकियन और खामेनेई के बीच यह मुलाकात तब तय हुई जब पेज़ेशकियन ने इस्तीफे की धमकी दी। हालाँकि, पेज़ेशकियन को बताया गया कि वे खामेनेई से उनके सामान्य आवास पर नहीं, बल्कि राजधानी तेहरान में एक गुप्त जगह पर मिलेंगे।</div><div><br></div><div><b>अंधेरी, टिंटेड खिड़कियाँ, पिछली सीट</b></div><div>जब पेज़ेशकियन उस जगह पहुँचे, तो उन्हें एक कमर्शियल कार की पिछली सीट पर बिठाया गया, जिसकी खिड़कियाँ अंधेरी और टिंटेड थीं। खामेनेई पहले से ही उस कार में इंतजार कर रहे थे, लेकिन पेज़ेशकियन उन्हें देख नहीं पाए। इसके अलावा, हाथ मिलाने की भी इजाजत नहीं थी और बाद में पेज़ेशकियन ने पूछा कि क्या वह व्यक्ति सच में सुप्रीम लीडर ही था।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/trending/impact-of-national-handloom-day-2026-on-sustainable-fashion" target="_blank">National Handloom Day 2026: आत्मनिर्भर भारत और Women Empowerment की दिशा में हथकरघा उद्योग का बढ़ता कद</a></h3><div><br></div><div>'ईरान इंटरनेशनल' ने राष्ट्रपति कार्यालय के लोगों के हवाले से कहा कि इस बर्ताव से पेज़ेशकियन को "अपमानित" महसूस हुआ। बाद में उन्होंने पूछा कि क्या दूसरी मुलाकात हो सकती है, लेकिन अब तक इस अनुरोध को ठुकरा दिया गया है।</div><div><br></div><div>यह रिपोर्ट पेज़ेशकियन की हालिया टिप्पणियों से मेल खाती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि खामेनेई से बातचीत करना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने इस हफ़्ते की शुरुआत में कहा, "इस समय उनसे बातचीत करना बहुत मुश्किल है, लेकिन किसी भी हाल में, उनकी मौजूदगी हमारे लिए बहुत बड़ी ताकत है ताकि हम आगे बढ़ सकें।"</div><div><b>&nbsp;</b></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/death-toll-from-floods-in-assam-rises-to-97-over-1-68-lakh-people-affected-across-15-districts" target="_blank">Assam Floods | असम में बाढ़ की स्थिति विकराल! मौतों का आंकड़ा 97 पहुंचा, 15 जिलों के 1.68 लाख लोग प्रभावित</a></h3><div><b><br></b></div><div><b>खामेनेई की सेहत को लेकर कोई साफ़ जानकारी नहीं</b></div><div>जब से यह टकराव शुरू हुआ है, खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। यहाँ तक कि उन्होंने अपने पूर्ववर्ती और पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा नहीं लिया, जबकि उनके तीनों भाई वहाँ मौजूद थे। इसी बीच, ट्रंप ने पहले दावा किया था कि खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और वे "90 प्रतिशत खत्म हो चुके हैं"।</div><div><br></div><div>ट्रंप ने जुलाई में फॉक्स न्यूज़ से कहा था, "उनके पास कोई नौसेना नहीं है, कोई वायु सेना नहीं है, सब कुछ खत्म हो चुका है। उनका एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम खत्म हो गया है, उनके सभी नेता मारे जा चुके हैं, उनके सबसे अच्छे नेता मारे जा चुके हैं।"&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">अब, ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट ने खामेनेई की सेहत और उनके ठिकाने को लेकर अटकलों को और हवा दे दी है, और लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सुप्रीम लीडर असल में देश के फ़ैसले ले रहे हैं या नहीं।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/iran-president-met-mojtaba-khamenei-in-back-seat-of-car-in-dark-suspense-remains-over-identity</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Thailand School Shooting | थाईलैंड के स्कूल में अंधाधुंध गोलीबारी! 15 से ज्यादा छात्र घायल, कई मौतों की आशंका, पुलिस ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/indiscriminate-shooting-school-in-thailand-over-15-students-injured-multiple-fatalities-feared]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>थाईलैंड में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहाँ बैंकॉक के उत्तरी हिस्से में स्थित नोंथाबुरी प्रांत के एक प्रतिष्ठित स्कूल में अचानक गोलीबारी शुरू हो गई। स्थानीय मीडिया और प्रांतीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 15 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि कई अन्य लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">शुरुआती रिपोर्टों से यह भी संकेत मिला कि कई लोगों की मौत हो सकती है, हालांकि हताहतों की सही संख्या की पुष्टि नहीं हुई थी।