क्रिप्टो करेंसी में करना चाहते हैं निवेश तो पहले जान लें इसके नफे और नुकसान

क्रिप्टो करेंसी में करना चाहते हैं निवेश तो पहले जान लें इसके नफे और नुकसान

क्रिप्टो करेंसी पर कंट्रोल किसी देश, संस्थान या सरकार का नहीं है ऐसे में कभी-कभार इसकी उछाल बहुत ज्यादा हो जाती है तो वहीं गिरावट भी काफी देखने को मिलती है। इस वजह से इसमें निवेश करना कभी-कभी जोखिम भरा साबित होता है।

भारत में क्रिप्टो करंसी को लेकर चर्चा जोरों पर है। क्रिप्टो करेंसी का चलन देश में लगातार बढ़ता जा रहा है। एक अनुमानित जानकारी के मुताबिक देश में एक दर्जन क्रिप्टो एक्सचेंजों पर एक करोड़ से ज्यादा एक्टिव लोग इन्वेस्टर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं। लोकप्रियता के मामले में क्रिप्टो करेंसी की बिटकॉइन सबसे आगे है। अप्रैल में इसकी वैल्यू 40 लाख तक पहुंच गई थी। हालांकि, हाल फिलहाल में इसकी वैल्यू में गिरावट देखी गई है। यहां भी दूसरे मार्केट की तरह उतार-चढ़ाव और नफा नुकसान की आशंका बनी रहती है। ऐसे में क्रिप्टो इंडस्ट्री से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातों को हम आज आपको बता रहे हैं। हम यह बातें एक अखबार में छपी खबर के आधार पर बता रहे हैं।

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पहला और सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि वर्तमान समय में क्रिप्टो इंडस्ट्री का मूड कैसा है? आपको बता दें कि क्रिप्टो टोकन के मुकाबले बिटकॉइन और इथारियम में ज्यादा गिरावट नहीं हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक बिटकॉइन क्रिप्टो इंडस्ट्री की जान है। यही मार्केट की दिशा और दशा दोनों को ही तय करता है। जब बिटकॉइन में उछाल आता है तब दूसरे कॉइन भी आगे बढ़ने लगते हैं। गिरावट में गोरान भी यही देखने को मिलता है। जब बिटकॉइन थोड़ी गिरती है तो दूसरे डिजिटल करेंसी में ज्यादा गिरावट देखने को मिलती है। वर्तमान में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। बिटकॉइन में इस समय 20 फ़ीसदी की नरमी आई है तो दूसरे टोकन मनी में 40 से 50 फ़ीसदी लुढ़क गए हैं।

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सवाल यह भी है कि अगर आप क्रिप्टो खरीदते हैं तो आपके हाथ क्या आएगा? क्रिप्टो ऐसेट भी हो सकती है और यूटिलिटी टोकन भी। बिटकॉइन एसेट है तो इथारियम यूटिलिटी टोकन है। एसेट को आप काफी हद तक गोल्ड जैसा मान सकते हैं। इस पर लोगों को भरोसा भी होता है। इसे गोल्ड का डिजिटल वर्जन माना जा सकता है। दुनिया के किसी भी कोने में एसेट के बदले पैसा बनाया जा सकता है। वर्तमान में देखें तो भारत सरकार ने अभी तक क्रिप्टोकरंसी को मान्यता नहीं दी है। लेकिन पिछले 5-6 महीनों में इसे लेकर बदलाव की स्थिति जारी है। वित्त मंत्रालय की ओर से भी कहा गया है कि जल्दी क्रिप्टो करेंसी को रेगुलेट करने के लिए एक कानून बनाया जाएगा। सूत्र बता रहे हैं कि भारत में क्रिप्टो को करेंसी के बजाय डिजिटल एसेट माना जा सकता है। आने वाले 10-12 महीने क्रिप्टो में कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

क्रिप्टो में भारी उतार-चढ़ाव होता रहता है। ऐसे में निवेश करने से पहले हमें कई बातों का ध्यान रखना होता है और सावधानी बरतनी होती है। शुरुआत में आप ज्यादा पैसे नहीं लगा सकते है। थोड़ा बहुत पैसे लगाकर इसकी शुरुआत कर सकते हैं। मार्केट को बेहतर तरीके से समझने के बाद ही इसमें ज्यादा पैसे लगाने की शुरुआत करें। अब हम आपको क्रिप्टो करेंसी के फायदे और नुकसान के बारे में बताते है। सबसे पहले आप इसके लाभ जान लीजिए। क्रिप्टो करेंसी के लाभ अधिक है और घाटा कम क्योंकि क्रिप्टो करेंसी डिजिटल है। ऐसे में इसमें धोखाधड़ी की संभावनाएं बहुत कम होती है। अधिक पैसा होने पर क्रिप्टो करेंसी में निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है। इसकी कीमतों में लगातार उछाल आता रहता है। क्रिप्टो करेंसी के लिए कई सारे वॉलेट उपलब्ध है। इसकी वजह से खरीदारी और पैसे का लेनदेन आसान हो जाता है। क्रिप्टो करेंसी पर किसी अथॉरिटी का कंट्रोल नहीं होता जिसके चलते नोटबंदी या करेंसी का मूल्य घटने जैसा खतरा कभी सामने आता नहीं है। क्रिप्टो करेंसी खरीद कर उसे देश के बाहर आसानी से भेजी जा सकता है और फिर उसे पैसे में रुपांतरित किया जा सकता है। क्रिप्टो करेंसी का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होता है जो अपना धन छुपाकर रखना चाहते हैं। इसलिए क्रिप्टो करेंसी पैसे छुपाकर रखने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। आपको यह जानना भी जरूरी है कि क्रिप्टो करेंसी पूरी तरह से सुरक्षित है। 

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आपने क्रिप्टो करेंसी के फायदे तो जान लिया, अब नुकसान भी जान लीजिए। क्रिप्टो करेंसी डिजिटल करेंसी है ऐसे में इसका मुद्रण नहीं किया जाता। यानी कि इस करेंसी के नोट नहीं छापे जाते हैं और ना ही बैंक के अकाउंट या पासबुक जारी किया जाता है। क्रिप्टो करेंसी पर कंट्रोल किसी देश, संस्थान या सरकार का नहीं है ऐसे में कभी-कभार इसकी उछाल बहुत ज्यादा हो जाती है तो वहीं गिरावट भी काफी देखने को मिलती है। इस वजह से इसमें निवेश करना कभी-कभी जोखिम भरा साबित होता है। इसका उपयोग गलत कामों के लिए जैसे हथियार की खरीद-फरोख्त, ड्रग्स सप्लाई, कालाबाजारी आदि में आसानी से किया जा सकता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल दो लोगों के बीच ही किया जाता है। लिहाजा, यह काफी खतरनाक भी हो सकता है। इसको हैक करने का भी खतरा बना रहता है। इसका एक और नुकसान यह है कि यदि कोई ट्रांजैक्शन आपसे गलती से हो गया तो आप उसे वापस नहीं मंगा सकते हैं जिससे आपको घाटा होता है।