फरवरी में फिर लगा महंगाई का झटका, Food Inflation ने बढ़ाई चिंता, CPI 3.21% पर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल के चलते फरवरी में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई बढ़कर 3.21 प्रतिशत पर पहुंच गई। इस दौरान शहरी क्षेत्रों में कीमतों का दबाव ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा अधिक रहा, जबकि भविष्य की दिशा वैश्विक कारकों और घरेलू आपूर्ति पर निर्भर करेगी।
देश में महंगाई की स्थिति को लेकर जारी नए आंकड़ों में फरवरी महीने में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि समग्र स्तर पर कीमतों का दबाव अभी भी नियंत्रण में माना जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों में बताया गया है कि फरवरी महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.21 प्रतिशत दर्ज की गई है। इससे पहले जनवरी महीने में यह दर 2.75 प्रतिशत थी।
गौरतलब है कि इस बढ़ोतरी के बावजूद महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय किए गए लक्ष्य दायरे के भीतर बनी हुई है। बता दें कि केंद्रीय बैंक महंगाई को चार प्रतिशत के आसपास बनाए रखने का लक्ष्य रखता है, जबकि इसके लिए दो से छह प्रतिशत का सहनशील दायरा तय किया गया है।
मौजूद आंकड़ों के अनुसार फरवरी में महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव को माना जा रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी काफी अधिक होती है, इसलिए इनके दामों में बदलाव का सीधा असर कुल महंगाई दर पर पड़ता है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में खाद्य महंगाई दर करीब 3.75 प्रतिशत दर्ज की गई है। सब्जियों, अनाज और दाल जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बदलाव के कारण इसमें यह बढ़ोतरी देखने को मिली है।
बता दें कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी महंगाई के आंकड़ों में थोड़ा अंतर देखने को मिला है। फरवरी में शहरी क्षेत्रों में महंगाई दर करीब 3.32 प्रतिशत रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह लगभग 3.07 प्रतिशत दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि शहरों में कीमतों का दबाव गांवों के मुकाबले थोड़ा अधिक रहा है।
गौरतलब है कि जनवरी महीने में खुदरा महंगाई दर में काफी गिरावट दर्ज की गई थी। उस समय सब्जियों समेत कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी आने के कारण महंगाई कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि फरवरी में फिर से हल्की बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। खासकर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और वैश्विक तनाव का असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
बता दें कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में यदि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव होता है तो इसका असर परिवहन लागत और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहती है और सरकार खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी कदम उठाती है तो महंगाई को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।
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