</span></div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/scorpio-breaks-through-security-barricade-in-ramban-and-flees-escapes-despite-warnings-firing" target="_blank">Jammu and Kashmir | रामबन में सुरक्षा बैरिकेड तोड़कर भागी संदिग्ध स्कॉर्पियो: चेतावनियों और फायरिंग के बावजूद फरार, अमरनाथ यात्रा मार्ग पर हाई अलर्ट</a></h3><div><br></div><div>यह घटना शुक्रवार सुबह बांग क्रुआई जिले के डेबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल में हुई। थाई प्रसारक 'थाई पीबीएस' ने शुरू में बताया कि गोलीबारी में 10 से 15 लोग घायल हुए हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पुलिस ने कहा कि स्कूल में गोलीबारी करने का संदेह एक छात्र पर है। गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद प्लाई बांग पुलिस स्टेशन के अधिकारियों को कैंपस भेजा गया और उन्होंने इलाके को सुरक्षित करने का काम शुरू किया।</span></div><div><br></div><div>अधिकारियों ने कहा कि हताहतों की संख्या अभी शुरुआती है क्योंकि बचाव और कार्रवाई का काम चल रहा था। पुलिस ने लोगों से यह भी आग्रह किया कि जब अधिकारी स्थिति को संभाल रहे हों, तो वे घटना की लाइव-स्ट्रीमिंग न करें।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/pm-modi-urges-people-to-buy-handloom-products-on-national-handloom-day" target="_blank">PM Modi ने Handloom Day पर हथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की, बुनकरों की मदद का दिया संदेश</a></h3><div><br></div><div>घायलों की हालत, क्या किसी की मौत की पुष्टि हुई है और गोलीबारी के पीछे का मकसद क्या था, इस बारे में और जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं थी।</div><div><br></div><div>अधिकारी स्कूल को सुरक्षित करने और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करने का काम जारी रखे हुए थे।</div><div><br></div><div>और जानकारी का इंतज़ार है।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 09:55:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/indiscriminate-shooting-school-in-thailand-over-15-students-injured-multiple-fatalities-feared</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Houthi Attack Saudi Arabia | सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का सिलसिलेवार हमला! 4 साल के बच्चे समेत 11 नागरिक घायल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/11-civilians-including-children-injured-in-houthi-attacks-near-yemen-border-saudi-military]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए सिलसिलेवार हमलों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सऊदी अरब की सेना के अनुसार, यमन सीमा के पास सऊदी अरब के दक्षिणी नजरान क्षेत्र में हुए हूती हमलों में एक चार वर्षीय बच्चे सहित कम से कम 11 आम नागरिक घायल हो गए हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इससे कुछ घंटे पहले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मध्य और पूर्वी यमन में उन सिलसिलेवार हमलों की जिम्मेदारी ली थी, जिनमें कम से कम 30 सैनिक मारे गए थे और कम से कम 50 अन्य घायल हुए थे।</span></p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/delhi-rain-man-missing-after-falling-in-drain-ndrf-search" target="_blank">Delhi में बारिश के दौरान नाले में गिरा व्यक्ति, NDRF का सर्च ऑपरेशन जारी</a></h3><p><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> हूती के एक नेता ने कहा कि इन हमलों में सऊदी अरब समर्थित सैनिकों को निशाना बनाया गया और ‘‘सैकड़ों’’ लोग मारे गए या घायल हुए।
 यमन के अधिकारियों ने बताया कि ये हमले मारिब और हद्रामौत प्रांतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के सुरक्षा बलों के शिविरों पर किए गए।</span></p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/chhattisgarh-high-court-denies-bail-to-ex-ias-jivan-kishore-dhruv" target="_blank">CGPSC scam: पूर्व IAS जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज, High Court का सख्त रुख</a></h3><p><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></p><p><span style="font-size: 1rem;">
</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> सऊदी अरब की सेना के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने कहा कि नजरान में हुए हमले में सऊदी अरब के सात नागरिक, यमन का एक नागरिक तथा मिस्र के दो और पाकिस्तान का एक प्रवासी घायल हुआ। इन घायलों में एक बच्चा भी शामिल है।
