यूँ ही नहीं बढ़ गयी भारतीय पासपोर्ट की ताकत, 5 साल में हुए हैं अथक प्रयास

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ना सिर्फ दुनिया के अन्य देशों से भारत के संबंध बेहतर हुए, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा। आज वैश्विक मसलों पर भारत के प्रधानमंत्री से विश्व के नेता सलाह मशविरा करते हैं तो यह भारत की बढ़ती ताकत का ही प्रतीक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों पर अकसर सवाल उठते हैं और पूछा जाता है कि इससे क्या हासिल हुआ। यही नहीं इस सरकार पर यह भी आरोप लगता है कि विदेश मामलों को यह ठीक से हैंडल नहीं कर पाती। लेकिन वास्तविकता कुछ और है। पिछले पांच साल के दौरान विदेश मंत्रालय का कामकाज शानदार रहा है। ना सिर्फ दुनिया के अन्य देशों से भारत के संबंध बेहतर हुए, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा। आज वैश्विक मसलों पर भारत के प्रधानमंत्री से विश्व के नेता सलाह मशविरा करते हैं तो यह भारत की बढ़ती ताकत का ही प्रतीक है। मोदी सरकार के कार्यकाल में विश्व में जहां भी भारतीय मुसीबत में पड़े उनकी पूरी पूरी मदद की गई है। यही नहीं भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती ताकत दर्शाती है कि पिछले पांच सालों में विदेश मामलों के मोर्चे पर कितने काम हुए।

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2019 की पासपोर्ट इंडेक्स रैंकिंग पर अगर नजर डालें तो इसमें 10 अंकों का जोरदार उछाल आया है। और कुल 199 देशों की इस सूची में भारत 67वें स्थान पर पहुँच गया है। यह भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती ताकत ही है कि अब भारतीय नागरिक 25 देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं और 39 देशों में भारतीय नागरिकों को वीजा ऑन अराइवल यानि आगमन पर वीजा मिलने की सुविधा प्राप्त हो गयी है। और इसके बाद अब जो परिदृश्य है उसमें भारतीयों को 134 देशों में जाने के लिए वीजा की जरूरत पड़ती है। वहीं भारत दुनिया के 166 देशों के नागरिकों को बिना वीजा, ई-वीजा और आगमन पर वीजा की सुविधा देता है। इस वजह से भारत वेलकमिंग कंट्रीज की सूची में 19वें स्थान पर है।

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नरेन्द्र मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य के पर्यटन को बढ़ावा देने के कई प्रयास किये। आपको याद होगा कि उन्होंने ही सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को गुजरात पर्यटन का ब्रांड अम्बेसेडर बनाया था और जब मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने देश भर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलायीं और खुद उनकी निगरानी की। विश्व के विभिन्न देशों से भारत के बेहतर होते रिश्तों का ही कमाल है कि आज 50 से ज्यादा देशों ने अपने देशों के पर्यटन बोर्ड के कार्यालय भारत में खोल रखे हैं और भारतीय पर्यटकों को आकर्षक ऑफरों से लुभाते हैं। दरअसल यह भी एक बड़ा तथ्य है कि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था ने तेज गति से विकास किया है और भारतीयों की खर्च करने की क्षमता में जोरदार इजाफा हुआ है। विश्व के देशों को पता है कि भारतीय अगर उनके देश में आएंगे तो जमकर शॉपिंग करेंगे और इसके अलावा भारतीय नागरिक कभी भी किसी देश में कानून व्यवस्था के लिए कोई परेशानी नहीं खड़ी करते, इसलिए इन्हें अच्छी नजर से देखा जाता है। सरकार ने पर्यटकों को लुभाने के लिए वैसे तो कई कदम उठाये लेकिन एक आंकड़े पर आप भी गौर करें। 2014 में भारत 46 देशों को ई-वीजा सुविधा प्रदान करता था और अब 2019 में 166 देशों को यह सुविधा प्रदान करवा रहा है।

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अब अगर पासपोर्ट इंडेक्स पर गौर करें तो यह रैंकिंग वीजा फ्री स्कोर और ह्यूमन डेवल्पमेंट इंडेक्स के आधार पर तैयार की जाती है और इस रैंकिंग में यूएई पहले नंबर पर आता है। यूएई के लोगों को 168 देशों में जाने के लिए किसी वीजा की जरूरत नहीं है, उन्हें मात्र 31 देशों में जाने से पहले वीजा लेना पड़ता है। इस सूची में जर्मनी दूसरे नंबर पर, फ्रांस और अमेरिका तीसरे नंबर पर आते हैं। अगर इस रैंकिंग में दक्षिण एशियाई देशों पर नजर डालें मालदीव-51वें नंबर पर, भूटान-69वें नंबर पर, बांग्लादेश-86वें नंबर पर, नेपाल-82वें नंबर पर, पाकिस्तान-91वें नंबर पर, श्रीलंका-83वें नंबर पर और अफगानिस्तान-93वें नंबर पर है।

-नीरज कुमार दुबे

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