President Murmu ने Handloom Day पर ई-कॉमर्स से हथकरघा उत्पादों की वैश्विक पहचान पर दिया जोर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स मंचों के जरिए देश के हथकरघा उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच बढ़ाई जा सकती है। इस अवसर पर उन्होंने उत्कृष्ट बुनकरों और कारीगरों को संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025 प्रदान किए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि देश का हथकरघा क्षेत्र रोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करता है और ई-कॉमर्स मंचों के जरिए इसके उत्पादों की वैश्विक बाजारों में पहुंच को और बढ़ाया जा सकता है। मुर्मू ने 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र से लगभग 35 लाख लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें 25 लाख से अधिक महिलाएं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास का एक मजबूत आधार बनेगा।
उन्होंने कहा, “हथकरघा क्षेत्र न केवल आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। डिजिटल मंचों और ई-कॉमर्स के माध्यम से भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया जा सकता है।” मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में विश्वास जताया कि सरकार और अन्य हितधारकों के सहयोग से यह क्षेत्र आने वाले समय में और सशक्त होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ और ‘राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025’ भी प्रदान किए।
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इन पुरस्कारों के जरिए उत्कृष्ट बुनकरों और कारीगरों के योगदान को सम्मानित किया जाता है।
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