 हूती विद्रोहियों ने इस हमले के संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया है।</span></p><p><b>सऊदी के नजरान में आम नागरिकों को बनाया निशाना</b></p><p>सऊदी अरब की सेना के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि नजरान क्षेत्र में हुए इस हमले में घायलों में विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं:</p><p>सऊदी नागरिक: 7 लोग (जिनमें एक 4 साल का बच्चा भी शामिल है)</p><p>मिस्र के प्रवासी: 2 लोग</p><p>यमन का नागरिक: 1 व्यक्ति</p><p>पाकिस्तान का प्रवासी: 1 व्यक्ति</p><p>फिलहाल हूती विद्रोहियों की ओर से नजरान में हुए इस हमले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></p><p class="MsoNormal"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">on Prabhasakshi</span><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;"><o:p></o:p></span></p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 09:39:33 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/11-civilians-including-children-injured-in-houthi-attacks-near-yemen-border-saudi-military</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[NASA यात्रियों Anil Menon और Jessica Meir ने ISS में spacewalk पूरी कर पावर किट लगाई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/nasa-astronauts-anil-menon-jessica-meir-complete-iss-spacewalk]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, सात अगस्त अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यात्रियों अनिल मेनन और जेसिका मेयर ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर अपनी चहलकदमी सफलतापूर्वक पूरी कर ली। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन के पावर चैनल में तकनीकी उन्नयन किट स्थापित करने का काम किया, जिससे भविष्य में अतिरिक्त सौर पैनल लगाए जा सकेंगे। अंतरिक्ष स्टेशन के उन्नयन की कड़ी में यह 281वीं चहलकदमी थी।</p><p>यह अंतरिक्ष में जेसिका मेयर की छठी और अनिल मेनन की पहली चहलकदमी थी। चहलकदमी बृहस्पतिवार को भारतीय समयानुसार शाम छह बजकर तीन मिनट पर शुरू हुई और बृहस्पतिवार रात साढ़े 12 बजे समाप्त हुई। मेनन और मेयर ‘क्वेस्ट एयरलॉक’ से बाहर निकले और उन्होंने लगभग छह घंटे 27 मिनट तक अंतरिक्ष स्टेशन की बाहरी संरचना में तकनीकी उन्नयन का कार्य किया।</p><p>‘क्वेस्ट एयरलॉक’ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) का एक विशेष वायुरुद्ध प्रवेश-निकास कक्ष (एयरलॉक मॉड्यूल) है, जिसके माध्यम से अंतरिक्ष यात्री चहलकदमी के लिए स्टेशन से बाहर निकलते हैं और वापस अंदर आते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य स्टेशन के 3बी पावर चैनल पर ‘माउंटिंग हार्डवेयर’ स्थापित करना था। नासा ने एक बयान में कहा, ‘‘यह कार्य भविष्य में आईआरओएसए (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन रोल-आउट सोलर एरे) नामक नए ‘रोल-आउट’ सौर पैनलों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।</p><p>इससे अंतरिक्ष स्टेशन को अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जो उसकी महत्वपूर्ण प्रणालियों के संचालन और स्टेशन को भविष्य में सुरक्षित एवं नियंत्रित तरीके से कक्षा से बाहर करने में सहायक होगी।’’ वर्ष 2021 से अब तक अंतरिक्ष यात्री छह आईआरओएसए सौर पैनल इकाइयां स्थापित कर चुके हैं। अब केवल दो इकाइयां और लगाई जानी बाकी हैं, जिन्हें इस वर्ष के अंत तक अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचाया जाएगा। चहलकदमी के दौरान कुछ देर के विश्राम में जेसिका मेयर ने कहा, ‘‘अनिल, तुम चंद्रमा को देख सकते हो…, हालांकि मुझे नहीं पता कि तुम किस दिशा में हो।’’ इस पर मेनन ने जवाब दिया, ‘‘मेरी दाहिनी ओर है।</p><p>हां, मैं उसे देख सकता हूं। जानकारी देने के लिए धन्यवाद। वहां मुझे भविष्य में चंद्रमा का एक आधार (मून बेस) दिखाई दे रहा है।’’ यह इस महीने अंतरिक्ष स्टेशन के ‘एक्सपीडिशन-75’ दल के लिए निर्धारित तीन चहलकदमी में पहली चहलकदमी थी।</p><p>इसके बाद 13 अगस्त को होने वाली दूसरी चहलकदमी के दौरान दो अंतरिक्ष यात्री स्टेशन के ‘स्पेस-टू-ग्राउंड’ एंटीना को बदलेंगे। यह एंटीना नासा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संचार प्रणाली है, जिसके माध्यम से ह्यूस्टन स्थित मिशन नियंत्रण केंद्र और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बीच डेटा और हाई-स्पीड संचार किया जाता है। फिर 25 अगस्त को होने वाली तीसरी चहलकदमी में दल के सदस्य पावर चैनल की केबलों और डेटा रिले प्रणालियों को जोड़ेंगे।</p><p>यह कार्य नियमित रखरखाव का हिस्सा है और अंतरिक्ष स्टेशन को भविष्य में कक्षा से सुरक्षित रूप से बाहर लाने की तैयारियों से भी जुड़ा है। नासा के अनुसार, इस अंतरिक्ष चहलकदमी के दौरान अंतरिक्ष यात्री ‘हार्मनी मॉड्यूल’ के अग्र पोर्ट पर स्थित अंतरिक्ष यानों की ‘डॉकिंग’ में उपयोग होने वाले एक ‘नेविगेशन’ सहायक उपकरण को भी बदलेंगे।