Tata Sons लिस्टिंग विवाद के बीच Noel Tata 12 नवंबर को छोड़ेंगे 6 कंपनियों का Board

टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा 12 नवंबर को 70 वर्ष की उम्र पूरी होने पर समूह की 6 प्रमुख कंपनियों के बोर्ड से हट जाएंगे। हालांकि वह टाटा संस में ट्रस्ट्स के प्रतिनिधि पद पर बने रहेंगे। यह कदम एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल और टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग विवाद के बीच उठाया जा रहा है।
टाटा समूह में नेतृत्व और कंपनी चलाने के नियमों को लेकर चल रही खींचतान के बीच नोएल टाटा के बोर्ड से हटने की तैयारी ने सबका ध्यान खींचा है। टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा 12 नवंबर को 70 साल के हो जाएंगे। समूह के नियमों के मुताबिक, वह इस उम्र में 6 बड़ी कंपनियों के निदेशक मंडल से हट जाएंगे। हालांकि, वह टाटा संस के निदेशक मंडल में टाटा ट्रस्ट्स के प्रतिनिधि के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेंगे। टाटा संस समूह की मुख्य कंपनी है, जिसके तहत कई बड़े कारोबार चलते हैं।
नोएल टाटा फिलहाल ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, टाटा इंटरनेशनल और ट्रेंट हाइपरमार्केट प्राइवेट लिमिटेड के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष हैं। वह दुबई की टाटा इंटरनेशनल वेस्ट एशिया डीएमसीसी में भी गैर-कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, वह टाटा स्टील और टाइटन कंपनी के उपाध्यक्ष हैं। स्पेन की फैशन कंपनी इंडिटेक्स से जुड़े संयुक्त कारोबार इंडिटेक्स ट्रेंट रिटेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में भी वह निदेशक हैं।
हालांकि, नोएल टाटा ट्रेंट हाइपरमार्केट लिमिटेड में अपनी भूमिका जारी रखेंगे। यह ट्रेंट और ब्रिटेन की कंपनी टेस्को का संयुक्त कारोबार है, जो स्टार बाजार और स्टार डेली नाम से खुदरा स्टोर चलाता है। बाकी पदों पर आगे कौन जिम्मेदारी संभालेगा, इसे लेकर अभी पूरी व्यवस्था सामने नहीं आई है। ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इंटरनेशनल और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के अध्यक्ष पदों के साथ टाटा स्टील और टाइटन के उपाध्यक्ष पदों पर भी उत्तराधिकारी तय करने होंगे।
गौरतलब है कि टाटा समूह में गैर-कार्यकारी निदेशकों के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 70 साल तय है, जबकि कार्यकारी निदेशकों के लिए यह सीमा 65 साल है। स्वतंत्र निदेशकों के लिए अलग नियम हैं। नोएल टाटा का कंपनियों के बोर्ड से हटना इसी व्यवस्था के तहत हो रहा है। लेकिन टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट्स के प्रतिनिधि के तौर पर उनकी भूमिका जारी रहने से समूह के सबसे अहम फैसलों में उनका प्रभाव बना रह सकता है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है, जब नोएल टाटा और टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्त किए जाने को लेकर मतभेद सामने आए हैं। 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को 21 फरवरी 2027 से अगले 5 साल के लिए फिर अध्यक्ष बनाने की मंजूरी दी थी। नोएल टाटा ने इस फैसले का विरोध किया था, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के दूसरे प्रतिनिधि वेणु श्रीनिवासन ने इसके समर्थन में वोट दिया था।
विवाद की मुख्य वजह टाटा संस के कंपनी नियमों की व्याख्या है। टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि अध्यक्ष की दोबारा नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की जरूरी सहमति मिलनी चाहिए थी। ट्रस्ट्स ने यह भी सवाल उठाया है कि अध्यक्ष के निर्णायक मत को उनके प्रतिनिधियों की सहमति का विकल्प नहीं माना जा सकता। वहीं, टाटा संस का कहना है कि बोर्ड ने बहुमत से नियुक्ति को मंजूरी दी थी।
मौजूद जानकारी के अनुसार, नोएल टाटा ने 26 अक्टूबर को टाटा संस के कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर नियुक्ति प्रक्रिया पर फिर सवाल उठाए। उन्होंने बैठक की अंतिम कार्यवाही, मतदान का रिकॉर्ड और बैठक की आवाज व वीडियो से जुड़ी रिकॉर्डिंग मांगी। उन्होंने यह भी पूछा कि कंपनी के नियमों के तहत जरूरी चयन समिति बनाई गई थी या नहीं और आवश्यक मंजूरियां ली गई थीं या नहीं। कारोबार से जुड़े कुछ संभावित हितों के टकराव पर भी उन्होंने चिंता जताई है। ये आरोप और सवाल हैं, किसी गड़बड़ी के साबित होने का निष्कर्ष नहीं।
टाटा संस की प्रस्तावित शेयर बाजार में सूचीबद्धता भी विवाद का एक अहम हिस्सा है। टाटा ट्रस्ट्स कंपनी को लिस्टिंग कराने के पक्ष में नहीं है। दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से टाटा संस को उच्च श्रेणी की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किए जाने के कारण नियामकीय दबाव भी बना हुआ है।
इस पूरे मामले में एन. चंद्रशेखरन की उम्र भी चर्चा में है। 2 जून 1963 को जन्मे चंद्रशेखरन 2 जून 2028 को 65 साल के हो जाएंगे। ऐसे में उनका प्रस्तावित कार्यकाल फरवरी 2032 तक जाता है, जो समूह की सामान्य रिटायरमेंट सीमा से आगे है। इसके लिए लागू नियमों के तहत छूट या विशेष मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है। यह समूह की आंतरिक नीति है, कानून के तहत अपने आप लागू होने वाला प्रतिबंध नहीं।
चंद्रशेखरन 2017 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का नेतृत्व करने के बाद टाटा संस के अध्यक्ष बने थे। उनके कार्यकाल में विमानन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल कारोबार में बड़े निवेश हुए हैं। ऐसे में नेतृत्व में स्थिरता को भी अहम माना जा रहा है। नोएल टाटा का 6 कंपनियों के बोर्ड से हटना एक तय उम्र संबंधी नियम का पालन है, लेकिन मौजूदा विवाद ने समूह में नियुक्तियों, शेयरधारकों के अधिकारों और कंपनी चलाने के नियमों पर बहस तेज कर दी है। आने वाले समय में इन मुद्दों पर होने वाले फैसले टाटा समूह की नेतृत्व व्यवस्था और भविष्य की दिशा के लिए अहम साबित हो सकते हैं।
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