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 09:35:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/nasa-astronauts-anil-menon-jessica-meir-complete-iss-spacewalk</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Donald Trump ने US में Birth Tourism रोकने के लिए दो नए आदेशों पर हस्ताक्षर किए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-signs-executive-orders-to-restrict-us-birth-tourism]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, सात अगस्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) के मामलों पर सख्ती करने और जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता पाने के पात्र लोगों की संख्या सीमित करने के लिए दो कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ सप्ताह पहले उच्चतम न्यायालय ने इस संबंध में ट्रंप के पहले जारी आदेश को खारिज कर दिया था। बृहस्पतिवार को हस्ताक्षरित आदेशों में से एक उन लोगों को निशाना बनाता है जो व्यावसायिक रूप से ‘बर्थ टूरिज्म’ को चुनते हैं और बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं।</p><p>इस आदेश का उद्देश्य ऐसे लोगों की अमेरिका में प्रवेश की सुविधा सीमित करना है। दूसरा आदेश उन लोगों की परिका विस्तार करता है जिन्हें जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता के लिए अयोग्य माना जाएगा। इसमें विदेशी सरकारों की ओर से ‘लॉबिंग’ (पैरवी) करने वाले विदेशी नागरिकों के बच्चों को भी शामिल किया गया है।</p><p>अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 30 जून को ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता समाप्त करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने 100 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था को बरकरार रखते हुए कहा था कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोग अमेरिकी नागरिक होते हैं। ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ के ‘ओवल ऑफिस’ में इन आदेशों पर हस्ताक्षर करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उच्चतम न्यायालय के 30 जून के फैसले की आलोचना की और कहा कि नया कदम ‘‘कुछ आवश्यक बदलाव करने’’ के लिए उठाया गया है।</p><p>उन्होंने कहा, ‘‘जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था इसलिए हम इसमें बदलाव कर रहे हैं।’’
इस दौरान ट्रंप के साथ ‘व्हाइट हाउस’ के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ अधिकारी स्टीफन मिलर, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर और व्हाइट हाउस स्टाफ सचिव विल शार्फ मौजूद थे। नौ जुलाई 1868 को अनुमोदित अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन ने अमेरिका में जन्मे या कानूनी रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों को अमेरिकी नागरिकता प्रदान की थी जिनमें पहले दास रह चुके लोग भी शामिल थे। ट्रंप ने कहा, ‘‘यह प्रावधान गृहयुद्ध के तुरंत बाद बनाया गया था।</p><p>इसका उद्देश्य दासों के बच्चों को नागरिकता देना था लेकिन अब क्या हो रहा है? लोग इसके आधार पर पूरा कारोबार खड़ा कर रहे हैं।’’
ट्रंप की आप्रवासन विरोधी नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले स्टीफन मिलर ने कहा कि लोग पर्यटक बनकर अमेरिका आते हैं लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य यहां बच्चा पैदा करना होता है ताकि वह बच्चा स्वतः अमेरिकी नागरिक बन जाए। मिलर ने कहा, ‘‘इस त्रुटिपूर्ण व्यवस्था के कारण ऐसे लोगों को सरकारी कल्याण योजनाओं, भविष्य में मतदान के अधिकार और वे सभी अधिकार एवं विशेषाधिकार मिल जाते हैं जो केवल अमेरिकी नागरिकों के लिए होने चाहिए।’’
इन आदेशों में कई ऐसी श्रेणियां सूचीबद्ध की गई हैं जिनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता से संबंधित दस्तावेज जारी नहीं किए जाने चाहिए।</p><p>इनमें वे बच्चे शामिल हैं जिनके माता-पिता ने ऐसा व्यावसायिक लेन-देन किया हो, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिला को अमेरिका या उसके किसी क्षेत्र में प्रसव कराने के लिए लाना हो। इसके अलावा, आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों के बच्चे, विदेशी सरकारों के कर्मचारियों के बच्चे और अमेरिकी क्षेत्रों में जन्मे ऐसे बच्चे जिन्हें संघीय कानून के तहत नागरिकता नहीं मिलती, उन्हें भी इस सूची में शामिल किया गया है। आप्रवासन विशेषज्ञों ने ट्रंप के इन नए कार्यकारी आदेशों की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें असंवैधानिक बताया है।</p><p>न्यूयॉर्क स्थित आव्रजन मामलों के वकील साइरस मेहता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया, ‘‘ट्रंप का जन्म के आधार पर नागरिकता से संबंधित नया कार्यकारी आदेश स्पष्ट रूप से असंवैधानिक है। यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता ने अमेरिका में बच्चे के जन्म को सुनिश्चित करने के लिए व्यावसायिक लेन-देन किया है, तो उसके आधार पर नागरिकता से इनकार करना 14वें संशोधन का उल्लंघन है।’’
‘माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के अनुसार, सबसे व्यापक जनगणना आधारित अनुमान के मुताबिक हर वर्ष अमेरिका में 22,000 से 26,000 बच्चों का जन्म ‘बर्थ टूरिज्म’ के कारण होता है। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में विदेशी पते वाली माताओं से केवल 9,600 बच्चों का जन्म अमेरिका में हुआ।</p><p>‘अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन’ ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय इस मुद्दे पर पहले ही फैसला दे चुका है कि जन्म के आधार पर नागरिकता अमेरिकी संविधान द्वारा सुनिश्चित की गई है। ऐसा कोई भी कार्यकारी आदेश, जो इस अधिकार पर हमला करने की कोशिश करेगा, उसका भी वही हश्र होगा जो राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले आदेश का हुआ था।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 09:35:30 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-signs-executive-orders-to-restrict-us-birth-tourism</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Boston में 9 अगस्त को होगी International India Day Parade, जुटेंगे हजारों लोग]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/boston-to-host-international-india-day-parade-on-august-9]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>योषिता सिंह
न्यूयॉर्क, सात अगस्त बोस्टन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय भारत के स्वतंत्रता दिवस को पूरे उत्साह के साथ मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस अवसर पर भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जो भारत और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी को भी प्रदर्शित करेंगे। ‘फाउंडेशन ऑफ इंडियन-अमेरिकन्स’ (एफआईए)- न्यू इंग्लैंड द्वारा नौ अगस्त को बोस्टन में 5वीं ‘इंटरनेशनल इंडिया डे परेड’ आयोजित की जाएगी।</p><p>इसे न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में भारत के स्वतंत्रता दिवस, उसकी सांस्कृतिक विरासत और भारत-अमेरिका की स्थायी मित्रता के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस वर्ष की परेड का विषय ‘स्वतंत्रता का उत्सव एवं अमेरिका-भारत मित्रता’ रखा गया है। परेड में 15 आकर्षक झांकियां शामिल होंगी।</p><p>इसके साथ ही एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सामुदायिक संगठनों, पूर्व सैनिकों, आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों और न्यू इंग्लैंड के भारतीय-अमेरिकी समुदाय की विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारों लोगों की भागीदारी होगी। इस समारोह के ग्रैंड मार्शल कर्नल इंदर प्रीत सिंह (युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित पूर्व सैनिक) और अमेरिकी नौसेना की खुफिया विशेषज्ञ मैगी लेहमन होंगे। उन्हें देश की सेवा और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया जाएगा।</p><p>इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बोस्टन में भारत के पहले महावाणिज्यदूत रघुराम शास्त्री होंगे। उनकी उपस्थिति भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और न्यू इंग्लैंड में तेजी से बढ़ते भारतीय-अमेरिकी समुदाय के समर्थन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड के कार्यकारी निदेशक दीपक राठौर ने कहा कि इस वर्ष की परेड अब तक का सबसे बड़ा और सबसे रंगारंग आयोजन होगा, जिसमें स्वतंत्रता, लोकतंत्र, सांस्कृतिक विविधता और भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी के मूल्यों का उत्सव मनाया जाएगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 09:35:25 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/boston-to-host-international-india-day-parade-on-august-9</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अमेरिका की अदालत का बड़ा फैसला: युवाओं को नुकसान पहुंचाने के मामले में Meta पर $56.7 करोड़ का जुर्माना]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/us-court-orders-meta-to-pay-567-million-for-children-mental-health-and-safety]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>इंस्टाग्राम और फेसबुक की मूल कंपनी मेटा (Meta) को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के मामले में एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मेक्सिको की एक अदालत ने मेटा को अपने सोशल मीडिया मंचों के दुष्परिणामों से निपटने के लिए 56.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹4,700 करोड़ से अधिक) का भुगतान करने का आदेश दिया है।&nbsp;न्यायाधीश ब्रायन बीडशाइड ने बृहस्पतिवार देर रात यह फैसला सुनाया। फैसले के अनुसार, इस भारी राशि का सबसे बड़ा हिस्सा यानी 42 करोड़ डॉलर युवाओं के मानसिक उपचार से जुड़ी सेवाओं पर खर्च किया जाएगा। वहीं, शेष राशि अगले पांच वर्षों में बाल सुरक्षा, जागरूकता, रोकथाम और जांच सेवाओं पर लगाई जाएगी।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/christian-leaders-met-amit-shah-and-demanded-the-withdrawal-of-the-fcra-amendment-bill" target="_blank">FCRA Amendment Bill 2026 | द्रमुक सांसद पी. विल्सन और ईसाई नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से की मुलाकात, कानून वापस लेने की मांग</a></h3><p>मुकदमे के पहले चरण में अदालत ने मेटा पर 37.5 करोड़ डॉलर का दीवानी जुर्माना लगाया था। अदालत ने माना था कि कंपनी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया और अपने मंचों पर बच्चों के यौन शोषण के बारे में उपलब्ध जानकारी छिपाई।
अभियोजकों ने मुकदमे के दूसरे चरण में न्यायाधीश से मेटा के कामकाज में बुनियादी बदलाव करने का आदेश दिए जाने का अनुरोध किया था। इन बदलावों का उद्देश्य लोगों को लत लगाने वाले ‘फीचर’ पर अंकुश लगाना, उम्र के सत्यापन की व्यवस्था में सुधार करना और स्वतः लागू होने वाली निजता संबंधी व्यवस्थाओं तथा कड़ी निगरानी के जरिये बच्चों के यौन शोषण को रोकना था।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/atiq-ahmed-beloved-son-to-be-buried-next-to-his-father-grave-died-tragic-death-in-road-accident" target="_blank">पिता की कब्र के पास दफनाया जाएगा अतीक अहमद का लाडला, सड़क हादसे में हुई दर्दनाक मौत</a></h3><p>
अदालत ने कहा कि बच्चों की निजता से संबंधित संघीय कानून मेटा को 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए आयु सत्यापन उपकरण लागू करने से रोकते हैं।
अदालत ने कहा कि बाल ऑनलाइन निजता संरक्षण अधिनियम यानी ‘सीओपीपीए’ के कारण वह मेटा को बच्चों से निजी जानकारी देने या आयु सत्यापन के उद्देश्य से इंटरनेट पर उनकी गतिविधियों पर स्वतः नजर रखने के लिए कहने का आदेश नहीं दे सकती।
अदालत ने यह भी कहा कि बच्चों की उम्र सत्यापित करने का आदेश केवल मेटा को देना और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों को इससे बाहर रखना कंपनी के लिए ‘‘अनुचित और अत्यधिक नुकसानदेह’’ होगा।</p><p><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Stay updated with </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/international" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">International
News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">on Prabhasakshi</span>&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 09:02:22 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/us-court-orders-meta-to-pay-567-million-for-children-mental-health-and-safety</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Shehbaz Sharif तीन दिवसीय यात्रा पर Saudi Arabia जाएंगे, रक्षा संबंधों पर होगी वार्ता]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/shehbaz-sharif-and-asim-munir-to-visit-saudi-arabia]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से बृहस्पतिवार से तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सऊदी अरब जाएंगे। पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह 18 जून को हस्ताक्षरित ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के तहत अमेरिका और ईरान को फिर से वार्ता की मेज पर लाने के लिए ‘‘हरसंभव प्रयास’’ कर रहा है। शरीफ छह से आठ अगस्त तक होने वाली इस यात्रा के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।</p><p>विदेश कार्यालय (एफओ) ने ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडल में फील्ड मार्शल मुनीर के अलावा उप प्रधानमंत्री इशाक डार और अन्य केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। डार उप प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ विदेश मंत्री भी हैं। वह यरुशलम पर आयोजित एक मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के बाद जॉर्डन की यात्रा पूरी करके पहले ही सऊदी अरब पहुंच चुके हैं।</p><p>विदेश कार्यालय ने कहा कि वह वहीं प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे। बयान में कहा गया, ‘‘यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शरीफ सऊदी अरब के युवराज और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात करेंगे। वार्ता में पाकिस्तान-सऊदी अरब द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से जुड़े साझा हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।’’ पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने कहा कि यह यात्रा पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच दशकों पुराने आपसी विश्वास, सहयोग और भाईचारे पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारी को दर्शाती है।</p><p>उसने कहा, ‘‘हालांकि यह यात्रा खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच हो रही है, लेकिन इसका महत्व मौजूदा संकट और अल्पकालिक परिस्थितियों से कहीं अधिक है। इससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे, रणनीतिक सहयोग गहरा होगा, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समन्वय बढ़ेगा तथा बहुपक्षीय सहयोग को भी मजबूती मिलेगी।’’ यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया का संघर्ष कई मोर्चों तक फैल गया है, जिसके चलते खाड़ी देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय बढ़ाने की दिशा में कदम तेज किए हैं। इससे पहले 30 जुलाई को सऊदी अरब ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक समुद्री मार्गों और महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा के लिए बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन (एमएमडीसी) का प्रस्ताव रखा था।</p><p>खबरों के अनुसार, पाकिस्तान सहित 14 देशों ने इस पहल का समर्थन किया, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों में से एक की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं का संकेत मिला। इस्लामाबाद ने साथ ही सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और लाल सागर तथा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से वैध समुद्री व्यापार के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले वर्ष रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करके अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत किया था।</p><p>यह समझौता इस वर्ष की शुरुआत में प्रभावी हुआ। इस समझौते का क्रियान्वयन ऐसे समय शुरू हुआ, जब पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा था। इसे इस्लामाबाद की सऊदी अरब के साथ अपनी करीबी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखने और साथ ही तेहरान के साथ संवाद के रास्ते खुले रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।</p><p>रक्षा ढांचे के तहत पाकिस्तान ने संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा सहयोग और सऊदी अरब की सुरक्षा आवश्यकताओं के समर्थन के लिए सैन्य कर्मियों और विमान भी वहां तैनात किए हैं। पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए वित्तीय सहायता के मामले में भी सऊदी अरब पर निर्भर है।</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 18:10:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/shehbaz-sharif-and-asim-munir-to-visit-saudi-arabia</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Hiroshima परमाणु हमले की 81वीं बरसी पर मेयर Kazumi Matsui ने परमाणु हथियारों की होड़ की निंदा की]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/hiroshima-marks-81st-atomic-bombing-anniversary-kazumi-matsui-speech]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>जापान के हिरोशिमा शहर में अमेरिका द्वारा किए गए परमाणु बम हमले की बृहस्पतिवार को 81वीं बरसी मनाई गई। इस अवसर पर शहर के महापौर काजुमी मात्सुई ने प्रमुख शक्तियों द्वारा युद्ध का सहारा लेने की आलोचना की और परमाणु हथियारों को प्रतिरोधक क्षमता के साधन के रूप में उचित ठहराने की प्रवृत्ति समाप्त करने का आह्वान किया। हिरोशिमा शांति स्मारक पार्क में आयोजित समारोह में अपने शांति संदेश में मात्सुई ने कहा कि परमाणु हथियारों की अमानवीयता को कम करके आंकना और अपनी समृद्धि के लिए बल प्रयोग को स्वीकार करना हिंसक प्रतिशोध के ऐसे चक्र को जन्म दे सकता है, जिसका अंत एक और हिरोशिमा या नागासाकी जैसी त्रासदी में हो सकता है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/currentaffairs/the-hiroshima-tragedy-advocates-for-a-ban-on-nuclear-weapons" target="_blank" rel="noopener">परमाणु हथियारों के प्रतिबंध की वकालत करती है हिरोशिमा त्रासदी</a></h3><p>उन्होंने कहा कि आज भी अनेक राजनीतिक नेता परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को व्यावहारिक नीति मानते हैं और हिंसा को वैध ठहराते हैं। उनके अनुसार, इससे परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व का लक्ष्य और दूर होता जा रहा है। उन्होंने लोगों से अतीत से सीख लेकर शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील भी की।</p><p>समारोह में अमेरिका और ईरान सहित लगभग 120 देशों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों समेत करीब 50,000 लोगों ने भाग लिया। सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर, जब वर्ष 1945 में अमेरिकी बी-29 बमवर्षक विमान ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था, उसी समय घंटी बजाई गई और दो मिनट का मौन रखा गया। प्रधानमंत्री बनने के बाद सानाए ताकाइची ने पहली बार इस स्मृति समारोह में भाग लिया।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/bjd-opposes-private-nuclear-power-plant-proposal-in-odisha" target="_blank" rel="noopener">BJD ने Odisha में Nuclear Power Plant प्रस्ताव का विरोध किया, सुरक्षा पर उठाए सवाल</a></h3><p>उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने संबंधी संयुक्त राष्ट्र की संधि के ढांचे के भीतर वह ऐसे विश्व के निर्माण के लिए ‘‘व्यावहारिक दृष्टिकोण’’ अपनाएंगी, जहां परमाणु हथियारों का कभी इस्तेमाल न हो। यह समारोह ऐसे समय आयोजित हुआ है, जब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का समर्थन करने वाली ताकाइची सरकार इस वर्ष के अंत में नई सुरक्षा एवं रक्षा नीति तैयार करते समय जापान के युद्धोत्तर तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों में ढील दे सकती है। परमाणु बम हमले के जीवित बचे लोगों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें जापान भी शामिल है, के बीच प्रतिरोधक क्षमता के नाम पर परमाणु हथियार रखने के बढ़ते समर्थन पर चिंता और निराशा व्यक्त की है।</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 17:00:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/hiroshima-marks-81st-atomic-bombing-anniversary-kazumi-matsui-speech</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Strait of Hormuz पर Iran-Oman के बीच ऐतिहासिक समझौता, US Sanctions के बीच क्या बदलेगी दुनिया की सूरत?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/international/historic-agreement-between-iran-and-oman-regarding-the-strait-of-hormuz]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ओमान के साथ एक समझौते का मसौदा तैयार करने के अंतिम चरण में है। वहीं, गुरुवार को ईरान युद्ध और व्यापक मध्य पूर्व से जुड़ी हालिया घटनाओं के तहत लेबनान में दो इज़राइली सैनिक मारे गए। सूडान में चल रहे युद्ध से यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, प्राचीन मेरो पिरामिड (Meroe pyramids) को खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि वहां संरक्षण का काम पूरी तरह से रुक गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बुधवार को कहा कि ओमान के साथ 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' (होर्मुज़ जलडमरूमध्य) को लेकर एक समझौता तैयार करने का काम "आखिरी चरण" में है। उन्होंने कहा कि अगर "कुछ पक्ष इस प्रक्रिया में रुकावट नहीं डालते हैं" तो एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा; उनका इशारा साफ़ तौर पर अमेरिका की ओर था। यह समझौता इस बात पर निर्भर कर सकता है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है या नहीं। यह जलडमरूमध्य दुनिया भर में शिपिंग और ऊर्जा की सप्लाई के लिए बहुत अहम है। फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों से शुरू हुई जंग से पहले, दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित इसी जलमार्ग से होकर गुज़रता था। गुरुवार को आगे क्या होता है, इस पर सबकी नज़रें अमेरिका पर टिकी थीं।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/iran-will-never-possess-nuclear-weapons-oil-prices-will-fall-through-negotiations-jd-vance-claims" target="_blank">Iran के पास कभी नहीं होंगे Nuclear Weapons, बातचीत से गिरेंगे Oil Prices, जेडी वेंस का दावा</a></h3><div>सूडान में अप्रैल 2023 में शुरू हुआ संघर्ष खार्तूम से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर में स्थित मेरोए पिरामिडों के लिए खतरा बन गया है। इस जगह पर 200 से ज़्यादा पिरामिड हैं, जिन्हें 800 ईसा पूर्व और 350 ईस्वी के बीच कुश साम्राज्य के शाही मकबरों के तौर पर बनाया गया था; यह जगह अपनी खास कोणीय बनावट (आर्किटेक्चर) के लिए जानी जाती है। युद्ध ने सूडान की कई ऐतिहासिक जगहों और संग्रहालयों को नुकसान पहुँचाया है, और यूनेस्को ने अप्रैल में चेतावनी दी थी कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों पर खतरा बढ़ रहा है। पुरातत्वविद् महमूद सुलेमान ने कहा कि मेरोए में पिरामिडों के ढहने की आशंका है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/donald-trump-furious-over-reports-of-us-ammo-shortage-says-leakers-will-face-long-prison" target="_blank">US Ammo Shortage की खबरों पर भड़के Donald Trump, बोले- जानकारी Leak करने वालों को होगी लंबी जेल</a></h3><div>गुरुवार को हुई ताज़ा घटनाओं में मुख्य रूप से ओमान के साथ ईरान के प्रस्तावित 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' समझौते, लेबनान में दो इज़राइली सैनिकों की मौत और सूडान के मेरो पिरामिडों पर बढ़ते ख़तरे को लेकर नई चिंता शामिल रही, क्योंकि युद्ध के कारण वहाँ की धरोहर वाली जगहों को ख़तरा बना हुआ है।&nbsp;</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 15:43:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/international/historic-agreement-between-iran-and-oman-regarding-the-strait-of-hormuz</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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